अतीत-अतीत होते मेरे सहयात्री!

December 31, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपने बलिष्ठ कन्धों पर तीन सौ पैंसठ दिनों के भार पल-पल लाद कर मुखमण्डल पर निष्कामता का भाव लिये अनवरत-अनथक यात्रा करते-करते अतीतोन्मुख हो रहे मेरे सहयात्री! तुम क्लान्त हो चुके हो; […]

“जोकर’ हूँँ मैं और मेरी जिंदगी सर्कस

December 23, 2019 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक संपर्क सूत्र :- 9340411563 ‘जोकर’ हूं मैं और मेरी जिंदगी सर्कस है । जिसमें मुझे लोगों को हंसाने, लोगों को खुश करने का काम मिला है । मगर […]

कविता : आत्मरक्षा करेगी नारी

December 22, 2019 0

शालू मिश्रा (युवा साहित्यकार/अध्यापिका) रा.उ.प्रा.वि.सराणा (जालोर) देखो बहुत सह लिए उसने जुल्मों-सितम, अब आत्मरक्षा की ख़ातिर नारी वीरांगना कहलाएगी। अपने आत्म सम्मान की रक्षा में नारी,अस्त्र शस्त्र उठाकर अपनी आबरू वो बचाएगी। इस कलयुग में […]

परीक्षा का भय

December 14, 2019 0

शालू मिश्रा, युवा साहित्यकार/अध्यापिका (रा.बा. उ.प्रा.वि.सराणा, आहोर), नोहर (हनुमानगढ़) कौन था वो महान जिसने बनाई थी ये रस्म, परीक्षा आने का नाम सुनकर वो ही बात याद आ जाती है । प्रश्न पत्र को देख […]

ले वो वादे गरीबी मिटा देंगे

December 10, 2019 0

ले वो वादे गरीबी मिटा देंगे, ले वो वादे बेरोजगारी मिटा देंगे, लो वो वादे भ्रष्टाचार मिटा देंगे, हम नया हिन्दुस्तान बना देंगे । ले वो वादे कुपोषण मिटा देंगे, ले वो भारत को साक्षर […]

कविता : हिम्मत

December 3, 2019 0

सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार, मो0- 8800416537 तुम कुछ कर सकते हो  तुम आगे बढ़ सकते हो । तुममे है बहुत हिम्मत  तुम जग को बदल सकते हो । तुम खुद से […]

कविता : दहेज दानव

November 30, 2019 0

कब तक अपनी बहू बेटियाँ चढ़ती रहेंगी बलिवेदी पर । इस दहेज दानव के मुख का कब तक रहें निवाला बनकर ? कब तक इनके पैरों में जकड़ी रहेंगी बेड़ियाँ ? कब तक हम सब […]

बेशक, मैं एक सम्पादक हूँ

November 29, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– जी हुज़ूर! मैं सम्पादक हूँ; तरह-तरह का सम्पादक हूँ; किसिम-किसिम का सम्पादक हूँ। पूर्वग्रह से ग्रस्त सम्पादक हूँ। सवाल है– रूप-रुपये-रुतबे का तलाश है, ऐसे दाताओं की फिर तो आपको फ़ीचर-पेज का […]

आख़िर कब तक?

November 24, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय : जुम्हूरियत को नंगी दिखाओगे कब तक? बेहयाई की सीरत दिखाओगे कब तक? जाहिल-मवाली अब दिखे हैं हर जानिब, लुच्चों को सिर पे बिठाओगे कब तक? तवाइफ़ से बढ़कर सियासत है दिखती, […]

हा! हा! किसान, छोड़ूँ निशान

November 18, 2019 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) खोलो खोलो अपनी पलकें; क्यों प्रगति देख जियरा धड़के? तू उगा कर अन्न बना दाता; फिर भी ना ब्याज़ चुका पाता। जो देता हूँ ले पकड़ दाम; मत व्यर्थ प्रगति का चक्र […]

बाल दिवस विशेष : बच्चों​ की मस्ती

November 13, 2019 0

शालू मिश्रा, (युवा साहित्यकार/अध्यापिका)नोहर (हनुमानगढ), रा.बा.उ.प्रा.वि.सराणा, (जालोर) हम बच्चों कीयारी ऐसी,देखत देशीऔर विदेशी |मन करत है हमकादिन भरखेले खेल,मस्ती करत डांटनजो आए उसकोहो जाए जेल ।मस्ती का दिनइक रविवार हीआता है,जो सुबह जल्दीसे हमकोजगाता हैं।हंसी […]

हे राम! अयोध्या तुम्हें बुलाती है

November 11, 2019 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) हे राम! अयोध्या तुम्हें बुलाती है; राह में दीये जलाती है। हे राम!…………. तुम्हीं हो मेरे आठों याम; तुम्हीं से रघुवर ये सुखधाम। तुम्हीं से मुरली की है तान; तुम्हीं से जीवन […]

‘छठि’ याद अवला से अँखिया में बचपन जीये लागल!

October 31, 2019 0

डाकेटर पिरीथिबीनाथ पाँड़े- ‘छठि’ के नउवा सुनि के आपन गाँव, घर, दुआरि, डेरा, खरिहान, बर-बनिहार आ पाँड़े पोखरा याद आवे लागल। मुँड़ी पर फल-फूल, सिंघाड़ा, ठेकुआ, पूआ-पूड़ी, ठेकुआ, भीगल चाना, उखि के गेंड़, सिंहाड़ा, नीबू, […]

आवर्तन और दरार : ‘नीति’ छिछोरी दिख रही, ‘राज’ हुआ असहाय!

October 31, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : राष्ट्रवाद छद्म बना, चहुँ दिशि दिखते चोर। मुँह काला हो रात में, चन्दन चमके भोर।। दो : तन पाप में ख़ूब रमा, पुण्य नहीं है पास। मुखमण्डल जल्लाद-सा, कैसे आये […]

ग़ज़ल : गाँव सारे शहर में समाने लगे हैं

October 30, 2019 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) बुझे थे दीये जगमगाने लगे हैं। गाँव सारे शहर में समाने लगे हैं।। आँगन की सिसकी समझने से पहले; दहलीज़ घर की गिराने लगे हैं। पिछले बरस ही तो पैदा हुए थे; […]

कब तक सहूँगी प्रताड़ना ?

October 25, 2019 0

सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार, संपर्क:- 8800416537 कब तक सहूँगी प्रताड़ना, कभी तो पूरी करो मेरी कामना । चीख-चीख कर रो रही हूँ मैं, कभी तो मान लो मेरी कहना । मत करो […]

कविता : ऐ माटी के दीपक धरा रोशन कर दे

October 25, 2019 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी तिमिर को जीत कर आलोक कर दे।ऐ माटी के दीपक धरा रोशन कर दे।। तू तूफानों से घबराया न कभी भी रे। तू अज्ञान को अंतर्मन से दूर कर दे।। खिला […]

आग : सच बता तू अपने से कब लगी ?

October 19, 2019 0

महेन्द्र महर्षि, गुरुग्राम (से.नि. वरिष्ठ प्रसारण अधिकारी, दूरदर्शन) क्याऊं-क्याऊं, तेज साइरन, बेचैन सी भागती अग्निशमन की मोटरें , एक के पीछे एक , मेरे घर के समीप की सड़क से गुज़र गईं। मैंने अपने से […]

रावण अभी मरा नहीं है

October 11, 2019 0

सीतांशु त्रिपाठी सतना म॰ प्र॰– सुनो राम मैंने कहा न था तुम मुझको मार न पाओगे, मै तो हूँ अमर और निडर भी तुम कैसे मुझे डराओगे , तुमने देखे थे मेरे दस शीष आओ कुछ […]

कविता : हिम्मत

October 11, 2019 0

सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार मो0- 8800416537 तुम कुछ कर सकते हो तुम आगे बढ़ सकते हो । तुममे है बहुत हिम्मत  तुम जग को बदल सकते हो । तुम खुद से […]

राम और रावण गले मिलने लगे हैं !

October 8, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– कैसे-कैसे बाबा अब दिखने लगे हैं, कामिनी ले बाँहों में खिलने लगे हैं। भगवा वस्त्र औ’ कलंकित मर्यादा, आश्रम में बहुरुपिये दिखने लगे हैं। कौन है साधु और शैतान भी कौन? चरित्र […]

एक अभिव्यक्ति : उपहास को, परिहास मत बनने दो

October 8, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हास को इतिहास मत बनने दो, उपहास को परिहास मत बनने दो। आगत-अनागत थाली में तेल-बाती लिये प्रतीक्षा सह रहे हैं; बाट जोह रहे हैं, उस पल का, जब तुम अपने होने […]

कविता – दशहरा

October 7, 2019 0

जयति जैन “नूतन”- इतना ना इतराओ यारोरावण को जलाकरखुद के अंदर मारो रावणजिओ सम्मान पाकर।सिर्फ पुतले जलाने से कुछ नहीं होने वालाना लोभ मिटने वाला ना मान बदलने वालामन में बैठे राक्षस कोसमझाओ बहिला फुसलाकरना माने तो […]

मरे सारी दुनिया परन्तु हम क्यों मरेंगे ?

October 5, 2019 0

जब आपने कह दिया है तो क्यों रुकेंगे ? किसी के सामने हम अब क्यों झुकेंगे ?मोहब्बत की है हमने, कोई चोरी नहीं मरे सारी दुनिया परन्तु हम क्यों मरेंगे ?दिल में उसे बसाया है […]

आवर्त्तन और दरार : संविधान है कह रहा, लाओ! घर में सौत

October 2, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : कैसा यह भगवान् है, चोर-चमारी भक्ति। मन्दिर में मूरत दिखे, उड़न-छू हुई शक्ति।। दो : पट्टी बाँधे आँख में, देश जगाता चोर। भक्त माल सब ले गये, कहीं नहीं अब […]

सच-सरासर-सच

September 29, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- एक- जपो नमो-नमो माला, लिये कटोरा हाथ। कंगाली में देश है, दिखे न कोई साथ।। दो– देश की शिक्षा चोर है, चहुँ दिशि दिखें दलाल। रोज़गार की चाह में, उजले होते बाल।। […]

कविता- भावनाओं का मोल

August 26, 2019 0

अलका जैन, रानीपुर (झांसी, उ. प्र.)– भावनाओं का मोल नहीं है रिश्तों के बाजार में,अपने ही अपनों को डुबोतेलाकर के मझधार में। ना सावन में झूले पड़तेराखी में अब प्रेम कहांदीपावली ना जगमग होतीहोली में हुड़दंग […]

शांति का प्रतीक धर्मप्रिय सत्यशील ऐसा देश है हमारा

August 14, 2019 0

शांति का प्रतीक धर्मप्रिय सत्यशील ऐसा देश है हमारा हिन्दुस्तान, सभी मिलजुल के रहे, दिल की बात खुल के कहें, मन में तनिक भी नहीं अभिमान, जात और पात की ना करे कोई बात कद्र […]

वक़्त की ठोकर का शिकार

August 8, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा”, (युवा कवि एवं लेखक) संपर्क:- 7509552096 वक़्त  की  ठोकर  का  शिकार  हुए  है, तबीयत ठीक है जिनकी अब वो बीमार हुए है । चट्टानों  से  मजबूत  हौसले थे जिनके, वक़्त की मार से […]

सामाजिक जहर : बात पीरियड्स की

August 1, 2019 0

कवि- सितांशु त्रिपाठी, सम्पर्क सूत्र – 9399851765  जिला – सतना, मध्यप्रदेशEmail- sitanshu2811@gmail.com“ एक बात पुरानी है, एक घटिया सोच पुरानी है ।दिल तो रोया कब का था, आंखों में फिर आज मेरे पानी है ।समझ न पाया […]

कहो तो इल्जाम खुद पर लगाऊं

July 30, 2019 0

जयति जैन “नूतन” – नहीं साब जीदोषी मैं हूँमैंने खुद का बलात्कार किया हैकपड़े उतारे खुदके मैंनेखुद को नोंच लिया है।खुद को दोषी कह ना पाऊंइसलिए नाम दूसरे का लिया हैन्याय की गुहार लगाई मैंनेअपनों […]

बाबा एक सवाल है

July 21, 2019 0

सीतांशु त्रिपाठी, जिला- सतना मध्यप्रदेश Contact no. 9399851765 बाबा एक सवाल है जो मुझे बहुत परेशान कर रहा है उसका जवाब बताओगे क्या ? मुझमें और छोटी में यह है फर्क जो उसको आज समझाओगे […]

कविता – बेटियां

July 18, 2019 0

जयति जैन “नूतन” घर से भाग जाती है जो बेटियां वे ले जाती हैं कई बेटियों के सपने उनकी उम्मीदें,वह कायम कर जाती है मां बाप के दिलों में एक डर जो उन्हें दिन रात सताता है कहीं दूसरी बेटियों […]

ये वहम तुम्हारा अहम है

July 16, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा”- सिर्फ   हम   ही   हम  है, ये वहम तुम्हारा अहम है । आसमां  में  उड़ रहे है वो, जिनके लिए जमीं कम है । पिता सबसे अनमोल है जग में, बाहर से कठोर […]

मेरे जख्मों पर हँस रहा है वो

July 10, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा”,   युवा कवि एवं लेखक,        सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:- 7509552096 मुझ पर तानें कस रहा है वो, मेरे जख्मों पर हँस रहा है वो । गुरुर  की  नाव  में  सवार  होकर  […]

ख़ुद को बदल रहा है वो

July 8, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा”,  युवा कवि एवं लेखक,        सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:-7509552096 आखिर अब खुद को बदल रहा है वो, गिर  उठ  गिर  फिर  संभल रहा है वो । मौसम  का  मौसम  बिगड़ रहा है अब, […]

तुम नहीं दिखे

June 30, 2019 0

ज़ैतून ज़िया- तुम आये कब मुझे आहट भी ना लगी कितने दिन से व्यथित थी पीड़ा थी आज स्वप्न में तुम्हारी हर चीज दिखी मुझे ये वर्दी, ये सितारे और भूरा बटुआ मेरे तिल के […]

सौंप दो ये धरा स्त्री को

June 30, 2019 0

ये जो तुम कहते हो सब स्त्री के कारण है तो बस भी करो अब ये अहम है जो किआ तुमने अपने पौरुष से पहाड़ काट डाला नदियों को कमर से पकड़ बलपूर्वक मोड़ दिआ […]

अस्तित्व नहीं खोना मुझे

June 29, 2019 0

ज़ैतून ज़िया (अध्यापिका)- मन करता है तुम्हें बाँध लूँ कविता में सब पढ़े तुम्हें पसंद करें तुम्हें बार बार दोहराये तुम्हारी पंक्तियों को प्रेम में लेकिन फिर भी तुम मेरे ही रहो  बिलकुल मेरी कविता […]

नजर में फिर नजर नहीं आया नजर लगाने वाला

June 28, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा” युवा कवि एवं लेखक      सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क :-7509552096- नजर में फिर नजर नहीं आया नजर लगाने वाला । आख़िर पकड़ा गया वो दरिंदा शहर जलाने वाला, खुद  को खुदा मानकर बिना […]

लो अब मैं चीख़कर कहता हूं प्यार हुआ है मुझे

June 27, 2019 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक),    सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क:- 7509552096 अजब सा नशा छाया है और खुमार हुआ है मुझे, लो अब  मैं  चीख़कर कहता हूं प्यार हुआ है मुझे, रात  भर  अब […]

चाहता है आदमी विश्व ग्राम बना लूँ

June 21, 2019 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी चाहता है आदमी आसमान को छू लूँ। चाँद तारे तोड़ लाऊँ धरती को सजा लूँ।। चाहता है आदमी सोने का महल बनाऊं। चांदी कर दरवाजों को घर पर लगा दूँ।। चाहता […]

क्षणिकाएँ : कर समर्पण बस

June 20, 2019 0

कवि राजेश पुरोहित– तू इतना समझ फकत मेरे दोस्त कर समर्पण बस । प्यार राधा जैसा कहाँ जीवन में खुदगर्ज़ हो तुम । चलो सुन्दर वतन हम सब बनाएं आओ साथ चलें । हे दयालु […]

कविता : पहली नजर का प्यार

June 16, 2019 0

सौरभ कुमार ठाकुर – उसे जब देखा मैंने पहली बार, हुआ था मुझे पहली नजर का प्यार । चला आया जब मैं वहांँ से, याद सताने लगी उसकी हजार बार । मिलना हो गया था दुश्वार, […]

इ हय ‘परियागराज’

June 15, 2019 0

(‘परियागराज’ मात्र एक प्रतीक है। ऐसी मानसिकता के लोग सर्वत्र हैं।) डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सबद चीनी मात करै, जहर हिरदय मा लाय। ऐसो जन घर-घर दिखैं, मन नाहीं पतियाय।। महादेबी से बढ़ि लखैं, रचना दिखै […]

महाशक्ति भारत

June 11, 2019 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी करो मेहनत की कमाई सब मेरे भाई। गीता ज्ञान सिखाती करके सीखो भाई।। गाँधी ने गीता ज्ञान की अलख जगाई।सत्याग्रह कर हमको आज़ादी दिलाई।। वैज्ञानिक सोच विकसित करो भाई। अंधश्रद्धा में […]

हक के लिए आवाज उठाओ तो सही

June 9, 2019 0

कवि सौरभ कुमार ठाकुर (बाल कवि/लेखक), मुजफ्फरपुर, बिहार मो0- 8800416537 हक के लिए आवाज उठाओ तो सही, आवाज में हमारे वजनदारी चाहिए । देश हमारा प्यारा, श्रेष्ठ और सच्चा है, बस देशवासियों में भी ईमानदारी चाहिए […]

जिस दिन तुम मुझसे मिलने वाली थी

June 2, 2019 0

सौरभ कुमार ठाकुर, बाल कवि और लेखक मुजफ्फरपुर, बिहार, संपर्क:- 8800416537 पता नही किस शहर में, किस गली तुम चली गई। मैं ढूँढ़ता रह गया, तुम छोड़ गई । पता नही हम किस मोड़ पर फिर […]

खुद की खोज जारी रखो

June 1, 2019 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’- खुद की खोज जारी रखो, मरने की रोज तैयारी रखो, कब कौन कहां बदल गया, इसकी पूरी जानकारी रखो, खुद पर यकीन करना सीखो, नियत सच्ची और जुबां प्यारी रखो, वहम और […]

कविता :- तो फिर क्यों आ रहे हो

May 26, 2019 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’, युवा कवि एवं लेखक,       सतना (म.प्र.), सम्पर्क:- 7509552096 मुझे क्यों आजमाने आ रहे हो, बताओ क्या जताने आ रहे हो । तुम्हीं ने मुझको ठुकराया था एक दिन,  तो फिर […]

माँ : तुम मेरे जीवन के नौका की खेवनहार हो

May 12, 2019 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’, युवा कवि एवं लेखक, सतना (म.प्र.) सम्पर्क:- 9340411563 तुम मेरे जीवन के नौका की खेवनहार हो । तुम ही मेरा रब हो और जीने का आधार हो तुम ही मेरा जग हो […]

फ़िर कभी न अश्क़ से हम, यों मोहब्बत को भिगोएँगे

May 11, 2019 0

गीत जगन्नाथ शुक्ल..✍ (प्रयागराज) चल ग़ज़ल हम फ़ातिहा , पढ़ आयें ग़म की कब्र पे; फ़िर कभी न अश्क़ से हम, यों मोहब्बत को भिगोएँगे। रोष उनमें था बहुत , और दोष हममें कम न […]

भगवान परशुराम जयंती पर विशेष : भगवान परशुराम की वन्दना

May 7, 2019 0

ॐ जय ऋषिवर परशुराम, जय ऋषिवर परशुराम। विप्र जाति के रक्षक, सबके लीला धाम।।ॐ जय…. जमदाग्नि नन्दन हो, जग के पालनहार। रेणुका से जन्में, किया शत्रु संहार।।ॐ जय….. महादेव की भक्ति में, सब अर्पण किया। […]

क्योंकि वो बस एक मजदूर है, बस यही उसका कसूर है

May 2, 2019 0

शिवांकित तिवारी “शिवा”      युवा कवि एवं लेखक, सतना (म.प्र.) सम्पर्क:-9340411563 पसीने से तर-बतर, घर से निकल दोपहर, जा रहा है.. उसका क्या कसूर है? क्योंकि वो बस एक मजदूर है, बस यही उसका […]

प्रभु महावीर स्वामी को समर्पित दोहे

April 17, 2019 0

दिव्य लोक की राह में , रश्मि पुंज के मंत्र ।महावीर क्षण साधना, जीवन भर का तंत्र ।।१ अरिहंतो को नमन है , सिद्धजन नमस्कार !साधक संतो नमन है, कृपा करो करतार !!२ मंत्र साध […]

दोहा मुक्तक : चुनाव चक्रवात

April 17, 2019 0

देख चुनाव उछाल है , सभी करे उत्पात ।जोश भरे हर चाल में, सता भूख संताप ।भूल चुके जो कर्म है , करे अनोखी बात ।वोट चोट की मार से ,सभी सहे अनुताप ।। नेता […]

बढ़ाकर हम कदम अपने, चलो मतदान कर आएं

April 13, 2019 0

मतदान गीत बढ़ाकर हम कदम अपने ,चलो मतदान कर आएं। लेकर साथ सबको हम,खुशी से झूम कर गाएं।। दुनियां के भले ही काम ,कितने भी जरूरी हो। मगर सब काम हो पीछे ,पहले मतदान कर […]

मजबूत लोकतन्त्र बनाओ

April 10, 2019 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी – शत प्रतिशत मतदान की शपथ दिलाओ। एक मत से होती जीत हार सबको बताओ।। सभी दे अपना मत लोकतंत्र मजबूत बनाओ। स्वच्छ छवि के नेता चुन संसद तक पहुंचाओ।। गोरवशाली […]

तेरे जाने से, अब ये शहर वीरान हो गया

April 8, 2019 0

तेरे जाने से, अब ये शहर वीरान हो गया। तेरे जादू का असर अब जाने कहां खो गया। तेरी पायल की झंकार से, ये सारा शहर जाग जाता था। अब उन झंकारो का खतम नामों-निशान […]

लगता है चुनाव आ रहे……

March 14, 2019 0

दीपक श्रीवास्तव “दीपू”- सुबह-सुबह वो कुण्डी खटका रहे ना पूछने पर भी परिचय बता रहे लगता है चुनाव आ रहे … जो ना घूमते थे कभी गलियों में अब वो बच्चो को टाफियां खिला रहे […]

भरोसा रख उस कोख पर, जिससे मैं तुझसे जुड़ी हूँ माँ

March 10, 2019 0

शिवांगी जैन आज अंधेरे में हूँ तो क्या तेरी हिम्मत की लौ से जमाना देखना चाहती हूं माँ । बेटों की इस दौड़ में दौड़ना चाहती हूं माँ । हमेशा दर्द हम बेटियों ने सहा […]

अभिनन्दन के स्वागत में उमड़ा जन सैलाब

March 1, 2019 0

कवि राजेश पुरोहित, भवानीमंडी एक मार्च उन्नीस को मनाई दीवाली हर नज़र केवल अभिनंदन के लिए एक झलक मिल जाए अभिनन्दन हर जुबान पर अभिनंदन अभिनंदन पाकिस्तान घुटनों के बल झुका है अभिन्दन स्वदेश सुरक्षित […]

कवि को कवि धर्म निभाने दो

February 25, 2019 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज)- जिसने अपनी रचनाओं में , हर कालखण्ड को खींचा है; जिसके कलम की स्याही ने ,नित सूर्य-चन्द्र को सींचा है। जो दिनकर-कबीर के वंशज हैं, हर ग़लत बात पे प्रश्न किये; जब […]

आज फ़िर रोया हिमालय, निकली है आँसू की धारा

February 16, 2019 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) – आज फ़िर रोया हिमालय, निकली है आँसू की धारा;डूबे हैं फ़िर कुछ सितारे, आसमाँ   का    बढ़ता पारा। आज फ़िर रोया हिमालय०…. सिन्धु भी  है सूखा जैसे, व्यपगत हुआ हो नीर सारा;सूर्य  […]

भारत माँ की पुकार

February 15, 2019 0

राघवेन्द्र कुमार “राघव”- हर मां का हमें चाहिए बेटा हर बहना का भाई । भारत माता ने रोते – रोते आवाज़ लगाई । आज पुनः दर्पी दुश्मन चढ़ हिन्द – ए – भाल पर आया […]

शहीदों को नमन

February 15, 2019 0

कवि राजेश पुरोहित – सारा देश आज दुखी है सोशल मीडिया पर शहीदों के चित्र हैं नमन बारम्बार अमर शहीदों को करता हर भारतीय बस एक सवाल लिए आतंकवाद कब होगा खत्म क्या हमारे जवान […]

गीत – ग़ज़लों में सिमटी कहानी

February 8, 2019 0

ग़ज़लों  में सिमटी कहानी;    प्रेम कैसे उपन्यास होगा?   दूरियाँ  बढ़  गई  हैं  दिलों  की;   अब कहाँ स्वाँस-विन्यास होगा?      गीत ग़ज़लों……..   मन  में  उठते  हैं   ऊँचे  बवण्डर;    हृदय में पतझड़ का एहसास होता।    दुःख  का झरना […]

आओ गणतन्त्र दिवस मनाएं

January 27, 2019 0

राजेश पुरोहित- वीर शहीदों की अमर गाथा जन – जन को सुनाएं आओ हम सब हिंदुस्तानी , गणतन्त्र दिवस मनाएं । गूँज उठे गाँव ढाणी गली वन्दे मातरम गीत गाएं सुभाष , भगत ,आज़ाद, बिस्मिल […]

एक आह्वान : आओ! उठो! एक अभिनव अभियान के साक्षी बनें

January 7, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आओ! आकाश को उतार लें, इस धरती पर। क्षितिज को बाँध लें, अपनी मुट्ठी में। सूरज को उगा लें, अपनी हथेली पर। सागर को सिमटा लें, अपनी आँखों में। पर्वत को बो […]

एक अभिव्यक्ति : स्वीकृति-अस्वीकृति की धुरी पर

December 28, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- ज़िन्दगी में अर्थ की परिव्याप्ति सुरसुरी-सी लगने लगी है। देह की खुरचन सायास-अनायास केंचुल की भाँति उतरती आ रही है। कालखण्ड स्थितप्रज्ञ की भूमिका में अनासक्त योगी-सदृश “एकोहम् सर्वेषाम्” को अभिमन्त्रित कर […]

जिनके चरणों की रज चन्दन वो दशरथनन्दन भटक रहे

December 21, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल..✍(प्रयागराज) जिनके चरणों की रज चन्दन वो दशरथनन्दन भटक रहे; नाममात्र  लेकर जिनका खल सारा सुख-वैभव गटक रहे। बोझ नहीं  सह  सकती  जनता  वादों के हत्यारों  की; झूठ- फ़रेब भरे  कृत्यों से  सौहार्द – प्रेम  सब  चटक रहे। […]

कवि कौन ?

December 8, 2018 0

 कोरे कागज को रंगीन कर दे।ये सिर्फ कवि का काम होता है ।।लफ़्ज़ों से महफ़िल सजाना हो।ये सब के वश में कहाँ होता है।।कल्पनाओं का अथाह खजाना।केवल कवि के ही पास होता है।।सजीव चित्रण करता […]

माँ ही मेरी जिंदगी और माँ से ही मेरी पहचान है

December 3, 2018 0

शिवांकित तिवारी, युवा कवि,लेखक एवं प्रेरक, सतना (म.प्र.) माँ शब्द मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा गुमान है, माँ ही मेरी जिंदगी और माँ से ही मेरी पहचान है। अंधेरों से उजालों तक के इस सफर में, […]

कविता-  मतदान

November 30, 2018 0

जयति जैन ‘नूतन’ मतदान करने जा तो रहे हो पर इतना ध्यान धरना । साम दाम दंड भेद काम है शैतान का बस इससे ही तुम बचना । सौ सही मगर चार गलत हों काम […]

मन का महाभारत

November 25, 2018 0

कवि राजेश पुरोहित काम क्रोध लोभ मोह के शत्रु। रात दिन महाभारत है करते।। मन के रणक्षेत्र के ये महारथी। कभी किसी से कम न पड़ते।। अपने अपने बाहुबल दिखाते। एक दूजे से झगड़ते- लड़ते।। […]

आओ प्रिये! कार्तिकी पर हम, देवों की दीपावली मनायें

November 24, 2018 0

आओ प्रिये, कार्तिकी पर हम, देवों की दीपावली मनायें । सभी देवता हमें निहारे, वे उतर धरा पर आयें ।। मिट्टी और बिजली के दीपक, देव देवियाँ नहीं सजाते । नील गगन में लटके तारे, […]

मार्ग प्रशस्त करो प्रभु मेरा, सिया राम संग डालो डेरा

November 20, 2018 0

पवनपुत्र को समर्पित मौलिक रचना  रचयिता- सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ हे हनुमान दर्शन दो हे हनुमान हे बलवान, हम सब बालक हैं अज्ञान।  मार्ग प्रशस्त करो प्रभु मेरा, सिया राम संग डालो डेरा।। जीवन अंधेरी नगरी […]

मत समझ श्रान्त हूँ

November 18, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) शब्द हूँ ;शान्त हूँ; मत समझ श्रान्त हूँ। वर्ण  के  भेद  से  वाक्य में क्लान्त हूँ।। वो  तो  श्रृंगार  से  थी  मोहब्बत मुझे; ओज धारण करूँ या नहीं; भ्रान्त  हूँ। थोड़ी बदली […]

ईश्वर आपस में नहीं झगड़ते इंसानों को मत लड़वाओ तुम

November 16, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (प्रयागराज) ०९६७००१००१७ ईश्वर आपस में नहीं झगड़ते इंसानों को मत लड़वाओ तुम। मन्दिर-मसज़िद बहुत हुआ अब  बनवाओ रुग्णालय तुम।। असमय कलियाँ मुरझा जातीं, बिखरे    शूलों   के   भय  से। विदुर-नीति  भी  शरमा जातीं, कपटी  […]

ऐसी दिवाली बनाओ तुम

November 16, 2018 0

राग द्वेष लालच को हटाकर, अहंंकार को जड़ से मिटाकर, नई उमंग से उजियाला लाओ तुम। चहूँ दिशा में फैला है घनघोर अंधेरा, अब ले भी आओ नया सवेरा, जगमग मन के दीप जलाओ तुम […]

ग्रीन दिवाली सबको प्यारी, होय नहीं कोई बीमारी

November 7, 2018 0

बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’ जगमग जगमग ज्योति जली है। दीवाली की धूम मची है।। दीपोत्सव की रजनी आयी। दीपों की माला बुन लायी।। घर में मंगल मूर्ति विराजे। रिद्धि-सिद्धि भी संग सुसाजे।। लक्ष्मी – पूजन सभी […]

आओ इस दीपावली हम कुछ खास करे

November 6, 2018 0

दीपक श्रीवास्तव “दीपू” आओ इस दीपावली हम कुछ खास करे । जलाकर चिराग रोशन जहाँ करे ।। मैया की मूरत हो , प्रण हम करे। न हो कोई मायूस कोशिश ये हम करे ।। आओ […]

हे हरि ! तेरे साथ सदा मेरा विरोध

October 31, 2018 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा उत्तर- प्रदेश तेरे साथ सदा मेरा विरोध ,अब मुझे सहा जाता नहीं । दिन प्रतिदिन तूने मुझ पर ऋण का भार ,रहें बढ़ाते इस आभार भरे शब्दों से सदा सिमटी सी कोने […]

नीति’ छिछोरी दिख रही, ‘राज’ हुआ असहाय!

October 31, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : तन्त्र लोक का है कहाँ, चहूँ दिशा हैं चोर। मुँह काला हो रात में, चन्दन चमके भोर।। दो : तन पाप में ख़ूब रमा, पुण्य नहीं है पास। चेहरा है […]

चौराहे पर खड़ी जवानी

October 30, 2018 0

जग का दुःख है रोया हमने, अपना  दुखड़ा  भूल  गये। उस पथ के पथराही हैं हम; जिस पथ में नित शूल नये। सारा सावन आँखों में ही, रुक कर मानो सूख गया। इतने  पर भी […]

क्या सम्भव है धराधाम से राम उठाने आएँगे?

October 30, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (इलाहाबाद) बिन सोने की लङ्का का ग़र मैं रावण बन जाऊँ तो; क्या सम्भव है धराधाम से राम उठाने आएँगे? ख़ुद तम्बू में रह करके जो भक्तों से न रुष्ट हुये; आगे  करके  […]

न्यू इण्डिया’ के लुटेरे ‘कहार’ देखिए!

October 27, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय डोली ‘हिन्दुत्व’ औ’ ‘विकास’ की उठी, ‘न्यू इण्डिया’ के लुटेरे ‘कहार’ देखिए! ‘अच्छे दिन’ की चिड़िया फुर्र हो गयी, सौ डिग्रीवाला चुनावी बुख़ार देखिए! धर्म से शून्य, पर ज्ञान बाँटने में दक्ष, […]

ऐ मौत तूने तो जमींदार बना दिया

October 27, 2018 0

आदित्य कर्ण दरभंगा, बिहार (मिथलांचल) ऐ मौत तूने तो जमींदार बना दिया। जब ज़िंदा था तो घूमता था, दर-ओ-बदर, अब मर गया तो इतना बड़ा श्मशान दिला दिया। भटकते रहे उम्र भर, चैन-ओ-सुकून के लिए, […]

खुशियों से भरा रहे दामन, पति होकर यही मनाऊँ मैं

October 26, 2018 0

करवा चौथ व्रत की पूर्व सन्ध्या पर धर्मपत्नी को समर्पित सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ कीमौलिक रचना- प्रिय अर्धांगिनी क्या दे दूं, जो तुमको खुश कर पाऊँ मैं। जो करवा चौथ का ब्रत रखा, कैसे आभार जताऊँ […]

करवाचौथ और प्रियतम

October 23, 2018 0

शालू मिश्रा, युवा कवयित्री, नोहर (हनुमानगढ़) राजस्थान याचक बनकर तुमनें मुझे मांगा था मात पिता से, मन कर्म वचनो से मैने भी तुम्हारा साथ दिया। चूँङी बिदींया मेहदीं से करके सोलह श्रृंगार, प्यार भरी माँग को […]

कविता : प्रयाग

October 18, 2018 0

जगन्नाथ शुक्ल…✍ (इलाहाबाद) ऋषि भरद्वाज के यज्ञ की आग हूँ। मैं युगों-युगों से तीर्थराज प्रयाग हूँ।। सूर्य-चन्द्र की ज्योति तक आबाद हूँ, मैं  ही  अकबर  का अल्लाहाबाद हूँ। चन्द्रशेखर आज़ाद के हृदय का ताप हूँ, […]

किससे दुआ माँगू तू मेरी हो जाए

October 16, 2018 0

राजन कुमार साह- (Writer/Motivator) जिसे मैं चाहता हूँ वो चाहत हो तुम जिसे मैंने पाया मेरी अमानत है तुम तन्हा-ए-दिल तुझसे ना बिछड़ पाऊँगा बिछड़ा तो एक पल भी जी नहीं पाऊंगा मेरी जिंदगी के […]

इन्हें सब मालूम कहाँ – कहाँ दंगा करवाना है

October 16, 2018 0

राजन कुमार साह- (Writer/Motivator) किसी को मंदिर, किसी को मस्जिद बना लेने दो। गरीबों की आह , उनकी पुकार यूँ ही दब जाने दो।। कोई   मर   रहा भुखा उन्हें  यूँ  ही  मर  जाने  दो। गर […]

क्या खता हुई है हमसे तू मुझे याद करती नहीं

October 15, 2018 0

राजन कुमार साह- (Writer/Motivator) क्या खता हुई है हमसे तु मुझे याद करती नहीं है.. कभी करती थी बातें सात जन्मों की अब इक पल साथ दे राजी नहीं है.. गर खुश है तू मुझको […]

गर चुभती है जहाँ को सच्चाई, हमें कोई हर्ज नहीं

October 14, 2018 0

राजन कुमार साह- (Writer/Motivator) जिंदगी एक जंग है, यूँ हार मानते नहीं। गर हो खडे मैदान में, कभी छोड़ भागते नहीं।। है जोरावर दुश्मन का , हम भी किसी से कम नहीं। गर हो हौसला […]

एक अभिव्यक्ति : भाषा ले रसगागरी

October 13, 2018 0

डॉ०पृथ्वीनाथ पाण्डेय भाषा ले रसगागरी, चली पिया के देश। अगवानी में लिपि रही, मन्त्रमुग्ध परिवेश।। सौम्य कविता-कामिनी, ले रचना परिधान। उपमा, अद्भुत, सोरठा, सबका है सम्मान।। वहीं समीक्षा बैठकर, रहि माथा खुजलाय। कैसे-कैसे कवि यहाँ, […]

भारतीय वायु सेना को समर्पित विनय शुक्ल जी की रचना

October 11, 2018 0

भारतीय वायु सेना के स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय वायु सेना को समर्पित विनय शुक्ल जी की बेहतरीन रचना : नीली वर्दी, नीला अंबर प्रबल, प्रचण्ड हे गरूड़ दिगम्बर क्षितिज नभ का हो या […]

नवरात्र शुरू हो चुके मातु, आकर के दर्शन दे जाना

October 10, 2018 0

सुधीर अवस्थी ‘परदेसी’ बघौली- नवरात्र शुरू हो चुके मातु , आकर के दर्शन दे जाना। उपवास किया मां तेरे लिए, एक दिन मेरे भी घर आना।। पता मातु मुझे भली भांति, तुम हमको छोड़ न […]

काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती

October 9, 2018 0

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती परिणय की परिपाटी में तुम पर न्यौछावर हुआ तुम्हें अपना वर्तमान और भविष्य माना हर पग तेरे साथ चलने की कोशिश की, तुम में ही अपना सर्वस्व ढूँढा काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। हर रात उठ-उठ कर तेरे चेहरे में ख़ुद को ढूँढा हर सुबह उठ कर तेरे सोते हुये चेहरे का अजब सा मुँह मोड़ना देखकर ख़ुश हुआ तेरे बालों की महक से तेरी थकान का अंदाज़ा लगा सकता हूँ तेरे चेहरे की शिकन से तेरा मूड बता सकता हूँ काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। हालांकि गुलाबी शूट और बैंगनी साड़ी तुम पे जचती है गुलाब की चार पंखुड़ियाँ तेरी मुस्कान बढ़ाती हैं सूरज की कुछ ही किरणों में तुम थक जाती हो हवा के चंद झोंकों में ठण्ड से डर जाती हो काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। घर के किसी भी कोने में जब तुम होती हो क्या महसूस किया तुमने, हर थोड़ी देर में तुम्हें देख जाता हूँ काली टी-शर्ट में तेरा सोता हुआ फोटो देख कर आज भी चहक जाता हूँ सेवपुरी के दो टुकड़ों में तेरी मुस्कान अब भी दिखती है काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। रेड लेबल चाय का बड़ा डिब्बा तेरे बड़े से मग की याद दिलाता है मेरी कॉफ़ी का १० रूपये वाला पाउच अब भी तेरे चाय के डब्बे से शर्माता है मैरून रंग की वाशिंग मशीन से जब फर्श पर पानी फैलता है और डबल बेड की सरकती ट्रॉली तेरी याद दिलाती है काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। तेरा छोटा सा डस्ट-बिन खाली पड़ा है पुरानी कॉलेज की बॉय-कट बालों वाली फोटोज और फाईलें वैसी ही पड़ी हैं तेरी तकिया से वही ख़ुशबू आती है तेरे टेडी तेरी याद दिलाते हैं काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती।

जनाब! फेसबुक देखिए

October 7, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चित्र-विचित्र चेहरे हर तरफ़ से देखिए, यक़ीं न हो जनाब तो फेसबुक देखिए। कविता के नाम पर क्या-क्या परोसे हैं, अर्थ-भाव सड़ रहे हैं फेसबुक देखिए। उनकी शब्दावली पर नज़रें इनायत हों, […]

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