एक अभिव्यक्ति
पृथ्वीनाथ पाण्डेय– बेशक, चाहो पर बताओ नहीं, बेशक, पाओ पर सताओ नहीं। मुद्दत बाद ज़िन्दगी सयानी हुई, उसे सब्ज़बाग़ दिखाओ नहीं। मस्त-मौला है और फक्कड़ भी, भूले-बिसरे भी आज़्माओ नहीं। हक़ीक़त की ज़मीं ही बेहतर […]
पृथ्वीनाथ पाण्डेय– बेशक, चाहो पर बताओ नहीं, बेशक, पाओ पर सताओ नहीं। मुद्दत बाद ज़िन्दगी सयानी हुई, उसे सब्ज़बाग़ दिखाओ नहीं। मस्त-मौला है और फक्कड़ भी, भूले-बिसरे भी आज़्माओ नहीं। हक़ीक़त की ज़मीं ही बेहतर […]
पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : ऐ हुस्न की मलिक:! आँखें यों मला न करो, वही तस्वीर है, जो छोड़कर तुम आयी थी। दो : अब लौटकर न आयेंगी फिर से बहारें, मेरे आँसू में अब डूबते […]
आकांक्षा मिश्रा : एक स्त्री आधी से ज्यादा दूरी अकेले तय करती हैं , तुम्हारे सारे अधिकारों को कर्तव्य मानकर सफर जारी करती हुई तुम्हें मुक्त कर देती हैं मुड़कर मत देखो ,अधूरी रहेगी सारी […]
✍️ प्रिया कुमारी, नई दिल्ली अच्छा तो तुम सही, मैं गलत हूँ लेकिन ये बताओ मुझ पे हाथ उठा के, मेरे आत्म सम्मान को गिरा के तुम सही कैसे हो सकते हो …. मेरे हर […]
— डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक– मुखड़ा मौलिक दिख रहा, दिखता करुणा-रूप। शोकाकुल परिवेश है, बनती मृत्यु अनूप।। दो– मौन निमन्त्रण मौन है, सूनी माँग न देख। सधवा विधवा बन गयी, कैसा विधि का लेख।। तीन […]
जगन्नाथ शुक्ल….✍ (प्रयागराज) प्रिये तुम्हारे प्रेम पत्र का , हर अक्षर आधार बन गया। भावों की जो बनी तूलिका, उस में ही संसार बस गया।। चढ़ते सूरज की किरणों सङ्ग, राग हमारा गहराया है। आते […]
हर हाथ कलम अभियान चलाकर मानेंगे। हम सरकारी स्कूल की सूरत बदल कर मानेंगे।। श्रम से अपने बच्चों को आगे बढ़ाकर मानेंगे। गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का परचम हम ही लहरायेंगे।। पेन पेंसिल और रबर से […]
Awadhesh Kumar Shukla ‘Murakh Hirdai’ (Head Master UPS Kamipur, Kachhauna)- Lo! life is busy So life is easy, If life is lazy, Then life is crazy. Behold at beauty, Be yield to the duty, If […]
शालू मिश्रा (युवा साहित्यकार/अध्यापिका, रा.बा.उ.प्रा.वि.सराणा, जालोर) मधु ऋतु का हुआ है आगमन, वसुधा ने किया पीतांबर धारण । प्रकृति में चहुँ ओर सुगंध छायी हैं, मनमोहक सी ये बेला आई है। समीर में हुआ केसर […]
असित दुबे, हरदोई- इस शीतल सी निशा घड़ी में, चपल चंद्रिका चाँद को लाई, अंधकार संग मैं, निरा अकेला, मुझको याद प्रिये की आई। यह चुभती सी विछोह वेदना, है घुली हुई मेरे प्रतिपल में, […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपने बलिष्ठ कन्धों पर तीन सौ पैंसठ दिनों के भार पल-पल लाद कर मुखमण्डल पर निष्कामता का भाव लिये अनवरत-अनथक यात्रा करते-करते अतीतोन्मुख हो रहे मेरे सहयात्री! तुम क्लान्त हो चुके हो; […]
शालू मिश्रा (युवा कवयित्री/अध्यापिका) रा.बा.उ.प्रा.वि.सराणा, जालोर, नोहर (हनुमानगढ़) राजस्थान पल पल बीत गया इस वर्ष को सहेज कर यादों में । नव वर्ष का हदय से करे स्वागत महकती सी कल की नई भोर में […]
शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक संपर्क सूत्र :- 9340411563 ‘जोकर’ हूं मैं और मेरी जिंदगी सर्कस है । जिसमें मुझे लोगों को हंसाने, लोगों को खुश करने का काम मिला है । मगर […]
शालू मिश्रा (युवा साहित्यकार/अध्यापिका) रा.उ.प्रा.वि.सराणा (जालोर) देखो बहुत सह लिए उसने जुल्मों-सितम, अब आत्मरक्षा की ख़ातिर नारी वीरांगना कहलाएगी। अपने आत्म सम्मान की रक्षा में नारी,अस्त्र शस्त्र उठाकर अपनी आबरू वो बचाएगी। इस कलयुग में […]
शालू मिश्रा, युवा साहित्यकार/अध्यापिका (रा.बा. उ.प्रा.वि.सराणा, आहोर), नोहर (हनुमानगढ़) कौन था वो महान जिसने बनाई थी ये रस्म, परीक्षा आने का नाम सुनकर वो ही बात याद आ जाती है । प्रश्न पत्र को देख […]
ले वो वादे गरीबी मिटा देंगे, ले वो वादे बेरोजगारी मिटा देंगे, लो वो वादे भ्रष्टाचार मिटा देंगे, हम नया हिन्दुस्तान बना देंगे । ले वो वादे कुपोषण मिटा देंगे, ले वो भारत को साक्षर […]
सीतांशु त्रिपाठी, जिला- सतना (मध्यप्रदेश) फिर लुट गई है गुड़िया किसी मां की चलो रे हम सब मिल के फिर उसको इंसाफ दिलाये । उसकी तस्वीर पर जस्टिस फॉर प्रियंका रेड्डी लिख कर दो-चार दिनों […]
सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार, मो0- 8800416537 तुम कुछ कर सकते हो तुम आगे बढ़ सकते हो । तुममे है बहुत हिम्मत तुम जग को बदल सकते हो । तुम खुद से […]
राजन कुमार साह ‘साहित्य’ (दरभंंगा, बिहार) चंद नेताओं से यारों होता गदहा महान है । चंद पैसो के लिए बेचता नहीं अपना ईमान है । कौन कहता है हमारे देश में महंगाई बहुत है । […]
कब तक अपनी बहू बेटियाँ चढ़ती रहेंगी बलिवेदी पर । इस दहेज दानव के मुख का कब तक रहें निवाला बनकर ? कब तक इनके पैरों में जकड़ी रहेंगी बेड़ियाँ ? कब तक हम सब […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– जी हुज़ूर! मैं सम्पादक हूँ; तरह-तरह का सम्पादक हूँ; किसिम-किसिम का सम्पादक हूँ। पूर्वग्रह से ग्रस्त सम्पादक हूँ। सवाल है– रूप-रुपये-रुतबे का तलाश है, ऐसे दाताओं की फिर तो आपको फ़ीचर-पेज का […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय : जुम्हूरियत को नंगी दिखाओगे कब तक? बेहयाई की सीरत दिखाओगे कब तक? जाहिल-मवाली अब दिखे हैं हर जानिब, लुच्चों को सिर पे बिठाओगे कब तक? तवाइफ़ से बढ़कर सियासत है दिखती, […]
जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) खोलो खोलो अपनी पलकें; क्यों प्रगति देख जियरा धड़के? तू उगा कर अन्न बना दाता; फिर भी ना ब्याज़ चुका पाता। जो देता हूँ ले पकड़ दाम; मत व्यर्थ प्रगति का चक्र […]
शालू मिश्रा, (युवा साहित्यकार/अध्यापिका)नोहर (हनुमानगढ), रा.बा.उ.प्रा.वि.सराणा, (जालोर) हम बच्चों कीयारी ऐसी,देखत देशीऔर विदेशी |मन करत है हमकादिन भरखेले खेल,मस्ती करत डांटनजो आए उसकोहो जाए जेल ।मस्ती का दिनइक रविवार हीआता है,जो सुबह जल्दीसे हमकोजगाता हैं।हंसी […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : राष्ट्रवाद छद्म बना, चहुँ दिशि दिखते चोर। मुँह काला हो रात में, चन्दन चमके भोर।। दो : तन पाप में ख़ूब रमा, पुण्य नहीं है पास। मुखमण्डल जल्लाद-सा, कैसे आये […]
जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) बुझे थे दीये जगमगाने लगे हैं। गाँव सारे शहर में समाने लगे हैं।। आँगन की सिसकी समझने से पहले; दहलीज़ घर की गिराने लगे हैं। पिछले बरस ही तो पैदा हुए थे; […]
सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार, संपर्क:- 8800416537 कब तक सहूँगी प्रताड़ना, कभी तो पूरी करो मेरी कामना । चीख-चीख कर रो रही हूँ मैं, कभी तो मान लो मेरी कहना । मत करो […]
कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी तिमिर को जीत कर आलोक कर दे।ऐ माटी के दीपक धरा रोशन कर दे।। तू तूफानों से घबराया न कभी भी रे। तू अज्ञान को अंतर्मन से दूर कर दे।। खिला […]
महेन्द्र महर्षि, गुरुग्राम (से.नि. वरिष्ठ प्रसारण अधिकारी, दूरदर्शन) क्याऊं-क्याऊं, तेज साइरन, बेचैन सी भागती अग्निशमन की मोटरें , एक के पीछे एक , मेरे घर के समीप की सड़क से गुज़र गईं। मैंने अपने से […]
सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार मो0- 8800416537 तुम कुछ कर सकते हो तुम आगे बढ़ सकते हो । तुममे है बहुत हिम्मत तुम जग को बदल सकते हो । तुम खुद से […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– कैसे-कैसे बाबा अब दिखने लगे हैं, कामिनी ले बाँहों में खिलने लगे हैं। भगवा वस्त्र औ’ कलंकित मर्यादा, आश्रम में बहुरुपिये दिखने लगे हैं। कौन है साधु और शैतान भी कौन? चरित्र […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हास को इतिहास मत बनने दो, उपहास को परिहास मत बनने दो। आगत-अनागत थाली में तेल-बाती लिये प्रतीक्षा सह रहे हैं; बाट जोह रहे हैं, उस पल का, जब तुम अपने होने […]
जयति जैन “नूतन”- इतना ना इतराओ यारोरावण को जलाकरखुद के अंदर मारो रावणजिओ सम्मान पाकर।सिर्फ पुतले जलाने से कुछ नहीं होने वालाना लोभ मिटने वाला ना मान बदलने वालामन में बैठे राक्षस कोसमझाओ बहिला फुसलाकरना माने तो […]
जब आपने कह दिया है तो क्यों रुकेंगे ? किसी के सामने हम अब क्यों झुकेंगे ?मोहब्बत की है हमने, कोई चोरी नहीं मरे सारी दुनिया परन्तु हम क्यों मरेंगे ?दिल में उसे बसाया है […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : कैसा यह भगवान् है, चोर-चमारी भक्ति। मन्दिर में मूरत दिखे, उड़न-छू हुई शक्ति।। दो : पट्टी बाँधे आँख में, देश जगाता चोर। भक्त माल सब ले गये, कहीं नहीं अब […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- एक- जपो नमो-नमो माला, लिये कटोरा हाथ। कंगाली में देश है, दिखे न कोई साथ।। दो– देश की शिक्षा चोर है, चहुँ दिशि दिखें दलाल। रोज़गार की चाह में, उजले होते बाल।। […]
सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार, मो0- 8800416537 पानी पियो खाना बनाओ सिंचाई करो पानी फेंको या पानी बर्बाद करो । कुछ फर्क नही पड़ता ख़त्म तो होगा पानी ही और प्रभाव पड़ेगा इंसान पर […]
अलका जैन, रानीपुर (झांसी, उ. प्र.)– भावनाओं का मोल नहीं है रिश्तों के बाजार में,अपने ही अपनों को डुबोतेलाकर के मझधार में। ना सावन में झूले पड़तेराखी में अब प्रेम कहांदीपावली ना जगमग होतीहोली में हुड़दंग […]
कवि : सितांशु त्रिपाठी– आज जब मुझे लगा कि शायद न अब हैं मेरे भविष्य का कोई ठिकाना , तब सारे नौकरी वाले दोस्तों ने कहा नौकरी न लगे तो बिल्कुल न तुम घबराना , […]
शांति का प्रतीक धर्मप्रिय सत्यशील ऐसा देश है हमारा हिन्दुस्तान, सभी मिलजुल के रहे, दिल की बात खुल के कहें, मन में तनिक भी नहीं अभिमान, जात और पात की ना करे कोई बात कद्र […]
शिवांकित तिवारी “शिवा”, युवा कवि एवं लेखक– नदी अब बहुत गुमान में है, क्योकि वो आजकल उफ़ान में है । ग़रीब तो आज भी फुटपाथ पर सोते है, अमीरजादे तो अंदर अपने मकान में है । ज़मीं से तो उनका रिश्ता […]
शिवांकित तिवारी “शिवा”, (युवा कवि एवं लेखक) संपर्क:- 7509552096 वक़्त की ठोकर का शिकार हुए है, तबीयत ठीक है जिनकी अब वो बीमार हुए है । चट्टानों से मजबूत हौसले थे जिनके, वक़्त की मार से […]
जयति जैन “नूतन” – नहीं साब जीदोषी मैं हूँमैंने खुद का बलात्कार किया हैकपड़े उतारे खुदके मैंनेखुद को नोंच लिया है।खुद को दोषी कह ना पाऊंइसलिए नाम दूसरे का लिया हैन्याय की गुहार लगाई मैंनेअपनों […]
जयति जैन “नूतन” घर से भाग जाती है जो बेटियां वे ले जाती हैं कई बेटियों के सपने उनकी उम्मीदें,वह कायम कर जाती है मां बाप के दिलों में एक डर जो उन्हें दिन रात सताता है कहीं दूसरी बेटियों […]
शिवांकित तिवारी “शिवा”- सिर्फ हम ही हम है, ये वहम तुम्हारा अहम है । आसमां में उड़ रहे है वो, जिनके लिए जमीं कम है । पिता सबसे अनमोल है जग में, बाहर से कठोर […]
शिवांकित तिवारी “शिवा”, युवा कवि एवं लेखक, सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:- 7509552096 मुझ पर तानें कस रहा है वो, मेरे जख्मों पर हँस रहा है वो । गुरुर की नाव में सवार होकर […]
शिवांकित तिवारी “शिवा”, युवा कवि एवं लेखक, सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:-7509552096 आखिर अब खुद को बदल रहा है वो, गिर उठ गिर फिर संभल रहा है वो । मौसम का मौसम बिगड़ रहा है अब, […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– बातों-ही-बातों में, ‘आदर्श’ अब बँटने लगे, जनाब को देखिए, मुद्दों से अब हटने लगे! राम तो राजसिंहासन, त्याग कर आगे बढ़े, ग़ज़ब की रामभक्ति, कुर्सी से अब सटने लगे! आश्वासनबाबू की बाबूगिरी […]
शिवांकित तिवारी “शिवा” अपने सुकून की बलि देकर, वो सबकी जान बचाता है, भूख प्यास भूल कर वो डॉक्टर होने का फर्ज निभाता है दर्द से दवा तक का सफ़र था कड़ा, वो गिरा लड़खड़ा के, हुआ फिर खड़ा […]
ज़ैतून ज़िया- तुम आये कब मुझे आहट भी ना लगी कितने दिन से व्यथित थी पीड़ा थी आज स्वप्न में तुम्हारी हर चीज दिखी मुझे ये वर्दी, ये सितारे और भूरा बटुआ मेरे तिल के […]
ये जो तुम कहते हो सब स्त्री के कारण है तो बस भी करो अब ये अहम है जो किआ तुमने अपने पौरुष से पहाड़ काट डाला नदियों को कमर से पकड़ बलपूर्वक मोड़ दिआ […]
ज़ैतून ज़िया (अध्यापिका)- मन करता है तुम्हें बाँध लूँ कविता में सब पढ़े तुम्हें पसंद करें तुम्हें बार बार दोहराये तुम्हारी पंक्तियों को प्रेम में लेकिन फिर भी तुम मेरे ही रहो बिलकुल मेरी कविता […]
राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” सरकारी स्कूल की पढ़ाई, हम बेहतर कर देंगे। जो संकल्प किया हमने, पूर्ण उसी को कर देंगे।। नवोदय क्रान्ति से देखो क्या परिवर्तन आया है। नई नई शिक्षण विधियों से रोचक […]
शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक), सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:- 7509552096 अजब सा नशा छाया है और खुमार हुआ है मुझे, लो अब मैं चीख़कर कहता हूं प्यार हुआ है मुझे, रात भर अब […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय समग्र भारत का परिधान है हिन्दी, राष्ट्रीय आन-बान औ’ शान है हिन्दी। भाषाओं में है शीर्ष स्थान पर स्थित, जीवन-मरण का आख्यान है हिन्दी। आओ! करें नमन अपनी मातृभाषा को, हमारे आचरण […]
कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी चाहता है आदमी आसमान को छू लूँ। चाँद तारे तोड़ लाऊँ धरती को सजा लूँ।। चाहता है आदमी सोने का महल बनाऊं। चांदी कर दरवाजों को घर पर लगा दूँ।। चाहता […]
कवि राजेश पुरोहित– तू इतना समझ फकत मेरे दोस्त कर समर्पण बस । प्यार राधा जैसा कहाँ जीवन में खुदगर्ज़ हो तुम । चलो सुन्दर वतन हम सब बनाएं आओ साथ चलें । हे दयालु […]
सौरभ कुमार ठाकुर – उसे जब देखा मैंने पहली बार, हुआ था मुझे पहली नजर का प्यार । चला आया जब मैं वहांँ से, याद सताने लगी उसकी हजार बार । मिलना हो गया था दुश्वार, […]
(‘परियागराज’ मात्र एक प्रतीक है। ऐसी मानसिकता के लोग सर्वत्र हैं।) डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सबद चीनी मात करै, जहर हिरदय मा लाय। ऐसो जन घर-घर दिखैं, मन नाहीं पतियाय।। महादेबी से बढ़ि लखैं, रचना दिखै […]
समर्पण की भावना जगाती दोस्ती रिश्तों में सबसे अच्छा रिश्ता है दोस्ती। सुख दुख में सबसे पहले काम आती दोस्ती।। कृष्ण सुदामा सी दोस्ती आज भी मिल जाएगी। त्याग समर्पण की भावना जगाती है दोस्ती।। […]
कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी 1. दो कुलों में उजियारा करती बेटियां अपनी सुरक्षा भी खुद करने लगी है बेटियाँ। ये सच है कि अब तो बोलने लगी है बेटियाँ।। इनके साहस को कम न समझो […]
कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी करो मेहनत की कमाई सब मेरे भाई। गीता ज्ञान सिखाती करके सीखो भाई।। गाँधी ने गीता ज्ञान की अलख जगाई।सत्याग्रह कर हमको आज़ादी दिलाई।। वैज्ञानिक सोच विकसित करो भाई। अंधश्रद्धा में […]
कवि सौरभ कुमार ठाकुर (बाल कवि/लेखक), मुजफ्फरपुर, बिहार मो0- 8800416537 हक के लिए आवाज उठाओ तो सही, आवाज में हमारे वजनदारी चाहिए । देश हमारा प्यारा, श्रेष्ठ और सच्चा है, बस देशवासियों में भी ईमानदारी चाहिए […]
शिवांकित तिवारी “शिवा” युवा कवि एवं लेखक, सतना (मध्यप्रदेश) प्रकृति को सहेजने को अब सब मिलके तैयार हो, विनाश ना हो प्रकृति का यह प्रयास बार – बार हो, जागो सभी बचाओ […]
सौरभ कुमार ठाकुर, बाल कवि और लेखक मुजफ्फरपुर, बिहार, संपर्क:- 8800416537 पता नही किस शहर में, किस गली तुम चली गई। मैं ढूँढ़ता रह गया, तुम छोड़ गई । पता नही हम किस मोड़ पर फिर […]
शिवांकित तिवारी ‘शिवा’- खुद की खोज जारी रखो, मरने की रोज तैयारी रखो, कब कौन कहां बदल गया, इसकी पूरी जानकारी रखो, खुद पर यकीन करना सीखो, नियत सच्ची और जुबां प्यारी रखो, वहम और […]
शिवांकित तिवारी ‘शिवा’, युवा कवि/लेखक सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:-7509552896 आज हम आरक्षण का दंश झेल रहे हैं, उन्हें क्या ? वो तो राजनीति का खेल खेल रहे हैं । कुर्सी पर बैठ नचा रहे हैं जनता को, […]
शिवांकित तिवारी ‘शिवा’, युवा कवि एवं लेखक, सतना (म.प्र.), सम्पर्क:- 7509552096 मुझे क्यों आजमाने आ रहे हो, बताओ क्या जताने आ रहे हो । तुम्हीं ने मुझको ठुकराया था एक दिन, तो फिर […]
शिवांकित तिवारी ‘शिवा’, युवा कवि एवं लेखक, सतना (म.प्र.) सम्पर्क:-7509552096 हुये विपक्षी ढेर सभी और हारे सारे दल। देखो फिर से मोदी आया फिर से खिला कमल। ‘चौकीदार चोर है’ जो कहते थे गिरे घुटनो के […]
शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ रास्ता तुम्हीं हो और तुम्हीं हो मेरा सफ़र, वास्ता तुम्हारा है हर घड़ी और हर पहर, तुम ही मेरे जीवन की सबसे मजबूत कड़ी, तुम ही मुश्किलों में सिर्फ मेरे साथ खड़ी, […]
शिवांकित तिवारी ‘शिवा’, युवा कवि एवं लेखक, सतना (म.प्र.) सम्पर्क:- 9340411563 तुम मेरे जीवन के नौका की खेवनहार हो । तुम ही मेरा रब हो और जीने का आधार हो तुम ही मेरा जग हो […]
गीत जगन्नाथ शुक्ल..✍ (प्रयागराज) चल ग़ज़ल हम फ़ातिहा , पढ़ आयें ग़म की कब्र पे; फ़िर कभी न अश्क़ से हम, यों मोहब्बत को भिगोएँगे। रोष उनमें था बहुत , और दोष हममें कम न […]
ॐ जय ऋषिवर परशुराम, जय ऋषिवर परशुराम। विप्र जाति के रक्षक, सबके लीला धाम।।ॐ जय…. जमदाग्नि नन्दन हो, जग के पालनहार। रेणुका से जन्में, किया शत्रु संहार।।ॐ जय….. महादेव की भक्ति में, सब अर्पण किया। […]
शिवांकित तिवारी “शिवा” युवा कवि एवं लेखक, सतना (म.प्र.) सम्पर्क:-9340411563 पसीने से तर-बतर, घर से निकल दोपहर, जा रहा है.. उसका क्या कसूर है? क्योंकि वो बस एक मजदूर है, बस यही उसका […]
……चुनाव-2019…… फूट रहे हैं बोल भयानक नेताओं के मुख से, जनता हुई है आहत अपने नेताओं के रुख से। बैन लगा योगी के ऊपर रोका गया छिछोरा आजम, बड़ी निराली माया मेनका, मौन हुई अपने […]
दिव्य लोक की राह में , रश्मि पुंज के मंत्र ।महावीर क्षण साधना, जीवन भर का तंत्र ।।१ अरिहंतो को नमन है , सिद्धजन नमस्कार !साधक संतो नमन है, कृपा करो करतार !!२ मंत्र साध […]
देख चुनाव उछाल है , सभी करे उत्पात ।जोश भरे हर चाल में, सता भूख संताप ।भूल चुके जो कर्म है , करे अनोखी बात ।वोट चोट की मार से ,सभी सहे अनुताप ।। नेता […]
मतदान गीत बढ़ाकर हम कदम अपने ,चलो मतदान कर आएं। लेकर साथ सबको हम,खुशी से झूम कर गाएं।। दुनियां के भले ही काम ,कितने भी जरूरी हो। मगर सब काम हो पीछे ,पहले मतदान कर […]
कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी – शत प्रतिशत मतदान की शपथ दिलाओ। एक मत से होती जीत हार सबको बताओ।। सभी दे अपना मत लोकतंत्र मजबूत बनाओ। स्वच्छ छवि के नेता चुन संसद तक पहुंचाओ।। गोरवशाली […]
तेरे जाने से, अब ये शहर वीरान हो गया। तेरे जादू का असर अब जाने कहां खो गया। तेरी पायल की झंकार से, ये सारा शहर जाग जाता था। अब उन झंकारो का खतम नामों-निशान […]
दीपक श्रीवास्तव “दीपू”- सुबह-सुबह वो कुण्डी खटका रहे ना पूछने पर भी परिचय बता रहे लगता है चुनाव आ रहे … जो ना घूमते थे कभी गलियों में अब वो बच्चो को टाफियां खिला रहे […]
शिवांगी जैन आज अंधेरे में हूँ तो क्या तेरी हिम्मत की लौ से जमाना देखना चाहती हूं माँ । बेटों की इस दौड़ में दौड़ना चाहती हूं माँ । हमेशा दर्द हम बेटियों ने सहा […]
कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी एक मार्च उन्नीस को मनाई दीवाली हर नज़र केवल अभिनंदन के लिए एक झलक मिल जाए अभिनन्दन हर जुबान पर अभिनंदन अभिनंदन पाकिस्तान घुटनों के बल झुका है अभिन्दन स्वदेश सुरक्षित […]
जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज)- जिसने अपनी रचनाओं में , हर कालखण्ड को खींचा है; जिसके कलम की स्याही ने ,नित सूर्य-चन्द्र को सींचा है। जो दिनकर-कबीर के वंशज हैं, हर ग़लत बात पे प्रश्न किये; जब […]
जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) – आज फ़िर रोया हिमालय, निकली है आँसू की धारा;डूबे हैं फ़िर कुछ सितारे, आसमाँ का बढ़ता पारा। आज फ़िर रोया हिमालय०…. सिन्धु भी है सूखा जैसे, व्यपगत हुआ हो नीर सारा;सूर्य […]
राघवेन्द्र कुमार “राघव”- हर मां का हमें चाहिए बेटा हर बहना का भाई । भारत माता ने रोते – रोते आवाज़ लगाई । आज पुनः दर्पी दुश्मन चढ़ हिन्द – ए – भाल पर आया […]
कवि राजेश पुरोहित – सारा देश आज दुखी है सोशल मीडिया पर शहीदों के चित्र हैं नमन बारम्बार अमर शहीदों को करता हर भारतीय बस एक सवाल लिए आतंकवाद कब होगा खत्म क्या हमारे जवान […]
ग़ज़लों में सिमटी कहानी; प्रेम कैसे उपन्यास होगा? दूरियाँ बढ़ गई हैं दिलों की; अब कहाँ स्वाँस-विन्यास होगा? गीत ग़ज़लों…….. मन में उठते हैं ऊँचे बवण्डर; हृदय में पतझड़ का एहसास होता। दुःख का झरना […]
राजेश पुरोहित- वीर शहीदों की अमर गाथा जन – जन को सुनाएं आओ हम सब हिंदुस्तानी , गणतन्त्र दिवस मनाएं । गूँज उठे गाँव ढाणी गली वन्दे मातरम गीत गाएं सुभाष , भगत ,आज़ाद, बिस्मिल […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आओ! आकाश को उतार लें, इस धरती पर। क्षितिज को बाँध लें, अपनी मुट्ठी में। सूरज को उगा लें, अपनी हथेली पर। सागर को सिमटा लें, अपनी आँखों में। पर्वत को बो […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- ज़िन्दगी में अर्थ की परिव्याप्ति सुरसुरी-सी लगने लगी है। देह की खुरचन सायास-अनायास केंचुल की भाँति उतरती आ रही है। कालखण्ड स्थितप्रज्ञ की भूमिका में अनासक्त योगी-सदृश “एकोहम् सर्वेषाम्” को अभिमन्त्रित कर […]
जगन्नाथ शुक्ल..✍(प्रयागराज) जिनके चरणों की रज चन्दन वो दशरथनन्दन भटक रहे; नाममात्र लेकर जिनका खल सारा सुख-वैभव गटक रहे। बोझ नहीं सह सकती जनता वादों के हत्यारों की; झूठ- फ़रेब भरे कृत्यों से सौहार्द – प्रेम सब चटक रहे। […]
शिवांकित तिवारी, युवा कवि,लेखक एवं प्रेरक, सतना (म.प्र.) माँ शब्द मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा गुमान है, माँ ही मेरी जिंदगी और माँ से ही मेरी पहचान है। अंधेरों से उजालों तक के इस सफर में, […]
जयति जैन ‘नूतन’ मतदान करने जा तो रहे हो पर इतना ध्यान धरना । साम दाम दंड भेद काम है शैतान का बस इससे ही तुम बचना । सौ सही मगर चार गलत हों काम […]
कवि राजेश पुरोहित काम क्रोध लोभ मोह के शत्रु। रात दिन महाभारत है करते।। मन के रणक्षेत्र के ये महारथी। कभी किसी से कम न पड़ते।। अपने अपने बाहुबल दिखाते। एक दूजे से झगड़ते- लड़ते।। […]
जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) शब्द हूँ ;शान्त हूँ; मत समझ श्रान्त हूँ। वर्ण के भेद से वाक्य में क्लान्त हूँ।। वो तो श्रृंगार से थी मोहब्बत मुझे; ओज धारण करूँ या नहीं; भ्रान्त हूँ। थोड़ी बदली […]
जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) ०९६७००१००१७ ईश्वर आपस में नहीं झगड़ते इंसानों को मत लड़वाओ तुम। मन्दिर-मसज़िद बहुत हुआ अब बनवाओ रुग्णालय तुम।। असमय कलियाँ मुरझा जातीं, बिखरे शूलों के भय से। विदुर-नीति भी शरमा जातीं, कपटी […]
राग द्वेष लालच को हटाकर, अहंंकार को जड़ से मिटाकर, नई उमंग से उजियाला लाओ तुम। चहूँ दिशा में फैला है घनघोर अंधेरा, अब ले भी आओ नया सवेरा, जगमग मन के दीप जलाओ तुम […]
जगन्नाथ शुक्ल…✍ (इलाहाबाद से प्रयागराज) बेमतलब के रिश्तों सङ्ग कितना रहते? अपमानों के गरल कण्ठ कितना सहते? सबने है मुझको बेग़ैरत-सा समझा; मैं ही था जो रिश्तों में था बैठा उलझा। बिन समझे मुझको उलझन […]
बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’ जगमग जगमग ज्योति जली है। दीवाली की धूम मची है।। दीपोत्सव की रजनी आयी। दीपों की माला बुन लायी।। घर में मंगल मूर्ति विराजे। रिद्धि-सिद्धि भी संग सुसाजे।। लक्ष्मी – पूजन सभी […]