नया साल नये रंग लेकर आया है
नया सालनए रंग लेकर आया है,टूटे बिखरे ख्वाबों कोफिर से जोड़ कर,एक नया एहसास लेकर आया है।बीते हैं जो पल विषाद में,उनमें एक नयाआह्लाद लेकर आया है।छोड़ चुके हैं जो अपनेहमें समझ कर बोझ,उनको रिश्तो […]
नया सालनए रंग लेकर आया है,टूटे बिखरे ख्वाबों कोफिर से जोड़ कर,एक नया एहसास लेकर आया है।बीते हैं जो पल विषाद में,उनमें एक नयाआह्लाद लेकर आया है।छोड़ चुके हैं जो अपनेहमें समझ कर बोझ,उनको रिश्तो […]
ठंड का मौसम है आयासर्दी-जुकाम साथ है लाया।ऊनी वस्त्र हमें पहनायेआग के पास हमें बिठाये।नहाने से सब छूटकारा पायेमुँह धोके सब काम चलाये।ठंडा पानी देख दिल घबरायेनहाये या ना नहाये?ये प्रश्न मन मे बार बार […]
नया साल आया है ,खुशियों की बहार लाया है ।बीते हुए कल को बुलाना है ,नए साल को खुशहाल बनाना है।इस साल के दुखों को मिटाना है,नए साल को सुकून से बिताना है।नए साल का […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देखो!थोड़ा नज़दीक आओ।देखो! उस कुत्ते कोअपनी जाति पहचानता है।उसके सामने भीड़ हैगँवार कुत्ते से लेकरअर्द्धशिक्षित-शिक्षित कुत्तों की मण्डलीमन्त्रणा करती आ रही है,‘रिफ़ाइण्ड हड्डी’ का दरकार है;क्योंकि उनकी भी अपनी सरकार […]
हम क्यों, किसके लिए तथा क्या लिख रहे हैं?– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••• प्रत्येक वर्ष की भाँति माघमेला-आरम्भ होने से पूर्व ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ की ओर से संगमतट के समीप-स्थित ‘संगम नागरिक पाण्डाल’ (शुद्ध शब्द ‘पाण्डाल’ […]
ठाकुरद्वारा में शिव जी मंदिर कागांव में भोले भाले लोगों कास्कूल में हेडमास्टर सर काअंदाज ही निराला है।खेतो मे मक्के काभीड़ मे धक्के काहिंदी भाषा परलगने वाली बिंदी काअंदाज ही निराला है।ठाकुरद्वारा स्कूल के गुरुओ […]
तन्हा दिल है न जाने कब से ,तुम मिलकर भी न मिल पाए।तन्हा है दिल न जाने कब से ,तुम छोड़ कर भी ना छोड़ पाए।तन्हा है दिल न जाने कब से,तुम देख कर भी […]
मैं लिख रहा हूं तुमकोतुम पढ़ लेना खुद कोअगर न समझ आये कुछतो पूछ लेना फिर हमको।वैसे तुमबहुत समझदार होफिर भीकुछ समझ ना आएअपने बारे मेंकुछ तुमकोतो नासमझ समझ कर हीपूछ लेना हमको।मैं सोच रहा […]
जीवन के पथ परयहां से वहां जा रहा हूं,समझ नहीं आताक्या कर रहा हूंऔर क्या नहीं कर रहा हूं।जीवन की डगमग करतीनाव में बैठकरज़िंदगी का सफरतय कर रहा हूं।कभी तूफानों कामंजर देख रहा हूंतो कभी […]
चिड़िया उड़तीचू-चू करती,पंख फैलाकरनील गगन मेंउड़ती कभी यहांँकभी वहाँ ।नन्हें-नन्हेंपंखों से भरतीबड़ी-बड़ी उड़ाने ।छूकर क्षितिज कोकभी हँसतीकभी मुस्काती। राजीव डोगरा(भाषा अध्यापक)गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारापता-गांव जनयानकड़पिन कोड -176038कांगड़ा हिमाचल प्रदेश9876777233rajivdogra1@gmail.com
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (एक)तेरा चुप भी इक सवाल है,यहाँ अब न कोई मलाल है।यहाँ हर ख़याल है सो रहा,अब यहाँ बोल है न चाल है।(दो)चमकता चाँद-सा बदन,न चुरा अनकहा कथन।पतंगी रूप हम पा […]
मैं तेरे पास रहूंतेरे साथ रहूंयही काफी है।मंत्रों का बोझतंत्रो का ओजभारी सा लगता है।तेरी गोद मेंममता भरी छाया मेंसोया रहूंयही काफी है।जन्म जन्मांतर की सिद्धियांयुगों-युगों की रिद्धियांअब भारी सी लगती हैतेरा हाथ पकड़ करबस […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मृग-मरीचिका-सा लगे, मार्ग दिखे विश्रान्त।पथ का राही सोच मे, चंचल मन अब क्लान्त।।दो–अलख जगाता फिर रहा, मिला नहीं भगवान्।अन्तस्-स्वर से दूर हो, पाता है अपमान।।तीन–युग का लक्षण दिख रहा, दिखे […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कृति ‘जो झुका नहीं’ संस्मरण-प्रधान है, जिसका नामकरण समयसापेक्षहै। इसके कृतिकार अपने समय के प्रतिष्ठित पत्रकार अग्रज-सम कृष्णमोहन अग्रवाल जी हैं, जो अपने पत्रकारिता के स्वर्णिम काल में ‘के० एम० […]
प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा दीये जब नफरत के बुझ जाते होजब प्रेम से मीत बुलाते होजब कहीं किसी से बैर ना होसब अपने हो, कोई गैर न होउस रोज दीवाली होती है। गरीबों की थाली में […]
आओ तुम्हें सुनाता हूंबचपन की कहानी,वहां भी होती थी दिल्लगीऔर साथ ही होती थीहर दिन एक नई कहानी।रूठना मनानाआए दिन ही चलता था ।पर नहीं थी मन मेंकोई छल कपट की कहानी।हर रोज़ हम सबलड़ते […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘भारतीय क्रिकेट-दल’ पिछले कुछ दिनों से ‘कोमा’ में पड़ा हुआ था; उपचार किया जा रहा था; किन्तु सब व्यर्थ रहा। १० मिनट-पूर्व उसके वर्तमान अस्तित्व का अवसान हो चुका था; […]
दीवाली जगमग हुई, दीये-झालर संग।दिलवालों के माल पर, दिलवाले सबरंग ।। कच्चे,पक्के घर सभी, सजे-धजे बहु-भेष ।उत्साही गलियाँ हुई, मचा-कोलाहल देख ।। दूकानें शोभामती, चमक-दमक पर ध्यान ।वित्तमती हर नायिका, चटक-मटक का मान ।। खील […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय दीपवर्तिका की ज्वलनशीलतालोकमानस की सहनशीलतापृथक्-पृथक् पथ पर परिलक्षित होती हैं।दो समानान्तर दूरी पर चलते हुए भीसंवाद करने के लिएकहीं-कोई ठौर नहीं बचता।किस-हेतु लोक दीप जलाता हैख़ुश हो लेता है?दीप-प्रज्वलन के […]
एक दीप मन में भी जलाएंभरा जो अंधकार चलो उसे भी मिटाएंमंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे एक साथ बनाएहिंदू, मुस्लिम ,सिख -ईसाई का भेदभाव मिटाएंदिल से हटा दें फरेब की फुलझड़ियांबैर-भाव को भुला बनाएं चलो अपनत्व की […]
दिवाली आयी दिवाली आयी,खुशियों की बहार है लायी।हर घर जगमग दीप जलायें,श्रीराम जी की याद दिलायें।दीपावली है हमारा पवित्र त्यौहार,हर घर में है खुशियों का समाहार।राम ने रावण पर विजय है पायी,हर घर से बुराई […]
——-राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवट जिनका लाखों जन कोसम्बल देता था।जिनका हुङ्कार रौद्र होकरतूफ़ां बन जाता था। ऐसे वीर शिरोमणि को सिरशत-शत बार नवाता हूँ।सरदार देश के हे युगसृष्टा!मैं तुमको पुनः बुलाता हूँ। कृषक देश […]
छायी हैं नफ़रतें हर जगहआओ मिलकरमोहब्बत काएक नया गीत गाये।छाया है अविश्वास काघना अंधकारयहाँ हर जगह,आओ मिलकरविश्वास का एक नन्हा सादीया जलायें।छाया है मृत्यु कातांडव यहां हर जगह,आओ मिलकरनव जीवन का संचार करें।छाया है महामारी […]
कभी हँसाती है तोकभी रुलाती है।यह जिंदगीसमझ नहीं आती है?कभी खुशियां है तोकभी गम है ।यह जिंदगी भीकिसी.खेल सेकहां कम है।कभी दोस्त हैं तोकभी दुश्मन है ।तो जिंदगी मेंकही ग़म है तोकही हम है।कभी दिल […]
कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी , बिल्कुल ज़िंदगी की तरह शांत। लहरे पानी में भी उठती हैं, जिंदगी में भी । कुछ किनारे इनके थपेड़ो से टूट जाते हैं , फ़ना हो जाते […]
● राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ चिर-प्रतीक्षित ‘समग्र सामान्य हिन्दी’ की सम्पूर्ण सामग्री मुद्रणार्थ सम्बन्धित मुद्रणालय में प्रेषित की जा चुकी है। अगले सप्ताह तक मुद्रित होकर सप्ताहान्त से नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक ‘अमेज़न’, ‘फ़्लिप […]
जिंदगी है एक अनमोल रत्नइसमे खुश रहने का करो प्रयत्न।दुःख की घड़ी भी आएगीपर सुख से दूर नहीं रह न पाएगी।जिंदगी मे क्या छूट गयाक्यों करते हो उसकी चिंता?बस आगे बढ़ते चलोजिंदगी की हकीकत सेकिसी […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–रूप-रंग की हाट में, तरह-तरह तस्वीर।राँझा बिकते हैं कहीं, कहीं बिक रहीं हीर।।दो–धर्म पंथ औ’ जाति की, बिगड़ गयी है रीति।ऐसे में कैसे भला, सब तक पहुँचे प्रीति।।तीन–रुपया-रुतबा-रूपसी, बहुत भयंकर […]
कोरोना आया कोरोना आया,ऑनलाइन शिक्षा की नीति लाया,स्कूल जाना बंद करवाया,हर बच्चों के हाथ में फोन पकड़ाया,हर घर को पाठशाला बनाया,हर घर पाठशाला से अब हम पढ़ते,गूगल मीट से भी अब हमअध्यापकों से शिक्षा ग्रहण […]
● अभी न होगा मेरा अन्त— निराला ■ ‘निराला’ की प्रथम हिन्दी-गुरु ‘मनोहरा देवी’ — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इलाहाबाद का नाम आते ही प्रथम पंक्ति में जिस सारस्वत हस्ताक्षर का नाम-रूप दिखता है, वह […]
प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा अरे कलयुगी दानवो, मेरे पुतले को जलाने वालोंमैं नहीं कहता कि मत जलाओ मुझे ,लेकिन क्यों जलाते हो मेरे पुतले को यह तो बताओ मुझे ।तुम तो मुझे धर्मात्मा और ज्ञानी पंडित […]
मेरी पहचान हैं,मेरे पापा।मेरी हर खुशी हैं ,मेरे पापा।मेरी जान हैंमेरे पापा।मेरा हौसला हैं ,मेरे पापा।मेरा जनून हैं,मेरे पापा।मेरी मुसकान हैं ,मेरे पापा।मेरा सुख हैं,मेरे पापा। संजना (11वीं कक्षा की छात्रा)कांगड़ा हिमाचल प्रदेश।
★ समीक्षक– राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अब तक की प्रकाशित सभी सामान्य हिन्दी की पुस्तकों :– ‘नालन्दा सामान्य हिन्दी’, ‘मानक सामान्य हिन्दी’, ‘बृहद् सामान्य हिन्दी’, ‘प्रामाणिक सामान्य हिन्दी’, ‘संजीवनी वस्तुनिष्ठ […]
गांधी के सपनों का भारत आओ मिलकर हम बनाएं।गांव -गांव और ढाणी -ढाणी शिक्षा का दीप जलाएं।। रामराज्य की कल्पना को आओ मिल साकार बनाएं।भारत माँ के वीर सिपाही हम इस गुलशन को महकाएँ।। सत्य […]
गाँवों की समृद्धि के लिए गांधी जी प्रयास किए।कुटीर उद्योग खुलवाकर स्वरोजगार से जोड़ दिए।। खादी के वस्त्रों का चलन,गांधी जी के चरखे से आया।स्वावलम्बन और मेहनत से सबने खादी घर घर बनाया।। अहिंसा को […]
आओ करें तलाश कहीं ज़िन्दगी मिले।शायद किसी शहर में कोई आदमी मिले।। खंजर कहीं कटार कहीं हाथ में पत्थर।मुश्किल है इस जहाँ में कहीं सादगी मिले।। उजड़े हुए हैं गाँव तो जलते हुए शहर।उठती नज़र […]
गुरु-शिष्य का रिश्ता हैप्रेम भाव से निभता है।गुरु ज्ञानरत्नों का भंडार हैदेकर शिष्य को,दिलवाता समाज मेंप्रतिष्ठा मान-सम्मान है।शिष्य गुरुचरणों मेंजब झुकता है ,तभी तो उसकोज्ञान अमृत फल मिलता है।आओ,गुरुओं का मान करेंमिलकर दिल सेउनका सम्मान […]
सोचता हूँ आज कुछ लिखूं,पर क्या लिखूं?दर्द, प्रेम, गरीबी ,बीमारी या भूख !या लिखूं दो वो सपना जिसे मेरे पिता देखते हैं ,मेरे इलाहाबाद में मौजूद होने पर ।या लिख दूँ भूखे कामगारों के शोषण […]
आज (२३ सितम्बर) ओजस्वी कवि ‘दिनकर’ जी की जन्मतिथि है। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐतिहासिक चेतना के प्रखर वाणीदायक राष्ट्र-कवि को हमारा नमन। राष्ट्रकवि दिनकर ने हिन्दी-काव्य को छायावाद/रहस्यवाद की कुहेलिका (कुहासा) से बाहर […]
आखिरी भ्रम थाछटने लगा धुंध परछाईयों सेतुम मेरे साथ हो ! अजीब किनारे से चुप होकरप्रतिक्रिया देने के लिए हर बारएक सीधा सवाल कर जाते हो । आखिरी भ्रम थाये सीधी सरल जिंदगी अभीदो कदम […]
(महादेवी जी के साथ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की की गयी एक भेंटवार्त्ता) मैंने महादेवी जी के साथ वर्ष १९८२ में एक मुक्त भेंटवार्त्ता की थी; तब मैं विद्यार्थी और पत्रकार की भूमिका में भी होता […]
आज (११ सितम्बर) ही की तिथि में महादेवी जी का शरीरान्त हुआ था। — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रयाग-आगमन और क्रॉस्थवेट स्कूल, बाई का बाग़, इलाहाबाद में प्रवेश पाने के बाद महादेवी जी की साहित्य-साधना […]
फिर से, तुमको जीवन कीमर्यादा के लिएउठना होगा।तुमको मानवता कीउदारता के लिएफिर सेउस ईश्वर के आगेझुकना होगा।तुम्हें असत्य कोहराने के लिएफिर सेसत्य से जुड़ना होगा।तुमको मानवता कीरक्षा के लिएफिर सेहार कर भी जीतना होगा। राजीव […]
भारतेन्दु हरिश्चन्द : हिन्दी-भाषा और साहित्य के महागौरव — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज की तारीख़ में समाचारपत्रों और वैद्युत्-माध्यम ने खड़ी बोली की प्रतिष्ठा करनेवाले और साहित्य को नयी क्रान्ति का माध्यम बनानेवाले सारस्वत […]
ऐसी दुर्गति शिक्षकी, चिन्तन,चिन्ता माथ ।बरसों से है घिस रही, झाड़ू अपने हाथ ।। ‘वेतन भोगी सोच’ है, शिक्षक-सुचिता व्यर्थ ।शिक्षणेत्तर बोझ ने, कर दिया बेड़ा गर्क ।। दौड़ा-दौड़ा फिर रहा, निपटाऊ हर वर्क।हाय शिक्षकी […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ख़ता क़ुबूल हो तो कहो! नफ़ासत लिख दूँ,पयामे इश्क़ के नाम इक वरासत लिख दूँ।न झुकाओ निगाहें चिलमन उठाकर आज,सलामे इश्क़ के नाम कहो! बग़ावत लिख दूँ।बला हो, हूर हो […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे होठों का रंग चुरा लो तो कोई बात बने,तनहाई की अँगड़ाई दे दो तो कोई बात बने।कानेमलाहत१ हो तो बदन को शराफ़त सिखलाओ,ख़ुशअक्ख़लाक़२ पैरहन३ ले लो तो कोई बात […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज एक–हमारी फ़क़ीरी तुझसे बहुत जुदा है प्यारे!ख़ुद को फ़क़ीर बना, पाप का महल बनाता?दो–ग़रीब की कुटिया ग़र उजाड़ेगा, जल जायेगा बद्दुआ से उसकी।तेरे सिरहाने-पैताने किराये के लोग रोनेवाले होंगे।तीन–अपने हक़ […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कृष्ण-कृष्ण हैं रट रहे, कर्महीन जो लोग।पापकर्म में रत रहे, मौन दिखे संयोग!दो–अनाचार है पक रहा, कदाचार के धाम।पापी छक्-छक् चूसते, मानो फल हो आम।।तीन–धरा-धाम में दिख रहे, बढ़कर एक […]
सुनो!तुम्हें देने के लिए प्यार नहीं बो रही मैं,कहीं सींच-सींच करपागलपन में सड़ा दिया तो?मुहब्बत में हिलोरे लेती बेल भी नहीं लगाऊँगी,कहीं सहारा देने, बाँध-बाँध के टाँकने कीबंदिशों में घुट के ग़र मर गयी ‘मुहब्बत’ […]
◆ आज (२८ अगस्त) फ़िराक़ गोरखपुरी की १२५ वीं जन्मतिथि है। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय फ़िराक़ एक फक्कड़, किन्तु ख़ुद्दार शख़्सीयत (‘शख़्सियत’ अशुद्ध शब्द है।) का नाम है। पाँव से सिर तक की उनकी […]
“जोबन छलकाती उठी चंचल नार, राधा गोकुल में जैसे खेले होली”– फ़िराक़ एक ख़ूबसूरत एहसास का नाम है, फ़िराक़। ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई के साथ-साथ, समालोचना और इतिहास पर भी क़लम चलानेवाले रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी […]
मैं फकीर हूँ,तेरे दर का खुदामेरी आजमाइश न कर।तू पीर है मेरा,मेरे खुदामेरी जग हंसाई न कर।मैं कमजोर लाचार हूँ,मेरे खुदामेरा तू हम राही बन।मैं अनजान हूँ,तेरी इस कायनात सेमेरे खुदातू मेरा हमराज बन।मैं मुरीद […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवन क्या है ?एक बहती हुई नदी है ।कंकरीले और पथरीले रास्तोंपर बहती हुई,सर्दी और गर्मी सहती हुई।जैसे नदी चलना नहीं छोड़ती है ऐसे ही ये जिन्दगी है ।अनेक रूकावटें और अनेक […]
Raghavendra Kr. Tripathi ‘Raghav’ what is life ?It is like a flowing river.Flowing on narrow and rocky paths. Enduring winter and summer.Life is al like a river.You know river does not stopIt is always flowing.Bear […]
● फ़ादर कामिल बुल्के, जिनका सम्पूर्ण जीवन ‘हिन्दीमय’ बना रहा! ‘मुक्तिदाता’, ‘नया विधान’, नील पक्षी’, ‘अँगरेज़ी-हिन्दीकोश’ आदिक कृतियों के प्रणेता फ़ादर कामिल बुल्के की आज (१७ अगस्त) निधनतिथि है और उनकी पुण्यस्मृति में ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज […]
आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक मातृभूमि प्राणों से प्यारी,स्वतंत्रता अपनी अनमोल ।वीर, आबाल, वृद्ध और नारीदेशभक्त सदा शत्रु पर भारी।प्राणों की आहुति दे-दे कर ,अनगिनत चुकाया इसका मोल।खुशी भरा यह दिवस अनोखाआओ मिलकर ध्वज फहराएं।‘राष्ट्र की उन्नति’ […]
आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक धरती और गगन कहे,सुख शांति चहुँ ओर रहेजय भारत-जय भारत।सद्भाव के बीज उगे ,उन्नति का आशा जगे,खुशियों की फ़सल लगे ,तन-मन झूमे और कहेजय भारत-जय भारत।लहराता हुआ ध्वज कहे,वीरभूमि की रज कहे,जय […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(भाषाविज्ञानी, समीक्षक तथा ‘ओलिम्पिक एन्साइक्लोपीडिया’ के लेखक) २३ जुलाई, २०२१ ई० को वर्ष २०२० के ओलिम्पिक के रूप में जापान की राजधानी ‘टोक्यो’ में ग्रीष्मकालीन ओलिम्पिक का उद्घाटन हुआ था। यों […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय स्याह परछाइयाँ :–वक़्त-बेवक़्त कीचुपके से दाख़िल होती हैं,मन के अँधेरे घर में।घर के भार सेलहूलुहान नीवँकब दम तोड़ देगीइसे वक़्त भी नहीं जानता;क्योंकि वह जी रहा होता है,अपना वर्तमान।वह सहला […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बीज घृणा का हर तरफ़, उगने लगी खटास।गदहपचीसी हर जगह, दूर हो रही आस।।गोरखधन्धा दिख रहा, खेल निराले खेल।बाहर से दुश्मन लगें, अन्दर-अन्दर मेल।।गुण्डों का अब राज है, उस पर […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय गंगाजल ले घूमता, अपराधी के देश।साधु बनाता संग ला, बना-बना के वेश।।दानव-जैसा दिख रहा, देव बहुत हैं दूर।शैतानों-सा बोलता, दिखता मानो सूर।।अधिनायक बन घूमता, मन से दिखता हीन।आतंकी का रूप […]
प्रेमचंद के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ आज भी जीवित है ★डॉ० प्रदीप चित्रांशी (साहित्यकार, प्रयागराज) मुंशी प्रेमचंद ने बहुत सी कहानियाँ,उपन्यास लिखे जो आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि उन्होंने वास्तविक परिस्थितियों का वर्णन जितनी वास्तविकता […]
आज (३१ जुलाई) प्रेमचन्द की जन्मतिथि है। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कथा-विषय पर जब संवाद-परिसंवाद होता है तब समीक्षक पारदर्शिता के साथ ‘प्रेमचन्द’ से आगे बढ़ नहीं पाता है। यह अलग बात है कि […]
उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती (31 जुलाई, 1880 लमही, काशी) सत्य, निष्ठा और न्याय के पथ पर,मैं जीवन भर चलती जाऊँ।सादा जीवन हो उच्च विचार,मैं महापुरुषों से ऐसी सीख लाऊँ। आदर्श यथार्थ भरी […]
1. वसुधा पर मानव कुछ सीखा है हमने जग में, वसुधा के इस आँचल सेपौरुष की गाथा को सुनता आजीवन मानव व्याकुल मन से। सुरसरि के अविरल प्रवाह को बाँध दिया तब शंभू नेस्थान जटा […]
हम बिखरेंगेकुछ इस तरहकि तुम संभाल भी न पाओगे।हम टूटेंगेकुछ इस तरहतुम जोड़ भी न पाओगे।हम लिखेंगेकुछ इस तरहकि तुम समझ भी न पाओगे।हम सुनाएंगे दास्तांकुछ इस तरहकि तुम कुछ कह कर भीन कह पाओगे।हम […]
मेरी बहुप्रतीक्षित पाण्डुलिपि ‘नारीचरितमानस’ (समग्र नारी-दर्शन) अब अन्तिम रूप ग्रहण कर चुकी है। एक बार दृष्टि-अनुलेपन करूँगा, तदनन्तर उसे प्रकाशन-प्रक्रियाओं के साथ सम्बद्ध करने पर विचार करूँगा। इसमें भावपक्ष, हृदयपक्ष, विचारपक्ष :– आदर्श और यथार्थ […]
माँ के आँचल में जो सुकून है वो सुकून कहीं और कहाँ? सुना था मैंने, उसने सुनी जब मेरी पहली किलकारी तो आँखें उसकी नम सी हुई थीं पाकर मुझे अपनी गोद में उसने तो […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय विश्वास की डोर थामेसरक रहा थालक्ष्य की ओर—तन-मन मेंआशंकाओं की झंझावात समेटेडोर की मध्य-बिन्दु के स्पर्श की अनुभूतिबाहर से भीतर तकसिहरन भरती जा रही थी।अचानक…. सहसा!विश्वास की कुटिल चालेंचलायमान हो उठीं।विस्फारित […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–माना तू सरकार है, सीमा अपनी जान।मत छेड़ तू हम सबको, खोयेगा तू मान।।दो–मन आन्दोलित है यहाँ, रोक सके तो रोक।ज्वाला से मत खेल तू! बोल रहा है लोक।।तीन–जन-जन जागो […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ : जैसा कि हमारे पाठकों को ध्यान होगा कि आज (२३ जुलाई) से विश्व की सबसे बड़ी खेल-प्रतियोगिता ‘ओलिम्पिक’ का समारम्भ हो चुका है। यह ओलिम्पिक चार वर्षों के अन्तराल पर […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शाम ढली दीये को जलने दो,नींद में सपनों को पलने दो।बढ़ती है प्यास तो बढ़ जायेबर्फ़ को पानी में गलने दो।दम तोड़ ले ख़्वाहिश कहीं,आदत है, नींद में चलने दो।सरे-बाज़ार […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय समय आया, कर विचार।देश की जनता है लाचार।समय-बाण से बेधो इतना,राजनीति बदले आचार।खद्दर शर्म से पानी-पानी,नहीं कहीं सुख का आधार।महँगाई से त्रस्त है जनता,सरकारें धरती पर भार।नेताओं से त्रस्त है […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मायावी संसार में, भाँति-भाँति के लोग।पाप-घड़ा है भर रहा, यहीं करोगे भोग।।दो–जीवन रस की गागरी, कर लो छककर पान।भाव-समादर है यहीं, मिलता भी अपमान।।तीन–यहाँ-वहाँ के भेद से, मन में होता […]
स्वनामधन्य निबन्धकार और पत्रकार पं० बालकृष्ण भट्ट इलाहाबाद में जन्मे, पले, बढ़े तथा अन्तिम श्वास भी यहीं लिया। तब तक वे साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्रों में अपना महत् प्रभाव स्थापित कर चुके थे। भाषाविज्ञानी […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भूख से बिलबिलाती आँतेंचीथड़ों में लिपटी-चिपटी-सिमटीअपनी पथराई आँखें पालतीटुकुर-टुकुर ताकतीआँखों से झपटने की तैयारी करतीमेले-झमेले की गवाह बनती।आस-विश्वास की फटही झोली लियेतमन्नाओं-अर्मानों की लाश ढोतीफफोलों से सजी हथेलियों कीरेखागणित पढ़तेहोठों […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–तुम बहार बनकर छाते रहो,ख़ुद को पतझर मुबारक करता हूँ।दो–ले गये सब यहाँ से रजनीगन्धा,मेरे हक़ में नागफनी छोड़ आये हैं।तीन–आँखों में आँखें डाल बातें सीखो,मुखौटा हटाओ तो कोई बात […]
Slipping fingers on touch screen,They look Jolly and evergreen,Roaming busily with world in the fist,Indeed in touch, but in touch none is seen. First necessity is a phone-mobile,How has affected it lifestyle!Day or night, dark […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कितना प्यारा लगता झरना,पर्वत से जब झरता झरना!कलकल-छलछल गीत सुनाकर,सबका मन है हरता झरना।उठता-गिरता, गिरता-उठता,कष्ट है कितना सहता झरना!आज गिरा है कल तो उठेगा,ठोकर खाकर बढ़ता झरना।कष्टों से है क्या […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय फल-राजा कहलाता आम, मीठा और रसीला आम।दिखते माह जुलाई में हैं, डाल-डाल गदराये आम।लँगड़ा, चौसा और दशहरी, सिन्दूरी, मलदहिया आम।तरह-तरह के नाम हैं उसके, फजली, चम्पा, देसी आम।कहीं है हापुस, […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–महकी अमराईचहका यौवनआग लगी पानी में!दो–आँखों-की खटासकोई आस-न-पासरिश्ते मुसकरा उठे।तीन–काग़ज़ की नावबारिश की छाँवसूरज सघन चिकित्साकक्ष में।चार–वर्तनी अकेलीसौन्दर्य-बोध लजीलाअभिव्यक्ति दरकने लगी।पाँच–प्रतीक सजीलाबिम्ब रंगीलाअभिव्यक्ति बहक पड़ी।(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (एक)भाषा बनावटीशैली मिलावटीप्रस्तुति हस्पताल में।(दो)भाषा बदरंगशैली मलंगप्रस्तुति मधुशाला में।(तीन)कथ्य निहत्थातथ्य बेसुरे“हँसुए के ब्याह में खुरपे का गीत”।(चार)भयंकर आँधी-तूफ़ानकहीं कोई अप्रिय घटना नहींअसहयोग आन्दोलन है।पाँचबित्ताभर ज़मीन नहींनाम ‘पृथ्वीनाथ’घोटाला-ही-घोटाला! (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य […]
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज कैलेण्डर में टँकी तिथिएक जुलाई,आँखों-में-आँखें डालतीन सौ पैंसठ दिनों की दैनन्दिनी उघारे,सिद्धहस्त ज्योतिषी-सदृश अतीत-वाचन कर रही है।आषाढ़-मास के उमड़ते-घुमड़ते बादल देख,कवि-कलाधर, कवि-कुसुमाकर, कवि-चूड़ामणिकवि-सम्राट कालिदास का‘मेघदूत’ जीवन्त हो उठता है।पावस-ऋतु […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यक़ीं नहीं आताख़ुद को देख रहा हूँ।अतीत, वर्तमान तथा भविष्य के गलियारों मेंढूँढ़ रहा हूँअपने न होकर भी हो जाने के साक्ष्य कोपर हर बारख़ुद को ख़ुद सेठगा हुआ पा […]
अंजलि तिवारी : हमारा यह हीरोज़ इग्नोटम एक ऐसा मंच है जिस पर प्रतिभाशाली, फेमस-अनफेमस, अनसीन और सारे टैलेंट्स, फ़ील्ड्स के लोग के पीछे के संघर्ष की कहानी को आप सब तक पहुंचाते है । […]
बहते आँसू आँख से, जाने न कोई पीर।जाने वो समझे नहीं, समझे जो गम्भीर।। आँसू टपके नैन से,बहने लगी है धार।पिया मिलन की आस मे,चोट खाई हज़ार।। देख आँसू माई के ,लखन हुए गम्भीर।वन गमन […]
जगन्नाथ शुक्ल ‘जगन’, प्रयागराज तुम मुझे नफ़रत करो मैं नेह तुमको ही करूँगा;नागफनियों के शहर में रातरानी सा खिलूँगा। जो कहो कि मैं तुम्हारेबाँकपन को भूल जाऊँ।शीलता की मूर्ति के,अवहेलना का दोष पाऊँ। यदि तेरे […]