संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

यह जिंदगी भी किसी खेल से कहाँ कम है

October 26, 2021 0

कभी हँसाती है तोकभी रुलाती है।यह जिंदगीसमझ नहीं आती है?कभी खुशियां है तोकभी गम है ।यह जिंदगी भीकिसी.खेल सेकहां कम है।कभी दोस्त हैं तोकभी दुश्मन है ।तो जिंदगी मेंकही ग़म है तोकही हम है।कभी दिल […]

कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी

October 25, 2021 0

कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी , बिल्कुल ज़िंदगी की तरह शांत। लहरे पानी में भी उठती हैं, जिंदगी में भी । कुछ किनारे इनके थपेड़ो से टूट जाते हैं , फ़ना हो जाते […]

आगाज़

October 22, 2021 0

इन अंधेरों को बोलिएरोशनी का आगाज़ करें।इन नफरतों को बोलिएमोहब्बत का इजहार करेंइन दुखों को बोलिएसुखों का आगाज़ करें।इन ग़मो को बोलिएइश्क का थोड़ा इजहार करें।इन तारों को बोलिएहमारे चांद का आगाज़ करें।इन परवानों को […]

जिंदगी पर कविता

October 19, 2021 0

जिंदगी है एक अनमोल रत्नइसमे खुश रहने का करो प्रयत्न।दुःख की घड़ी भी आएगीपर सुख से दूर नहीं रह न पाएगी।जिंदगी मे क्या छूट गयाक्यों करते हो उसकी चिंता?बस आगे बढ़ते चलोजिंदगी की हकीकत सेकिसी […]

आवर्त्तन और दरार

October 18, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–रूप-रंग की हाट में, तरह-तरह तस्वीर।राँझा बिकते हैं कहीं, कहीं बिक रहीं हीर।।दो–धर्म पंथ औ’ जाति की, बिगड़ गयी है रीति।ऐसे में कैसे भला, सब तक पहुँचे प्रीति।।तीन–रुपया-रुतबा-रूपसी, बहुत भयंकर […]

कोरोना आया कोरोना आया, हर घर को पाठशाला बनाया

October 17, 2021 0

कोरोना आया कोरोना आया,ऑनलाइन शिक्षा की नीति लाया,स्कूल जाना बंद करवाया,हर बच्चों के हाथ में फोन पकड़ाया,हर घर को पाठशाला बनाया,हर घर पाठशाला से अब हम पढ़ते,गूगल मीट से भी अब हमअध्यापकों से शिक्षा ग्रहण […]

राम

October 15, 2021 0

राम-राम करते होतुम रावण बनने केलायक भी नहीं।ज्ञान-ज्ञान करते होतुम अज्ञानी बनने केलायक भी नहीं।ध्यान-ध्यान तुम करते होतुम ज्ञान केलायक भी नहीं।स्वयं को न जानान ही पहचाना कभीफिर भी महाज्ञानीबने फिरते हो।राम तो कण-कण में […]

क्यों जलाते हो मुझे

October 15, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा अरे कलयुगी दानवो, मेरे पुतले को जलाने वालोंमैं नहीं कहता कि मत जलाओ मुझे ,लेकिन क्यों जलाते हो मेरे पुतले को यह तो बताओ मुझे ।तुम तो मुझे धर्मात्मा और ज्ञानी पंडित […]

मेरी पहचान हैं, मेरे पापा

October 14, 2021 0

मेरी पहचान हैं,मेरे पापा।मेरी हर खुशी हैं ,मेरे पापा।मेरी जान हैंमेरे पापा।मेरा हौसला हैं ,मेरे पापा।मेरा जनून हैं,मेरे पापा।मेरी मुसकान हैं ,मेरे पापा।मेरा सुख हैं,मेरे पापा। संजना (11वीं कक्षा की छात्रा)कांगड़ा हिमाचल प्रदेश।

शैलपुत्री

October 7, 2021 0

हे शैल सुता विनती सुन लोहे वृषभ वाहिनी तुम सुन लोअंतर से तुम्हें बुलाता हूँदुख सन्ताप सारे सुनाता हूँमैं पीड़ा देश की गाता हूँजन जन का दुखड़ा गाता हूँ।जब जब ह्रदय को चोट लगेमैं शरण […]

गांधी-दर्शन

October 3, 2021 0

गांधी के सपनों का भारत आओ मिलकर हम बनाएं।गांव -गांव और ढाणी -ढाणी शिक्षा का दीप जलाएं।। रामराज्य की कल्पना को आओ मिल साकार बनाएं।भारत माँ के वीर सिपाही हम इस गुलशन को महकाएँ।। सत्य […]

मुश्किल है इस जहाँ में कहीं सादगी मिले

October 1, 2021 0

आओ करें तलाश कहीं ज़िन्दगी मिले।शायद किसी शहर में कोई आदमी मिले।। खंजर कहीं कटार कहीं हाथ में पत्थर।मुश्किल है इस जहाँ में कहीं सादगी मिले।। उजड़े हुए हैं गाँव तो जलते हुए शहर।उठती नज़र […]

गुरु-शिष्य

September 27, 2021 0

गुरु-शिष्य का रिश्ता हैप्रेम भाव से निभता है।गुरु ज्ञानरत्नों का भंडार हैदेकर शिष्य को,दिलवाता समाज मेंप्रतिष्ठा मान-सम्मान है।शिष्य गुरुचरणों मेंजब झुकता है ,तभी तो उसकोज्ञान अमृत फल मिलता है।आओ,गुरुओं का मान करेंमिलकर दिल सेउनका सम्मान […]

सोचता हूँ आज कुछ लिखूँ!

September 23, 2021 0

सोचता हूँ आज कुछ लिखूं,पर क्या लिखूं?दर्द, प्रेम, गरीबी ,बीमारी या भूख !या लिखूं दो वो सपना जिसे मेरे पिता देखते हैं ,मेरे इलाहाबाद में मौजूद होने पर ।या लिख दूँ भूखे कामगारों के शोषण […]

यादों की एक कापी

September 15, 2021 0

आखिरी भ्रम थाछटने लगा धुंध परछाईयों सेतुम मेरे साथ हो ! अजीब किनारे से चुप होकरप्रतिक्रिया देने के लिए हर बारएक सीधा सवाल कर जाते हो । आखिरी भ्रम थाये सीधी सरल जिंदगी अभीदो कदम […]

कविता : फिर से

September 10, 2021 0

फिर से, तुमको जीवन कीमर्यादा के लिएउठना होगा।तुमको मानवता कीउदारता के लिएफिर सेउस ईश्वर के आगेझुकना होगा।तुम्हें असत्य कोहराने के लिएफिर सेसत्य से जुड़ना होगा।तुमको मानवता कीरक्षा के लिएफिर सेहार कर भी जीतना होगा। राजीव […]

शिक्षक : ‘वेतन भोगी सोच’ है, शिक्षक-सुचिता व्यर्थ

September 6, 2021 0

ऐसी दुर्गति शिक्षकी, चिन्तन,चिन्ता माथ ।बरसों से है घिस रही, झाड़ू अपने हाथ ।। ‘वेतन भोगी सोच’ है, शिक्षक-सुचिता व्यर्थ ।शिक्षणेत्तर बोझ ने, कर दिया बेड़ा गर्क ।। दौड़ा-दौड़ा फिर रहा, निपटाऊ हर वर्क।हाय शिक्षकी […]

सलामे इश्क़ के नाम कहो! बग़ावत लिख दूँ

September 5, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ख़ता क़ुबूल हो तो कहो! नफ़ासत लिख दूँ,पयामे इश्क़ के नाम इक वरासत लिख दूँ।न झुकाओ निगाहें चिलमन उठाकर आज,सलामे इश्क़ के नाम कहो! बग़ावत लिख दूँ।बला हो, हूर हो […]

तनहाई की अँगड़ाई दे दो तो कोई बात बने

September 5, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे होठों का रंग चुरा लो तो कोई बात बने,तनहाई की अँगड़ाई दे दो तो कोई बात बने।कानेमलाहत१ हो तो बदन को शराफ़त सिखलाओ,ख़ुशअक्ख़लाक़२ पैरहन३ ले लो तो कोई बात […]

“डंके की चोट पर”!

August 31, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज एक–हमारी फ़क़ीरी तुझसे बहुत जुदा है प्यारे!ख़ुद को फ़क़ीर बना, पाप का महल बनाता?दो–ग़रीब की कुटिया ग़र उजाड़ेगा, जल जायेगा बद्दुआ से उसकी।तेरे सिरहाने-पैताने किराये के लोग रोनेवाले होंगे।तीन–अपने हक़ […]

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