सई नदी की करुण कथा : पौराणिक और ऐतिहासिक नदी मर रही है

दृढ़ता से बढ़ते चलो, पुरुष-अर्थ के साथ

March 24, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक―दिखें दोगले हर जगह, हरदम करते घात।दूरी कर लो दूर से, बने न कोई बात।।दो―दृढ़ता से बढ़ते चलो, पुरुष-अर्थ के साथ।ख़ुद मे तुम भरपूर हो, नहीं बढ़ाओ हाथ।।तीन―हर जगह चेहरे […]

कविता– रहने दो

March 24, 2023 0

कुछ ख्वाहिशें अधूरी हैतो रहने दो।मोहब्बत की तरफ पाव नहीं जातेतो रहने दो।अपनापन दिखा कर भीकोई अपना नहीं बनतातो रहने दो।मंदिरों मस्जिदों में घूम कर भीहृदय नेक पाक नहीं होतातो रहने दो।दिलों जान से मोहब्बत […]

आज का हाल

March 23, 2023 0

दिल में प्यार है,आंखों में नमी है,मन में उदासी,यही आज का हाल है।चेहरे पर मुस्कान है,दिल में दर्द है,दिमाग में सोच है,यही आज का हाल है।कहीं खामोशी है ,कहीं खुशहाली है ,कहीं निराशा है ,यही […]

विश्व जल दिवस पर अवधेश शुक्ल के दोहे

March 22, 2023 0

पानी मीठा चाहिए, जीव-जगत सब कोय ।अति आनन्द प्रीति तिया, काया जबहिं भिगोय ।। पानी पी-पी जग जिये, जुग-जुग अकट प्रमान ।पानी मत बिथराइयो, रखियो याको मान ।। पानी बहता निर्झरा, ऋतम्भरा हरसाय ।सीतल पानी […]

प्यार भरी लोरी

March 17, 2023 0

माँ! ममतामयी आंचल मेंफिर से मुझे छुपा लोबहुत डर लगता है मुझेदुनिया के घने अंधकार में।माँ! फिर से अपने प्यार भरेअहसासों के दीपमुझ में आकर जला दो।माँ! खो न जाऊं कहींदुनिया की इस भीड़ मेंमाँ! […]

पकड़ गिराओ धर्मान्धों को!

March 17, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केवल धन्धा-केवल चन्दा,भक्ति-भाव है मन्दा।भक्त और भगवान् है कैसा,खेल खेलते गन्दा।सनातनी का खेल निराला,गले पड़ा ज्यों फन्दा।पकड़ गिराओ धर्मान्धों को!रगड़ो जैसा रन्दा।एक कबीर की और ज़रूरत,लाओ कहीं से बन्दा।(सर्वाधिकार सुरक्षित― […]

मैं चेतना हूंँ

March 15, 2023 0

मैं सोचती हूंँ ,जन्मतिथि पर तुम्हें क्या उपहार दूंँ ,तुम स्वयं में चेतना हो। जीवन जीने की कला है तुममें,तुम्हें क्या सीख दूँ ,तुम स्वयं में प्रज्ञा हो। नित नवीन सद्विचार लाती हो ,तुम्हें क्या […]

जीवन मेरा वसन्त

March 10, 2023 0

जीवन मेरा वसन्तमस्त रहती हूंँ अपनी दुनिया में,हंसती हूंँ हसाती हूंँ औरों को गले लगाती हूंँजीवन मेरा वसन्त। कोयल की कूक, पपीहे की पीहू ,गीत गाती गुनगुनाती हूँ,जीवन मेरा वसन्त। भेदभाव दूर करती हूंँ,प्रेम की […]

कविता– वजह

March 10, 2023 0

मेरे चेहरे कीरौनक की वजह तुम हो।मेरे लबों परआई मुस्कुराहट की वजह तुम हो।मेरे दिल कीहसरत की वजह तुम हो।मेरे मन में आएएहसासों की वजह तुम हो।मेरे गालों में आईरंगत की वजह तुम हो।मेरे ह्रदय […]

नेताओं की बात सुनो मत, सबकी गिरगिट से यारी

March 8, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कहीं उमंग-उत्साह नहीं है, सब दिखते हैं खोली मे,परिपाटी से अधिक नहीं कुछ, देख असर इस होली मे।महँगाई का असर है इतना, मीठा ‘मीठ’ नहीं लगता,महिमा है बाज़ार की प्यारे! […]

अथाह अनुभूति

March 4, 2023 0

हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]

हम अपनो से दूर हुए, कैसी है मेरी मज़बूरी

March 2, 2023 0

हम अपनों से दूर हुएकैसी है मेरी मज़बूरी ?जिस माँ ने जनम दियावह माँ आज है अकेली। उसके प्यार के लिएहम भाईआपस में लड़ जाते थे , हम दोनों को झगड़ते देखमांँ कहती –तुम दोनों […]

मुस्कराहट बाकी है अभी

February 24, 2023 0

बिखर चुका है बहुत कुछमगर कुछ यादेंसमेटना बाकी है अभी।बहुत गम है जिंदगी मेंमगर चेहरे परमुस्कुराहट बाकी है अभी।खत्म हो चला है भलेजीवन का सफरमगर फिर भीकुछ करने के इरादेबाकी है अभी।बहुत जान चुका हूंजीवन-मृत्यु […]

हमारे अध्यापक

February 19, 2023 0

धूल में मिट्टी के कण की तरह थे, आसमान का तारा बना दिया। कितने प्यारे थे हमारे अध्यापक, हर काम में काबिल बना दिया। बहुत याद आओगे हमेशा, कौन समझाएगा हमें आप जैसा। हर काम […]

अथश्री रगड़ू-झगड़ू-संवाद शुरू― एक

February 19, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रगड़ू― चाचा!झगड़ू― हाँ भतीजे रगड़ू।रगड़ू― चाचा! नौकरी तो मिलौ नाय। जब नौकरी नै मिलौ तव छोकरी कैसौ मिलौ।झगड़ू― एमा तोर मतलब का आय?रगड़ू― चाचा! अबै हम छत्तीस के होये जाय […]

सजनी! तुमको दया ना आयी

February 19, 2023 0

सजनी! तुमको दया ना आयी ।इतनी निष्ठुरता से देखा ।अविरल बही अश्रु सरि रेखा।अपनी त्रुटि खुद समझ न आयी ।दृशा – दशा पूरित हो आयीं ।।तब भी तुमको दया न आयी ।। पुनर्मिलन की आश […]

ख़ैरातख़ान: खोलता, कुछ लोग के लिए

February 18, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ख़ैरातभरी झोली, कुछ लोग के लिए, शातिर दिमाग़-खोली, कुछ लोग के लिए। बन्दिश मे दिख रही, हर साँस अब यहाँ, दी जाती ‘ऑक्सीजन’, कुछ लोग के लिए। कैसे कह दें […]

मेरी संजीदगी मत छेड़, उसे चुपचाप रहने दे

February 17, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बदन के खटते१ रहने पे, हरारत आ ही जाती है, लबों के मुसकराने पे, नज़ारत२ आ ही जाती है। देता ही रहा हर पल गवाही, उनकी फ़ित्रत का, तभी तो […]

नज़रें ग़र इनायत हों तो एक बात मै कहूँ

February 17, 2023 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रिश्तों की अहम्मीयत जान जाइए,बुराई मे अच्छाई पहचान जाइए।निगाहें ग़र तलाशी लेने पे उतर आयें,ज़बाँ को तसल्ली दे मुसकान लाइए।नज़रें इनायत हों तो एक बात मै कहूँ,अपनी कथनी-करनी मे ईमान […]

बदलते रिश्ते

February 15, 2023 0

शादी की बहुत दिनों बाद अनोखी अपने ननिहाल गई, वहाँ उसने देखा नानी का घर कच्चे मकान के स्थान पर, पक्की ईंटों का आलीशान बँगला बन गया था। गाड़ी दरवाज़े पर जाकर खड़ी हुई, अनोखी […]

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