विषाक्त उत्सवधर्मिता!

November 6, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय दीपवर्तिका की ज्वलनशीलतालोकमानस की सहनशीलतापृथक्-पृथक् पथ पर परिलक्षित होती हैं।दो समानान्तर दूरी पर चलते हुए भीसंवाद करने के लिएकहीं-कोई ठौर नहीं बचता।किस-हेतु लोक दीप जलाता हैख़ुश हो लेता है?दीप-प्रज्वलन के […]

एक दीप मन में भी जलायें

November 3, 2021 0

एक दीप मन में भी जलाएंभरा जो अंधकार चलो उसे भी मिटाएंमंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे एक साथ बनाएहिंदू, मुस्लिम ,सिख -ईसाई का भेदभाव मिटाएंदिल से हटा दें फरेब की फुलझड़ियांबैर-भाव को भुला बनाएं चलो अपनत्व की […]

दीपावली है हमारा पवित्र त्यौहार

November 2, 2021 0

दिवाली आयी दिवाली आयी,खुशियों की बहार है लायी।हर घर जगमग दीप जलायें,श्रीराम जी की याद दिलायें।दीपावली है हमारा पवित्र त्यौहार,हर घर में है खुशियों का समाहार।राम ने रावण पर विजय है पायी,हर घर से बुराई […]

सरदार देश के हे युगसृष्टा!

November 1, 2021 0

——-राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवट जिनका लाखों जन कोसम्बल देता था।जिनका हुङ्कार रौद्र होकरतूफ़ां बन जाता था। ऐसे वीर शिरोमणि को सिरशत-शत बार नवाता हूँ।सरदार देश के हे युगसृष्टा!मैं तुमको पुनः बुलाता हूँ। कृषक देश […]

एक नयी दीपावली

October 29, 2021 0

छायी हैं नफ़रतें हर जगहआओ मिलकरमोहब्बत काएक नया गीत गाये।छाया है अविश्वास काघना अंधकारयहाँ हर जगह,आओ मिलकरविश्वास का एक नन्हा सादीया जलायें।छाया है मृत्यु कातांडव यहां हर जगह,आओ मिलकरनव जीवन का संचार करें।छाया है महामारी […]

यह जिंदगी भी किसी खेल से कहाँ कम है

October 26, 2021 0

कभी हँसाती है तोकभी रुलाती है।यह जिंदगीसमझ नहीं आती है?कभी खुशियां है तोकभी गम है ।यह जिंदगी भीकिसी.खेल सेकहां कम है।कभी दोस्त हैं तोकभी दुश्मन है ।तो जिंदगी मेंकही ग़म है तोकही हम है।कभी दिल […]

कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी

October 25, 2021 0

कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी , बिल्कुल ज़िंदगी की तरह शांत। लहरे पानी में भी उठती हैं, जिंदगी में भी । कुछ किनारे इनके थपेड़ो से टूट जाते हैं , फ़ना हो जाते […]

गुरुदेव ‘आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जी’ की कृति– ‘समग्र सामान्य हिन्दी’ नवम्बर-माह से उपलब्ध

October 24, 2021 0

● राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ चिर-प्रतीक्षित ‘समग्र सामान्य हिन्दी’ की सम्पूर्ण सामग्री मुद्रणार्थ सम्बन्धित मुद्रणालय में प्रेषित की जा चुकी है। अगले सप्ताह तक मुद्रित होकर सप्ताहान्त से नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक ‘अमेज़न’, ‘फ़्लिप […]

आगाज़

October 22, 2021 0

इन अंधेरों को बोलिएरोशनी का आगाज़ करें।इन नफरतों को बोलिएमोहब्बत का इजहार करेंइन दुखों को बोलिएसुखों का आगाज़ करें।इन ग़मो को बोलिएइश्क का थोड़ा इजहार करें।इन तारों को बोलिएहमारे चांद का आगाज़ करें।इन परवानों को […]

जिंदगी पर कविता

October 19, 2021 0

जिंदगी है एक अनमोल रत्नइसमे खुश रहने का करो प्रयत्न।दुःख की घड़ी भी आएगीपर सुख से दूर नहीं रह न पाएगी।जिंदगी मे क्या छूट गयाक्यों करते हो उसकी चिंता?बस आगे बढ़ते चलोजिंदगी की हकीकत सेकिसी […]

आवर्त्तन और दरार

October 18, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–रूप-रंग की हाट में, तरह-तरह तस्वीर।राँझा बिकते हैं कहीं, कहीं बिक रहीं हीर।।दो–धर्म पंथ औ’ जाति की, बिगड़ गयी है रीति।ऐसे में कैसे भला, सब तक पहुँचे प्रीति।।तीन–रुपया-रुतबा-रूपसी, बहुत भयंकर […]

कोरोना आया कोरोना आया, हर घर को पाठशाला बनाया

October 17, 2021 0

कोरोना आया कोरोना आया,ऑनलाइन शिक्षा की नीति लाया,स्कूल जाना बंद करवाया,हर बच्चों के हाथ में फोन पकड़ाया,हर घर को पाठशाला बनाया,हर घर पाठशाला से अब हम पढ़ते,गूगल मीट से भी अब हमअध्यापकों से शिक्षा ग्रहण […]

आज (१५ अक्तूबर) निराला की मृत्युतिथि है

October 15, 2021 0

● अभी न होगा मेरा अन्त— निराला ■ ‘निराला’ की प्रथम हिन्दी-गुरु ‘मनोहरा देवी’ — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इलाहाबाद का नाम आते ही प्रथम पंक्ति में जिस सारस्वत हस्ताक्षर का नाम-रूप दिखता है, वह […]

राम

October 15, 2021 0

राम-राम करते होतुम रावण बनने केलायक भी नहीं।ज्ञान-ज्ञान करते होतुम अज्ञानी बनने केलायक भी नहीं।ध्यान-ध्यान तुम करते होतुम ज्ञान केलायक भी नहीं।स्वयं को न जानान ही पहचाना कभीफिर भी महाज्ञानीबने फिरते हो।राम तो कण-कण में […]

क्यों जलाते हो मुझे

October 15, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा अरे कलयुगी दानवो, मेरे पुतले को जलाने वालोंमैं नहीं कहता कि मत जलाओ मुझे ,लेकिन क्यों जलाते हो मेरे पुतले को यह तो बताओ मुझे ।तुम तो मुझे धर्मात्मा और ज्ञानी पंडित […]

मेरी पहचान हैं, मेरे पापा

October 14, 2021 0

मेरी पहचान हैं,मेरे पापा।मेरी हर खुशी हैं ,मेरे पापा।मेरी जान हैंमेरे पापा।मेरा हौसला हैं ,मेरे पापा।मेरा जनून हैं,मेरे पापा।मेरी मुसकान हैं ,मेरे पापा।मेरा सुख हैं,मेरे पापा। संजना (11वीं कक्षा की छात्रा)कांगड़ा हिमाचल प्रदेश।

एक उलझन

October 11, 2021 0

(पहला अंक ) मुझे अफसोस है , कि तुमसे कोई बात कभी कही सुनी होती तो आज ऐसे दौर से न गुजरती । खैर कर ही क्या सकती हूँ ? खिड़की खोलती हूँ कोयले से […]

‘समग्र सामान्य हिन्दी’ : देश के प्रत्येक प्रतियोगी विद्यार्थी के लिए उपयोगी और महत्त्वपूर्ण

October 8, 2021 0

★ समीक्षक– राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अब तक की प्रकाशित सभी सामान्य हिन्दी की पुस्तकों :– ‘नालन्दा सामान्य हिन्दी’, ‘मानक सामान्य हिन्दी’, ‘बृहद् सामान्य हिन्दी’, ‘प्रामाणिक सामान्य हिन्दी’, ‘संजीवनी वस्तुनिष्ठ […]

शैलपुत्री

October 7, 2021 0

हे शैल सुता विनती सुन लोहे वृषभ वाहिनी तुम सुन लोअंतर से तुम्हें बुलाता हूँदुख सन्ताप सारे सुनाता हूँमैं पीड़ा देश की गाता हूँजन जन का दुखड़ा गाता हूँ।जब जब ह्रदय को चोट लगेमैं शरण […]

गांधी-दर्शन

October 3, 2021 0

गांधी के सपनों का भारत आओ मिलकर हम बनाएं।गांव -गांव और ढाणी -ढाणी शिक्षा का दीप जलाएं।। रामराज्य की कल्पना को आओ मिल साकार बनाएं।भारत माँ के वीर सिपाही हम इस गुलशन को महकाएँ।। सत्य […]

गांधी के सपनों का भारत

October 2, 2021 0

गाँवों की समृद्धि के लिए गांधी जी प्रयास किए।कुटीर उद्योग खुलवाकर स्वरोजगार से जोड़ दिए।। खादी के वस्त्रों का चलन,गांधी जी के चरखे से आया।स्वावलम्बन और मेहनत से सबने खादी घर घर बनाया।। अहिंसा को […]

मुश्किल है इस जहाँ में कहीं सादगी मिले

October 1, 2021 0

आओ करें तलाश कहीं ज़िन्दगी मिले।शायद किसी शहर में कोई आदमी मिले।। खंजर कहीं कटार कहीं हाथ में पत्थर।मुश्किल है इस जहाँ में कहीं सादगी मिले।। उजड़े हुए हैं गाँव तो जलते हुए शहर।उठती नज़र […]

गुरु-शिष्य

September 27, 2021 0

गुरु-शिष्य का रिश्ता हैप्रेम भाव से निभता है।गुरु ज्ञानरत्नों का भंडार हैदेकर शिष्य को,दिलवाता समाज मेंप्रतिष्ठा मान-सम्मान है।शिष्य गुरुचरणों मेंजब झुकता है ,तभी तो उसकोज्ञान अमृत फल मिलता है।आओ,गुरुओं का मान करेंमिलकर दिल सेउनका सम्मान […]

सोचता हूँ आज कुछ लिखूँ!

September 23, 2021 0

सोचता हूँ आज कुछ लिखूं,पर क्या लिखूं?दर्द, प्रेम, गरीबी ,बीमारी या भूख !या लिखूं दो वो सपना जिसे मेरे पिता देखते हैं ,मेरे इलाहाबाद में मौजूद होने पर ।या लिख दूँ भूखे कामगारों के शोषण […]

“सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है”

September 23, 2021 0

आज (२३ सितम्बर) ओजस्वी कवि ‘दिनकर’ जी की जन्मतिथि है। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐतिहासिक चेतना के प्रखर वाणीदायक राष्ट्र-कवि को हमारा नमन। राष्ट्रकवि दिनकर ने हिन्दी-काव्य को छायावाद/रहस्यवाद की कुहेलिका (कुहासा) से बाहर […]

यादों की एक कापी

September 15, 2021 0

आखिरी भ्रम थाछटने लगा धुंध परछाईयों सेतुम मेरे साथ हो ! अजीब किनारे से चुप होकरप्रतिक्रिया देने के लिए हर बारएक सीधा सवाल कर जाते हो । आखिरी भ्रम थाये सीधी सरल जिंदगी अभीदो कदम […]

“आज की कविताओं में दर्शन नहीं है”— महादेवी वर्मा

September 12, 2021 0

(महादेवी जी के साथ डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की की गयी एक भेंटवार्त्ता) मैंने महादेवी जी के साथ वर्ष १९८२ में एक मुक्त भेंटवार्त्ता की थी; तब मैं विद्यार्थी और पत्रकार की भूमिका में भी होता […]

महीयसी महादेवी वर्मा की शब्दसत्ता : एक अनुशीलन

September 11, 2021 0

आज (११ सितम्बर) ही की तिथि में महादेवी जी का शरीरान्त हुआ था। — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रयाग-आगमन और क्रॉस्थवेट स्कूल, बाई का बाग़, इलाहाबाद में प्रवेश पाने के बाद महादेवी जी की साहित्य-साधना […]

कविता : फिर से

September 10, 2021 0

फिर से, तुमको जीवन कीमर्यादा के लिएउठना होगा।तुमको मानवता कीउदारता के लिएफिर सेउस ईश्वर के आगेझुकना होगा।तुम्हें असत्य कोहराने के लिएफिर सेसत्य से जुड़ना होगा।तुमको मानवता कीरक्षा के लिएफिर सेहार कर भी जीतना होगा। राजीव […]

आज (९ सितम्बर) भारतेन्दु हरिश्चन्द की जन्मतिथि है

September 9, 2021 0

भारतेन्दु हरिश्चन्द : हिन्दी-भाषा और साहित्य के महागौरव — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज की तारीख़ में समाचारपत्रों और वैद्युत्-माध्यम ने खड़ी बोली की प्रतिष्ठा करनेवाले और साहित्य को नयी क्रान्ति का माध्यम बनानेवाले सारस्वत […]

शिक्षक : ‘वेतन भोगी सोच’ है, शिक्षक-सुचिता व्यर्थ

September 6, 2021 0

ऐसी दुर्गति शिक्षकी, चिन्तन,चिन्ता माथ ।बरसों से है घिस रही, झाड़ू अपने हाथ ।। ‘वेतन भोगी सोच’ है, शिक्षक-सुचिता व्यर्थ ।शिक्षणेत्तर बोझ ने, कर दिया बेड़ा गर्क ।। दौड़ा-दौड़ा फिर रहा, निपटाऊ हर वर्क।हाय शिक्षकी […]

सलामे इश्क़ के नाम कहो! बग़ावत लिख दूँ

September 5, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ख़ता क़ुबूल हो तो कहो! नफ़ासत लिख दूँ,पयामे इश्क़ के नाम इक वरासत लिख दूँ।न झुकाओ निगाहें चिलमन उठाकर आज,सलामे इश्क़ के नाम कहो! बग़ावत लिख दूँ।बला हो, हूर हो […]

तनहाई की अँगड़ाई दे दो तो कोई बात बने

September 5, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे होठों का रंग चुरा लो तो कोई बात बने,तनहाई की अँगड़ाई दे दो तो कोई बात बने।कानेमलाहत१ हो तो बदन को शराफ़त सिखलाओ,ख़ुशअक्ख़लाक़२ पैरहन३ ले लो तो कोई बात […]

“डंके की चोट पर”!

August 31, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज एक–हमारी फ़क़ीरी तुझसे बहुत जुदा है प्यारे!ख़ुद को फ़क़ीर बना, पाप का महल बनाता?दो–ग़रीब की कुटिया ग़र उजाड़ेगा, जल जायेगा बद्दुआ से उसकी।तेरे सिरहाने-पैताने किराये के लोग रोनेवाले होंगे।तीन–अपने हक़ […]

अभिव्यक्ति के दंश

August 31, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कृष्ण-कृष्ण हैं रट रहे, कर्महीन जो लोग।पापकर्म में रत रहे, मौन दिखे संयोग!दो–अनाचार है पक रहा, कदाचार के धाम।पापी छक्-छक् चूसते, मानो फल हो आम।।तीन–धरा-धाम में दिख रहे, बढ़कर एक […]

अंजु चन्द्रामल की अभिव्यक्ति

August 29, 2021 0

सुनो!तुम्हें देने के लिए प्यार नहीं बो रही मैं,कहीं सींच-सींच करपागलपन में सड़ा दिया तो?मुहब्बत में हिलोरे लेती बेल भी नहीं लगाऊँगी,कहीं सहारा देने, बाँध-बाँध के टाँकने कीबंदिशों में घुट के ग़र मर गयी ‘मुहब्बत’ […]

“किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्रभर फिर भी, ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी”– फ़िराक़

August 28, 2021 0

◆ आज (२८ अगस्त) फ़िराक़ गोरखपुरी की १२५ वीं जन्मतिथि है। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय फ़िराक़ एक फक्कड़, किन्तु ख़ुद्दार शख़्सीयत (‘शख़्सियत’ अशुद्ध शब्द है।) का नाम है। पाँव से सिर तक की उनकी […]

आज (२८ अगस्त) फ़िराक़ गोरखपुरी की १२५वीं जन्मतिथि है

August 28, 2021 0

“जोबन छलकाती उठी चंचल नार, राधा गोकुल में जैसे खेले होली”– फ़िराक़ एक ख़ूबसूरत एहसास का नाम है, फ़िराक़। ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई के साथ-साथ, समालोचना और इतिहास पर भी क़लम चलानेवाले रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी […]

कविता : मेरे ख़ुदा

August 27, 2021 0

मैं फकीर हूँ,तेरे दर का खुदामेरी आजमाइश न कर।तू पीर है मेरा,मेरे खुदामेरी जग हंसाई न कर।मैं कमजोर लाचार हूँ,मेरे खुदामेरा तू हम राही बन।मैं अनजान हूँ,तेरी इस कायनात सेमेरे खुदातू मेरा हमराज बन।मैं मुरीद […]

जीवन क्या है ? एक बहती हुई नदी

August 26, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवन क्या है ?एक बहती हुई नदी है ।कंकरीले और पथरीले रास्तोंपर बहती हुई,सर्दी और गर्मी सहती हुई।जैसे नदी चलना नहीं छोड़ती है ऐसे ही ये जिन्दगी है ।अनेक रूकावटें और अनेक […]

Poem : Story of Life

August 24, 2021 0

Raghavendra Kr. Tripathi ‘Raghav’ what is life ?It is like a flowing river.Flowing on narrow and rocky paths. Enduring winter and summer.Life is al like a river.You know river does not stopIt is always flowing.Bear […]

भाषाकार फादर कामिल बुल्के की स्मृति में ‘सर्जनपीठ’ का राष्ट्रीय आयोजन

August 17, 2021 0

● फ़ादर कामिल बुल्के, जिनका सम्पूर्ण जीवन ‘हिन्दीमय’ बना रहा! ‘मुक्तिदाता’, ‘नया विधान’, नील पक्षी’, ‘अँगरेज़ी-हिन्दीकोश’ आदिक कृतियों के प्रणेता फ़ादर कामिल बुल्के की आज (१७ अगस्त) निधनतिथि है और उनकी पुण्यस्मृति में ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज […]

मातृभूमि प्राणों से प्यारी

August 14, 2021 0

आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक मातृभूमि प्राणों से प्यारी,स्वतंत्रता अपनी अनमोल ।वीर, आबाल, वृद्ध और नारीदेशभक्त सदा शत्रु पर भारी।प्राणों की आहुति दे-दे कर ,अनगिनत चुकाया इसका मोल।खुशी भरा यह दिवस अनोखाआओ मिलकर ध्वज फहराएं।‘राष्ट्र की उन्नति’ […]

जय भारत-जय भारत

August 14, 2021 0

आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक धरती और गगन कहे,सुख शांति चहुँ ओर रहेजय भारत-जय भारत।सद्भाव के बीज उगे ,उन्नति का आशा जगे,खुशियों की फ़सल लगे ,तन-मन झूमे और कहेजय भारत-जय भारत।लहराता हुआ ध्वज कहे,वीरभूमि की रज कहे,जय […]

लौट आना

August 13, 2021 0

वापिस लौट आनामेरे तरकश सेब्रह्मास्त्र छूटने से पहले,वापिस लौट आनामेरे द्वारा प्रकृति के नियमतोड़ने से पहले,वापिस लौट आनामेरा किसी और सेदिल लगाने से पहले,वापिस लौट आनामेरी आंखों में अश्कसूखने से पहले,वापिस लौट आनामेरी रूह को […]

रहस्य-रोमांच का अनुभव कराता रहा ‘टोक्यो-ओलिम्पिक– २०२०’

August 11, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(भाषाविज्ञानी, समीक्षक तथा ‘ओलिम्पिक एन्साइक्लोपीडिया’ के लेखक) २३ जुलाई, २०२१ ई० को वर्ष २०२० के ओलिम्पिक के रूप में जापान की राजधानी ‘टोक्यो’ में ग्रीष्मकालीन ओलिम्पिक का उद्घाटन हुआ था। यों […]

वक़्त-बेवक़्त

August 9, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय स्याह परछाइयाँ :–वक़्त-बेवक़्त कीचुपके से दाख़िल होती हैं,मन के अँधेरे घर में।घर के भार सेलहूलुहान नीवँकब दम तोड़ देगीइसे वक़्त भी नहीं जानता;क्योंकि वह जी रहा होता है,अपना वर्तमान।वह सहला […]

‘ओबीसी’ की आड़ में, बँटने लगा समाज

August 9, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बीज घृणा का हर तरफ़, उगने लगी खटास।गदहपचीसी हर जगह, दूर हो रही आस।।गोरखधन्धा दिख रहा, खेल निराले खेल।बाहर से दुश्मन लगें, अन्दर-अन्दर मेल।।गुण्डों का अब राज है, उस पर […]

जागो-जागो देश! अब, जमके करो प्रहार

August 9, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय गंगाजल ले घूमता, अपराधी के देश।साधु बनाता संग ला, बना-बना के वेश।।दानव-जैसा दिख रहा, देव बहुत हैं दूर।शैतानों-सा बोलता, दिखता मानो सूर।।अधिनायक बन घूमता, मन से दिखता हीन।आतंकी का रूप […]

प्रेमचन्द की कथा में सामाजिक यथार्थ : मत और सम्मत

August 1, 2021 0

प्रेमचंद के उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ आज भी जीवित है ★डॉ० प्रदीप चित्रांशी (साहित्यकार, प्रयागराज) मुंशी प्रेमचंद ने बहुत सी कहानियाँ,उपन्यास लिखे जो आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि उन्होंने वास्तविक परिस्थितियों का वर्णन जितनी वास्तविकता […]

प्रेमचन्द के बाद धीमा होता कहानी का सफ़र, क्यों?

July 31, 2021 0

आज (३१ जुलाई) प्रेमचन्द की जन्मतिथि है। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कथा-विषय पर जब संवाद-परिसंवाद होता है तब समीक्षक पारदर्शिता के साथ ‘प्रेमचन्द’ से आगे बढ़ नहीं पाता है। यह अलग बात है कि […]

सत्य, निष्ठा और न्याय मेरा गाँव मेरा देश

July 31, 2021 0

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती (31 जुलाई, 1880 लमही, काशी) सत्य, निष्ठा और न्याय के पथ पर,मैं जीवन भर चलती जाऊँ।सादा जीवन हो उच्च विचार,मैं महापुरुषों से ऐसी सीख लाऊँ। आदर्श यथार्थ भरी […]

अभिजीत मिश्र की कविताएँ

July 30, 2021 0

1. वसुधा पर मानव कुछ सीखा है हमने जग में, वसुधा के इस आँचल सेपौरुष की गाथा को सुनता आजीवन मानव व्याकुल मन से। सुरसरि के अविरल प्रवाह को बाँध दिया तब शंभू नेस्थान जटा […]

कविता : कुछ इस तरह…

July 30, 2021 0

हम बिखरेंगेकुछ इस तरहकि तुम संभाल भी न पाओगे।हम टूटेंगेकुछ इस तरहतुम जोड़ भी न पाओगे।हम लिखेंगेकुछ इस तरहकि तुम समझ भी न पाओगे।हम सुनाएंगे दास्तांकुछ इस तरहकि तुम कुछ कह कर भीन कह पाओगे।हम […]

सगर्व-सहर्ष घोषणा–

July 30, 2021 0

मेरी बहुप्रतीक्षित पाण्डुलिपि ‘नारीचरितमानस’ (समग्र नारी-दर्शन) अब अन्तिम रूप ग्रहण कर चुकी है। एक बार दृष्टि-अनुलेपन करूँगा, तदनन्तर उसे प्रकाशन-प्रक्रियाओं के साथ सम्बद्ध करने पर विचार करूँगा। इसमें भावपक्ष, हृदयपक्ष, विचारपक्ष :– आदर्श और यथार्थ […]

डॉ० सपना दलवी की कविता— माँ

July 29, 2021 0

माँ के आँचल में जो सुकून है वो सुकून कहीं और कहाँ? सुना था मैंने, उसने सुनी जब मेरी पहली किलकारी तो आँखें उसकी नम सी हुई थीं पाकर मुझे अपनी गोद में उसने तो […]

बँटवारे का दंश!

July 29, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय विश्वास की डोर थामेसरक रहा थालक्ष्य की ओर—तन-मन मेंआशंकाओं की झंझावात समेटेडोर की मध्य-बिन्दु के स्पर्श की अनुभूतिबाहर से भीतर तकसिहरन भरती जा रही थी।अचानक…. सहसा!विश्वास की कुटिल चालेंचलायमान हो उठीं।विस्फारित […]

चिथड़ा-चिथड़ा मन

July 23, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–माना तू सरकार है, सीमा अपनी जान।मत छेड़ तू हम सबको, खोयेगा तू मान।।दो–मन आन्दोलित है यहाँ, रोक सके तो रोक।ज्वाला से मत खेल तू! बोल रहा है लोक।।तीन–जन-जन जागो […]

‘ओलिम्पिक एन्साइक्लोपीडिया’ आज भी प्रासंगिक है

July 22, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ : जैसा कि हमारे पाठकों को ध्यान होगा कि आज (२३ जुलाई) से विश्व की सबसे बड़ी खेल-प्रतियोगिता ‘ओलिम्पिक’ का समारम्भ हो चुका है। यह ओलिम्पिक चार वर्षों के अन्तराल पर […]

वक़्त को छेड़ना नादानी है

July 22, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शाम ढली दीये को जलने दो,नींद में सपनों को पलने दो।बढ़ती है प्यास तो बढ़ जायेबर्फ़ को पानी में गलने दो।दम तोड़ ले ख़्वाहिश कहीं,आदत है, नींद में चलने दो।सरे-बाज़ार […]

हे प्रकृति! अब करो उद्धार

July 22, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय समय आया, कर विचार।देश की जनता है लाचार।समय-बाण से बेधो इतना,राजनीति बदले आचार।खद्दर शर्म से पानी-पानी,नहीं कहीं सुख का आधार।महँगाई से त्रस्त है जनता,सरकारें धरती पर भार।नेताओं से त्रस्त है […]

विषय विसंगति से भरा, मन लेता है भेद

July 20, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मायावी संसार में, भाँति-भाँति के लोग।पाप-घड़ा है भर रहा, यहीं करोगे भोग।।दो–जीवन रस की गागरी, कर लो छककर पान।भाव-समादर है यहीं, मिलता भी अपमान।।तीन–यहाँ-वहाँ के भेद से, मन में होता […]

बालकृष्ण भट्ट हिन्दी-साहित्य के प्रथम व्यावहारिक आलोचक थे— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ

July 20, 2021 0

स्वनामधन्य निबन्धकार और पत्रकार पं० बालकृष्ण भट्ट इलाहाबाद में जन्मे, पले, बढ़े तथा अन्तिम श्वास भी यहीं लिया। तब तक वे साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्रों में अपना महत् प्रभाव स्थापित कर चुके थे। भाषाविज्ञानी […]

घायल होती मुसकान

July 17, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भूख से बिलबिलाती आँतेंचीथड़ों में लिपटी-चिपटी-सिमटीअपनी पथराई आँखें पालतीटुकुर-टुकुर ताकतीआँखों से झपटने की तैयारी करतीमेले-झमेले की गवाह बनती।आस-विश्वास की फटही झोली लियेतमन्नाओं-अर्मानों की लाश ढोतीफफोलों से सजी हथेलियों कीरेखागणित पढ़तेहोठों […]

कुछ शे’र सुनाता हूँ, जो मुझसे मुख़ातिब हैं

July 17, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–तुम बहार बनकर छाते रहो,ख़ुद को पतझर मुबारक करता हूँ।दो–ले गये सब यहाँ से रजनीगन्धा,मेरे हक़ में नागफनी छोड़ आये हैं।तीन–आँखों में आँखें डाल बातें सीखो,मुखौटा हटाओ तो कोई बात […]

मस्ती में इठलाता झरना

July 10, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कितना प्यारा लगता झरना,पर्वत से जब झरता झरना!कलकल-छलछल गीत सुनाकर,सबका मन है हरता झरना।उठता-गिरता, गिरता-उठता,कष्ट है कितना सहता झरना!आज गिरा है कल तो उठेगा,ठोकर खाकर बढ़ता झरना।कष्टों से है क्या […]

मनहर ताल लगाये आम

July 10, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय फल-राजा कहलाता आम, मीठा और रसीला आम।दिखते माह जुलाई में हैं, डाल-डाल गदराये आम।लँगड़ा, चौसा और दशहरी, सिन्दूरी, मलदहिया आम।तरह-तरह के नाम हैं उसके, फजली, चम्पा, देसी आम।कहीं है हापुस, […]

आवर्त्तन-दरार

July 3, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–महकी अमराईचहका यौवनआग लगी पानी में!दो–आँखों-की खटासकोई आस-न-पासरिश्ते मुसकरा उठे।तीन–काग़ज़ की नावबारिश की छाँवसूरज सघन चिकित्साकक्ष में।चार–वर्तनी अकेलीसौन्दर्य-बोध लजीलाअभिव्यक्ति दरकने लगी।पाँच–प्रतीक सजीलाबिम्ब रंगीलाअभिव्यक्ति बहक पड़ी।(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, […]

अभिव्यक्ति के दंश

July 2, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (एक)भाषा बनावटीशैली मिलावटीप्रस्तुति हस्पताल में।(दो)भाषा बदरंगशैली मलंगप्रस्तुति मधुशाला में।(तीन)कथ्य निहत्थातथ्य बेसुरे“हँसुए के ब्याह में खुरपे का गीत”।(चार)भयंकर आँधी-तूफ़ानकहीं कोई अप्रिय घटना नहींअसहयोग आन्दोलन है।पाँचबित्ताभर ज़मीन नहींनाम ‘पृथ्वीनाथ’घोटाला-ही-घोटाला! (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य […]

अपनी ‘जन्मतिथि’ के अवसर पर स्वयंं को समर्पित पंक्तियाँ

July 1, 2021 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज कैलेण्डर में टँकी तिथिएक जुलाई,आँखों-में-आँखें डालतीन सौ पैंसठ दिनों की दैनन्दिनी उघारे,सिद्धहस्त ज्योतिषी-सदृश अतीत-वाचन कर रही है।आषाढ़-मास के उमड़ते-घुमड़ते बादल देख,कवि-कलाधर, कवि-कुसुमाकर, कवि-चूड़ामणिकवि-सम्राट कालिदास का‘मेघदूत’ जीवन्त हो उठता है।पावस-ऋतु […]

एक अभिव्यक्ति

June 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यक़ीं नहीं आताख़ुद को देख रहा हूँ।अतीत, वर्तमान तथा भविष्य के गलियारों मेंढूँढ़ रहा हूँअपने न होकर भी हो जाने के साक्ष्य कोपर हर बारख़ुद को ख़ुद सेठगा हुआ पा […]

सौगंद अकबरियन की नयी पुस्तक “लवलेस लव (Loveless Love)”

June 27, 2021 0

अंजलि तिवारी : हमारा यह हीरोज़ इग्नोटम एक ऐसा मंच है जिस पर प्रतिभाशाली, फेमस-अनफेमस, अनसीन और सारे टैलेंट्स, फ़ील्ड्स के लोग के पीछे के संघर्ष की कहानी को आप सब तक पहुंचाते है । […]

कविता : राजेश पुरोहित विरचित दोहे

June 25, 2021 0

बहते आँसू आँख से, जाने न कोई पीर।जाने वो समझे नहीं, समझे जो गम्भीर।। आँसू टपके नैन से,बहने लगी है धार।पिया मिलन की आस मे,चोट खाई हज़ार।। देख आँसू माई के ,लखन हुए गम्भीर।वन गमन […]

नागफनियों के शहर में रातरानी सा खिलूँगा

June 17, 2021 0

जगन्नाथ शुक्ल ‘जगन’, प्रयागराज तुम मुझे नफ़रत करो मैं नेह तुमको ही करूँगा;नागफनियों के शहर में रातरानी सा खिलूँगा। जो कहो कि मैं तुम्हारेबाँकपन को भूल जाऊँ।शीलता की मूर्ति के,अवहेलना का दोष पाऊँ। यदि तेरे […]

कुचल डालो! इस सियासी चाल को अब

June 13, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आदमीयत का यह रोना हो गया है,देश का किरदार बौना हो गया है।हासिल क्या उन्हें हस्पताल-पार्क से,‘ब्यूटी पार्लर’ कोना-कोना हो गया है।शेर-मानिन्द देश जो गरजता था,अब वह जयचन्दों का छौना […]

इबादत

June 5, 2021 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा, उत्तर प्रदेश हमारे,वक्त का एक खैरियत, इबादत व हाल-चाल । यहाँ तकजिंदगी के बहुत सारे नियम बदलने कोशिश न कर सके ,छोड़ दिये मुहब्बत ,वादे और इबादते । बहुतमुश्किल हुईथोड़ा रुक कर […]

कहानी – “सरहद”

May 29, 2021 0

पायल रॉय, संस्थापक – “शिक्षा एक उज्ज्वल भविष्य की ओर” (युवा समाजसेविका, जबलपुर, म. प्र.) शाम का समय हो चला था। आज बादल कुछ ज्यादा ही साफ दिखाई दे रहे थे और हमेशा की तरह मैं […]

सखी! राह तुम अइसि बतायउ

May 27, 2021 0

सखी, राह तुम अइसि बतायउ ।चलतै गयेन, न मुड़ि कै देखेन,सही बात तुम नाय बतायउ ।आगे मिलो सून चउराहो,कउनिउ राह न हमइ सुझायउ ।सखी, राह तुम कइसि बतायउ ? पुनि प्रति राह भई दुइ डगरी।आठौ […]

आचार्य पं० प्रभात शास्त्री की विद्वत्ता अपराजेय थी– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

May 27, 2021 0

‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ और ‘सर्जनपीठ’ का संयुक्त राष्ट्रीय आयोजन ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ और ‘सर्जनपीठ’ के संयुक्त तत्त्वावधान में कल (२७ मई) प्रयागराज से विद्वान् पं० प्रभात शास्त्री की १०३वीं जन्मतिथि के अवसर पर ‘आचार्य पं० […]

एक ‘अपाहिज़’ दर्द

May 25, 2021 0

एक समीचीन (यथार्थ) अभिव्यक्ति ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उस खूँटी को देख!जो शिथिल-सहमी-सकुची-संत्रस्त;क्रन्दन करती भार ढोती;फफकती-सिसकती;अपनी हथेलियों की लकीरों को बाँचती;आशंका-सिन्धु में डूब और उतरा रही है।विषाक्त होती उसकी काया-छाया सेउसका मौन करता प्रश्नकेवल […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की ‘निबन्ध’ के प्रति अवधारणा

May 24, 2021 0

वस्तुत: निबन्ध-लेखन एक ऐसा कर्म है, जो लेखक को समग्रता की ओर ले जाता है। जिसने निबन्ध-लेखन कर लिया हो, उसे किसी भी विषय को ‘हस्तामलक’ बना लेने की सामर्थ्य अर्जित हो जाती है। निबन्ध […]

इंसानियत को खा गयी है, भूख आपकी

May 23, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय घड़ियाली आँसू, न अब बहाइए हुजूर!मन में हमारे क्या है, अब सुनाइए हुजूर!बातें मन की सुनाते हुए, सुला दिये हमें,चेहरा-पे चेहरा, अब न लगाइए हुजूर!तिकड़मी चाल आपकी, सब जान चुके […]

“अहे सुख-दुख के सहचर मौन!”– कविवर पन्त

May 20, 2021 0

● आज (२० मई) कविवर पण्डित सुमित्रानन्दन पन्त की जन्मतिथि है। ★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कल्पना के साथ सुमधुर कोमलता भी पन्त के काव्य में आरम्भ से ही संलक्षित होती है। वे प्रकृति का मातृरूप […]

नीति देश की मनचली, छिनरे हैं सब ओर

May 11, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गंगा में शव बह रहे, केवल दिखता रोष।शासक मद में चूर है, नहीं किसी को होश।।दो–क्रूर बहुत परिवेश है, साधन-सुविधा हीन।जनता ऐसी दिख रही, मानो कोई दीन।।तीन–हम अपने ही देश […]

आचार्य जी ने हिन्दी-भाषा का बहुविध परिष्कार किया था

May 10, 2021 0

आज भाषा-प्रबन्धन के निष्णात हस्ताक्षर आचार्य पण्डित महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की जन्मतिथि (९ मई, १८६४ ई०) है। आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी कवि, आलोचक, निबन्धकार, समर्थ सम्पादक तथा निजी सूझ-बूझ […]

भगवान कैसा होता है …….

May 9, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी : चलो ठीक हैतुम कहते हो तो मान लेता हूंकि मां में भगवान होता है,लेकिन मुझे यह तो बताओकि भगवान कैसा होता है ,मां ने तो कभी आंसू तक नहीं आने दियाफिर यह […]

आवर्त्तन और दरार

May 3, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–आग आग से कह रही, दु:ख में भी है सुख।सुख तो औरों के लिए, बाँध लो गठरी दु:ख।।दो–तिनका-तिनका जोड़कर, महल बनाया एक।आधी घड़ी न सुख मिला, रहने लगे अनेक।।तीन–कष्ट मिटाओ […]

उन्हें औक़ात पर अब लाइए साहिब!

May 1, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उनकी बातों में मत आइए साहिब!उनकी घातों में मत आइए साहिब !हर गोट के मिज़ाज से वाक़िफ़ हैं वे,भूलकर धोखा मत खाइए साहिब!ख़ैरात भी माँगे तो मत दीजिए उन्हें,उन्हें औक़ात […]

यह है ‘जैविक युद्ध’, हाय! लड़ रहा मनुष्य अभागा

May 1, 2021 0

अभी समय है, अभी नहीं कुछ भी बिगड़ा है ।क्रूर-काल कोविड-19, चुप-छुप पास खड़ा है ।सम्भलो स्वयं, सम्भालो अपनों को भी प्यारे,‘जीता वही सिकन्दर’ जिसने विजयी युद्ध लड़ा है।। उसे पूछता कौन, हार कर पीठ […]

आज़ाद क़लम

April 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–चपटी धरती है कहीं, कहीं दिखे है गोल।आँख उठाकर देखिए, सब हैं पोलमपोल।दो–तुलसी औ’ कबीर सूर, सदा हमारे संग।क़लम आज हैं बिक रहे, दिखते नंग-धड़ंग।तीन–शिथिल पड़ी संवेदना, कपट हुई मन-बात।पहचानो! […]

अव्यक्त सत्ता जोड़ लो समष्टि से

April 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हो रहा है जो, जहाँ सो हो रहा।व्यर्थ ढपली, बज रही कर्त्तव्य की,भार भारी लग रहा, सब दिख रहे।गात शिथिल स्पष्ट सब लक्षित हुए,कौन जाने कौन-सा पल क्या रहे!बयार हलकी […]

खेलने की उम्र में फैले हैं हाथ देखो

April 24, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ खेलने की उम्र में फैले हैं हाथ देखो ।कुदरत भी क्या अजब हैइसके कमाल देखो ? तुतलाती भाषा में बच्चे,कितने प्यारे लगते हैं ।शैतानी कर-कर इठलाते,सबसे न्यारे लगते हैं ।जब ये […]

धू-धू जलती है चिता, लावारिस है रूप

April 15, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मातम पसरा हर दिशा, मुखिया दिखता मौन।कितना निर्दय दिख रहा, इसे बताये कौन?दो–लाशों का अम्बार है, चीख़-दहाड़ें रोज़।बेशर्मी है नाच रही, कौन करेगा खोज?तीन–बाप मरा-बेटा मरा, घर-घर छाया शोक।माँ का […]

“जमूरा-जमूरा, जमूरा-जमूरा, जमूरा-जमूरा”

April 15, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जमूरे!बोल ओस्ताद।अबे! कहाँ मर गया तू?यहीं तो हूँ ओस्ताद! तेरे पिच्छू।कोरोना से अब तक लाखों लोग मर चुके हैं।फिर ओस्ताद!अबे हरामख़ोर!तुझे क्यों रखा है?’मन की बात’ सुनाऔर यहाँ बटोरी गयी […]

Awakening and sleep

April 12, 2021 0

★ Acharya Pt Prithvi Nath Pandey On the dense road of AllahabadOld-fashioned sleeping adult,Co-ordinates livelihoods;Amazingly collected and segregatedDemonstrate a civilization of conduct;Interviewing the subconscious,As if far from worldlyA dreamed beauty in a closed ventricleShreya-Preya, with […]

मौसम वाणी बोलता, होंगे अबकी पस्त

April 10, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–आस्तीन के साँप सब, मत जाओ अब पास।कदाचार है दिख रहा, कर दो अबकी साफ़।।दो–कितने चतुर-सुजान हैं, हवाबाज़ी में दक्ष।सच की गरदन दाबकर, पाप का रखते पक्ष।।तीन–पाप घड़ा का भर […]

जो बैठे हैं तेरे साथ, वे बेईमान लिये फिरते हैं

April 9, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेजान हुस्न की, अदा लिये वे फिरते हैं,चश्मे पुरनम की, अदा लिये वे फिरते हैं।कज़ा लौट घर उनके, दस्तक दे आती है,साथ ज़िन्दगी का, सामान लिये वे फिरते हैं।तल्ख़ अन्दाज़ में, […]

चिंतन : मूरख को मूरख कहै, अतिशय मूरख होय

April 2, 2021 0

आज ‘फर्स्ट अप्रैल’- मूरख दिवस है । आज के दिन चतुर लोग किसी को मूर्ख बनाने में आनन्दित होते हैं । मूर्ख बनाये नही जाते, होते ही हैं । मूर्खता साधारण बुद्धिमानो को विकार या […]

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