प्रेम और आनंद की राह है कृष्ण
राघवेन्द्र कुमार राघव– कृष्ण! निर्मोही है,इसीलिए कृष्ण सेमोह हो जाता है।कृष्ण! प्रेम कीप्रवहमान सरिता है।जिसमे जड़ और चेतनसब बह जाता है।व्याकुल कंठों की चाह है कृष्ण।प्रेम और आनंद की राह है कृष्ण।किन्तु हर नदी कीएक […]
राघवेन्द्र कुमार राघव– कृष्ण! निर्मोही है,इसीलिए कृष्ण सेमोह हो जाता है।कृष्ण! प्रेम कीप्रवहमान सरिता है।जिसमे जड़ और चेतनसब बह जाता है।व्याकुल कंठों की चाह है कृष्ण।प्रेम और आनंद की राह है कृष्ण।किन्तु हर नदी कीएक […]
राघवेन्द्र कुमार राघव– हमने पढ़ा है कि प्रेम सत्य है और शाश्वत भी है।सबने यही जाना कि प्रेम शक्ति है और आदत भी है।क्या आपको नहीं लगता कि प्रेम मे पूर्णता का अभाव है?और सत्य […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेशक,तुम हो।तुम्हारे साथ मै नहीँ;क्योँकि तुम मै-मय हो।तुम्हारे-मेरे मध्य का मै,एक अन्तराल-शिला पर बैठा,कुचक्र रच रहा है।तुम और मै मिल-बैठ,उस अन्तराल को पी रहे हैँ–भीतर तक।आँखेँ–पलकोँ पर प्रश्नो को सँभाले,तुमसे […]
आजाद हुए हम गैरों सेमगर अभी नही हुए औरों से।जीत चुके हैं हम औरों सेमगर हारे हुए हैंअभी अपने विचारों से।छोटे को बड़ा, बड़े को छोटासमझना अभी छोड़ा नहीं।जाति-पांति के कठोर नियमों सेमुख भी अभी […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–देश ग़ुलामी जी रहा, हम पर है परहेज़।निजता सबकी है कहाँ, ख़बर सनसनीख़ेज़।।दो–लाखोँ जनता बूड़ती, नहीं किसी को होश।“त्राहिमाम्” हर ओर है, जन-जन मेँ आक्रोश।।तीन–प्रश्न ठिठक कर है खड़ा, उत्तर भी […]
मृत्यु तुम क्योंआ रही हो?यू क्यों बार-बारमुस्कुरा रही हो?क्या प्रलय करता हुआजल तुमको भाता है?क्या सड़ती हुईलाशें तुम्हें सुकून देती हैं?क्या तुमको कभीकिसी ने पुकारा है?क्या तुमको कभीकिसी ने ठुकराया है?किस क्रोध मेंतुम बरस रही […]
Dr. Raghavendra Kumar Raghav– On our motherland, friendship is a sacred creed.Friendship is more precious than every need.It is the greatest relationship that is pure and true.A treasure cherished, forever shining through.With devotion complete, every […]
ढूंढने पर भी नहीं मिलतेवह लोग जो सत्य की बातसब से किया करते हैं। ढूंढने पर भी नहीं मिलतेवह लोग जो अपने होकरअपनापन दिखाया करते हैं। ढूंढने पर भी नहीं मिलतेवह लोग जो सच्ची मोहब्बत […]
Raghavendra Kumar ‘Raghav’– Be truthful always, human life we rare find.This is a glorious creation of God, one of a kind.Our purpose in life is to seek and to know.The truth that sets us free, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरी चित्रलेखा की खिलखिलाहटमुझे निमन्त्रण दे रही है–अज्ञात प्यास-कुण्ड मेनिमग्न हो जाने के लिए।सम्मोहक शक्ति के–संस्पर्श और संघर्षणमेरी देह के आचरण कीपट-कथा लिख रहे हैँऔर मै सूत्रधार-समअपनी ही पराजय कीपृष्ठभूमि […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–टूट रहे तटबन्ध हैँ, जल का हाहाकार।प्रलय आँख मे नाचता, लिये मृत्यु आकार।।दो–चाहत पूरी कर रहा, ले निर्मम-सा रूप।जनता मरती देश मे, निर्दय कितना भूप।।तीन–हा धिक्-हा धिक्! कर रही, क्रन्दन […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– उसकी भूख से बिलबिलाती आँतेँ–अन्तहीन सिलसिला से संवाद करना चाहती हैँ।उसकी चाहत–चीथड़ोँ मे लिपटीँ-चिपटीँ-सिमटीँ;अपनी पथराई आँखेँ पालतीँ;टुकुर-टुकुर ताकतीँ;आँखोँ से झपट लेने की तैयारी करतीँ,मेले-झमेले की गवाह बनकर रह जाती हैँ।उसके अन्तस् […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••• शब्द की उष्मा;शब्द की कान्ति;शब्द की संगति;शब्द की ऊर्जा;सार्थक तभी होती हैजब शब्दकार–साधनापथ से आ जुड़ता है।शब्द सात्त्विक होता है,तुम ही अपने आचरण की सभ्यता मे रँगकर,उसे राजसी बनाते हो […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– One walked, two walked and gathering grew,The caravan assembled, and onward it flew.This is the way to journey, on common ground,With every hand united, strength will be found. But when […]
Raghavendra Kumar ‘Raghav’– The clock hand marches, minutes turn to hours.Seasons dance and twirl, adorned with floral powers.The world’s a shifting canvas, ever new and bold.Embrace each fleeting moment, stories yet untold. With open arms […]
इस बारबारिश की पहली बूँदों से खुद टूटकरटूटे-बिखरे पत्ते ने अपनी शाख से नयी कोपल को संभालने की अरदास की।अलग होने लगी बिखरी पत्तियाँ धरती का स्पर्श करकह रही हर ऊँचाई के बादइसी धरती की […]
बीते हुए वक्त मेंबीता हुआहर लम्हा याद आएगा। बन गई है जो जगहआपके हृदय मेंवो बीता हुआहर कल औरआज याद आएगा। मुक्त हो जाएगेइस जहाँ से एक दिनऔर छुप जाएगेआपके हृदय की ओट में। फिर […]
कब किताबों के पन्नो सेप्यार हो गयापता ही न चला। कब अल्फाज़ों कालफ्ज़ों से इकरार हो गयापता ही न चला। कब शब्दों कोमात्राओंं से इश्क़ हो गयापता ही न चला। कब प्रकृति कामानव से आलिंगन […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’ Refuge in Me and actions done.By My grace, against evil battle won.Soul is immortal so this eternal state see.Realize My presence and achieve me.Abandon all physical duties and take refuge […]
दोस्ती का एकनया रिश्ता बनाएँगे।महबूब से ज्यादाआपको चाहेंगे।जिस्मों के बाजार मेंआपकी रूह सेरिश्ता बनाएँगे।रूठ गयाअगर वक्त तोउसको भीआपके लिए मनाएंगे।छोड़ जाएंगे जबआपके अपनेतो भी हमदिल से रिश्ता निभाएंगे। डॉ. राजीव डोगरा(युवा कवि व लेखक)पता-गांव जनयानकड़पिन […]
Dr. Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’— Colourful life because of mental bloom,Mood determine happiness or gloom.If mind accepts we troubles find,If rejects all leaves worries behind. So keep your mind calm and free,Smile like blossoms on […]
नेता बनना है तो काम करो, करने को काम हजार है,हिंदू मुस्लिम को ना बाँटो, मुस्लिम मेरा जिगरी यार है।साथ में रहते हैं हम कुछ ऐसे जैसे रहता परिवार है,मुझे पसंद है सेंवई ईद की, […]
घनघोर बादलकहां हो?मानव दानव के लिए न सहीपर इस धरा के लिए सहीसब की प्यासबुझा दो। तप्त ऊष्मा सेमुरझा रही जोप्रकृति रूपसीउसको जराअपने शीतल स्पर्श सेसहला दो। जीव-जंतुओं केसूख रहे जो कंठसूर्य की तप्त किरणों […]
न देखा मैं सृजनहारान देखा मैं पालनहारामैं देखा अपना गुरु बलिहाराजिन भव पारमुझे उतारा। न देखा मैं राम प्यारान देखा मैं कृष्ण न्यारामैं देखा अपना गुरु प्याराजिन दरश दिखायाप्रभु तेरा हर रूप न्यारा। न देखी […]
Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– When someone asks what is Dharma and what it signifies?Say, it’s what we uphold, where true meaning lies.Following it brings us prosperity, freeing us from sorrow.Attaining supreme joy and bliss, into […]
आस्तीन के सांप बन न डसा करोअपने हो तो अपने बन ही रहा करो। किसी वन के विषधर की तरहदांतों में विष छुपा न रखा करोजैसे हो वैसे ही बन रहा करो। सभ्यता का मोल […]
चला परिंदा घर की ओर,हरा भरा है मेरे घर का आंँगन,सुदूर भ्रमण कर आया ,नहीं दिखा मातृछाया जैसा कोई,जहांँ खुशियों का अंबार है,रिश्तो का लिहाज़ है ,संस्कार दिया है हम सबको,भूल कोई ना हमसे हो,कोई […]
Composed By– Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’, Balamau In shimmering heat, a vision gleams.A lake of comfort, a land of dreams. Religion beckons, a promise untold.But closer you get, the water, it fold. A mirage, it […]
Raghavendra Kumar Tripathi Raghav– Within this body, sin takes hold,No carnal cravings leave me bold.These worldly ties, they bind and chain,From their embrace, I seek escape, oh pain! With faith and love, my spirit yearns,Redemption’s […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• उनकी बातोँ मे, मत आइए साहिब!उनके घातोँ मे, मत आइए साहिब!हर गोट के मिज़ाज से, वाक़िफ़ हैँ वे;भूलकर भी धोखा, मत खाइए साहिब!ख़ैरात भी माँगेँ, तो मुँह मोड़ लीजिए;उन्हेँ औक़ात […]
अंदर ही अंदर लोगकफ़न ओढ़ रहे हैमोहब्बत के नाम परदफन हो रहे है। देखते नहीं सुनते नहींसमझते भी नहींबस मोहब्बत के नाम परगम ढो रहे है। अपनों का परायों कायहां कोई भेद नहींअपने मतलब के […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अंकुश नहीँ जब़ान पे, बोलेँ ऊल-जुलूल।हवा घृणा की चल रही, पकड़ लिया है तूल।।मतदाता भी सोच मे, कौन हमारे साथ।दिखते सब बहुरूपिये, कहाँ दबायेँ हाथ?थू-थू सबकी हो रही, जीभ अभागी […]
मेरी कहानी के सभी किरदार विविध रंगों की भांँति हैं ,विसंगतियाँ होते हुए भी आपसी तारतम्यता की उनमें पराकाष्ठालक्षित है । मेरी कहानी की सभी किरदार मूक नहीं ,सीधा सपाट बयानी में प्रत्युत्तर देते हैं,सामाजिक […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–ध्यान बँटाने के लिए, तरह-तरह की खोज।मन्दिर-मस्जिद लड़ रहे, हर पल हर दिन रोज़।।दो–सत्ता चेरी दिख रही, चिपकी कुर्सी देह।रड़ुवा-रड़ुवी संग हैँ, माँग भरी है रेह।।तीन–ग़ज़नी-गोरी संग मिल, लूट रहे […]
●आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• हमारी बात, हम तक रहे तो बेहतर है,हमारा साथ, हम तक रहे तो बेहतर है।चादर देखकर ही, पाँव हम पसारा करते,हमारा ख़्वाब, हम तक रहे तो बेहतर है।जनाब! आप तो हमारे […]
आओ हम स्कूल चलेनव भारत का निर्माण करें। छूट गया है जोबंधन भव काआओ मिलकर उसकोपार करें,आओ हम स्कूल चले॥ जाकर स्कूल हमगुरुओं का मान करेंबड़े बूढ़ों का कभी नहम अपमान करें,आओ हम स्कूल चले॥ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केवल चन्दा, दिखता धन्धा;भक्ति-भाव है, मन्दा-मन्दा।भक्त और भगवान् का नाता;खेल खेलते गन्दा-गन्दा।अन्धभक्ति का खेल निराला;गले पड़ा ज्यों निर्मम फन्दा।पकड़ गिराओ बहुरुपियों को;रगड़ो जैसे रगड़े रन्दा।क्रान्ति-पलीता आग छुआ दे;लाओ कहीं से […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आँखों-ही-आँखों मे, रात हो जाने दो,या ख़ुदा! तसल्ली से, बात हो जाने दो।जिस मकाम पे, छोड़ आया था ज़िन्दगी,साहिब! इकबार मुलाक़ात हो जाने दो।भ्रम भी नसीहत दे रहा, उम्रे दराज़ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••• वसंतबेचारा संत हो गया।पंचमी का–वह कन्त हो गया।पतझर बौराया–वह अन्त हो गया।हा धिक्-हा धिक्!वह हन्त हो गया। (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ मार्च, २०२४ ईसवी।)
शिव समान यह शिशु सुशोभित, वरदानी सा पुलकित है। शिव विग्रह के साथ स्वयं भी, दिखता अति आलोकित है। नमः शिवाय, ओम जागृत, महारात्रि पर अभिजित है। डमरू के डिमडिम स्वर सुनकर, विश्वधरा भी गुंजित […]
मैं कालों का काल हूँमैं ही तो महाकाल हूँ।सत्य का पालनहार हूँअसत्य का करतासदा विनाश हूँ।मैं देवों का देव हूँमैं ही तो महादेव हूँ।अंधकार में करता प्रकाश हूँअंत का भी करता आरंभ हूँतभी तो मैं […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••• आँसू की तबीअत नासाज़ है पलकों को न छेड़ो। उसके गेसू मे इक अजीब-सी लर्जिश† की बुनावट है। ज़ख़्मी बूढ़े दरख़्त को, सिसकियाँ भर लेने दो। शम्अ न बुझाओ, तक्रीज़‡ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मन को तराशता हूँकसैला बिम्ब दिखता है।बूढ़े पलंग पर लेटा वय-वार्द्धक्यचुपके से जीने का गणितसूत्र समझाता है।मनमोहिनी माया मस्तिष्कतन्तु को,रुई का फाहा बनाकरआहिस्ते-आहिस्ते सरकाती है।अराजक ऐन्द्रियिक तत्त्व,सक्रिय होने लगते हैं।जीवनीशक्ति […]
आजकल बदलने लगे हैंतेरे अल्फाजतेरे शहर के मौसम के तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा अंदाजगिरगिट के रंग की तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा इश्कतेरी बेवफाई की तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा व्यवहारतेरी निग़ाह की तरह। […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• महब्बत को क़ब्रगाह मे दफ़्न कर लौटे हैं, ज़ख़्मी पाँव अभी, थोड़ी साँस उधार मे दे दो, सुबूत हैं आख़िरी दाँव अभी। परछाईं लगना चाहती है गले, शिद्दत से बूढ़े […]
कोई कह दे कि शाम हो गई हैअब यकीन नही होता।कदम-कदम पर अब तो बड़ा फरेब होता।चले कहाँ के लिए और आ गये कहाँखुशियों की चादर पर कोई सितारा दिखेये सितारे गगन को चूमते हैं।आँचल […]
Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’ Sanatan teachings are the ancient way of life. Embracing both the form and formless divine. God’s essence, soul’s liberation, profound. Sanatan Dharma, the path profound. In saguna and nirguna, God resides. […]
अज्ज कल बदलना लग्गियांतेरियां गल्लांतेरे शहरे दे मौसमे सैंई। अज्ज कल बदलना लग्गा।तेरा अंदाजगिरगिटे दे रंगे सैंई। अज्ज कल बदलना लग्गातेरा प्यारतेरे रुसदे चेहरे सैंई। अज्ज कल बदलना लग्गातेरा व्यवहारतेरियां नजरा सैंई। अज्ज कल बदलना […]
श्वेता! धवला! वाग्देवी! शब्द-दान दीजिए।आपका हूँ दास मातु, ज्ञान-मान दीजिए।आपका वरदहस्त, मूल्य से भी मूल्यवान।शब्दों मे मेरे राम हों, वरदान मातु दीजिए।श्वेता! धवला! वाग्देवी! शब्द-दान दीजिए।आपका है दास राघव, ज्ञान-मान दीजिए॥ आपसे ही शब्द-शक्ति, आप […]
Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– On land of India, where tales do roam.Lessons of valor, both beast and home.Loyal animals, hearts they have sown,In loyalty and courage, they have shown. In kingdom of Mewar, a horse stood […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• घिसटते हुए टायर की तरह ज़िदगी जीनेवालो! अपने भीतरभरी हवा की इज़्ज़त करना सीखो। फटे बाँस की तरह चरचपर चरचरमरमर करती ज़िन्दगी, एहसासात को छूती तो है, बूझती नहीं; ताड़ती […]
——० यथार्थ-दर्शन– छ: ०—– ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–आँखों-अन्धे नयनसुख, मनमिट्ठू के बोल।सत्तालोभी दिख रहे, जनता-हित है गोल।।दो–रागी-वैरागी यहाँ, रँड़ुओं का संसार।कामी-कंचन-कामिनी, माया अपरम्पार।।तीन–नेता आतंकी बने, बाँट रहे हैं देश।बोल विषैले बोलते, नक़्ली दिखते […]
मुझे वो पगडंडियाँअब दिखती नहींजिन पर मैं चला करता था। मुझे वो आम के बागअब नहीं मिलतेजिन्हें देख नन्हे मन मचलता था। मुझे वो नदियांअब नहीं मिलतीजिनमें बाल-गोपाल नहाया करते थे। मुझे वो सुकून की […]
——० यथार्थ-दर्शन– पाँच०—– ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–जनता हालत दिख रही, मानो हुई हलाल।नज़रें जिधर घुमाइए, दिखते चोर-दलाल।।दो–छीलो कटहल बैठकर, देखो नंगा नाच।चड्ढी टँगती खूँट पे, फोड़ो सिर पर काँच।।तीन–कोई हो राजा-प्रजा, नहीं दिखे […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• सीरत की बनावट पे मत जाइए,सूरत की सजावट पे मत जाइए।महब्बत की राह मे हैं धोखे बहुत,नज़रों की बुनावट पे मत जाइए।प्यासे हैं तो पीकर खिसक लीजिए,नदियों की गुनगुनाहट पे […]
——-० यथार्थ-दर्शन ०——- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राजनीति की कोठरी, कितनी है बदरंग!चेतन-पक्ष अलक्ष है, कूप पड़ी है भंग।।दो–जनहित दिखता है कहाँ, प्रतिनिधि बिकते रोज़।गुण्डे-लम्पट हैं दिखे, कौन करेगा खोज?तीन–दिखे कुशासन देश मे, न्याय […]
——–० यथार्थ-दर्शन ०——- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–महँगाई है मारती, भूख करोड़ों लोग।कुछ मरते हैं भोग से, कुछ मरते हैं रोग।दो–सिर पर छत दिखती नहीं, आस एक विश्वास।अपने मन के सब यहाँ, नहीं दिखे […]
धूप में तपा हुआ आदमीछाया में झुलस रहा है। हवा में बहता हुआ आदमीतूफानों से डर रहा है। आग से पका हुआ आदमीधूप में जल रहा है। अपनी बातों सेजख्मी करने वाला आदमीतलवार की नोक […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• होठों को दे ज़बाँ, अजी! कुछ तो बोलिए,बन्द कोठरी मे राज़, ज़रा उनको खोलिए।बेहोश थे तब आप, बड़े बोल बोले थे,बाहोश अब आप, उन शब्दों को तोलिए।ग़फ़्लत मे पड़कर वक़्त, […]
आजादी की है शान तिरंगा।भारत देश की है शान तिरंगा।घर-घर में लहराये तिरंगा।हमको जान से प्यारा तिरंगा।दुनिया में सबसे है न्यारा तिरंगा।सबकी आँखों का है तारा तिरंगा।तिरंगा कितना प्यारा हमारा।तीन रंग का मेल है सारा।सदा […]
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है। भारत में बड़े उत्साह से झंडा फहराया जाता है। इस राष्ट्रीय त्योहार को बच्चे स्कूल झंडे लाते है। 26 जनवरी को देशभर में प्रोग्राम किए जाते हैं। […]
आज खुशी का पल,प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा का क्षण।घर मंदिर है पांँच दीप जलाऊँ,पुष्प से सजाऊँ, पीला अक्षत चढ़ाऊँ।प्रभु का निमंत्रण पत्र आयासज गई अयोध्या नगरी। जिनके लिए सदियों से अखियांँ तरस गई,बाईस जनवरी दो […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राम सिया-बिन किस लिए, प्रश्न उछलता रोज़।मुँह-दरवाज़े बन्द हैं, कौन करेगा खोज?दो–मन्दिर दिखे अपूर्ण है, प्राण-प्रतिष्ठा-प्रश्न।मूल समस्या गर्त मे, मना रहे सब जश्न।।तीन–राजनीति की गोद मे, खेल रहे हैं राम।उल्लू […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••• होठ बुदबुदाये, कह न सका,भाव उमड़ाये, बह न सका।विचार फैले, चादर हो गये,सिकोड़े थे, पर तह न सका।बूढ़े ज़ख़्म, नासूर बन गये,दबाया ज़रूर, सह न सका।संदेश बहुत, राम-रहीम के,ज़ेह्न बेचारा, […]
मंच पर वेद्विअर्थी गीत गा रहे थे;लगातार हीगिरते जा रहे थे;ऐसे गिरे हुए कवि और संचालक‘कविता’ को उठा रहे थे;हद तो यह थी–सब-के-सब श्रोतागणकविता की इस दशा परताली बजा रहे थे! ✍ घनश्याम अवस्थी९४५१६०७७७२
मकरसंक्रांति का दिनहै आया ,पूरा भारत है हर्षाया।शीत ऋतु अब जाने को है,कुछ ऐसा सन्देशा लाया। गंगा का अवतरण दिवस है,सगरपुत्रों का तरण दिवस है।गंगा सागर अवगाहन का,एक मात्र यह पुण्य दिन आया। मकरसंक्रान्ति का […]
उन्होंने कहाहम बहुत अच्छे हैंहमने कहाहोंगे अपनी नजर में। उन्होंने कहाहम दिलकश इश्क करते हैंहमने कहाकरते होगे गैरों से। उन्होंने कहाहम सिकंदर हैं हर काम मेंहमने कहाहोगे बस इस दुनिया के। उन्होंने कहाहम जानते हैं […]
In youth’s bright glow, we shine so bold, Like a radiant light, strong and gold. Our spirits crave goodness and care, A warm hug, a nation’s love to share. National Youth Day is here today, […]
जमीन और आसमान मेंफर्क होता है।झूठ और सच मेंफर्क होता है।मोहब्बत और नफरत मेंफर्क होता है।अपने और पराये मेंफर्क होता है।जीत और हार मेंफर्क होता है।दिमाग और दिल मेंफर्क होता है।जायज और नाजायज मेंफर्क होता […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–साथ-साथ चलता रहा, वर्ष-हुआ अवसान।मन-मंथन मथता रहा, कहाँ मान-अपमान?दो–घूँघट काढ़े मौन है, अवगुण्ठन-सी देह।सहमे-सकुचे धर रहे, पाँव-पाँव अब गेह।।तीन–मलय मन्द मुसकान ले, बढ़े जोश के साथ।जन-जन अगवानी करे, झुका-झुका कर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• विश्वसनीय एकवर्षीय सहयात्री!अपने बलिष्ठ कन्धों पर,तीन सौ पैंसठ दिवसीय अनियन्त्रित-नियन्त्रित भारप्रतिक्षण लादकर,अनवरत-अनथक यात्रा करते-करते,तुम अतीतोन्मुख हो चुके थे।त्वरित गति मे कृषकाय१ होते,तुम्हारे स्कन्धप्रान्त२,क्लान्त३ होते अनुभव करा चुके थे।तुम श्रान्त ४ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–इधर चंचल हवा, उधर शोख़ अदा,हालात बन गये, जाएँ तो कहाँ जाएँ ?दो–शाम का घनेरा ग़ज़ब, हवा के तेवर कसे हुए,एक ग़रीब के कफ़न से, सूरज ने आँसू पोछे हैं।तीन–मैने […]
(एक)जंगल का क़ानून•••••••••••••••••••••••••••••••• जंगल का मिजाज़,बेख़ौफ़, आवारा-सी दिखती हवा के इर्द-गिर्दसिमटकर रह गया है।कल तक जो जंगली पेड़ों के पत्ते हिलते थे; सरसराते थे,अब चुप, मौन, डरे-डरे, सहमे दिख रहे हैं।ख़ून खौलाता दहाड़ सुनो!उस मक्कार-शातिर […]
Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– Beyond shiny toys and gold so bright, There’s a deeper joy, a special light. Not in grabbing stuff, but lending a hand, Doing good things across the land. It’s not about […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुट्ठी तान लो!मरी हुईं अँगुलियों के इर्द-गिर्दमक्खियाँ भिनभिनाती हैं।पुरुषार्थ के अंगारे को चूम लो!राख मे दबी हुई चिनगारी कोअलसाने मत दो।हर खेत मे,चिनगारी की सुगबुगाहट बो दो।हवा अपना रास्ताख़ुद-ब-ख़ुद तलाश […]
किसी के पासजब कुछ बचता नहीं।बुलाए तब कोईमैं इतना सस्ता नहीं। माना कि प्रेम चाहिएजीवन में।मगर मांगना पड़ेभीख की तरह,वो भी जँचता नहीं। माना कि जीवन मेंकुछ चीजेंहासिल नहीं हुई।फिर भीदेखकर औरों की तरक्कीमैं कभी […]
उच्च हिमालय, बहती नदियांकल-कल करतीझरनों की आवाजें।फैली हरियाली, सुगंधित सुमनमहके समीर, बहकी कलियाँऐसी गोद हिमाचल की।जय जय जय हिमाचल की। ऊंचे वृक्ष, नीची नदियांकर्कश ध्वनि करती चट्टानेचहकते पक्षी, महकती फसलेंसरसराहट करता पानी।गरजते बादल, बरसते घनऐसी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• सुनो न!तुम्हारी पूर्णताभाती नहीं मुझे;क्योंकि तुम मुझसेद्रुत गति मे चलायमान हो।हाँ, मै अपूर्ण हूँ।तुम मुग्ध हो, अपनी पूर्णता परऔर मुझे गर्व है, अपनी अपूर्णता पर;क्योंकि आज मुझेएहसास हो रहा है […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मेरी अनहद१ बाँसुरीप्रलय की धुन सुनाती है।कातर२ आँखें,जन-जीवन से पृथक्दृष्टि-अनुलेपन३ करती हैं,काल के कपोलों पर।मुझ पर दृष्टि चुभोती,विहँसती, अल्हड़ गौरैयापंख झाड़, फुर्र हो जाती है।मेरे मन को तलाश↑ है,एक निस्तब्ध४-निस्पन्द५नीरव६-निभृत […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राजनीति को क्या कहें, शब्द सभी हैं मौन।जनता निचुड़ी जा रही, सुधि लेगा अब कौन?दो–मुख पर चुगली नाचती, लिये पनौती माथ।वाम विधाता दिख रहा, छोड़ेंगे सब साथ।।तीन–अस्ली-नक़्ली सब यहाँ, भेद […]
बढ़ गए जीवन में तोउड़ते रहोगेजीवंत पक्षी की तरह।नहीं तो टूट करबिखर जाओगेकिसी शाख केमुरझाये पत्ते की तरह। जीवंत हो तोजीना पड़ेगासूर्य चांद की तरह।नहीं तो पड़े रहोगेश्मशान कीजली-बुझी हुईराख की तरह। जीवंत हो तोमहकते […]
एक दौर आएगा मेराएक शोर आएगा मेरा। समझते थे जो मुझेऔरों से भी कमजोरइतिहास-ऐ-पन्नों परअब नाम आएगा मेरा। एक वक्त थाकि लोग ना जानते थेना ही पहचानाते थेपर वक़्त के हर पनें परअब नाम आएगा […]
कहु सजनी , अब कहँ – कहँ खोजूँ,तन – मन को विश्राम ।जहँ – जहँ जाउं, तहाँ – तहँ भटकन,हारे को हरिनाम ।।राम, कहँ पावै मन विश्राम ।। भाषा मौन , मौन परिभाषा युक्त,हो चला […]
सुनो!दीपों का त्यौहार आ रहा हैकुछ रोशनीअपने अंदर भी कर लेना। सुना है !अंधकार बहुत हैतुम्हारे अंदर भीतभी दिखता नहीं तुम्हेंऔरों का व्यक्तित्व । मगर दिख जाता हैसत्य की रोशनी मेंऔरों को तुम्हारा अहम। क्या […]
सड़क दुर्घटना से अगर है बचनातो हमेशा हेलमेट पहने रखना।लापरवाही से वाहन ना चलाएंअपना व परिवार का जीवन बचाएं।हेलमेट को लगाएंअपना जीवन बचाएं।सड़क सुरक्षा का ज्ञानमिलता है जीवन दान।मत करो वाहन चलाते हुए मस्तीजिंदगी नहीं […]
हम ढूढ़ते रह गएउनको हर निग़ाह में,पर वो तो खो ही गएओर किसी की बाहों में। हम ने तो हमेशा उनसेइक़रार ही किया थापर वो ही हर बारइन्कार ही करते रह गए। हमने तो खो […]