लघुकथा : घुट्टी सब्र की

May 13, 2026 0

सोलह श्रृंगार से परिपूर्ण लाल जोड़े में सजी अक्षिता आज विवाह के उपरांत दूसरी बार इस चौखट के आगे थी। भीड़ आज भी कम नहीं थी,पर वातावरण की ये निस्तब्धता कोलाहल से भरे रहने वाले […]

शिवत्व की यात्रा : न मे मृत्युशंका न मे जातिभेदः

April 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में संध्या उतर चुकी थी। वटवृक्ष के नीचे बैठे सुधांशु की आँखें बंद थीं। आचार्य के शब्द उसके भीतर मर्मस्थान को वेध रहे थे। वास्तव मे ये विचार अब परिपक्व […]

शिवत्व की यात्रा : गुरु की माया

April 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल मे सूर्य की बाल किरणें जब धरती को स्पर्श कर रही थीं, उसी समय सुधांशु आश्रम के प्रांगण में खड़ा था। वह स्थान जहाँ से उसकी यात्रा आरम्भ हुई थी— […]

शिवत्व की यात्रा : दिव्य यात्रा के साक्षी अनिरुद्ध की वापसी

April 18, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि का दूसरा प्रहर था। आकाश में चंद्रमा शांत था, और उसकी चाँदनी धरती पर एक कोमल श्वेत आभा बिखेर रही थी। हवेली के पीछे वही उपवन—जहाँ कुछ समय पूर्व प्रेम […]

शिवत्व की यात्रा : प्रेम की अग्निपरीक्षा

April 17, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। आकाश में सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा था, और उसकी किरणें आकाश को लालिमा से भर रही थीं—मानो प्रकृति स्वयं किसी गहन भाव से रंग गई हो। […]

शिवत्व की यात्रा : यदि सब कुछ शिव हैं… तो प्रेम का स्थान कहाँ

April 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर की शीतलता अभी पूर्णतः विलीन नहीं हुई थी। मंदिर से लौटते समय सुधांशु के भीतर एक अद्भुत शांति थी, पर उसी के साथ एक नया प्रश्न भी जन्म ले चुका […]

शिवत्व की यात्रा : चेतना का जागरण

April 11, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि का अंतिम प्रहर… आकाश गहन अंधकार में डूबा था, पर उस अंधकार के भीतर एक अदृश्य प्रकाश छिपा हुआ था—जैसे सृष्टि स्वयं किसी महान परिवर्तन की प्रतीक्षा कर रही हो। […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्य के परे जाती साधना

April 8, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— रात का तीसरा प्रहर था। चारों ओर गहरा सन्नाटा छाया हुआ था। हवेली के भीतर सब सो चुके थे, किन्तु सुधांशु की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। उसके भीतर […]

शिवत्व की यात्रा मे पढ़ें भीतर का शत्रु

April 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात गहरी हो चुकी थी। हवेली के चारों ओर फैली शांति में केवल कभी-कभी पत्तों की सरसराहट सुनाई देती थी। दूर खेतों में जलती हुई मशालों की लौ हवा के साथ […]

प्रेरक कहानियाँ : शिवत्व की यात्रा मे पढ़ें मानसिक शत्रुओं का विरेचन और शान्ति की अनुभूति

April 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम के क्षितिज में विलीन हो रहा था और आकाश में हल्की सुनहरी आभा फैल रही थी। हवेली के प्रांगण में एक विचित्र शान्ति थी, […]

शिवत्व की यात्रा : त्याग का अग्निपथ

April 2, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जमींदार के कक्ष में कुछ क्षण के लिए ऐसा मौन छा गया मानो समय स्वयं रुक गया हो। सुधांशु के शब्द हवा में स्थिर हो गए थे— “यदि आवश्यक हुआ तो […]

शिवत्व की यात्रा : शक्ति और धर्म का संवाद

March 31, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का पहला प्रकाश अभी क्षितिज पर उभर ही रहा था। हल्की धुंध खेतों के ऊपर तैर रही थी और दूर कहीं बैलों की घंटियों की धीमी आवाज सुनाई दे रही […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्यमयी संन्यासी और पहली कसौटी

March 30, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात का सन्नाटा गहरा था। आकाश में बादल छाये हुए थे और चन्द्रमा कभी-कभी उनके बीच से झाँक जाता था। सुधांशु के घर के आँगन में दीपक की लौ हल्की-हल्की काँप […]

शिवत्व की यात्रा : धर्म और प्रेम का द्वंद्व

March 29, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात धीरे-धीरे गहरी हो चुकी थी। आकाश में चन्द्रमा बादलों के पीछे छिपता-उभरता जा रहा था। सुधांशु के घर के आँगन में एक दीपक जल रहा था जिसकी लौ हवा के […]

शिवत्व की यात्रा : तप की अग्नि है गृहस्थाश्रम

March 28, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य पश्चिम दिशा में ढल रहा था और आकाश में लालिमा फैलती जा रही थी। सुधांशु आश्रम की पगडंडी से आगे बढ़ रहा था। उसके कदम धीमे […]

शिवत्व की यात्रा : परीक्षा का आरम्भ

March 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की हल्की आभा प्रकट होने लगी थी। आश्रम के चारों ओर फैली निस्तब्धता धीरे-धीरे पक्षियों के कलरव से टूट रही थी। वृक्षों की […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्य का पुनः उदय और गुरु की दृष्टि

March 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वसंत का प्रारम्भ हो चुका था। आम के वृक्षों पर कोमल बौर आ गया था और हवा में एक मदमस्त सुगन्ध फैलने लगी थी। जीवन में जैसे एक हल्का-सा उल्लास लौट […]

शिवत्व की यात्रा : सम्बन्धों की कसौटी मे धर्म की पहली परीक्षा

March 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शीत ऋतु का प्रारम्भ था। प्रातःकाल की धूप अभी कोमल थी और हवा में हल्की ठंडक थी। निरंजन अपने घर के बाहर बैठा था। सामने आँगन में तुलसी के चौरे पर […]

शिवत्व की यात्रा : धर्म और सम्बन्ध मे प्रेम की मर्यादा

March 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा का समय समाप्त हो चुका था। आकाश स्वच्छ था और हवा में हल्की शीतलता घुलने लगी थी। संध्या का समय था। निरंजन घर के आँगन में बैठा था। सामने तुलसी […]

शिवत्व की यात्रा : साधना की गुप्त परम्परा

March 16, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– उस रहस्यमयी अतिथि के जाने के बाद कई दिनों तक निरंजन के भीतर एक अजीब जिज्ञासा बनी रही। वह व्यक्ति कौन था? उसका उद्देश्य क्या था? और उसे कैसे पता था […]

शिवत्व की यात्रा : साधना का दर्पण

March 14, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की एक गहरी रात्रि थी। आकाश में बादल छाए हुए थे और हवा में एक विचित्र नमी थी। घर के बाहर पीपल के पत्तों की हल्की सरसराहट सुनाई दे रही […]

शिवत्व की यात्रा : भक्ति की वास्तविक परीक्षा

March 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समय अपने शांत प्रवाह में आगे बढ़ता रहा। निरंजन का जीवन अब एक संतुलित लय में चल रहा था। सुबह का ध्यान, दिन भर का श्रम, परिवार की जिम्मेदारियाँ और रात्रि […]

शिवत्व की यात्रा : भीतर के अंधकार से युद्ध है गृहस्थ का तप

March 9, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की पहली किरणें आकाश को हल्की स्वर्णिम आभा से भर रही थीं। आश्रम के प्रांगण में शांति थी, पर उस शांति के भीतर […]

शिवत्व की यात्रा का विस्तार : व्यक्ति से युगचेतना तक

March 6, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद पूर्णिमा की रात्रि थी। चन्द्रमा का प्रकाश आश्रम की शिला-दीवारों पर शान्त चाँदी-सा बिछा हुआ था। हवा में न शीत का तीखापन था, न वर्षा की नमी—केवल एक निर्मल संतुलन। […]

शिवत्व की यात्रा का दार्शनिक स्वरूप : समाधि से समाज तक

March 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम में सामान्य दिनचर्या प्रारम्भ हो चुकी थी—गौशाला में सेवा, रसोई में धूप की सुगन्ध, प्रार्थना का मधुर गान। परन्तु निरंजन के भीतर कुछ असामान्य था। समाधि […]

शिवत्व की यात्रा : समाधि की देहरी

March 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की स्वच्छ रात्रि थी। आकाश निर्मल, तारकाओं से भरा हुआ, मानो अनन्त का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हो रहा हो। आश्रम के उत्तर दिशा में स्थित उस प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे […]

शिवत्व की यात्रा : नाद, नृत्य और ओंकार का मिलन

March 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा ऋतु का अन्तिम चरण था। आकाश स्वच्छ था, परन्तु वायु में अभी भी जल की शीतलता थी। आश्रम के उत्तर दिशा में एक प्राचीन कक्ष था, जिसे नाद-मण्डप कहा जाता […]

शिवत्व की यात्रा मे मर्यादा, प्रेम और त्याग का अग्निसंस्कार

February 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक गंभीरता थी। प्रभात की वायु में भी जैसे कोई गूढ़ संकेत था। निरंजन शिवालय के सामने बैठा था, पर आज उसका ध्यान स्थिर नहीं था। उसके […]

शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : मौन-तप और वाणी की शुद्धि

February 25, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– श्रावण का अन्तिम सप्ताह बीत चुका था। आश्रम का वातावरण अब अधिक शांत था। वर्षा की रिमझिम ध्वनि, वृक्षों से टपकती जल-बूँदें और दूर बहती नदी का मधुर स्वर—सब मिलकर एक […]

शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : भक्ति, ध्यान और ज्ञान की त्रिवेणी

February 24, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक विशेष वातावरण था। श्रावण मास का अंतिम सोमवार था। प्रातःकाल से ही शिव-मंदिर में अभिषेक चल रहा था। जल, दुग्ध, बिल्वपत्र और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर […]

शिवत्व की यात्रा का एक और चरण : आसक्ति से मुक्ति

February 23, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी नदी के तट पर निरंजन अकेला बैठा था। जल का प्रवाह शांत था, परन्तु उसके भीतर निरन्तर गति थी। वह उसी […]

शिवत्व की यात्रा : मौन का प्रकाश

February 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल रही थी। पूर्व दिशा में सूर्य अभी उगा नहीं था, परन्तु उसका संकेत धरती को जागृत कर चुका था। आश्रम के प्रांगण […]

शिव की महिमा : जन-मन मे शिवत्व का प्रस्फुटन

February 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– महाशिवरात्रि की उस साधना-रात्रि के पश्चात् गाँव का वातावरण जैसे दीर्घकाल तक उसी भाव में डूबा रहा। यह परिवर्तन क्षणिक उत्साह का परिणाम नहीं था; यह धीरे-धीरे लोकजीवन में उतरने लगा। […]

मनुजत्व से शिवत्व तक की अगली कड़ी : मन्त्र, मूर्ति और महातत्त्व

February 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव — दार्शनिक चर्चा ने गाँव की चेतना को गहरा किया था, पर अब एक नया प्रश्न उठने लगा— क्या यह समस्त साधना केवल आन्तरिक है, या इसके लिए परम्परागत उपासना की […]

शिवत्व का दार्शनिक आलोक

February 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वटवृक्ष के नीचे होने वाली मौन-साधना ने गाँव के जीवन को केवल सामाजिक नहीं, दार्शनिक आयाम भी प्रदान कर दिया था। अब प्रश्न केवल व्यवहार के नहीं रहे; वे अस्तित्व के […]

शिवत्व की अन्तर्यात्रा का ताण्डव

February 18, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– गाँव में बाहरी व्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित हो जाने के बाद जीवन पुनः अपनी सहज गति में लौट आया, किन्तु भीतर कुछ ऐसा था जो अब पहले जैसा नहीं रहा। […]

सत्ता और चेतना का संघर्ष

February 16, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चेतना का प्रसार जितना शांत दिखाई देता है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होता है। गाँवों में उभर रही नई पद्धति—जहाँ निर्णय सामूहिक होते थे, जहाँ न्याय करुणा के साथ संतुलित […]

परम्परा और परिवर्तन का संगम

February 15, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]

मेघनाद वध : रावण की निश्चित हार का प्रमाण

February 7, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– लंका अब केवल नगर नहीं थी—वह एक भय-शाला बन चुकी थी। रावण ने सभा में कहा—“अब मेरा पुत्र जाएगा।” इंद्रजीत। जिसने कभी पराजय नहीं देखी थी।जिसके अस्त्र देवताओं को भी चकित […]

सेतुसमुद्रम : धर्म पहले संवाद करता है और युद्ध बाद में

February 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समुद्र सामने था—अथाह, गंभीर और चुनौतीपूर्ण। यह वही समुद्र थाजो रावण के अहंकार की सीमा बन चुका था। वानर सेना ठिठकी नहीं,पर प्रश्न था—“कैसे?” राम मौन थे। विभीषण ने सागर से […]

लंका की गर्दन पर अंगद का पैर

February 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमान लौट आए थे। समुद्र के उस पार से नहीं,बल्कि एक नए युग की घोषणा लेकर। उन्होंने जो देखा था,जो किया था—वह केवल कथा नहीं थी,वह प्रमाण था। वानर सेना पहले […]

रामायण : रावण-निर्मित भय का उन्मूलन

February 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रावण को किसी ने देखा नहीं था—फिर भी सबने उसे देखा हुआ मान लिया था। किष्किंधा से दक्षिण की ओर बढ़ते वानर-दल के पाँव दृढ़ थे,पर मन अनिश्चित। वन बदलते जा […]

नागवल्ली का मित्रताधर्म

November 16, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार राघव– नागवल्ली का मन आज रासरङ्‌ग में नहीं लग रहा था। रह-रह कर उसे पङ्‌खुड़ी की याद आ रही थी। वह याद कर रही थी कि बाल्यकाल से तरुण होने कभी भी हम […]

आदित्य का आत्म-उन्नयन

June 14, 2025 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव– आदित्य एक साधारण परिवार का लड़का था, जो एक छोटे से गांव में रहता था। वह अपनी पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन हर समय असफलताओं का सामना करता रहता था। […]

अन्तर्मन की आँधी (कहानी)

May 29, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव– कभी-कभी जीवन के सबसे छोटे अनुभव और अनकहे शब्द, हमें इतनी गहरी सीख दे जाते हैं कि वह ताजिंदगी हमारे साथ चलती है। यही कहानी है एक गाँव की, जहाँ एक […]

कर्मपथ बना धर्मपथ

May 23, 2025 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी राघव– प्राचीन काल की बात है। एक सुंदर, हरे-भरे राज्य में एक साधारण-सा मनुष्य रहता था, जिसका नाम था धर्मवीर। उसका न कोई बड़ा घर था, न भारी धन-दौलत। पर पूरे […]

धर्म सड़क पर आ गया, मर्यादा भी भंग

January 18, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–महाकुम्भ के पर्व पर, भाँति-भाँति के लोग।कहते ख़ुद को साधु हैँ, सांसारिक है भोग।।दो–भौतिकता मे लिप्त हैँ, भस्म लगाये वेश।कान्ति अलक्षित दिख रही, कहे कहानी केश।।तीन–धर्म सड़क पर आ गया, […]

परिवर्तन की राह

January 11, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– उत्तर प्रदेश के एक गाँव मे बसे एक छोटे से घर मे शिव अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहता था। उसकी जिंदगी मे स्थिरता और सरलता का अनूठा संगम था। हर […]

उसकी मुस्कान

January 5, 2025 0

कई वर्षों पहले पीपल के वृक्ष के नीचे चबूतरे पर टोली बनाकर गुड्डा-गुड़ियों का विवाह करना जैसे; आदि खेल समूह में मिट्टी के बर्तनों के साथ खेलते हुए जाने कब जवानी की दहलीज पर आ […]

कहानी– आत्मोन्नति की यात्रा

November 28, 2024 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– सौरभ एक साधारण परिवार का लड़का था, जो एक छोटे से गांव में रहता था। वह अपनी पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन हर समय असफलताओं का सामना करता रहता था। हर […]

‘टूटते सन्दर्भ’ का एक अंश

November 18, 2024 0

“वह हँसती नहीँ, हँसी पीती है। मेरी दार्शनिकता से उत्पन्न उसकी अन्तः हँसी मुझ पर प्रभावी होने लगी। विगत पूरे वर्ष का अंश तो वही है। मुझे रास आने लगा। हम प्राय: अपने निशि-दिवा के […]

O Lord! Give us strength

May 22, 2024 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’ O beloved Motherland, I always bow to you,You have nurtured me with joy, so pure and true.O sacred land of great blessings, in your cause, my body I offer,To you, I […]

Avadh Bihari : A charismatic and courageous figure

February 25, 2024 0

Aditya Tripathi (Writer-Teacher) Once upon a time, in the tumultuous era of India’s struggle for independence, there lived a man named Avadh Bihari. He was a charismatic and courageous figure, renowned for his unwavering dedication […]

Avantibai Lodhi : A Fearless Revolutionary

February 22, 2024 0

Aditya Tripathi (Asst. Teacher, Hardoi)– Once upon a time in the small kingdom of Ramgarh, nestled in the heart of India, lived a courageous and determined queen named Avantibai Lodhi. Avantibai was not just a […]

Dharma

November 11, 2023 0

Aditya Tripathi (Assistant Teacher, Hardoi/Managing Editor) Once upon a time in a serene village nestled amidst rolling hills, a remarkable phenomenon unfolded, where the protectors of religion experienced an extraordinary bond with the faith they […]

Our words and actions make big difference

November 10, 2023 0

Aditya Tripathi (Assistant Teacher, Hardoi) The young man named Peeyush stood in front of the crowd, his heart pounding in his chest. He had been practicing his speech for weeks, but now that the moment […]

God is always with us

November 6, 2023 0

Aditya Tripathi (Assistant Teacher, Basic Shiksha, Hardoi) In a time long forgotten, there existed a land where the seeds of righteousness were sown deep within the hearts of its people. Religion flourished, and its guiding […]

Only God desires happens

November 2, 2023 0

Aditya Tripathi (Asst. Teacher, Basic Education, Kothawan, Hardoi) Once upon a time, in a land brimming with dreams and aspirations, there dwelled a young man named Lakhan. His heart was ignited by a fierce ambition, […]

Religion is one and solely one and it is eternal

October 31, 2023 0

Aditya Tripathi (Govt. Teacher, Kothawan, Hardoi) Once upon a time, in a diverse land filled with people of different cultures and beliefs, there was a village nestled amidst rolling hills and lush green fields. The […]

The power of education

October 30, 2023 0

Aditya Tripathi (Asst. Teacher, B.E.D., Hardoi) Once upon a time in a small village Balamau, there lived a young boy named Peeyush. He came from a humble background, but he had big dreams. Peeyush understood the […]

Sacred name of Bhagwan Rama

October 19, 2023 0

Aditya Tripathi (Assistant Teacher, PS, Pratappur, Kothawan) A long time ago in a peaceful village lived a devout sage named Jaidev Baba. He was known far and wide for his unwavering devotion to Lord Rama. […]

Rana Punja Bhil : The Hero of Haldighati

September 22, 2023 0

Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Rana Punja Bhil, a name etched in the annals of history, was not just a warrior but a symbol of unwavering courage and determination. Hailing from the Bhil tribe of Mewar, he […]

बदलते रिश्ते

February 15, 2023 0

शादी की बहुत दिनों बाद अनोखी अपने ननिहाल गई, वहाँ उसने देखा नानी का घर कच्चे मकान के स्थान पर, पक्की ईंटों का आलीशान बँगला बन गया था। गाड़ी दरवाज़े पर जाकर खड़ी हुई, अनोखी […]

Prisha, Unveiling the Real World!

January 20, 2023 0

Prisha, a girl with mellifluous voice and cheerful personality believes that one could create his/her own world. Her peculiar ways of looking at life is her individuality. She believes that one should enjoy little things […]

कहानी प्यार की : अधूरा पन्ना

November 7, 2022 0

उसने कहा कि मेरे सिवा उसका कोई अपना नहीं है हमने कहा अच्छा , और हां सुनो मुझे न तुम्हारे सारे दुख बाटने है हमने कहा अच्छा , मुझे तुम्हारी स्माइल, तुम्हारी आंखें, गाल पर […]

लघुकथा : भरोसा (‘कांच का प्याला’ विषय पर आधारित)

May 5, 2022 0

नीना अन्दोत्रा पठानिया (युवा साहित्यसेविका)- सभी रात का खाना खाकर अपने – अपने कमरे में चले गये और नई नवेली रमा किचन का बाकी काम समेट रही थी । कुछ महीने ही हुए थे अभी […]

लघुकथा : अवाक्

May 5, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा, उत्तर-प्रदेश— सुबह रिया ने आवाज दी रिशु बेटा उठो मम्मा आज जल्दी क्यों, पता है रिशु आज हम लोग गांव जा रहे है ; दादी से मिलने । मम्मा गांव में मजा […]

लघुकथा : पार्क की घुमक्कड़ी

May 3, 2022 0

 अभिरंजन शर्मा (बिहार)- वो दोनों बेफिक्र हो कर पार्क में घूमते थे। हाल-ए-दिल बयां करते थे। वे हर दिन मिलते थे। बिना किसी डर-भय के। बगल में पुलिस थाना भी था। समाज की हर बंदिशों […]

कमज़ोर बुनियाद

April 21, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा- जिंदगी कितनी उबड़-खाबड़ रास्तों को तय करती हुई चलती रहती है । शुरुआत भी कठिन और अंत भी, मिलते हुए राहगीर भी छल द्वन्द्व से भरे हुए है हुकूमत का अच्छा नकाब चेहरे […]

गीत- कलम-कबूतर

April 14, 2022 0

राश दादा राश, बंगालुरू ये कलम है मेरी शोख ए अदा कबूतर बनकर उड जाती । हर छत पर जा दाना लाती कभी रात अंधेरे खो जाती ।  कभी गुटुर गुटुर करती चलती कभी बडे […]

बयाँदारी हमारी

April 14, 2022 0

राश दादा राश (बंगालुरू)- कायस्थ* हूँ कागजी कारोबार है मेरा स्याही से रिश्ता और कलम यार है मेरा नब्ज ना टटोलना यारों ,मेरे जिस्म का मयखाने की बस्तियां शराबी टोलियाँ मेरे धमनियों मे प्रवाहित रक्त […]

एक उलझन

October 11, 2021 0

(पहला अंक ) मुझे अफसोस है , कि तुमसे कोई बात कभी कही सुनी होती तो आज ऐसे दौर से न गुजरती । खैर कर ही क्या सकती हूँ ? खिड़की खोलती हूँ कोयले से […]

कहानी – “सरहद”

May 29, 2021 0

पायल रॉय, संस्थापक – “शिक्षा एक उज्ज्वल भविष्य की ओर” (युवा समाजसेविका, जबलपुर, म. प्र.) शाम का समय हो चला था। आज बादल कुछ ज्यादा ही साफ दिखाई दे रहे थे और हमेशा की तरह मैं […]

मन हार गया तब तुम हारे, मन जीत गया तो जीते तुम

September 26, 2020 0

अनिल चौधरी ( बैंक अधिकारी ) इस क्रूर काल के हर रण में,हर अवरोहण आरोहण में ।तुम खुद ही खुद का संबल हो,जीवन संघर्षों के क्षण में ।। शूलों से छलनी पावों को ,पीड़ा से […]

कहानी : तब क्या होगा ?

July 31, 2020 0

महेन्द्र महर्षि (सेवा निवृत्त; वरिष्ठ प्रसारण अधिकारी) गुरूग्राम : बुद्ध प्रकाश का सपना अभी और आगे भी चलता , मगर ऐसा नहीं होता कि सपनों का संसार वास्तव में साकार होता ही हो। सुबह की […]

कहानी : विभाजन की रेखाएँ

July 2, 2019 0

राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” कहानीकार, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि कुण्डलपुर गाँव में आज एक ही चर्चा थी सेठ धनपत राय के चारों बेटे ने अपना अपना हिस्सा ले लिया। सेठजी की धन दौलत मकान दुकान […]

Short Story : BE MY NEEM

June 27, 2019 0

Zaitoon Zia – They both met daily at morning walk. She was in her 40s he was about to touch 30 Juz after 2 autumn! she came to meditate, he came to jog ! Smiles […]

लघुकथा : आकर्षण

June 27, 2019 0

राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’, कहानीकार संगीता की ससुराल में सब अमन चैन था । खाता पीता परिवार था। समाज मे अच्छी इज्जत थी। उसके ससुर जीतमल जी गाँव के सबसे अमीर आदमी थे। गाँव वाले […]

कहानी : अफ़वाह

June 22, 2019 0

राजा को जनता पर संदेह हुआ। वह बोले मैंने इन्हें सब कुछ दे दिया फिर भी भूखमरी । आखिर क्या वजह है। उन्होंने पुरोहित जी को बुलाकर पूरी समस्या बताई। पुरोहित जी ने राजा को […]

कहानी : मनमीत

May 24, 2019 0

एडवोकेट तृषा द्विवेदी ‘मेघ’, साहित्यसेविका, उन्नाव- इंगेजमेंट हो जाने के बाद देवेश और देविका दोनों एक -दूसरे से मिलने-जुलने लगे थे । दोनों ही समान गुणवान व योग्य थे, देवेश बी0 एड0 करके गवर्नमेंट टीचर की […]

लघुकथा : परछाई

April 12, 2019 0

दीदी आज मुझे बहुत डर लग रहा है। रात में भूतों के साये की खबर पड़ी थी। रात में मुझे उस भूत ने बहुत डराया। मैं पूरी रात सो नहीं पाया। मैं बोलना चाहता था […]

चलो मेरे साथ

April 9, 2019 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा, उत्तर प्रदेश आज , इक्कीस तारीख है । पूरा एक साल बीत गया , अपनी जिंदगी को अपनी तरह जीने की ख्वाईश भीतर ही भीतर दबी पड़ी थी । इन ख्वाइशों ने […]

एक कहानी : तब क्या होगा ?

July 31, 2018 0

महेन्द्र महर्षि , 31.7.2018. गुरूग्राम- चारपाई पर लेटा बुद्ध प्रकाश , जिसे घर पड़ौस के लोग लाड़ में बुधवा कहकर बुलाते हैं , आसमान में चमकते तारों को देखता – देखता न जाने कब सो […]

उष्ण प्रेम (लघु कहानी)

June 18, 2018 0

नीना अन्दोत्रा पठानिया, पठानकोट ,पंजाब – सारे बयान सरिता के खिलाफ जा रहे थे , हर बयान के बाद एक-एक उम्मीद दम तोड़ रही थी । हर आँख उस से कई सवाल कर रही थी […]

अमानुषिकता (लघुकथा)

May 31, 2018 0

नीना अन्दोत्रा पठानिया (पंजाब) “ रमा सोनू को अच्छी तरह से ढक ले ,आगे से चुड़ैल आ रही है , करम जली अपना तो सब कुछ खा गई अब सबके बच्चों पर नज़र रखती है […]

कहानी : “रिश्वत”    

May 11, 2018 0

बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’           बेनीगंज गाँव में रामदयाल नाम का एक युवक रहता था। उसके परिवार (फैमिली) में माता-पिता और दो छोटी बहनें थीं। पाँच बीघे खेती योग्य जमीन है। समीप […]

एक एसडीएम की कहानी

April 2, 2018 0

एक एसडीएम की कहानी  आज स्कूल में शहर की महिला SDM आने वाली थी क्लास की सारी लड़कियां ख़ुशी के मारे फूली नहीं समां रही थी …सबकी बातों में सिर्फ एक ही बात थी SDM […]

लघु कहानी- गोल्डन फ्रेम (यादें)

March 4, 2018 0

नीना अन्दोत्रा पठानिया- क्या हुआ बीबी जी, हर शनिवार को आप कुछ ढूंढने के लिए बाहर चली जाती है। कोई जान-पहचान का है। जिसका पता आप ढूढती हो ? नंदा की काम वाली ने नंदा […]

कहानी- दरकते रिश्ते

February 11, 2018 0

नीना अन्दोत्रा पठानिया- रोज की तरह अंजली ऑफिस से आकर घर के काम निपटा कर जैसे ही रूम आई तो देखा अशोक सो गया था। अंजली अशोक को सोता हुआ देख कर सोचने लग गई, […]

स्वच्छता और राजनीति

February 11, 2018 0

नीना अन्दोत्रा पठानिया (कहानीकार)- “माँ-माँ आज हमारे मुहल्ले में इतनी ज्यादा भीड़ क्यों लगी हुई है , बारह वर्षीय नेहा ने उत्सुकता से अपनी माँ से पूछा ।  माँ ने कहा “बेटा आज हमारे नेता […]

नदियाँ भारत के जीवन की कड़ी में आज राज्य उत्तराखंड से भागीरथी नदी

November 25, 2017 0

भागीरथी नदी – भागीरथी (बांग्ला – ভাগীরথী) भारत की एक नदी है। यह उत्तराखंड में से बहती है और देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है। भागीरथी गोमुख स्थान से २५ […]

विषाक्त उत्सवधर्मिता!

October 19, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- दीपवर्तिका की ज्वलनशीलता लोकमानस की सहनशीलता पृथक्-पृथक् पथ पर परिलक्षित होती हैं। दो समानान्तर दूरी पर चलते हुए भी संवाद करने के लिए कहीं-कोई ठौर नहीं बचता। किस हेतु लोक दीप जलाता […]