आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला
कल (१३ मार्च) शनिवार होगा और आप प्रति सप्ताह की भाँति ‘दैनिक जागरण’, ‘नई दुनिया’ तथा ‘नव दुनिया’ के सप्तरंग पृष्ठ पर ‘हिंदी हैं हम’ के अन्तर्गत हमारी शनिवासरीय ‘भाषा की पाठशाला’ में यह ज्ञान […]
कल (१३ मार्च) शनिवार होगा और आप प्रति सप्ताह की भाँति ‘दैनिक जागरण’, ‘नई दुनिया’ तथा ‘नव दुनिया’ के सप्तरंग पृष्ठ पर ‘हिंदी हैं हम’ के अन्तर्गत हमारी शनिवासरीय ‘भाषा की पाठशाला’ में यह ज्ञान […]
निम्नांकित दोहावली भारतेन्दु हरिश्चन्द की प्रसिद्ध कविता ‘निज भाषा’ से उद्धृत की गयी है। हिन्दी के अधिकतर भक्तगण हिन्दी-विषयक आयोजनों में “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा-ज्ञान के मिटत न […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला देश के ९९.९९ प्रतिशत विद्यार्थी-अध्यापक, साहित्यकार, भाषाकार, राजभाषाधिकारी, हिन्दी-अधिकारी, अनुवादक, भाषाविद्, वैयाकरण, व्याकरणाचार्य, प्रकाण्ड भाषापण्डित, भाषाशास्त्री, साहित्यकार, आलोचक, समालोचक, समीक्षक, टीकाकार, भाष्यकार, हिन्दी-संस्थानों-निदेशालयों के अध्यक्ष-निदेशक, समाचारपत्र-पत्रिकाओं और समाचार-चैनलों के […]
आप नीचे एक कोश के आवरण-पृष्ठ और उसके आरम्भिक पृष्ठ के क्रमश: दो चित्रों को ध्यानपूर्वक देखें। इसे देश के प्रसिद्ध प्रकाशन-प्रतिष्ठान ‘डायमंड’ प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है। यह हिन्दी का एक शब्दकोश है; […]
भाषा व्यक्तित्व को निखारती है और उसमें एक सुखद आकर्षण भी उत्पन्न करती है। आइए! अपने व्यक्तित्व को सँवारें। सौन्दर्य और सौन्दर्य-बोध की अवधारणा — कोई भी कविता ‘सुन्दर’ अथवा ‘nice’, ‘beautiful’, ‘great’ नहीं होती […]
कल (२० फ़रवरी) शनिवार रहेगा। ‘दैनिक जागरण-परिवार’ की शनिवासरीय प्रस्तुति ‘भाषा की पाठशाला’ में आप कल अनेक ऐसे शब्दों का अध्ययन करेंगे, जिनका ‘आप सभी’ अभी तक अशुद्ध अर्थ जानते-मानते-समझते तथा व्यवहार करते आ रहे […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आरोपी (यहाँ शुद्ध और उपयुक्त शब्द ‘आरोपित’ है।) पकड़ लिये गये हैं; गिरफ़्तारी (शुद्ध शब्द ‘गिरिफ़्तारी’ है।) हो गयी है; निलम्बित किये गये हैं; जाँच के आदेश दे दिये गये […]
◆ प्रतियोगिता-प्रकोष्ठ ● प्रतियोगिता– एक ★ विषय– ‘प्रथम’ गत मास हमने इस आशय की सूचना सम्प्रेषित की थी कि इस पाठशाला की ओर से निकट भविष्य में एक ‘प्रतियोगिता-शृंखला’ का आयोजन किया जायेगा, जो कि […]
★उत्तरप्रदेश-विधानसभा समूह ‘ख’ की परीक्षा पर प्रश्नचिह्न★’हिन्दी-भाषा’ के प्रश्नपत्र तैयार करनेवालों की अयोग्यता सामने आयी विद्यार्थी किसी भी परीक्षा में इसलिए सम्मिलित होते हैं कि उनका परिश्रम सार्थक हो और वे परीक्षा की कसौटी पर […]
★ आप ‘कितने’ पानी में हैं, टटोलिए! १- आपके घर के ठीक पीछेवाले घर से, दायीं ओर से चौथा घर किसका है ?२ – आप घर से जब नित्य जिस विद्यालय में अथवा जिस कार्यालय […]
”देखिए! ये हसीं शाम ढलने को है,अब तो जाने की इजाज़त दे दो मुझे।” यह युगल गीत ‘राज़’ फ़िल्म का है, जिसे लता मंगेश्कर जी और मुकेश जी ने गाये हैं। यहाँ पर दो विचारणीय […]
•••••••••••••••••••••••••••••••हमारा सांस्कृतिक-सामाजिक वैभव कैसे लुप्त हुआ? ★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमने जब अँगरेज़ी तिथि, माह तथा वर्ष अङ्गीकार कर लिये हैं अथवा उनका व्यवहार करने के लिए व्यवस्था बना दी गयी है तब उन्हें ‘आङ्गल’ […]
■ म्लेच्छ-भाषा– अर्थ, अभिप्राय तथा अवधारणा अस्पष्ट भाषा/अपभ्रंश भाषा ‘म्लेच्छ-भाषा’ है। जिन वर्णों के उच्चारण व्यक्त न हों, वे ‘म्लेच्छ-भाषा’ कहलाती हैं। किरात, खस, बर्बर, पह्लव, पौण्ड्र, द्रविड, शक, शबर, सिंहल, यवन इत्यादिक जातियाँ-जनजातियाँ-बर्बर जातियाँ […]
★ शब्द-विचारज़िम्म:दार-ज़िम्म:वार— सही शब्द ‘ज़िम्म:दार’ और ‘ज़िम्म:वार’ है। अब प्रयोग के धरातल पर वही ‘जिम्मेदार’ और ‘जिम्मेवार’ बन गया है। दोनों ही ‘अरबी’ शब्द हैं। दोनों का एक ही अर्थ है। ज़िम्मा में क्रमशः ‘दार’ […]
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••आप ‘दैनिक जागरण’, ‘नई दुनिया’ तथा ‘नव दुनिया’ में ‘हिंदी हैं हम’ के अन्तर्गत प्रकाशित होनेवाले साप्ताहिक (शनिवासरीय) स्तम्भ ‘भाषा की पाठशाला’ के लिए उन शब्दों को हमारे भेज सकते हैं, जिनके प्रयोग को लेकर […]
◆ नीचे दिये गये ‘चित्र’ को गम्भीरतापूर्वक देखें।■ न हिन्दी और न ही अँगरेजी का बोध!‘बस-विभाग’ की मूढ़ता अथवा ‘वाराणसी विकास प्राधिकरण’ का प्रमाद कहा जाये– न हिन्दी का संज्ञान और न ही अँगरेज़ी का […]
■ ‘विरामचिह्नों के प्रयोग वाक्य में स्पष्टता लाने के लिए, अर्थात् अर्थ का भाव प्रकट करने के लिए विराम-चिह्नों के प्रयोग अनिवार्य माने गये हैं। निस्सन्देह, विरामचिह्न की स्वतन्त्र सत्ता नहीं होती; परन्तु महत्ता अवश्य […]
कल (२८ नवम्बर) शनिवार रहेगा और आपको देश के शीर्षस्थ दैनिक हिन्दी-समाचारपत्र ‘दैनिक जागरण’ और मध्यप्रदेश के पाठकप्रिय दैनिक हिन्दी-समाचारपत्र ‘नई दुनिया’ के कल के अंक में अतीव उपयोगी साप्ताहिक स्तम्भ ‘भाषा की पाठशाला’ (‘सप्तरंग’ […]
निर्देश– नीचे दिये गये प्रश्नों में पाँच शब्द अंकित हैं और उत्तर के रूप में उनके विकल्प भी। आप प्रश्न-प्रकृति को समझते हुए, दिये गये शब्दों के शुद्ध और उपयुक्त अर्थ बताइए।१- परिरम्भ :–(क) गाढ़ […]
कल (२१ नवम्बर) शनिवार रहेगा और आपको देश के शीर्षस्थ दैनिक हिन्दी-समाचारपत्र ‘दैनिक जागरण’ और मध्यप्रदेश के पाठकप्रिय दैनिक हिन्दी-समाचारपत्र ‘नई दुनिया’ के कल के अंक में अतीव उपयोगी साप्ताहिक स्तम्भ ‘भाषा की पाठशाला’ (‘सप्तरंग’ […]
शुद्ध और उपयुक्त शब्द-प्रयोग :– दीपावली-दीवाली, दीया-दिया, प्रज्वलन, अधिकांश-अधिकतर, अवतरण-जन्म। ★ दीपावली-दीवाली– इन दोनों ही शब्द-प्रयोग को लेकर लोग भ्रम और संशय की स्थिति में रहते हैं। यही कारण है कि कुछ लोग ‘दीपावली’ तो […]
● भाषाविद्-समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने चिन्ता जतायी परीक्षा नियामक प्राधिकारी, उत्तरप्रदेश की ओर से 6 अक्तूबर को करायी गयी द्वितीय सेमेस्टर– 2020 के हिन्दी-विषय की परीक्षा; प्रश्न-पुस्तिका ‘।।-6’ में ऐसी-ऐसी अशुद्धियाँ देखने को […]
◆ निम्नांकित शब्द उत्तरप्रदेश के आंचलिक बोली-व्यवहार के अन्तर्गत आते हैं। आंचलिक शब्दों का कोई ‘सर्वमान्य’ व्याकरण नहीं है, इसीलिए स्थानिक भाषा का कोई स्वतन्त्र व्याकरण नहीं होता और उन्हें ‘बोली’ का नाम दे दिया […]
किशोर अजनानी की ‘सौ बात की एक बात’ का सचये हैं, किशोर अजनानी। ये वही साहिब हैं, जो समाचार-चैनल ‘News 18 इंडिया’ पर प्रतिरात्रि-दिन ‘सौ बात की एक बात’ के अन्तर्गत विविध प्रकार के समाचार […]
★ ललकार/हुंकार/चुनौती– आपमें से कोई भी इस आलेख में से ‘एक भी’ अशुद्धि निकाल कर दिखाये। — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमारी देवनागरी लिपि और हिन्दीभाषा उतनी सहज नहीं हैं, जितनी हिन्दी-भाषा के जानकारजन प्राय: […]
◆ शब्द– अल्ला और अल्लाह। ★ अल्ला– यह ‘संस्कृत-भाषा’ का शब्द है, जो लिंग-निर्धारण के अन्तर्गत स्त्रीलिंग का शब्द है। अधिकतर कोशकार ‘अल्ला’ शब्द को ‘अरबी-भाषा’ बताते हैं, जो कि भयंकर दोष है। शब्दभेद की […]
उत्तर, प्रश्न-शृङ्खला के अन्त में अङ्कित हैं । निम्नांकित में से शुद्ध उत्तर का चयन कीजिए :—-(यदि आपको लगता है कि इनमें से कोई उत्तर शुद्ध नहीं है तो कृपया शुद्ध उत्तर अंकित करें।)१- परीक्षक […]
१- निम्नांकित के अन्तर्गत प्रत्येक में से कौन-सा शब्द/वाक्य अशुद्ध नहीं है?(क) खिलाड़ी ने गेंद फेंका । (ख) खिलाड़ी ने गेंद फेंकी। (ग) खिलाड़ी ने गेंद फेकी।(घ) खिलाड़ी गेंद फेका। (ङ) खिलाड़ी गेंद फेकी।२- (क) […]
यहाँ उन शब्दों के प्रयोग के लिए अनुरोध किया गया है, जो शुद्ध हैं और उपयुक्त भी। कृपया अपने लेखन में उन शुद्ध शब्दों को स्थान देकर समाज का भाषिक मार्गदर्शन करें। ★ ‘प्रावधान’ के […]
हमारे महान् साहित्यकार, समीक्षक, कवि-कवयित्री, शाइर आदिक बहुत गर्व के साथ मंचों के माध्यम से कहते हैं :—० मैंने अभी-अभी एक ताज़ी कहानी लिखी है।० मैं एक ताज़ी ग़ज़ल पेश करती हूँ।० मैंने एक ताजा […]
यहाँ सबसे ऊपर एक चित्र दिया गया है। इस चित्र के अन्तर्गत दिखाये गये समाचारों का व्याकरण के निकष पर हम भाषिक परीक्षण करेंगे। आइए! चलते हैं, अपनी ‘प्रायोगिक भाषिक कर्मशाला में। अब हमने समाचार-चैनल […]
★’उत्तरप्रदेशलोक सेवा आयोग’ के दामन पर कब तक लगता रहेगा दाग़?★ आर०ओ०-ए०आर०ओ० के सामान्य हिन्दी/व्याकरण के प्रश्नपत्र में अशुद्धियाँ-ही-अशुद्धियाँ! एक अर्से से उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग बदनामी की चादर ओढ़े हुए है। प्रतियोगी विद्यार्थियों का […]
जीवन जीने की कला सिखाती हिन्दी ‘भाषारस-गागरी’ समारोह के अन्तर्गत पिछले तीन दिनों से ‘सारस्वत सभागार’, लूकरगंज, प्रयागराज में आयोजित हो रहे विविध कार्यक्रमों का समापन १६ सितम्बर के बौद्धिक परिसंवाद-कार्यक्रम ‘पठन-पाठन में हिन्दी-भाषा की […]
हमने सबसे पहले ‘सोसल डिस्टैंसिंग’ और ‘सामाजिक दूरी’ का मुखर विरोध करते हुए, स-तर्क ‘शारीरिक दूरी’ नामकरण किया था, जिसका हमारे ‘मुक्त मीडिया’ के सदस्यवृन्द ने स्वीकार भी किया था, वहीं अपने स्वभाव से विवश […]
जय देवनागरी-जय हिन्दी।★ इस सूचनात्मक टिप्पणी में अशुद्धि/अशुद्धियाँ ढूँढ़ें।
अब हमारी पाठशाला आन्तर्जालिक (ऑन-लाइन) रूप में शीघ्र प्रसारित होगी, जो हमारे सुविधानुसार संचालित होगी। पहला विषय– मौखिक और लिखित भाषा (लेखन-पठन-पाठन तथा उच्चारण)। ★ आप लिखते कुछ हैं और उच्चारण कुछ करते हैं। आप […]
समाचार-चैनल : ‘समाचार Plus’ का भाषिक अज्ञानइस चित्र को ध्यानपूर्वक देखिए। इसमें अंकित समाचार-शीर्षक को पढ़िए। पहली बात, यह समाचार-शीर्षक नहीं है, क्योंकि वही समाचार-शीर्षक उपयुक्त कहलाता है, जो क्रिया-रहित हो। यह तो एक वाक्य […]
★ कोश और कोष ‘कोश’ नैसर्गिक है, जबकि ‘कोष’ अनैसर्गिक/ कृत्रिम। आप ‘कोशिका’ का प्रयोग करते हैं; क्योंकि वह निसर्ग/ प्रकृति-जन्य है। आप उसे ‘कोषिका’ नहीं कह सकते। ‘कोष’ द्रव्यादिक से सम्बद्ध है। द्रव्यादिक नैसर्गिक […]
ऊपर दी गयी संस्थान की टीन-पट्टिका को ध्यानपूर्वक देखें। वह संस्थान ‘भरद्वाज-आश्रम’, प्रयागराज के सामनेवाले मार्ग पर स्थित है। टीन की यह पट्टिका वर्षों से संस्थान के प्रवेशद्वार के ऊपर लगी हुई है। इस संस्थान […]
प्रिय शिष्यवृन्द! आप जब शोधप्रबन्ध अथवा निम्नांकित विषयगत आशय के कर्म कर रहे होते हैं तब शब्दप्रयोग के प्रति आपको सतर्क-सन्नद्ध-सावधान रहना होगा। ऐसा इसलिए कि शोधकर्म करने-कराने का अर्थ ही है कि सम्बद्ध विद्यार्थी […]
कृपया निम्न टंकित चार शब्दों को गम्भीरतापूर्वक समझें। १- बाह्य— बाहरी, बाहर का, बाहर की ओर२- वाह्य— वहन (ढोने) करने-योग्य; जैसे– वाहन, वाहक आदिक।३- अन्तर्राष्ट्रीय— अपने राष्ट्र में होनेवाला; अपने राष्ट्र की भीतरी बातों से […]
——० संरचना-पक्ष ०—– ★ रचना— किसी भी उस पद्य अथवा गद्य-कृति को ‘रचना’ कहते हैं, जिसका प्रवाह नैसर्गिक होता है और सर्जन करने के लिए किसी का आश्रय नहीं लेना पड़ता। ★ लेख— किसी विषय […]
‘म्लेच्छ-भाषा’ क्या है? अस्पष्ट भाषा/अपभ्रंश भाषा ‘म्लेच्छ-भाषा’ है। जिन वर्णों का उच्चारण व्यक्त न हो, वह ‘म्लेच्छ-भाषा’ कहलाती है। किरात, खस, बर्बर, पह्लव, पौण्ड्र, द्रविड, शक, शबर, सिंहल, यवन आदिक जातियाँ-जनजातियाँ- बर्बर जातियाँ ‘म्लेच्छ’ कहलाती […]
यहाँ उन शब्दों के प्रयोग के लिए अनुरोध किया गया है, जो शुद्ध हैं और उपयुक्त भी। कृपया अपने लेखन में उन शुद्ध शब्दों को स्थान देकर समाज का भाषिक मार्गदर्शन करें। ★ ‘प्रावधान’ के […]
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘क्ष’, ‘त्र’, ‘ज्ञ’ आदिक अक्षर यदि संयुक्ताक्षर हैं तो दोहा-संरचना में ‘दो मात्राओं’ की गणना क्यों नहीं? जब संयुक्ताक्षर के उच्चारण में दो प्रकार की ध्वनि का सम्मिश्रण है तब […]
जिन्होंने पी०सी०एस०-साक्षात्कार परीक्षा में हमारे विद्यार्थियों से प्रश्न किया है– मुख्यमन्त्री शब्द से पहले ‘श्री’ लगेगा अथवा नहीं, उनसे हमारा प्रश्न है– उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री का नाम हमने नीचे लिखा है। आपको इनमें से शुद्ध […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘भाषापरिष्कार-समिति’ केन्द्रीय कार्यालय, प्रयागराज। शब्द : भारी बहुमत से; प्रचण्ड बहुमत से; बहुत भारी बहुमत से; भयंकर बहुमत से ये सभी शब्द अब सार्वजनिक सम्पत्ति बन चुके हैं; ज़ाहिर है, ‘पंचायती […]
प्रथमत: ‘लेखन’ और ‘रचना’ की वस्तुपरकता और विषयपरकता पर दृष्टिनिक्षेपित करना अत्यावश्यक है। इन दोनों शब्दों की अर्थ, अवधारणा तथा परिभाषा में भिन्नता है। ‘लेखन’ तो किसी भी प्रकार का हो सकता है; परन्तु ‘रचना’ […]
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘भाषा-परिष्कार-समिति’केन्द्रीय कार्यालय, इलाहाबाद! अब अनिवार्य हो गया है, देश के मीडिया-तन्त्र (मुद्रित-वैद्युत) में प्रत्येक स्तर पर काम करनेवाले-वालियों संवाददाताओं, समाचारलेखकों, समाचारवाचकों, सम्पादकों, प्रधान सम्पादकों, प्रूफ़-संशोधकों उद्घोषकों, सूत्रधारों आदिक के लिए […]
आइए! शब्द-मन्थन कर, शब्द-सामर्थ्य अर्जित करें। ★ शब्द है— ‘आयाम’। प्राय: हमारे अधिकतर अध्यापक, विद्वज्जन, साहित्यकार, समीक्षक, मीडियाकर्मी आदिक ‘आयाम’ का अनुपयुक्त प्रयोग करते-कराते आ रहे हैं— चाहे वह वाचिक हो अथवा लिखित हो; फलत:, […]
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘दैनिक जागरण-परिवार’ ने ‘हिंदी हैं हम’ के अन्तर्गत हमारी भाषा-शुचिता अभियान को गति देते हुए, ‘शहीद-शहादत’ तथा ‘शहीद की पत्नी’ के स्थान पर हमारी भारतीय संस्कृति, परम्परा तथा मूल्यबोध से […]
‘अरबी-फ़ारसी’ शब्दों का शुद्ध प्रयोग करना सीखें आज हम लीक से हटकर उस मार्ग पर चलेंगे, जिस पर चलने का साहस हमारे ‘विद्वज्जन’ नहीं कर पाते हैं; और वह मार्ग है, ‘विलक्षण ज्ञानमार्ग’। हम जब […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज (१७ जून) से ‘दैनिक जागरण’ ने ‘साइण्टिस्ट’ की शुद्ध हिन्दी ‘विज्ञानी’ शब्द का प्रयोग आरम्भ किया है, जो हमारे शिक्षित समाज के लिए एक प्रकार की अमूल्य शिक्षा है। […]
——– ‘नुक़्त:’ का प्रयोग ——– किस भाषान्तर्गत किस-किस शब्द में नुक़्त: (बिन्दी; अरबीभाषा का शब्द) का प्रयोग होगा, यह सतत अध्ययन और साधना का विषय है। बिना अध्ययन और अध्यवसाय के अनुचित प्रश्न-प्रतिप्रश्न करना, जड़बुद्धिता […]
कृपया ध्यान करें (‘ध्यान दें’ अशुद्ध प्रयोग है; क्योंकि ध्यान क्रियात्मक शब्द है। ध्यान किया जाता है; दिया नहीं जाता।) १- यथोचित स्थलों पर तिथि के बाद अल्प विरामचिह्न (,) लगाकर वर्ष लिखा जाता है; […]
शुद्ध शब्दप्रयोग (उदाहरण-सहित)यहाँ ‘से’ के स्थान पर ‘में’ का प्रयोग होता है; समझें :–★ मेरी समझ ‘में’ ऐसा ही है।★ तीव्र गति ‘में’ गाड़ी मत चलाओ।★ देर ‘में’ मत आना।★ गाड़ी देर ‘में’ आयेगी।★ क्रम […]
■ निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध कीजिए।★ कल रुई(रूई) की खेती होती है। सकारण उत्तर–यह प्रश्न देखने में सहज लग रहा है, जबकि है नहीं। पहली बात, इस वाक्य में ‘कल’ शब्द का प्रयोग है, जो […]
यह ‘समय’ (छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश) के समाचार-चैनल का चित्र है। इस चैनल के चित्र को ध्यानपूर्वक देखें। सबसे नीचे के समाचार-शीर्षक को पढ़ें :— ० सभी मृतक लकड़ी से लदे ट्रैक्टर में सवार थे। इस सामाचारिक वाक्य […]
यह है, ‘न्यूज़ 24’ समाचार-चैनल। नीचे ‘न्यूज़ 24’ समाचार-चैनल-द्वारा २४ फ़रवरी, २०२० ई० को प्रसारित किये गये दो समाचार दिखाये गये हैं। आप अब नीचे प्रदर्शित किये गये दोनों चित्रों के भाषिक सत्य को समझें […]
भाषा व्यक्तित्व को निखारती है और उसमें एक सुखद आकर्षण भी उत्पन्न करती है। आइए! अपने व्यक्तित्व को सँवारें। सौन्दर्य और सौन्दर्य-बोध की अवधारणा :— कोई भी कविता ‘सुन्दर’ अथवा ‘nice’, ‘beautiful’, ‘great’ नहीं होती […]
★ हिन्दी-वर्णमाला की कुल संख्या ★ वर्णमाला के अन्तर्गत वर्णों की कुल संख्या ‘हिन्दी-वर्णमाला’ में वर्णों की कुल कितनी संख्या है? इस प्रश्न का विस्तृत और विशद उत्तर लिखते हुए, विद्यार्थियों, यहाँ तक कि अधिकतर […]
★ आप ‘कितने’ पानी में हैं, टटोलिए! १- आपके घर के ठीक पीछेवाले घर से, दायीं ओर से चौथा घर किसका है ? २ – आप घर से जब नित्य जिस विद्यालय में अथवा जिस […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे पास एक विद्यार्थी ने ऊपर अंकित प्रश्न भेजा है; क्योंकि वह प्रश्न के विकल्प को समझ नहीं पा रहा है। उसने यह नहीं बताया है कि उक्त प्रश्न किस परीक्षा के […]
यहाँ पृथक् प्रकार के तीन वाक्य दिये गये हैं, जो दोषपूर्ण हैं। वे दोष कई प्रकार के हैं। वाक्य की प्रकृति को समझते हुए, हमने उन सभी दोषों पर सांगोपांग विचार करते हुए, उनका दोषमुक्त […]
◆ नीचे दिये गये ‘चित्र’ को गम्भीरतापूर्वक देखें। ■ न हिन्दी और न ही अँगरेजी का बोध! ‘बस-विभाग’ की मूढ़ता अथवा ‘वाराणसी विकास प्राधिकरण’ का प्रमाद कहा जाये– न हिन्दी का संज्ञान और न ही […]
प्रतिभाशाली विद्यार्थी वही होता है, जो शब्दानुशासन को सम्यक् रूपेण धारण करता हो। जिसके पास विद्या होती है, वही विद्यार्थी कहलाने का अधिकारी होता है; क्योंकि विद्यार्थी का मूल आभूषण ‘विनयशीलता’ है और विद्या ही […]
‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ की ओर से शोधविद्यार्थियों के पथप्रदर्शन-हेतु मास-पर्यन्त एक कर्मशाला आरम्भ करने पर विचार किया जा रहा है। उसके लिए कर्मशाला में सम्मिलित होनेवाले शोधार्थियों से एकमुश्त एक निर्धारित शुल्क लिया […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- हमारे हिन्दीशब्दकोशकारगण ने हिन्दीशब्दकोश के नाम पर ‘कबाड़ख़ाना’ बनाया है। इसका मुख्य कारण है कि उन्होंने उद्देश्यपरक कोश तैयार नहीं किये हैं। उद्देश्यपरक का प्रश्न इसलिए कि कौन-सा शब्द देशज/देसज है; तद्भव […]
‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ की ओर से प्रयागराज से ५ नवम्बर से आरम्भ अभिनव और अभूतपूर्व अभियान ‘अपनी भाषा सुधारिए’ दैनिक जागरण’ समाचारपत्र-कार्यालय से आरम्भ होकर दूरदर्शन-केन्द्र, प्रयागराज में विराम लिया है, जो कि […]
● ‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ की ओर से ‘अपनी भाषा सुधारिए!’ अभियान प्रयागराज में नवम्बर-माह के प्रथम सप्ताह से प्रारम्भ होगा। ★ अभियान का प्रथम चरण :– (समय : दस मिनट) हिन्दीभाषानुरागीजन प्रयागराज के […]
अधिकतर लोग का मानना है कि चिकित्सा,अभियान्त्रिकी, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, रक्षा-प्रतिरक्षा-आरक्षा, कृषि, वानिकी आदिक विषयों के विद्यार्थी और अध्यापक ‘हिन्दी-भाषा’ को ग्रहण करने, सीखने, संशोधित-परिष्कार करने के प्रति सजग और जागरूक नहीं रहते। उन लोग की मान्यता […]
● (शब्दों में प्रतिदिन वृद्धि की जा रही है।) शुद्ध शब्द हैं :– आर्द्र, उद्दण्ड, कर्त्ता, कर्त्तव्य, कर्तृत्व, कर्त्तव्य, वार्त्ता, सान्निध्य, बहुव्रीहि, अन्त:स्थ, कार्यकर्त्ता, कार्यकर्त्री, क़ाबिलीयत, गृहिणी, वाङ्मय, विद्वज्जन, शुभेच्छु, पैतृक, क्षत्रिय, शख़्सीयत, आप्रवासी, अनिवासी, […]
फ़स्ल दोगुणी प्रत्युत्पन्नमति जिजीविषा विजिगीषा श्रद्धाञ्जलि/श्रद्धांजलि सुषुप्ति जागर्ति जाग्रत् के गणनानुसार प्रवहमान आद्यन्त प्रामाणिक परीक्षोपयोगी सम-सामयिक उच्चतम न्यायालय परिषद् कोंपल आनुवंशिक विद्यालयीय जन्मे जन्मी कार्यालयीय चारों ओर क्रियान्वयन् श्रीमति! देवि! प्रियजन बच्चो! बृहत्तर अन्योन्याश्रित परिशिष्ट […]
शुद्ध शब्द हैं :– कर्त्ता कर्त्तव्य कर्तृत्व कर्त्तव्य वार्त्ता सान्निध्य बहुव्रीहि अन्त:स्थ कार्यकर्त्ता कार्यकर्त्री क़ाबिलीयत गृहिणी वाङ्मय विद्वज्जन शुभेच्छु पैतृक क्षत्रिय शख़्सीयत आप्रवासी अनिवासी दीप प्रज्वलित प्रज्वल उज्ज्वल पीयूष एलान रंग-विरंगे नन्हे-मुन्ने प्रविधान आरोपित जन्मतिथि […]
१. कार्यकर्त्री २. काबिलीयत ३. शख़्सीयत ४. आप्रवासी ५. दीप प्रज्वलित ६. एलान ७. रंग-विरंगे ८. नन्हे-मुन्ने ९. प्रविधान १०. आरोपित ११. जन्मतिथि १२. सौहार्द १३. मिष्टान्न भण्डार १४. एतिराज १५. बिलकुल १६. करगिल १७. […]
नीचे दी गयी संस्थान टीन-पट्टिका को ध्यानपूर्वक देखिए। वह संस्थान ‘भरद्वाज-आश्रम’, प्रयागराज के सामनेवाले मार्ग पर स्थित है। टीन की यह पट्टिका वर्षों से संस्थान के प्रवेशद्वार के ऊपर लगी हुई है। इस संस्थान में […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- प्रेमचन्द-विषयक इस विशेषांक में प्रत्येक स्थान पर ‘प्रेमचन्द्र’ ही छपा है। एक-दो स्थान पर होता तो मुद्रणप्रणाली के प्रक्रियान्तर्गत एक सामान्य भूल मानी जा सकती थी; परन्तु यहाँ तो ‘अज्ञान की सञ्चित […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– हमारे देश के ९५ प्रतिशत से अधिक मीडियाकर्मी और अधिवक्ता यह नहीं जानते कि ‘धारा’ और ‘अनुच्छेद’ में क्या अन्तर है। यही कारण है आज तक हमारे मीडियाकर्मी और अधिवक्ता ‘अनुच्छेद ३७०’ […]
● एक ‘भाषाविज्ञानी’ का ‘देश के समस्त संस्कृत-हिन्दीभाषा के पण्डितों’ से एक तार्किक प्रश्न :– ‘अयोगवाह’ (ं और ः) को जब न ‘स्वरों’ ने स्वीकार किया है और न ही ‘व्यंजनों’ ने, अर्थात उन दोनों […]
नवाचार के अन्तर्गत शीतांशु त्रिपाठी ने बनाया ऑटोमैटिक डस्टबिन- रिपोर्ट: राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– राघौगढ़ की जेपी यूनिवर्सिटी में बीटेक के छात्र शीतांशु त्रिपाठी ने वायरलेस इंटनेट पर आधारित मैकेनिकल तकनीक से लैस खास डस्टबिन […]
आज ‘गुरु पूर्णिमा’ है। ★ आषाढ़-मास की ‘पूर्णिमा’ को ‘गुरु पूर्णिमा’ की संज्ञा दी गयी है। इस सारस्वत पर्व पर ‘गुरुस्मरण’ का विधान है। ● डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला हिन्दी-व्याकरण का नियम वाक्य-विन्यास :- […]
लिपि : जिस प्रकार भाषा की उत्पत्ति कब से हुई है, इसका कोई सर्वमान्य उत्तर अब तक प्राप्त नहीं हो सका है उसी प्रकार लिपि की व्युत्पत्ति का प्रश्न मात्र ‘प्रश्न’ बनकर रह गया है। […]
‘दैनिक जागरण’ की ‘शनिवासरीय’ प्रस्तुति ‘भाषा की पाठशाला’ में हम ‘दो शब्दों’ पर सम्यक् रूपेण विचार करते हैं और अन्त में उन शब्दों के प्रति अपनी पाठक-पाठिकाओं को जागरूक करते हैं, जो अनभिज्ञता के कारण […]
यह घटना बलिया ज़िले की है। गाँव ‘सुखपुरा’ है। एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला मुझसे मिली थी। वह अर्द्ध-शिक्षिता थी। उसका पति झारखण्ड में कोयलरी (कोयला-कारख़ाना) में काम करता था। वह महिला अपने पति […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- शब्द परा है तो अपरा भी; शब्द ज्योति है तो तिमिर भी; शब्द स्थूल है तो सूक्ष्म भी; शब्द नूतन है तो पुरातन भी; शब्द रुदन है तो हास भी; शब्द सौम्य […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- जो भी व्यक्ति इस विषय का पक्षधर है कि उसके लिए ‘भाषा-शुचिता’ से अधिक ‘मात्र सम्प्रेषणीयता’ का महत्त्व है, ऐसे लोग मेरी मैत्री-सूची से स्वयं को ‘सदैव’ के लिए पृथक् कर लें; […]
◆ प्रश्नपत्र बनानेवाले ‘प्रधानाध्यापक’, ‘लौकिक’, ‘द्विगु’, ‘कपड़ा’ आदिक नहीं लिख सके डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय २२ दिसम्बर-२३ दिसम्बर, २०१८ ई० को ‘ग्रामविकास-अधिकारी’ की परीक्षाएँ हुई थीं, जिनके सभी ‘सेट कोड’ और ‘परीक्षा पुस्तक सीरीज़’ में बड़ी […]
यहाँ पृथक् प्रकार के तीन वाक्य दिये गये हैं, जो दोषपूर्ण हैं। वे दोष कई प्रकार के हैं। वाक्य की प्रकृति को समझते हुए, हमने उन सभी दोषों पर सांगोपांग विचार करते हुए, उनका दोषमुक्त […]
‘शब्द’ आप्त (प्रामाणिक, निष्णात)मनुष्य-द्वारा व्यक्त ज्ञान है। विज्ञ और पाठक-वर्ग को किसी भी ‘गर्हित मानव-कृत धर्म’ से स्वयं को पृथक् कर, ‘शब्द-संस्कार’ संवर्धन करने की सामर्थ्य अर्जित करनी चाहिए और अपने लोक में शब्द-संधान करना […]
यहाँ उन शब्दों के शुद्ध वर्तनी और शब्दार्थ दिये गये हैं, जिनका हमारा प्रबुद्ध-वर्ग अपने वाचन और लेखन में प्रयोग करता है। ऐसे शब्दों को हिन्दी ने आत्मसात कर लिया है। आप उन शब्दों पर […]
★ निम्नांकित शब्दों में से कोई एक शब्द ही शुद्ध है। आप शब्दों को व्याकरण की कसौटी पर कसते हुए, शुद्ध शब्द बताइए :– १- (क) अन्तेवासी (ख) अन्तःवासी (ग) अन्तवासी (घ) अन्ते:वासी २- (क) […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘छन्द-विधान’ पर अब नये सिरे से विचार करने की आवश्यकता है; क्योंकि कवि-कवयित्रियाँ ‘वर्तनी-अशुद्धि’ को प्रश्रय देते हुए, स्वेच्छाचारिता का परिचय देती आ रही हैं। अधिकतर सर्जक अपनी सुविधानुसार ‘लघु’ और ‘दीर्घ’ […]
★ अशुद्ध शब्द-प्रयोग देखें :—- साहित्येत्तर, विवाहेत्तर, पाठ्येत्तर, संग्रहित, गणमान्य, ख्याल, सूनसान, अनुग्रहित, बहुत बेहतर, सबसे बेहतरीन, बावजूद भी, अत्यन्त ही, प्राणप्रण, आद्यान्त, प्रवाहमान, सेवा-सुश्रूषा, शोधछात्र, विद्वतजनों, समर्थवान, गुणीजनों, कार्यकत्री। ★ शुद्ध शब्द :– साहित्येतर, […]
★ हमारे महान् साहित्यकार, समीक्षक, कवि-कवयित्री, शायर इत्यादिक बहुत गर्व के साथ मंचों के माध्यम से कहते हैं :—– ० मैंने अभी-अभी एक ताज़ी कहानी लिखी है। ० मैं एक ताज़ी ग़ज़ल पेश करती हूँ। […]
◆ ऊपर दिये गये ‘चित्र’ को गम्भीरतापूर्वक देखें। ‘रेलमन्त्रालय’ का अज्ञान; ‘रेलविभाग’ की मूढ़ता या फिर ‘वाराणसी विकास प्राधिकरण’ का प्रमाद कहा जाये– न हिन्दी का संज्ञान और न ही अँगरेजी का बोध! ★ […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यहाँ ‘ए०बी०पी० न्यूज़ समाचार-चैनल’ की ओर से बेचारी मंजू वर्मा को (शुद्ध शब्द ‘मंजु’), जो बिहार की ‘समाज-कल्याणमन्त्री’ हैं, और चन्द्रेश्वर वर्मा की पत्नी हैं, को श्रीमती मंजू वर्मा से कु० (कुमारी) […]
● रचना— किसी भी पद्य अथवा गद्य-कृति को ‘रचना’ कहते हैं | ● लेख— किसी विषय पर सांगोपांग अथवा एकांगी दृष्टि से विषय-प्रधान और शास्त्रीय पद्धति में प्रकाशित गद्यबद्ध विचारों को प्रकट करनेवाली रचना को […]
‘डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला’ अस्पष्ट भाषा/अपभ्रंश भाषा ‘म्लेच्छ-भाषा’ है। जिन वर्णों का उच्चारण व्यक्त न हो, वह ‘म्लेच्छ-भाषा’ कहलाती है। किरात, खस, बर्बर, पह्लव, पौण्ड्र, द्रविड, शक, शबर, सिंहल, यवन इत्यादिक जातियाँ-जनजातियाँ-बर्बर जातियाँ ‘म्लेच्छ’ […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, ‘भाषापरिष्कार-समिति’ केन्द्रीय कार्यालय, इलाहाबाद ——————————————————– शब्द : भारी बहुमत से, प्रचण्ड बहुमत से, बहुत भारी बहुमत से, भयंकर बहुमत से ——————————————————– ये सारे शब्द अब सार्वजनिक सम्पत्ति हो चुके हैं; ज़ाहिर है, […]