ग़ज़नी-गोरी मिल गये, लूट रहे अब देश

April 18, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–ध्यान बँटाने के लिए, तरह-तरह की खोज।मन्दिर-मस्जिद लड़ रहे, हर पल हर दिन रोज़।।दो–सत्ता चेरी बन गयी, कुरसी चिपकी देह।रड़ुवा-रड़ुवी संग हैं, माग भरी है रेह।।तीन–ग़ज़नी-गोरी मिल गये, लूट रहे […]

लगे आग चारों दिशा, चादर ले तू तान

April 18, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–धर्म कहे दुनिया जिसे, भटका-भटका ज्ञान।कर्ममार्ग अज्ञात है, अटका-अटका ध्यान।।दो–महँगाई मुरदा हुई, मस्जिद हुई जवान।मन्दिर धन्धा बन गया, काट रहे सब कान।।तीन–बाबा बुल्डोजर बने, चला रहे हैं बाण।कहाँ न्याय-अन्याय है, […]

आँखें जिधर घुमाइए, दिखते हैं सब सूर

April 17, 2022 0

◆ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–सत् संवाद-शून्य है, लुप्त धरा का धाम।कलियुग को हम क्या कहें, जहाँ फँसे हैं राम।।दो–राम-नाम की लूट मे, भक्त फँसे हनुमान्।नेत्र घृणा की बन्द कर, सन्मति दे भगवान्।।तीन–भाँज रहे तलवार […]

तेरी इन झील सी आंखों में, जो ये नूर दिखता है

April 16, 2022 0

Pawan Kashyap- तेरी इन झील सी आंखों में, जो ये नूर दिखता है । तेरे चेहरे की मदहोशी में, ये मन चूर दिखता है । कहीं जुल्फों का गिर जाना, कहीं अधरों का खुल जाना […]

मनुष्य देवता 

April 16, 2022 0

सुधेश – ३१४ सरल अपार्टमैन्ट्स , द्वारका , सैक्टर १०,  दिल्ली ११००७५  भारत की जनसंख्या थी जब तैतीस करोड़ तब उतने ही थे देवता आज सवा सौ करोड़ में कितने देवता है ? शायद कुछ […]

आँधी मेँ औँधा पेड़

April 16, 2022 0

सुधेश- पास के बगीचे मेँ एक बूढा पेड आँधी मेँ औँधे मुँह पडा था न माली पास आया न लकडी चोर धूप मेँ सूखा पानी मेँ गला यतीम सा पडा रहा कमबख्त मरने को। महीनोँ […]

पत्थर हो जाऊँ 

April 16, 2022 0

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय)- यदि पत्थर हो जाऊँ और कोई उस पर फूल चढ़ा दे तो पत्थर भी पुजने लगता है वहाँ खड़ा होता है मन्दिर भक्तों की लगती भीड़ […]

अभी रुको

April 16, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा (अध्येता/लेखिका)- उसने कहा बार -बार मृत्यु नहीं होगी जीवन को जोड़ने के लिए पीड़ा देती है मैं चाहता हूँ हर वक्त साथ रहूँ प्रकृति रहने नही देती रूपक में अभी रुको तुम्हे निकट […]

मंज़िल 

April 16, 2022 0

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय )

कविता : चींटी 

April 16, 2022 0

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) ३१४ सरल अपार्टमैन्ट्स , द्वारका , सैक्टर १० – सरकती सरकती चढ़ गई हिमालय कुछ दिनों बाद कोरी चमड़ी में खाज उठी सोचा एवरेस्ट की सैर करूँ […]

गदहे भाई

April 16, 2022 0

Babulal Dahiya- गदहे भाई बड़े खधाई दिन भर जागर प्यारा। मुँह अंधियारे निकर गया ता बहुरा लउटत ब्यारा।। लदी रहय पीठे मा गोनिया ढोबा पथरा ईटा। जहां न ठेलन कय पइठारी अतरिउ खोतरी हीठा।। मालिक […]

अव्यक्त

April 16, 2022 0

अमित द्विवेदी- एक पाषाण सा है मेरा अंतस जब कलम की नोक से तराशता हूँ तो साकार हो जाते है कई अनसुलझे रिश्ते कुछ अनकहे।

बाहर लाखों का मौसम 

April 16, 2022 0

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय)- भीतर ज्वर में तन तपता बाहर कोकिल कूक रही मीठी वाणी भीनी भीनी बयार सरकती कत्थक नर्तकी सी । भाई ज्वर जल्दी उतरो बाहर लाखों का […]

जागर्ति और सुषुप्ति

April 16, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रयागराज के सघन पदातिक पथ परविश्रान्त-क्लान्त शयन करती प्रौढ़ा,आजीविका-साधन से समन्वय-सामंजस्य स्थापित करती;अद्भुत एकान्वित और पार्थक्य केआचरण की सभ्यता प्रदर्शित करती;अवचेतन से साक्षात् करती,मानो सांसारिकता से सुदूरकिसी निभृत निलय में […]

आशीर्वाद की अभिलाषा

April 15, 2022 0

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ (लेखक/कवि, पत्रकार {हिन्दुस्तान} एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ )- गुरु पितु मातु प्रणाम तुम्हें, तुम बिन कौन हमारा है | बतियाने वाले बहुत दोस्त, संकट में कौन सहारा है || हे स्वर्ग के वासी […]

एक गीत होरी का गोदान

April 15, 2022 0

 दिवाकर दत्त त्रिपाठी- होरी का गोदान कभी क्या हो पायेगा ? पाँच पाँच करके हैं बीते साल कई ।चोर उचक्के हुयें हैं मालामाल कई ।खादी पहन के कइयों देश को लूट रहेखादी बुनने वालें हैं […]

सोच रहा हूँ एक गीत लिखूं

April 15, 2022 0

पिण्टू कुमार पाल- सोच रहा हूंँ एक गीत लिखूं, मेरे मन का मीत लिखूं, या तेरे मन की प्रीति लिखूं, प्रकृति का सौन्दर्य लिखूं, या विधवा के मन की व्यथा लिखूं, कहाँ हैं आप ? […]

चिठ्ठियाँ तुम्हारे नाम की

April 15, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा- तुम्हें….!!कभी-कभी चिठ्ठियाँ लिखाकरुँगी । चिठ्ठियाँ तुम्हारे नाम की पता मेरे घर का ही होगापढ़कर खुश तुम होना कुशल मेरे परिजन का ही होगा ।सिहर जायेगा हृदय…….ये जानकर , तुम्हारे द्वार परदिया आज भी जलता […]

कहाँ हैं आप ?

April 15, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा- बात कुछ अटपटा सा लगा होगालेकिन बात शुरू हुई,कहा हैं आप ? शायद मन झल्ला गया होगानिःसन्देह दोनों ही !आखिर ढाई शब्द के प्रश्न का उत्तर मिलाक्यों ? आशीर्वाद की अभिलाषा मौन एक […]

इश्क़ की बातें अक्सर महँगी पड़ती हैं

April 15, 2022 0

इश्क़ की रातेंऔर इश्क़ की बातेंअक्सर महँगी पड़ती है। ज्यादा समझदारी औरलगी हुई इश्क़ बीमारीअक्सर महँगी पड़ती है। गैरों के साथ यारी औरअपनों के साथ गद्दारीअक्सर महंगी पड़ती है। जरूरत से ज्यादा समझदारीऔर गैरों से […]

कविता : मृगमरीचिका

April 14, 2022 0

राश दादा राश (दार्शनिक/साहित्यकार)- जमीं से उठता वो ;जो आसमाँ नजर आता है ये सही नहीं वो आशियाँ बनाता है बलुआई रेत के संशय सुखद लुभाए ,, ,, मृगमरीचिका जो टूटे धैर्य का बन्धन करूँ […]

गजल : प्रेम की जानकी का हरण हो गया

April 14, 2022 0

दिवाकर दत्त त्रिपाठी- शुष्क मरुभूमि अंतःकरण हो गया । दर्द का देख फिर अवतरण हो गया । भावना का जटायू हताहत हुआ, प्रेम की जानकी का हरण हो गया । कुछ नये पंथ थे ,पर […]

गीत- कलम-कबूतर

April 14, 2022 0

राश दादा राश, बंगालुरू ये कलम है मेरी शोख ए अदा कबूतर बनकर उड जाती । हर छत पर जा दाना लाती कभी रात अंधेरे खो जाती ।  कभी गुटुर गुटुर करती चलती कभी बडे […]

कविता – स्त्री

April 14, 2022 0

डॉ. आकांक्षा मिश्रा-   एक स्त्री आधी से ज्यादा दूरी अकेले तय करती हैं , तुम्हारे सारे अधिकारों को कर्तव्य मानकर सफर जारी करती हुई तुम्हें मुक्त कर देती हैं मुड़कर मत देखो , अधूरी रहेगी […]

कविता : प्रेम की अनुभूति

April 14, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा, बस्ती- प्रेम की बारिश में ख्वाहिशों का समन्दर शब्दों के बन्धनों में बंधे हुए अब यही प्रेम मेरा समीकरण है जहां मेरा प्रेम ही मुझसे लिखवाता हैं तुम कहते हो कि प्रेम नहीं अभी […]

बयाँदारी हमारी

April 14, 2022 0

राश दादा राश (बंगालुरू)- कायस्थ* हूँ कागजी कारोबार है मेरा स्याही से रिश्ता और कलम यार है मेरा नब्ज ना टटोलना यारों ,मेरे जिस्म का मयखाने की बस्तियां शराबी टोलियाँ मेरे धमनियों मे प्रवाहित रक्त […]

राम! उत्तर दो

April 13, 2022 0

★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय राम!तुम पैदा क्यों हुए?तुम तो क्रय-विक्रय के लिएमात्र एक वस्तु-सदृश हो चुके हो।तुम एक ऐसा विज्ञापन हो,जिसे सीने पर साटकर उन्मादी भीड़हिंसा का जुलूस निकाल रही है।तुम्हारे नाम के रहस्य से […]

देश के युवा साथियों के नाम एक कविता

April 13, 2022 0

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ –लखनऊ-हरदोई राजमार्ग, टावर प्लाट, सुन्नी, हरदोई (उ॰प्र॰) युवा साथियों जोश मे आओ, अपने देश की शान को | विश्व गुरु भारत भूमि के, मिलके बढ़ाओ मान को || केवल अपने तक सीमित रहना, […]

मन बहुत साफ-सुथरा है, इसमे अच्छी बातों को बसाओ

April 12, 2022 0

जीवन बहुत छोटा है,इसे खुशी से बिताओ।क्रोध बहुत खराब है,उसे हमेशा दबाकर रखो।आंखें बहुत नशीली है,इन से आंसू मत बहाओ।होंठ बहुत खूबसूरत हैं,इनकी मुस्कुराते हुए शान बढ़ाओ।दिल में बहुत कुछ छुपाया है,इसे छुपाओ नहीं जताओ।मन […]

हकीक़त

April 11, 2022 0

दास्तां चलती रहीएक तरफ ,थोड़ी सी नादानियां भरीएक तरफ सब्र का तालीमएक तरफ हुक्म की पेशकसीथोड़ी रहमतें भी होदिलों में रंजिशें न बचेथोड़ी अदायगी रहे । आकांक्षा मिश्रा, गोण्डा

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन की सारस्वत यात्रा बेजोड़ रही है

April 8, 2022 0

राहुल सांकृत्यायन क्रान्तिकारी व्यक्तित्व के स्वामी थे ● विभूति मिश्र– समारोह-अध्यक्ष(प्रधानमन्त्री, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज, उ० प्र०)•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• “छत्तीस भाषाओं के जानकार राहुल सांकृत्यायन ने भोजपुरी बोली मे भी एक विशेष कृति का प्रणयन किया है, […]

पथिक

April 8, 2022 0

पथिक हो?फिर विराम क्यों ?चलना तेरा काम हैफिर आराम क्यों? पथिक हो?फिर पथ पर पड़ेकंकरओं सेतुमको भय क्यों? पथिक हो?फिर पथ परचलने से तुम कोथकावट क्यों? पथिक हो?फिर हार जाने केडर से तुम कोघबराहट क्यों? […]

थू-थू होखे अब लागल तहार सगरी

April 6, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय धीके लागल ए बबुआ! तहार नगरी,देख छलकत बा कइसे हमार गगरी।ए बिधाता के रचना जियान कइल तू,हेने अइह मत, पकड़ होने के डगरी।एही करनिया से करिखा पोताइ लेहल,सोचबो करिह ना […]

धूप-दर्शन

April 5, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–पुरवइया हलकान है, पछुआ करे न बात।घूँघट दिखती साँझ है, सूरज मारे लात।।दो–लू चलती ज्यों आग है, आँख उठे यों पीर।ऋतु कोलाहल यों पड़े, दहक रहा ज्यों तीर।तीन–मन तो बहुत […]

मैं एक गधा आवारा हूँ

April 1, 2022 0

सब यही सुना कर कहते हैं,मैं एक गधा आवारा हूँ।मानवता जिनमें होती है,बस उसी प्यार का मारा हूँ।। सबकी अपनी दुनिया होती,मैं भी अपने में जीता हूँ।ढोता हूँ जग का भार,और कटुताओं को चुप पीता […]

श्री सिद्धिविनायक स्तुति

April 1, 2022 0

हे ऋद्धि सिद्धि के ममदातातुमही हो मेरे भाग्य विधातापूर्ण करो प्रभुजी सब काजाॐ गं गं गं गणपति-गणेशाभक्त तेरा, पड़ा घने-क्लेशातुम्हीं आन दूर करो द्वेषाॐ कं कं कं कालिके-नंदनकरूं गौरी – सुत स्नेह वंदनभरो ह्रदय मेरे […]

परिचर्चा : निर्गुण काव्य परम्परा के संवाहक संत रैदास

March 29, 2022 0

दिनांक 18 फरवरी 2022 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित शुक्रवारीय परिचर्चा ऑनलाइन मो में सम्पन्न हुई थी । परिचर्चा का विषय “निर्गुण काव्य परम्परा के संवाहक संत रैदास ” लीक से हटकर […]

कैप्टन अनुज नैय्यर की कहानी, उनकी माँ मीना नैय्यर की जुबानी : “द टाइगर ऑफ़ द्रास”

March 29, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’— कारगिल युद्ध के अमर नायकों मे से एक नायक कैप्टन अनुज नैय्यर आपको याद हैं! टाइगर हिल की सोलह हजार फ़ीट ऊँची पश्चिमी चोटी प्वाइंट 4875 (जिसे पिंपल-टू भी कहा जाता […]

मत भूलो!

March 28, 2022 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरी आँखों के सामने एके-४७ हैउसे देख-देखकरकेवल ख़याली पुलाव पका-पकाकर रह जाता हूँ।सामने मेरा घर और परिवार वर्ज्य दीवार की भाँतिसीना तानकर खड़ा दिखता है।बेशक, बँधी मुट्ठियाँ हैं।दायित्व का बन्धनमुट्ठियों से […]

इन वादियों में

March 27, 2022 0

जग की पीड़ा ,पीड़ा में तुमको पायाइस दुनिया की लय मेंसब कुछ खोकरयादों की छुई मुई सी धूप बनबिखर रही जग में प्रांतर के कोने मेंछाया की सुखद रूप मेंकल तुमको पाया ,आजतुम्हारी यादों कोइस […]

माँ जगदंबे काली

March 25, 2022 0

रक्षा करो माँ जगदंबे कालीरक्षा करो माँ जगदंबे काली…… तुम हो दुर्गा तुम ही कालीकरती हो तुम अपने बल सेसारे जगत की रखवालीमेरी भी रक्षा करो माँ जगदंबे काली।रक्षा करो माँ जगदंबे काली…… तुम हो […]

क्यों चच्चा-बोल बच्चा?– तीन

March 24, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बच्चा– चच्चा!चच्चा– बोल बच्चा?बच्चा– चच्चा! अब तो अपनी रेखा की पाँचों अँगुरी घी मे है?चच्चा– वह कैसे?बच्चा– बुल्डोजर बाबा की सरकार बनने जा रही है। चुनाव मे सभी सभी छात्राओं […]

क्यों चच्चा-बोल बच्चा?– दो

March 23, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बच्चा– चच्चा! एक बात बताओ?चच्चा– बोल बच्चा?बच्चा– कल आप और चच्ची को आपके दोनो बेटे खरी-खोटी सुना रहे थे।चच्चा– तो क्या हुआ?बच्चा– वे तो यह भी कह रहे थे– घर […]

क्यों चच्चा-बोल बच्चा?

March 22, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बच्चा– चच्चा! महँगाई देख रहे हो?चच्चा– हाँ बच्चा।बच्चा– तो?चच्चा– गुड न्यूज़।बच्चा– वह क्या?चच्चा– बच्चा! उपाय है।बच्चा– वह क्या?चच्चा– रात मे सोते समय तकिया के नीचे मोदी बाबा की फोटू रख […]

फ़िल्म समीक्षा : सच का एहसास कराने में कामयाब है “द कश्मीर फ़ाइल्स”

March 22, 2022 0

“द कश्मीर फ़ाइल्स” अच्छी या बुरी की बहस से परे मैं एक ज़रूरी फ़िल्म मानता हूँ इसे : सन्त समीर फ़िल्में कम ही देख पाता हूँ, पर कुछ दिनों में इसकी चर्चा इतनी बार सुनी […]

समय की मुसकराहट

March 20, 2022 0

★ बिम्ब-विधान और प्रतीक-योजना का अनुशीलन करें। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आजमहुआटपकना भूल-सा गया है।फुनगी पर बैठी गौरैयाचहकना भूल-सी गयी है।तितलीपंखों को सिमटायेसशंक नेत्रों सेकुछ ढूँढ़-सी रही है।कोटर से झाँकता उल्लूबूढ़े अजगर की पीठ […]

धन्यवाद प्रकृति इतना देने के लिए

March 20, 2022 0

डॉ.अन्नपूर्णा सिसोदिया ‘अमन’- विद्यालय जाते समय आजकल सड़क के दोनों ओर सजे खेतों में गेहूं की बालियों की स्वर्ण लहरियों का मनमोहक दृश्य देख उपजे भाव..धन्यवाद प्रकृति इतना देने के लिए  – फागुनी बयार के […]

कोई फ़र्क नहीं

March 19, 2022 0

मैं कब हारामैं कब जीतामुझे इससे कोई फर्क नहीं। कौन अपनाकौन परायामुझे इससे कोई फर्क नहीं। मैं क्यों रोयामैं क्यों हंसामुझे इससे कोई फर्क नहीं। कौन मेराकौन तेरामुझे इससे कोई फर्क नहीं। क्या खोयाक्या पायामुझे […]

बातें-जज़्बे

March 18, 2022 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ताल कितना मिला रहा, छटक रहा हर राग।मिलता उत्तर भी नहीं, खेलूँ कैसे फाग।।देवर-भाभी में कहाँ, भला दिखे अनुराग।बाहर-बाहर प्रेम है, भीतर-भीतर आग।।रस्सी लेकर सब जुटे, बढ़ा-बढ़ाकर बैर।आँखें मन की बन्द […]

आज के प्रमुख समाचार–

March 18, 2022 0

■ लेखक और प्रस्तोता– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ● पाकिस्तान की संसद् मे इमरान ख़ान के विरुद्ध प्रस्तुत किया गया अविश्वास-प्रस्ताव ३४१-८१ से पारित कर दिया गया है। अब इमरान ख़ान दो दिनो के भीतर […]

होली का त्योहार है आया

March 18, 2022 0

होली का त्योहार है आया,खुशियों की बौछार है लाया।फागुन मास आता है ,रंगों का त्योहार लाता है।रंग बिरंगे गुलाल उड़ाए,हर चेहरे पर रंग लगाए।प्यार के रंग से भरी पिचकारी ,एक दूसरे पर बच्चों ने मारी।होलिका […]

बदलते रंग

March 11, 2022 0

बदलते हुए रंगों के साथबदलते हुएअपने लोग देखे हैं।चेहरे पर नकाब ओढ़ेसीने पर वार करतेअपने ही लोग देखे हैं।हरे रंगों जैसीअब लोगों के दिलों मेंहरियाली कहाँ ?अपने ही लोगखंजर फेरह्रदय तल कोबंजर करते देखे हैं।रंगों […]

हिन्दी का बहुविध संवर्द्धन करना हमारा उद्देश्य है– विभूति मिश्र

March 8, 2022 0

‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग’ की ओर से आगामी १२-१३ मार्च को आयोजित किये जानेवाले द्विदिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन की कार्ययोजना के संदर्भ मे ८ मार्च को सम्मेलन के प्रधानमन्त्री-कार्यालय मे एक पत्रकार-वार्त्ता का आयोजन किया गया। […]

Don’t consider daughter as a burden

March 7, 2022 0

Don’t consider daughter as a burdenDaughters are the basis of life.Daughters are the pride of every home,Respect them from the heart.To eradicate infanticide,Girls have to be given the right to live.It’s one’s destiny to have […]

फ्री में किताब छपवाने और उसको अमेजन और फ्लिपकार्ट पर लिस्ट कराने का सुनहरा मौका

March 4, 2022 0

हर लेखक का स्वप्न होता है कि वो अपनी किताब को हाथों में लेकर पढ़ें और उनके पाठकों तक उनकी किताब प्रिंट रूप में पहुचें। भारतीय समाचार-चैनलों की विश्वसनीयता : युक्रेन-रूस-युद्ध के संदर्भ मे लेकिन […]

तेरी महफ़िल में शोर कहाँ ?

March 4, 2022 0

तेरी महफ़िल में शोर कहाँ ?मेरे सिवातेरा कोई यहाँ और कहाँ?लोग कहते हैंतुम हर लफ़्ज़ कोपकड़ लेते हो।फिर तुम्हारी जिंदगी मेंमोहब्बत के पन्नों परइश्क की दास्तां कहाँ?लोग कहते हैंहर आशिक तेरा यहाँ।फिर तेरे चाहने वालों […]

शिवरात्रि

February 28, 2022 0

शिवजी की रात है सुहानी, पर्वतों से जुड़ी है उनकी कहानी। नीलकंठ है उनका नाम, उनके भक्तों में है मेरा नाम। तन मन से निकली आवाज, शिवजी को पाना है मेरा ख्वाब। भक्त इस दिन […]

अविरल धारा

February 28, 2022 0

जीवन के सिन्धु सेतु पर दिखा कई देशों का पहरा। जहाँ, बह गई निजता, मनुष्यता सदा एक सानिध्य की चेष्टा। असंख्य आकांक्षाओं से निकली जीवन की एक सुंदर रेखा। हमने जिसको देखा भावशून्य न ही […]

एहसास करो!

February 24, 2022 0

एहसास करो जरा मेरी कमी ,थोड़ी सी तो महसूस करोगे।एहसास करो जरा मेरी बातें,थोड़ी सी तो याद करोगे।एहसास करो जरा मेरा प्यार,थोड़ा सा तो पछताओगे । एहसास करो जरा मेरी मोहब्बत ,थोड़ी सी तो समझ […]

कविता : युवक

February 22, 2022 0

शिवाजी पटेल, कुरसठ जन्म लेकर जैसे ही इस दुनिया में आता है। माँ-बाप का वह राजा बेटा कहलाता है। दिन पर दिन वह प्यार से बड़ा होता जाता है। बाप के कंधे पर हर जगह […]

फिर से

February 18, 2022 0

खुदा करेतुम्हें भी मोहब्बत होफिर से,किसी और से नहींबस मुझसे । खुदा करेमैं भी खफा हूं तुमसेऔर तुम वफा करोफिर से,किसी और से नहींबस मुझसे। खुदा करेतुम भी दिल लगाओफिर सेकिसी और से नहींबस मुझसे। […]

बेटी को मत समझो भार

February 13, 2022 0

बेटी को मत समझो भार,बेटियां हैं जिंदगी का आधार।बेटियां हैं हर घर की शान,दिल से करो उनका सम्मान।भ्रूण हत्या को मिटाना है,बेटियों को जीने का हक दिलाना है।बेटा होना किसी का भाग्य है ,बेटी होना […]

Bose Sir is the best

February 11, 2022 0

East or West,Bose sir is the best,North or South,Manoj sir is so couth. Up or down,He is BEOS’crown,Left or Right,He is so bright. Sky or the earth,His action spreadth,To the lazy or advance,He gives another […]

मुस्कुराहट की वजह बनो

February 11, 2022 0

मुस्कुराहट की वजह बनोक्यों दर्द की वजह बनते हो ?मोहब्बत की वजह बनोक्यों नफरत की वजह बनते हो ?जीने की वजह बनोक्यों मृत्यु की वजह बनते हो ?निभाने की वजह बनोक्यों बिखरने की वजह बनते […]

‘खेला होबे’ का नया संस्करण– ‘खदेड़ा होबे’ का लोकार्पण आज लखनऊ मे किया गया

February 7, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बंगाल से आकर ममता दीदी का आज (७ फ़रवरी) लखनऊ मे अखिलेश यादव के साथ मुलाक़ात करना, उत्तरप्रदेश की राजनीति मे ‘खेला होबे’ के नये संस्करण ‘खदेड़ा होबे’ की सम्भावना […]

मोहब्बत मरी नहीं, बेवफाई का शिकार हो गयी

February 5, 2022 0

मोहब्बत मरी नहींबेवफाई का शिकार हो गईशिद्दत से निभाने वाले आज भी हैं।यह दुनिया खाली नहींमुफ्त में खिलाने वालों सेसिंह आज भी जिंदा है।थोड़ी सेवा कर गरीबों कीफोटो खिंचवामदद करना एक रिवायत हो गईप्रभु दूर […]

ईहे कहाला भोजपुरी; सुनी सभे

February 4, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अँखिया के कजरा हेराइ गइले सजनी,हाथवा के मेहँदी खियाइ गइले सजनी।अजोरिया मे लौके हर ओरिया अन्हरिया,एहि घरवा दियवा बुताइ गइले सजनी।जोहत रहि गइनी चनरमा के चननिया,एही तरी अँखिया सुखाइ गइले […]

तस्वीर

February 4, 2022 0

मैंने देखा वक्त मेंशाम और सुबह की झलकसुबह मंदिरों की घण्टियों के आवाजशाम सीढ़ियों पर बैठे कुछ करुनानिधानप्रतिबिम्ब सब देव के सबके रचे प्रतिमान पुष्प अर्पित कर चले जब, पांव से लिपट कर मांगे सजल […]

हे ! वाग्वादिनी माँ

February 4, 2022 0

हे ! वाग्वादिनी माँहे ! वाग्वादिनी माँतू हमें ज्ञान देंतू हमें ध्यान दें।भटक रहें हमजीवन पथ परआकर हमें तू अब थाम लें।तू ब्राम्ह की मायातू ही महामायाहम फंसे मोहजालआकर हमें तू अब निकाल लें।तू ज्ञान […]

नेता जी की जय

February 2, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–नेता आतंकी बने, बाँट रहे हैं देश।बोल विषैले बोलते, नक़्ली दिखता वेश।।दो–नेता इनको मत कहो, करते हैं व्यापार।मानवता को खा रहे, दिखें धरा पर भार।।तीन–घृणित कृत्य से युक्त हैं, दुर्गुण […]

कोरोना के काल में खुद को बचाना है

February 2, 2022 0

कोरोना की महामारी है आई,हर जगह हलचल है मचाई।स्कूल कॉलेज बंद करवाएं,बच्चे ऑनलाइन क्लास लगवाएं ।कई लोगों ने अपनी जान गवाई,कोरोना से बचने की रखो तैयारी।तीसरी लहर है आई ,छोटे बच्चों पर पड़ी है भारी।सबको […]

बोलो जय श्री राम

January 31, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–राम-नाम तो आड़ है, काम दिखे बेकाम।बेच रहे हैं देश को, बोलो जय श्री राम।।दो–दिखता नक़्ली काम है, और न अस्ली चाम।ठगते आये देश को, बोलो जय श्री राम।।तीन–मूल विषय […]

एक स्वछन्द अभिव्यक्ति

January 29, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–बनता-मिटता चित्र यहाँ, जीवन बन अभिशाप।मीठे फल सब चख रहे, बनकर के निष्पाप।।दो–भाँति-भाँति-जन हैं यहाँ, चतुर-चोर-चालाक।वाणी कोयल कूकती, दिखते मन से काक।।तीन–मन से दिखते दीन हैं, तन से सुन्दर अंग।चीर […]

ग़ुलामो की बस्ती

January 29, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यहाँ ग़ुलामो की बस्ती हैमारो ठोकरधराशायी कर दो नीवँ को।चाटुकार चमचों की गरदनलम्बी होती जा रही;उठाओ कील और टाँग दो खूँटी पे।ये इन्सानियत की भाषासमझकर भी नहीं समझतेइनकी ज़बाँ खोलोऔर […]

पराजित देह की ‘अनश्वर’ पटकथा

January 29, 2022 0

एक अभिव्यक्ति ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २९ जनवरी, २०२२ ईसवी।)

सन्नाटा

January 28, 2022 0

एक सन्नाटा सा छाने लगा हैअंदर ही अंदर।बहुत कुछ मेरा अंतर्मनकहना चाहता है,मगर पता नहीं क्यों?लपक कर बैठ जाता हैये सन्नाटा जुबान पर।बहुत सी बहती हुई वेदनाएँहृदय तल सेबाहर निकलना चाहती हैं,मगर पता नहीं क्यों?ये […]

कविता : इश्क़

January 27, 2022 0

मैंने उससे इश्क किया,उसने किया किसी और से ।मैंने उसे दिल दिया ,उसने दिया किसी और को ।मैंने उससे प्यार किया ,उसने किया किसी और से।मैंने उससे नजर मिलायी ,उसने मिलायी किसी और से।मैंने उसका […]

इहे ह भोजपुरी बाबू!

January 27, 2022 0

ई हमरा भोजपुरी उपनियास के पहिलका हिसवा के एगो छोटी चुकी अंसवा ह। तिरछोल भौजी — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय “का हो भौजी! घुघुनिया भछत-भछत सेकराहे-सेकराहे फेकरात-फेकरात तिरिछियाइ के मटकी मारत तीरछी पाला कइले केने […]

बन्द हैं जो राज़, उनको अब तो खोलिए

January 26, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय होठों को दे ज़बाँ, अजी! कुछ तो बोलिए,बन्द हैं जो राज़, उनको अब तो खोलिए।बेहोश थे जब आप, बहुत बोल बोले थे,बाहोश अब आप, उन शब्दों को तोलिए।आम खाये नहीं, […]

मेरे कान्हाजी

January 21, 2022 0

मुझे अपना मीत बनाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी सखियों के संग रिझाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी रासिको का रास सिखाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी प्रेम की अनुभूति करवाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी माखन चुराना सिखाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी निर्गुण […]

जी हाँ, मैं प्यार बेचता हूँ

January 17, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आइए जनाब!मैं प्यार बेचता हूँ।किसिम-किसिम का प्यार;तरह-तरह का प्यार;भाँति-भाँति का प्यार;नाना प्रकार का प्यार।विविध प्रकार का प्यार;विभिन्न प्रकार का प्यार।कोटि-कोटि का प्यार :–विभाजित प्यार; कटा प्यार-छँटा प्यार;अलगाऊ प्यार-लगाऊ प्यार;पूर्ण प्यार; […]

मौक़ा मिलते ही, बेलगाम हो लिये

January 17, 2022 0

अर्ज़ किया है ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आँखों-आँखों में, वे सलाम ले लिये,बन्द होठों से मेरे, वे पयाम ले लिये।लब थरथरा गये, मंज़र को देखकर,झुकीं ज्यों नज़रें, वे सलाम ले लिये।होठ खुले, अधखुले, बन्द […]

ऐ ज़िन्दगी! किस मोड़ पे, तूने छोड़ा था उसे

January 16, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय होठ बुदबुदाये, पर कुछ कह न सका, भाव उमड़ाया, पर कुछ बह न सका। विचार फैले इतने, बनके चादर हो गये, सिकोड़े थे बहुत, पर कुछ तह न सका। ज़ख़्म […]

एक शाम

January 15, 2022 0

जिंदगी की एक शामतेरे नाम लिखूंगा।कुछ अनकहे से अल्फाजतेरे नाम लिखूंगा।कुछ बिखरे हुए जज्बाततेरे नाम लिखूंगा।कुछ टूटे हुए अरमानतेरे नाम लिखूंगा।छलकता है जो पानीआंखों में तेरी याद मेंतेरे नाम लिखूंगा।करती है जो हवाएदेख कर तुमको […]

दूसर क पत्तर मा छेद करैं वालन क नून चाटौ

January 15, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वाह!ग़ज़ब की ख़्वाहिश! चड्ढी, ब्रा, लँगोटा मे भी इन महापुरुषों के चित्र चिपका देने चाहिए। यह तब है, जब चुनाव आयोग के द्वारा ‘चुनाव आचार संहिता’ लागू है। आश्चर्य की […]

लोहड़ी है हमारा पवित्र त्योहार

January 12, 2022 0

लोहड़ी है हमारा पवित्र त्योहार,घर-घर मे है खुशियाँ हजार।लोहड़ी है हमको भायी,सबके चेहरे पर खुशियाँ लायी।खुशी-खुशी लोहड़ी मनाते हैं,एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं।नए नए पकवान बनाते हैं,इस त्यौहार को मजेदार बनाते हैं।मूंगफली गजक रेवड़ी […]

बहकावे से दूर रह, तर्पण कर दो नाम

January 12, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–लँगोटी हैं चाट रहे, ले-ले गांधी-नाम।पाँच साल के मोह मे, बन जाये कुछ काम।।दो–शासन आते हाथ मे, फिर गांधी-अपमान।अन्तिम निर्णय कर बढ़ो, रहे न कोई नाम।।तीन–बहकावे से दूर रह, तर्पण […]

शायद मुझसे नहीं!

January 11, 2022 0

वो खुश है पर ,शायद मुझसे नहीं।वह नाराज हैं पर,शायद मुझसे नहीं ।उसे प्यार तो है पर,शायद मुझसे नहीं।वह बातें तो करते हैं पर ,किसी ओर से मुझसे नहीं।वो गुस्सा है पर ,शायद मुझसे नहीं।कौन […]

ऐ मेरे ज़मीर! उठ!

January 8, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय; ८ जनवरी, २०२२ ईसवी।)

कविता : शरणागत

January 7, 2022 0

मैं दीनहीन दुखियारा हूँमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।मैं जन्म-जन्म का मारा हूंमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।मैं हर जगह से हारा हूँमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।रोग शोक […]

नमन उस संघर्ष को

January 6, 2022 0

“लकीर की फ़कीर हूँ मैं, उसका कोई गम नहीं। नहीं धन तो क्या हुआ, इज्ज़त तो मेरी कम नहीं!” यह पंक्तियां हैं सिंधुताई की, जो जीता- जागता प्रमाण हैं जीवन की मुश्किलों से लड़कर हजारों […]

Poem : Welcome New Year

January 1, 2022 0

Two thousand twenty two,Twenty two year .Twenty first century’sWelcome new year. Marigold – flowers,Golden shining,Roses are wildly ,Blooming and laughing . Mine kitchen garden ,A beauteous spot,Bathing in the sun,Never feeling hot. Fruits are delicious […]

अतीत की ओर लौटते मेरे सहयात्री!

December 31, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपने बलिष्ठ कन्धों परतीन सौ पैंसठ दिनों के भारपल-पल लादकरअनवरत-अनथक यात्रा करते-करते,अतीतोन्मुख होते सहयात्री!तुम क्लान्त हो चुके हो;श्रान्त हो चुके हो;विश्रान्ति प्रतीक्षारत है,तुम्हें आगोश मे भरने के लिए;थपकी की ताल परसुमधुर […]

नया साल आया है, ढेरों खुशियाँ लाया है

December 31, 2021 0

नया साल आया है,ढेरों खुशियाँ लाया है।बच्चे बूढे खुश बहुत हैं,उत्साह का मौसम छाया हैं।।भेदभाव मिताएंगे,सबको गले लगाएंगे।ये सन्देश सब तक पहुंचाना हैं,सबको मिलकर रहना सिखाना हैं।।अब तो नये साल का सवेरा होगा,नये साल में […]

अब तो नया सवेरा होगा

December 31, 2021 0

हजारों खुशियां लाया हैनया साल जो आया है।भुला दो सब बीती बातों कोक्योंकि नया वर्ष जो आया है।अब तो नया सवेरा होगाइसमें खुशियों का डेरा होगा।नया साल आया हैबच्चों में धमाल लाया है ।बस आगे […]

नए साल में खुद भी हँसो और रोते हुए को भी हँसाओ

December 31, 2021 0

नए साल की बहुत-बहुत शुभकामना।पुराना साल चला गयानया साल आ गया।नए साल में खुद भी हँसोऔर रोते हुए को भी हँसाओ।नए साल में नए पकवान बनाओखुद भी खाओ औरगरीबों को भी खिलाओ। शबनम छठवीं कक्षा […]

नव वर्ष में कुछ नया कर जायें

December 31, 2021 0

देखो देखो नया साल है आयासुख दुख का पैगाम है लाया।दुख की बातों को भूल जाओखुशी से अब नया साल मनाओ।आगे-आगे कदम बढ़ाते जाओनए साल के साथकुछ नया सीखते जाओ।पुरानी बातों को भूल जाओमंजिल की […]

एक नयी मुस्कान नये वर्ष में पानी है

December 31, 2021 0

आप सब कोनववर्ष की शुभकामनाएं।बीत गया है पुराना वर्षनया वर्ष खुशियां लेकर आए है।ये कठिन जीवन कोसरल बनाने आये है।अब हमपुराने वर्ष को भूल जाएंगे।नए वर्ष मेंनया-नया काम कर जाएंगे।एक नयी मुस्काननए वर्ष में पानी […]

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