मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

कविता : छोटी-छोटी बातों पे

June 26, 2022 0

सुन मेरी लाडली बहना ,ओ मेरी प्यारी बहना ,छोटी – छोटी बातों पे ,धन्यवाद कह ,अपने भाई को शर्मिंदा न कर। सुन मेरी बहना, ओ मेरी लाडली बहनातेरा हक है मुझ पर ,तनिक तू संकोच […]

इहे काहाला ‘ठेठ’ भोजपुरी बोलिया

June 26, 2022 0

बरखारानी के नावे आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के एगो चिट्ठी आ ए हामार सोना के पुतरिया बरखारानी!जीयत रह आ जागतो रह! आ हेने के हाल-चाल ठीके बा। आपन सुनाव। ए घरी केने बाड़ू? आ जान […]

कविता : उड़ने दो

June 24, 2022 0

मत बांधोइन नन्हीं चिड़ियो कोखुले नील गगन मेंउड़ने दो।नन्हे-नन्हे पंखों सेसहसा इनको भी तोउड़ान भरने दो।लड़की हुई तो क्या हुआइनको भी तोअपना नामरोशन करने दो।खुद योनि का भेद करपहला योन शोषणतुम ही करते हो।लड़की-लड़की बोल […]

अभिव्यक्ति का कृष्णपक्ष

June 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रणयपंछी विकल उड़ने के लिए,ताकता हर क्षण गगन की ओर है।किन्तु ममता की करुण विरह-व्यथा,ज्ञानपथ को आज देती मोड़ है।धैर्य की सीमा सबल को तोड़कर,दर्द की लतिका हरी बढ़ने लगी,अर्चना […]

न्याय कहाँ मिलता यहाँ?

June 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–न्याय कहाँ मिलता यहाँ, बड़े-बड़ों का खेल।एड़ी फटती हर जगह, पापी-पापी-मेल।।दो–लज्जा उससे दूर है, लज्जा को भी लाज।सीरत-सूरत इस तरह, कोढ़ी को हो खाज।।तीन–अपना किसको हम कहें, किस पर हो […]

कल तक था जो जगद्गुरु?

June 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कहते ख़ुद को जगद्गुरु, पतित बन गये लोग।कथनी-करनी छेद है, पापकर्म है भोग।।दो–सम्मोहित हैं सब यहाँ, नहीं किसी को होश।दिखते मनबढ़ एक-से, ख़ाली करते कोष।।तीन–क़लम बिकाऊ दिख रहे, बिकते हैं […]

मै और मेरा मौन

June 20, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मै मौन हूँ।तेरा मौन और मेरे भीतर केउमड़ते-घुमड़ते मौन मेएक बहुत अधिक फ़र्क़ है :–तू चुप्पी को पीता रहता हैऔर मै,तुझे पीता रहता हूँ।दोनो के पीने मे फ़र्क़ है :–तू […]

हस्रतभरी निगाहें

June 19, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ★ मिर्ज़ा ग़ालिब ने क्या ख़ूब कहा है :— “दिल को नियाज़े हस्रते दीदार कर चुके, देखा तो हममे ताक़ते दीदार भी नही।’ यक़ीन नहीं आता,ख़ुद को देख रहा हूँ।अतीत, […]

कविता : पिता

June 18, 2022 0

पिता का आशीर्वादहरे दुर्वादल के जैसा ;जिंदगी में कभी अपने को कमजोर न समझना ,थोड़े से में भी खुश रहना। पिता का दुलारशहद के जैसा ;मातृभूमि रक्षा हेतु, धूलि तिलक कर ,वीरपुत्र को रणक्षेत्र में […]

रोज परेशान करता है इश्क

June 18, 2022 0

दुखी हूं बहुत मैंमेरे दिल में दुख है बहुतरोज परेशान करता है इश्कआकर रास्ते में मुझे।चेहरे पर मुस्कान लिएदिल में दर्द लिएघूमती हूँफिर भीसमझ नहीं आतायह इश्क़ रहता है कहां?मैं पसंद नहीं करतीइश्क को फिर […]

उस क़ुद्रत को सलाम, जो जिलाती है ज़िन्दगी

June 18, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेजान सड़क पे गुमनाम, दिखती है ज़िन्दगी,अनजान-सी हक़ीक़त, दिखती है ज़िन्दगी।उस हवा को दुलार, जो मन को सुकून दे,उस धूप को सलाम, जो खिलाती है ज़िन्दगी।सूखे हैं आँसू, तकिये का […]

कवि! हरे-भरे खेतों मे चल

June 18, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कवि! हरे-भरे खेतों मे चल।तू देख चुका शहरी जीवन,वैभव के सब नन्दन-कानन।क्या देखा-क्या पाया तूने,धनिकों के उर का सूनापन?अब उठा क़दम, दोपहर हुआ,उन दु:खियों के आँगन मे चल।कवि! हरे-भरे खेतों […]

कविता : झूठी यारी

June 17, 2022 0

मोहब्बत न सहीनफरत ही किया करो,खुशी न सहीगम ही दिया करो,दिल से न सहीदिमाग से हीसोच लिया करो,अपनापन न सहीपरायपन हीदिखा दिया करो,मुस्कान न सहीगम के आंसू हीदे दिया करो,बातचीत न सहीखामोशी का आलम हीमेरे […]

एक अभिव्यक्ति

June 16, 2022 0

● आचार्य ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–वह वादाशिकन है, पलकों पे बिठाना मत,गर नज़रों में समायी तो पछतायेगी ज़िन्दगी।दो–ज़िन्दगी भीख में मिला नहीं करती प्यारे!मौत के जबड़े से छुड़ा लेने की क़ुव्वत रख!तीन–ठिठक जाओगे तो दूर […]

सोचा था तुमने, बहल जाऊँगा?

June 16, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सोचा था तुमने, पिघल जाऊँगा,सोचा था तुमने, बदल जाऊँगा।शर्तों पर तुमने, थमाया झुनझुना,सोचा था तुमने, बहल जाऊँगा?गिरायी जो बिजली, रही बेअसर,सोचा था तुमने, दहल जाऊँगा?फ़ौलादी सीने मे, राज़ हैं बहुत,सोचा […]

मा! मौन को चीरो

June 15, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कौन-सा अपराध!कैसी गुस्ताख़ी!मै तो था,मात्र मास का एक लोथड़ा।शक़्ल इख़्तियार करने से पहले हीमेरे वुजूद को मिटा डाला?तुम ‘ममत्व’ और ‘अपनत्व’ केअन्तर्द्वन्द्व में उलझी रही;पिता लोक-लज्जा का स्मरण कराते हुए,तुम्हें […]

अब क्या कहूँ तुम्हें?

June 15, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इक हूक-सी उठी है, अब क्या कहूँ तुम्हें?तन-बदन है ज़ख़्मी, अब क्या कहूँ तुम्हें?हर रात मुझसे रूठी, दिन भी उदास रहता,बहके क़दम भी रहते, अब क्या कहूँ तुम्हें?इक छिप-छिपायी बदली, […]

उत्तर दो?

June 13, 2022 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कितना अनर्थ सिद्ध होता है,वर्ज्य लक्ष्मण-रेखा कासीता की भाँतिउल्लंघन करने का परिणाम!किसी दुरात्मन् रावण के हाथों अपहृत होवर्जना के वृत्त में प्रवासी जीवन-यापन का अभ्यास!कितनी मर्माहत करती हैकिसी प्रत्याशित राम कीतीव्र […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

June 13, 2022 0

★ ‘कामायनी’ की काव्य-कमनीयता वस्तुत: आज न तो ‘कामायनी’-सदृश कृती कृतिकार हैं और न ही अनुभव करनेवाले पाठक-वर्ग; क्योंकि कविता के नाम पर ‘हृदयजीविता’ के स्थान पर ‘विचारजीविता’ पाली जा रही है। कविता का उद्गम […]

चाहत दीदार का, शह-मात हो जाने दो

June 12, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आँखों-ही-आँखों में, बात हो जाने दो, बातों-ही-बातों में, अब रात हो जाने दो। बनने-सँवरने लग गये, ख़यालात पुराने, रातों-ही-रातों में, मुलाक़ात हो जाने दो। ज़मानाए दराज़१ जुस्तजू, परायी ही रही, […]

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