ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

कुचल डालो! इस सियासी चाल को अब

June 13, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आदमीयत का यह रोना हो गया है,देश का किरदार बौना हो गया है।हासिल क्या उन्हें हस्पताल-पार्क से,‘ब्यूटी पार्लर’ कोना-कोना हो गया है।शेर-मानिन्द देश जो गरजता था,अब वह जयचन्दों का छौना […]

इबादत

June 5, 2021 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा, उत्तर प्रदेश हमारे,वक्त का एक खैरियत, इबादत व हाल-चाल । यहाँ तकजिंदगी के बहुत सारे नियम बदलने कोशिश न कर सके ,छोड़ दिये मुहब्बत ,वादे और इबादते । बहुतमुश्किल हुईथोड़ा रुक कर […]

कहानी – “सरहद”

May 29, 2021 0

पायल रॉय, संस्थापक – “शिक्षा एक उज्ज्वल भविष्य की ओर” (युवा समाजसेविका, जबलपुर, म. प्र.) शाम का समय हो चला था। आज बादल कुछ ज्यादा ही साफ दिखाई दे रहे थे और हमेशा की तरह मैं […]

सखी! राह तुम अइसि बतायउ

May 27, 2021 0

सखी, राह तुम अइसि बतायउ ।चलतै गयेन, न मुड़ि कै देखेन,सही बात तुम नाय बतायउ ।आगे मिलो सून चउराहो,कउनिउ राह न हमइ सुझायउ ।सखी, राह तुम कइसि बतायउ ? पुनि प्रति राह भई दुइ डगरी।आठौ […]

आचार्य पं० प्रभात शास्त्री की विद्वत्ता अपराजेय थी– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

May 27, 2021 0

‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ और ‘सर्जनपीठ’ का संयुक्त राष्ट्रीय आयोजन ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ और ‘सर्जनपीठ’ के संयुक्त तत्त्वावधान में कल (२७ मई) प्रयागराज से विद्वान् पं० प्रभात शास्त्री की १०३वीं जन्मतिथि के अवसर पर ‘आचार्य पं० […]

एक ‘अपाहिज़’ दर्द

May 25, 2021 0

एक समीचीन (यथार्थ) अभिव्यक्ति ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उस खूँटी को देख!जो शिथिल-सहमी-सकुची-संत्रस्त;क्रन्दन करती भार ढोती;फफकती-सिसकती;अपनी हथेलियों की लकीरों को बाँचती;आशंका-सिन्धु में डूब और उतरा रही है।विषाक्त होती उसकी काया-छाया सेउसका मौन करता प्रश्नकेवल […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की ‘निबन्ध’ के प्रति अवधारणा

May 24, 2021 0

वस्तुत: निबन्ध-लेखन एक ऐसा कर्म है, जो लेखक को समग्रता की ओर ले जाता है। जिसने निबन्ध-लेखन कर लिया हो, उसे किसी भी विषय को ‘हस्तामलक’ बना लेने की सामर्थ्य अर्जित हो जाती है। निबन्ध […]

इंसानियत को खा गयी है, भूख आपकी

May 23, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय घड़ियाली आँसू, न अब बहाइए हुजूर!मन में हमारे क्या है, अब सुनाइए हुजूर!बातें मन की सुनाते हुए, सुला दिये हमें,चेहरा-पे चेहरा, अब न लगाइए हुजूर!तिकड़मी चाल आपकी, सब जान चुके […]

“अहे सुख-दुख के सहचर मौन!”– कविवर पन्त

May 20, 2021 0

● आज (२० मई) कविवर पण्डित सुमित्रानन्दन पन्त की जन्मतिथि है। ★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कल्पना के साथ सुमधुर कोमलता भी पन्त के काव्य में आरम्भ से ही संलक्षित होती है। वे प्रकृति का मातृरूप […]

नीति देश की मनचली, छिनरे हैं सब ओर

May 11, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गंगा में शव बह रहे, केवल दिखता रोष।शासक मद में चूर है, नहीं किसी को होश।।दो–क्रूर बहुत परिवेश है, साधन-सुविधा हीन।जनता ऐसी दिख रही, मानो कोई दीन।।तीन–हम अपने ही देश […]

आचार्य जी ने हिन्दी-भाषा का बहुविध परिष्कार किया था

May 10, 2021 0

आज भाषा-प्रबन्धन के निष्णात हस्ताक्षर आचार्य पण्डित महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की जन्मतिथि (९ मई, १८६४ ई०) है। आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी कवि, आलोचक, निबन्धकार, समर्थ सम्पादक तथा निजी सूझ-बूझ […]

“माँ” मेरी दुनिया

May 9, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी : मां से बढ़कर इस दुनिया में मेरा कोई नहीं ,जब भी मैं रोया तो चुप कराई वहीं ।अपने दिल में छुपा कर हमें रखती थी वो ,लोगों की नजरों से बचाने के […]

भगवान कैसा होता है …….

May 9, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी : चलो ठीक हैतुम कहते हो तो मान लेता हूंकि मां में भगवान होता है,लेकिन मुझे यह तो बताओकि भगवान कैसा होता है ,मां ने तो कभी आंसू तक नहीं आने दियाफिर यह […]

आवर्त्तन और दरार

May 3, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–आग आग से कह रही, दु:ख में भी है सुख।सुख तो औरों के लिए, बाँध लो गठरी दु:ख।।दो–तिनका-तिनका जोड़कर, महल बनाया एक।आधी घड़ी न सुख मिला, रहने लगे अनेक।।तीन–कष्ट मिटाओ […]

उन्हें औक़ात पर अब लाइए साहिब!

May 1, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उनकी बातों में मत आइए साहिब!उनकी घातों में मत आइए साहिब !हर गोट के मिज़ाज से वाक़िफ़ हैं वे,भूलकर धोखा मत खाइए साहिब!ख़ैरात भी माँगे तो मत दीजिए उन्हें,उन्हें औक़ात […]

यह है ‘जैविक युद्ध’, हाय! लड़ रहा मनुष्य अभागा

May 1, 2021 0

अभी समय है, अभी नहीं कुछ भी बिगड़ा है ।क्रूर-काल कोविड-19, चुप-छुप पास खड़ा है ।सम्भलो स्वयं, सम्भालो अपनों को भी प्यारे,‘जीता वही सिकन्दर’ जिसने विजयी युद्ध लड़ा है।। उसे पूछता कौन, हार कर पीठ […]

आज़ाद क़लम

April 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–चपटी धरती है कहीं, कहीं दिखे है गोल।आँख उठाकर देखिए, सब हैं पोलमपोल।दो–तुलसी औ’ कबीर सूर, सदा हमारे संग।क़लम आज हैं बिक रहे, दिखते नंग-धड़ंग।तीन–शिथिल पड़ी संवेदना, कपट हुई मन-बात।पहचानो! […]

अव्यक्त सत्ता जोड़ लो समष्टि से

April 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हो रहा है जो, जहाँ सो हो रहा।व्यर्थ ढपली, बज रही कर्त्तव्य की,भार भारी लग रहा, सब दिख रहे।गात शिथिल स्पष्ट सब लक्षित हुए,कौन जाने कौन-सा पल क्या रहे!बयार हलकी […]

खेलने की उम्र में फैले हैं हाथ देखो

April 24, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ खेलने की उम्र में फैले हैं हाथ देखो ।कुदरत भी क्या अजब हैइसके कमाल देखो ? तुतलाती भाषा में बच्चे,कितने प्यारे लगते हैं ।शैतानी कर-कर इठलाते,सबसे न्यारे लगते हैं ।जब ये […]

धू-धू जलती है चिता, लावारिस है रूप

April 15, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मातम पसरा हर दिशा, मुखिया दिखता मौन।कितना निर्दय दिख रहा, इसे बताये कौन?दो–लाशों का अम्बार है, चीख़-दहाड़ें रोज़।बेशर्मी है नाच रही, कौन करेगा खोज?तीन–बाप मरा-बेटा मरा, घर-घर छाया शोक।माँ का […]

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