कुछ सिसकियाँ हम तक रहें तो बेहतर है

March 31, 2024 0

●आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• हमारी बात, हम तक रहे तो बेहतर है,हमारा साथ, हम तक रहे तो बेहतर है।चादर देखकर ही, पाँव हम पसारा करते,हमारा ख़्वाब, हम तक रहे तो बेहतर है।जनाब! आप तो हमारे […]

आओ हम स्कूल चलें, नवभारत का निर्माण करें

March 29, 2024 0

आओ हम स्कूल चलेनव भारत का निर्माण करें। छूट गया है जोबंधन भव काआओ मिलकर उसकोपार करें,आओ हम स्कूल चले॥ जाकर स्कूल हमगुरुओं का मान करेंबड़े बूढ़ों का कभी नहम अपमान करें,आओ हम स्कूल चले॥ […]

पकड़ गिराओ धर्मान्धों को!

March 25, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केवल चन्दा, दिखता धन्धा;भक्ति-भाव है, मन्दा-मन्दा।भक्त और भगवान् का नाता;खेल खेलते गन्दा-गन्दा।अन्धभक्ति का खेल निराला;गले पड़ा ज्यों निर्मम फन्दा।पकड़ गिराओ बहुरुपियों को;रगड़ो जैसे रगड़े रन्दा।क्रान्ति-पलीता आग छुआ दे;लाओ कहीं से […]

सामना

March 22, 2024 0

रुख पहाड़ों की तरफ कियातो समझ आयाजन्नत इस धरा पर भी है। रुख बादलों की तरफ कियातो समझ आयाबदमाशी इनमें भी है। रुख बहती नदी की तरफ कियातो समझ आयाजीवन का बहाव इनमें भी है। […]

चिलमन उठा, ‘सच’ बयानात हो जाने दो

March 18, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आँखों-ही-आँखों मे, रात हो जाने दो,या ख़ुदा! तसल्ली से, बात हो जाने दो।जिस मकाम पे, छोड़ आया था ज़िन्दगी,साहिब! इकबार मुलाक़ात हो जाने दो।भ्रम भी नसीहत दे रहा, उम्रे दराज़ […]

अटकाव

March 15, 2024 0

ताबीज तब ही काम आते हैंजब बोलने की तमीज हो।वक्त तब ही काम आता हैजब वक्त की कदर की हो।अजीज तब ही काम आते हैंजब उनमे तहजीब हो।भक्ति तब ही काम आती हैजब उसमें शक्ति […]

वसंत बेचारा संत!

March 14, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••• वसंतबेचारा संत हो गया।पंचमी का–वह कन्त हो गया।पतझर बौराया–वह अन्त हो गया।हा धिक्-हा धिक्!वह हन्त हो गया। (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ मार्च, २०२४ ईसवी।)

शिव तो शिव हैं

March 8, 2024 0

शिव समान यह शिशु सुशोभित, वरदानी सा पुलकित है। शिव विग्रह के साथ स्वयं भी, दिखता अति आलोकित है। नमः शिवाय, ओम जागृत, महारात्रि पर अभिजित है। डमरू के डिमडिम स्वर सुनकर, विश्वधरा भी गुंजित […]

सदाशिव, सबका शिव

March 8, 2024 0

मैं कालों का काल हूँमैं ही तो महाकाल हूँ।सत्य का पालनहार हूँअसत्य का करतासदा विनाश हूँ।मैं देवों का देव हूँमैं ही तो महादेव हूँ।अंधकार में करता प्रकाश हूँअंत का भी करता आरंभ हूँतभी तो मैं […]

बंटवारा

March 3, 2024 0

आओ भईया खेत खाली, व्यापार सीजन ऑफ है।अपना तुम हिस्सा बंटा लो, जो हमारे पास है। माता पिता ने जो संजोया, आपका अधिकार है।जो भी हिस्से में मिले, सबको वही स्वीकार है।। घर – खेत […]

सामंजस्य

March 1, 2024 0

जब आहत हृदयश्मशान बन जाए तोउसमें लाशे नहींभावनाएं राख हुआ करती है। जब विश्वासी हृदय मेंबिखराव आ जाए तोअपने और पराए नहींबस मौन रहा करता है। जब वेदिती हृदयराख बन जाए हैसुख और दुख नहींबस […]

चिलमन को सो लेने दो

February 24, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••• आँसू की तबीअत नासाज़ है पलकों को न छेड़ो। उसके गेसू मे इक अजीब-सी लर्जिश† की बुनावट है। ज़ख़्मी बूढ़े दरख़्त को, सिसकियाँ भर लेने दो। शम्अ न बुझाओ, तक्रीज़‡ […]

गणितसूत्र समझाता वय-वार्द्धक्य

February 24, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मन को तराशता हूँकसैला बिम्ब दिखता है।बूढ़े पलंग पर लेटा वय-वार्द्धक्यचुपके से जीने का गणितसूत्र समझाता है।मनमोहिनी माया मस्तिष्कतन्तु को,रुई का फाहा बनाकरआहिस्ते-आहिस्ते सरकाती है।अराजक ऐन्द्रियिक तत्त्व,सक्रिय होने लगते हैं।जीवनीशक्ति […]

बदलते जज्बात

February 23, 2024 0

आजकल बदलने लगे हैंतेरे अल्फाजतेरे शहर के मौसम के तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा अंदाजगिरगिट के रंग की तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा इश्कतेरी बेवफाई की तरह। आजकल बदलने लगा हैतेरा व्यवहारतेरी निग़ाह की तरह। […]

बेचैन धार नदी-संग करवटें बदलती रही

February 21, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• महब्बत को क़ब्रगाह मे दफ़्न कर लौटे हैं, ज़ख़्मी पाँव अभी, थोड़ी साँस उधार मे दे दो, सुबूत हैं आख़िरी दाँव अभी। परछाईं लगना चाहती है गले, शिद्दत से बूढ़े […]

मेरी जीत भी मेरी हार भी

February 19, 2024 0

कोई कह दे कि शाम हो गई हैअब यकीन नही होता।कदम-कदम पर अब तो बड़ा फरेब होता।चले कहाँ के लिए और आ गये कहाँखुशियों की चादर पर कोई सितारा दिखेये सितारे गगन को चूमते हैं।आँचल […]

Sanatan teachings are the ancient way of life

February 18, 2024 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’ Sanatan teachings are the ancient way of life. Embracing both the form and formless divine. God’s essence, soul’s liberation, profound. Sanatan Dharma, the path profound. In saguna and nirguna, God resides. […]

बदलियां गल्ला (पहाड़ी कविता)

February 16, 2024 0

अज्ज कल बदलना लग्गियांतेरियां गल्लांतेरे शहरे दे मौसमे सैंई। अज्ज कल बदलना लग्गा।तेरा अंदाजगिरगिटे दे रंगे सैंई। अज्ज कल बदलना लग्गातेरा प्यारतेरे रुसदे चेहरे सैंई। अज्ज कल बदलना लग्गातेरा व्यवहारतेरियां नजरा सैंई। अज्ज कल बदलना […]

सरस्वती-वंदना : श्वेता! धवला! वाग्देवी! शब्ददान दीजिए

February 14, 2024 0

श्वेता! धवला! वाग्देवी! शब्द-दान दीजिए।आपका हूँ दास मातु, ज्ञान-मान दीजिए।आपका वरदहस्त, मूल्य से भी मूल्यवान।शब्दों मे मेरे राम हों, वरदान मातु दीजिए।श्वेता! धवला! वाग्देवी! शब्द-दान दीजिए।आपका है दास राघव, ज्ञान-मान दीजिए॥ आपसे ही शब्द-शक्ति, आप […]

Poem : Loyalty of Great Horse Shubhrak

February 12, 2024 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– On land of India, where tales do roam.Lessons of valor, both beast and home.Loyal animals, hearts they have sown,In loyalty and courage, they have shown. In kingdom of Mewar, a horse stood […]

दस्तूर

February 9, 2024 0

बहता है दर्द तोलफ़्ज़ों में पिरो दोझरता है इश्क़ तोअल्फाज़ो में बटोर लो। मिलता नहीं कोईशख्स इश्क करने कोतो ख्वाबों मेंकिसी से इजहार कर दो। मिलता नहीं कोई अपनाहाल-ए-दिल बतलाने कोतो परायों से थोड़ीगुफ्तगू कर […]

ज़िन्दगी का मक़्सद बन!

February 6, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• घिसटते हुए टायर की तरह ज़िदगी जीनेवालो! अपने भीतरभरी हवा की इज़्ज़त करना सीखो। फटे बाँस की तरह चरचपर चरचरमरमर करती ज़िन्दगी, एहसासात को छूती तो है, बूझती नहीं; ताड़ती […]

सत्तालोभी दिख रहे, जनता-हित है गोल

February 6, 2024 0

——० यथार्थ-दर्शन– छ: ०—– ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–आँखों-अन्धे नयनसुख, मनमिट्ठू के बोल।सत्तालोभी दिख रहे, जनता-हित है गोल।।दो–रागी-वैरागी यहाँ, रँड़ुओं का संसार।कामी-कंचन-कामिनी, माया अपरम्पार।।तीन–नेता आतंकी बने, बाँट रहे हैं देश।बोल विषैले बोलते, नक़्ली दिखते […]

मेरा जमाना

February 2, 2024 0

मुझे वो पगडंडियाँअब दिखती नहींजिन पर मैं चला करता था। मुझे वो आम के बागअब नहीं मिलतेजिन्हें देख नन्हे मन मचलता था। मुझे वो नदियांअब नहीं मिलतीजिनमें बाल-गोपाल नहाया करते थे। मुझे वो सुकून की […]

नज़रें जिधर घुमाइए, दिखते चोर-दलाल

February 2, 2024 0

——० यथार्थ-दर्शन– पाँच०—– ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–जनता हालत दिख रही, मानो हुई हलाल।नज़रें जिधर घुमाइए, दिखते चोर-दलाल।।दो–छीलो कटहल बैठकर, देखो नंगा नाच।चड्ढी टँगती खूँट पे, फोड़ो सिर पर काँच।।तीन–कोई हो राजा-प्रजा, नहीं दिखे […]

बदले अन्दाज़ हैं; भाँपिए ज़रूर

February 1, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• सीरत की बनावट पे मत जाइए,सूरत की सजावट पे मत जाइए।महब्बत की राह मे हैं धोखे बहुत,नज़रों की बुनावट पे मत जाइए।प्यासे हैं तो पीकर खिसक लीजिए,नदियों की गुनगुनाहट पे […]

देखो जनता बँट गयी, धर्म, वर्ग औ’ जाति

January 31, 2024 0

——-० यथार्थ-दर्शन ०——- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राजनीति की कोठरी, कितनी है बदरंग!चेतन-पक्ष अलक्ष है, कूप पड़ी है भंग।।दो–जनहित दिखता है कहाँ, प्रतिनिधि बिकते रोज़।गुण्डे-लम्पट हैं दिखे, कौन करेगा खोज?तीन–दिखे कुशासन देश मे, न्याय […]

जनता हालत यों दिखे, रहा गिद्ध ज्यों नोच

January 29, 2024 0

——–० यथार्थ-दर्शन ०——- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–महँगाई है मारती, भूख करोड़ों लोग।कुछ मरते हैं भोग से, कुछ मरते हैं रोग।दो–सिर पर छत दिखती नहीं, आस एक विश्वास।अपने मन के सब यहाँ, नहीं दिखे […]

व्यक्तित्त्व का डर

January 26, 2024 0

धूप में तपा हुआ आदमीछाया में झुलस रहा है। हवा में बहता हुआ आदमीतूफानों से डर रहा है। आग से पका हुआ आदमीधूप में जल रहा है। अपनी बातों सेजख्मी करने वाला आदमीतलवार की नोक […]

जो बच गये हैं पल, उन्हें अब तो मोलिए

January 25, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••• होठों को दे ज़बाँ, अजी! कुछ तो बोलिए,बन्द कोठरी मे राज़, ज़रा उनको खोलिए।बेहोश थे तब आप, बड़े बोल बोले थे,बाहोश अब आप, उन शब्दों को तोलिए।ग़फ़्लत मे पड़कर वक़्त, […]

हमारा तिरंगा

January 24, 2024 0

आजादी की है शान तिरंगा।भारत देश की है शान तिरंगा।घर-घर में लहराये तिरंगा।हमको जान से प्यारा तिरंगा।दुनिया में सबसे है न्यारा तिरंगा।सबकी आँखों का है तारा तिरंगा।तिरंगा कितना प्यारा हमारा।तीन रंग का मेल है सारा।सदा […]

कच्ची कविता : गणतंत्र दिवस

January 24, 2024 0

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है। भारत में बड़े उत्साह से झंडा फहराया जाता है। इस राष्ट्रीय त्योहार को बच्चे स्कूल झंडे लाते है। 26 जनवरी को देशभर में प्रोग्राम किए जाते हैं। […]

जन-जन के राम सबके राम

January 22, 2024 0

आज खुशी का पल,प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा का क्षण।घर मंदिर है पांँच दीप जलाऊँ,पुष्प से सजाऊँ, पीला अक्षत चढ़ाऊँ।प्रभु का निमंत्रण पत्र आयासज गई अयोध्या नगरी। जिनके लिए सदियों से अखियांँ तरस गई,बाईस जनवरी दो […]

सुन राम!

January 22, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••• राम!तू राम नहीं, ‘मरा’ है।भूल जा!‘मरा-मरा’ कहनेवालेकभी ‘राममय’ हो जाया करते थे,तब ‘सच्चरित्र’ होता था;होती थी, ‘सदाचरण’ की सभ्यताऔर होती थी, धर्म के मर्म की समझ।तेरा नायकत्व,प्रतिनायकत्व का रूप ले […]

राम-राम

January 20, 2024 0

राम-राम करते होतुम रावण बनने केलायक भी नहीं।ज्ञान-ज्ञान करते होतुम अज्ञानी बनने केलायक भी नहीं।ध्यान-ध्यान तुम करते होतुम ज्ञान केलायक भी नहीं।स्वयं को न जानान ही पहचाना कभीफिर भी महाज्ञानीबने फिरते हो।राम तो कण-कण में […]

बिल्ली घण्टी बाँधने, पहल करेगा कौन?

January 18, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राम सिया-बिन किस लिए, प्रश्न उछलता रोज़।मुँह-दरवाज़े बन्द हैं, कौन करेगा खोज?दो–मन्दिर दिखे अपूर्ण है, प्राण-प्रतिष्ठा-प्रश्न।मूल समस्या गर्त मे, मना रहे सब जश्न।।तीन–राजनीति की गोद मे, खेल रहे हैं राम।उल्लू […]

अजीब मोड़ पे, दिखी ज़िन्दगी

January 16, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••• होठ बुदबुदाये, कह न सका,भाव उमड़ाये, बह न सका।विचार फैले, चादर हो गये,सिकोड़े थे, पर तह न सका।बूढ़े ज़ख़्म, नासूर बन गये,दबाया ज़रूर, सह न सका।संदेश बहुत, राम-रहीम के,ज़ेह्न बेचारा, […]

कवि-सम्मेलन

January 14, 2024 0

मंच पर वेद्विअर्थी गीत गा रहे थे;लगातार हीगिरते जा रहे थे;ऐसे गिरे हुए कवि और संचालक‘कविता’ को उठा रहे थे;हद तो यह थी–सब-के-सब श्रोतागणकविता की इस दशा परताली बजा रहे थे! ✍ घनश्याम अवस्थी९४५१६०७७७२

कविता– मकर-संक्रान्ति

January 14, 2024 0

मकरसंक्रांति का दिनहै आया ,पूरा भारत है हर्षाया।शीत ऋतु अब जाने को है,कुछ ऐसा सन्देशा लाया। गंगा का अवतरण दिवस है,सगरपुत्रों का तरण दिवस है।गंगा सागर अवगाहन का,एक मात्र यह पुण्य दिन आया। मकरसंक्रान्ति का […]

आन्तरिक गुनहगार

January 13, 2024 0

उन्होंने कहाहम बहुत अच्छे हैंहमने कहाहोंगे अपनी नजर में। उन्होंने कहाहम दिलकश इश्क करते हैंहमने कहाकरते होगे गैरों से। उन्होंने कहाहम सिकंदर हैं हर काम मेंहमने कहाहोगे बस इस दुनिया के। उन्होंने कहाहम जानते हैं […]

कविता : फ़र्क

January 5, 2024 0

जमीन और आसमान मेंफर्क होता है।झूठ और सच मेंफर्क होता है।मोहब्बत और नफरत मेंफर्क होता है।अपने और पराये मेंफर्क होता है।जीत और हार मेंफर्क होता है।दिमाग और दिल मेंफर्क होता है।जायज और नाजायज मेंफर्क होता […]

है निशि-दिवा-सी घूमती सर्वत्र विपदा-सम्पदा

January 1, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–साथ-साथ चलता रहा, वर्ष-हुआ अवसान।मन-मंथन मथता रहा, कहाँ मान-अपमान?दो–घूँघट काढ़े मौन है, अवगुण्ठन-सी देह।सहमे-सकुचे धर रहे, पाँव-पाँव अब गेह।।तीन–मलय मन्द मुसकान ले, बढ़े जोश के साथ।जन-जन अगवानी करे, झुका-झुका कर […]

अवसान को प्राप्त हुए मेरे सहयात्री!

January 1, 2024 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• विश्वसनीय एकवर्षीय सहयात्री!अपने बलिष्ठ कन्धों पर,तीन सौ पैंसठ दिवसीय अनियन्त्रित-नियन्त्रित भारप्रतिक्षण लादकर,अनवरत-अनथक यात्रा करते-करते,तुम अतीतोन्मुख हो चुके थे।त्वरित गति मे कृषकाय१ होते,तुम्हारे स्कन्धप्रान्त२,क्लान्त३ होते अनुभव करा चुके थे।तुम श्रान्त ४ […]

नया वर्ष

December 30, 2023 0

नया वर्ष नया पैगाम लाया है।नफरत नहीं मोहब्बत काएहसास लाया है।नया वर्ष नया जुनून लाया है।हार नहीं जीत काख्वाब लाया है।नया वर्ष नयी बहार लाया है।खिलती नहीं जो कलियांउनको फूल बनाने आया है।नया वर्ष नया […]

अर्ज़ किया है

December 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–इधर चंचल हवा, उधर शोख़ अदा,हालात बन गये, जाएँ तो कहाँ जाएँ ?दो–शाम का घनेरा ग़ज़ब, हवा के तेवर कसे हुए,एक ग़रीब के कफ़न से, सूरज ने आँसू पोछे हैं।तीन–मैने […]

मुश्किल

December 23, 2023 0

मुश्किल से तुम आए होमुश्किल से हम आए हैंमोहब्बत नहीं है दो तरफाफिर भी हमइश्क अपना आजमाएंगे। मुश्किल से रास्ता मिला हैमुश्किल से सफर शुरू किया हैहमसफर नहीं है कोईफिर भी हमजुनून अपना आजमाएंगे। मुश्किल […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की दो कविताएँ

December 22, 2023 0

(एक)जंगल का क़ानून•••••••••••••••••••••••••••••••• जंगल का मिजाज़,बेख़ौफ़, आवारा-सी दिखती हवा के इर्द-गिर्दसिमटकर रह गया है।कल तक जो जंगली पेड़ों के पत्ते हिलते थे; सरसराते थे,अब चुप, मौन, डरे-डरे, सहमे दिख रहे हैं।ख़ून खौलाता दहाड़ सुनो!उस मक्कार-शातिर […]

Tellings of Guru Rabindra Nath Tagore

December 18, 2023 0

Raghavendra Kumar Tripathi ‘Raghav’– Beyond shiny toys and gold so bright, There’s a deeper joy, a special light. Not in grabbing stuff, but lending a hand, Doing good things across the land. It’s not about […]

स्वयं

December 15, 2023 0

हर जगहमैं ही सही हूँखुदा थोड़ी हूँ ।हर जगहमैं ही गलत हूँइतना बुरा थोड़ी हूँ।हर जगहझुक जाऊंइतना गिरा थोड़ी हूँ।हर जगहमैं जीत जाऊंइतना बड़ा सिकंदर थोड़ी हूँ।हर जगहमैं हार जाऊंइतना बुज़दिल थोड़ी हूँ।हर जगहमैं सहम […]

तान लो मुट्ठी और दिखा दो ताक़त!

December 14, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मुट्ठी तान लो!मरी हुईं अँगुलियों के इर्द-गिर्दमक्खियाँ भिनभिनाती हैं।पुरुषार्थ के अंगारे को चूम लो!राख मे दबी हुई चिनगारी कोअलसाने मत दो।हर खेत मे,चिनगारी की सुगबुगाहट बो दो।हवा अपना रास्ताख़ुद-ब-ख़ुद तलाश […]

हिन्दी कविता– अस्तित्व

December 8, 2023 0

किसी के पासजब कुछ बचता नहीं।बुलाए तब कोईमैं इतना सस्ता नहीं। माना कि प्रेम चाहिएजीवन में।मगर मांगना पड़ेभीख की तरह,वो भी जँचता नहीं। माना कि जीवन मेंकुछ चीजेंहासिल नहीं हुई।फिर भीदेखकर औरों की तरक्कीमैं कभी […]

हिमाचल गान

December 3, 2023 0

उच्च हिमालय, बहती नदियांकल-कल करतीझरनों की आवाजें।फैली हरियाली, सुगंधित सुमनमहके समीर, बहकी कलियाँऐसी गोद हिमाचल की।जय जय जय हिमाचल की। ऊंचे वृक्ष, नीची नदियांकर्कश ध्वनि करती चट्टानेचहकते पक्षी, महकती फसलेंसरसराहट करता पानी।गरजते बादल, बरसते घनऐसी […]

बिनब्याही अपूर्णता

November 28, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• सुनो न!तुम्हारी पूर्णताभाती नहीं मुझे;क्योंकि तुम मुझसेद्रुत गति मे चलायमान हो।हाँ, मै अपूर्ण हूँ।तुम मुग्ध हो, अपनी पूर्णता परऔर मुझे गर्व है, अपनी अपूर्णता पर;क्योंकि आज मुझेएहसास हो रहा है […]

मन से मन की

November 28, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मेरी अनहद१ बाँसुरीप्रलय की धुन सुनाती है।कातर२ आँखें,जन-जीवन से पृथक्दृष्टि-अनुलेपन३ करती हैं,काल के कपोलों पर।मुझ पर दृष्टि चुभोती,विहँसती, अल्हड़ गौरैयापंख झाड़, फुर्र हो जाती है।मेरे मन को तलाश↑ है,एक निस्तब्ध४-निस्पन्द५नीरव६-निभृत […]

जनता निचुड़ी जा रही, सुधि लेगा अब कौन?

November 27, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–राजनीति को क्या कहें, शब्द सभी हैं मौन।जनता निचुड़ी जा रही, सुधि लेगा अब कौन?दो–मुख पर चुगली नाचती, लिये पनौती माथ।वाम विधाता दिख रहा, छोड़ेंगे सब साथ।।तीन–अस्ली-नक़्ली सब यहाँ, भेद […]

जीवंत जीवन

November 24, 2023 0

बढ़ गए जीवन में तोउड़ते रहोगेजीवंत पक्षी की तरह।नहीं तो टूट करबिखर जाओगेकिसी शाख केमुरझाये पत्ते की तरह। जीवंत हो तोजीना पड़ेगासूर्य चांद की तरह।नहीं तो पड़े रहोगेश्मशान कीजली-बुझी हुईराख की तरह। जीवंत हो तोमहकते […]

कविता : दौर

November 21, 2023 0

एक दौर आएगा मेराएक शोर आएगा मेरा। समझते थे जो मुझेऔरों से भी कमजोरइतिहास-ऐ-पन्नों परअब नाम आएगा मेरा। एक वक्त थाकि लोग ना जानते थेना ही पहचानाते थेपर वक़्त के हर पनें परअब नाम आएगा […]

हारे को हरिनाम

November 15, 2023 0

कहु सजनी , अब कहँ – कहँ खोजूँ,तन – मन को विश्राम ।जहँ – जहँ जाउं, तहाँ – तहँ भटकन,हारे को हरिनाम ।।राम, कहँ पावै मन विश्राम ।। भाषा मौन , मौन परिभाषा युक्त,हो चला […]

कविता : दीप

November 12, 2023 0

सुनो!दीपों का त्यौहार आ रहा हैकुछ रोशनीअपने अंदर भी कर लेना। सुना है !अंधकार बहुत हैतुम्हारे अंदर भीतभी दिखता नहीं तुम्हेंऔरों का व्यक्तित्व । मगर दिख जाता हैसत्य की रोशनी मेंऔरों को तुम्हारा अहम। क्या […]

सड़क सुरक्षा

October 28, 2023 0

सड़क दुर्घटना से अगर है बचनातो हमेशा हेलमेट पहने रखना।लापरवाही से वाहन ना चलाएंअपना व परिवार का जीवन बचाएं।हेलमेट को लगाएंअपना जीवन बचाएं।सड़क सुरक्षा का ज्ञानमिलता है जीवन दान।मत करो वाहन चलाते हुए मस्तीजिंदगी नहीं […]

नासमझ इश्क

October 28, 2023 0

हम ढूढ़ते रह गएउनको हर निग़ाह में,पर वो तो खो ही गएओर किसी की बाहों में। हम ने तो हमेशा उनसेइक़रार ही किया थापर वो ही हर बारइन्कार ही करते रह गए। हमने तो खो […]

जो रावण है मन के भीतर कैसे उसे जलाएँ?

October 24, 2023 0

जो रावण है मन के भीतर कैसे उसे जलाएँ? इस बहुरंगी दुनिया मे अपना किसे बताएँ? जो रावण है मन के भीतर कैसे उसे जलाएँ? सबके मन मे बसे राक्षस सत्य और शुचिता गायब है। […]

Blame Game Players

October 23, 2023 0

Blame game players, always pointing fingers, Never taking responsibility, their hearts like cringers. They divide families, spread discord and strife, Their toxic presence, a thorn in life. Beware these sleeve snakes, for they bite the […]

दिल की बातें ‘दिल’ से-दिल पे

October 22, 2023 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कुछ कहने पे ज़बाँ, साथ देती ही नहीं,आँखें भी मुँह फेर लेती हैं, चुप रहने पे।दो–वे जब भी मिले, आँखें बदल-बदल कर,न कहीं इंकार मिला, न कहीं इक़्रार दिखा।तीन–उनके इस्रार का […]

ये सारा ब्रह्माण्ड ही माँ दुर्गा का विस्तार

October 21, 2023 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– इस भौतिक संसार में सब कुछ है बेकार। जिसने जगदम्बा को याद किया उसका बेड़ा पार। ये सारा ब्रह्माण्ड ही माँ दुर्गा का विस्तार। माँ को जिसका साथ मिला उसका हुआ […]

कृष्णपथ

October 20, 2023 0

प्रेमपथ परमुझे भी चलना हैचल कान्हा मुझे भीअब तेरे संग चलना है। रंग जाऊंतेरे रंग में सांवरियाऐसा प्रेम अबमुझे भी तुमसे करना है। मिट जाए अबमन की हर अभिलाषमुझे भी तेरे संगऐसा योगनाद करना है। […]

आज भी याद है वह तारीख

October 12, 2023 0

वादे किए थे हजारों ,एक पल में तोड़ गया।वह प्यार था हमाराजो हमें छोड़ गया।भूले नहीं जाते वह लम्हेजो उसके साथ बिताए थे ।याद आती है उसकी वह बातें कसमें खाकर जो उसने मुझे कही […]

रक्त रंजित यह धरा किसके कहे उसकी हुई?

October 11, 2023 0

रक्त रंजित यह धरा किसके कहे उसकी हुई? ख़ून की हर बूँद न इसकी हुई न उसकी हुई। मर गए जो, वो भी इंसान थे, मारने वाले जिन्हें ज़रा से, मुठ्टीभर शैतान थे। यह संघर्ष […]

I sing the songs of pain.

October 8, 2023 0

Poem—. I sing the songs of pain I tune my instrument with sorrow’s rain. The pain inflicted by our own. I bring pain in songs, well known. I sing the songs of pain. Composed by– […]

Poem : Essence of Love

October 5, 2023 0

In love’s embrace, we falter and sway, A puzzle of emotions, we struggle to convey. Love’s true essence, elusive and deep, A symphony of secrets, where our hearts keep. I cherish you more than words […]

Ode to Our Parents, Our Timeless Deities

October 4, 2023 0

Our parents, deities we cherish and adore, Their legacy unbroken, forevermore. With each passing day, our devotion grows deep, Their wisdom’s guidance, our hearts it keeps. Though humble their form, their vision so grand, They […]

वो लड़की हूँ

September 29, 2023 0

हाँ मैं एक लडक़ी हूँहाँ मैं वो ही लडक़ी हूँजो अपनी हो तोचार दीवारी में कैद रखतें हो।किसी ओर की हो तोचार दीवारी में भीनज़रे गड़ाए रखतें हों। हाँ मैं एक लडक़ी हूँहाँ मैं वो […]

An eternal Sacrificer Bhagat Singh

September 28, 2023 0

Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Speaking the truth, courage immense, Fighting for justice, resilience. For two months, hunger and thirst withstood, Courage to give his life, grand, good. Apart from those who begged for rights, Isolated from […]

वन्दन का क्रन्दन!

September 26, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• वन्दन! विरूप सर्जन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! काया-स्यन्दन१? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! नेत्रहीन-अंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! उधार का मंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! विद्रूप रंजन? तेरा बार-बार अभिनन्दन। वन्दन! […]

खोटी नीयत

September 21, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• साहिब!देखते-ही-देखते,‘इण्डिया’ प्रौढ़ हो गया।उसकी जड़ें भी,कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल चुकी हैं;सागर की गहराई-सा गाम्भीर्य है;उसके तने,आकाश की ऊँचाई-से शिखरस्थ हैं।आस-पास का माहौल :–बिगड़ा-बिगड़ा,उद्दण्ड-उद्धत, जंगली-सा दिखता है।ज़ह्रीले साँप भी फन […]

शब्द बना लो तीर

September 20, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जीवन जड़वत् दिख रहा, बहे नेत्रजल धीर।जोड़ो मन को क्रान्ति से, शब्द बना लो तीर।।दो–बलखाती इठला रही, सरिता संंचय नीर।आँगन बैठी धूप है, आकुल हुआ शरीर।।तीन–मृग-मरीचिका चाह है, मन-गति दिखता […]

अमूक कविता

September 15, 2023 0

कविता……कितने क्यों मौन होक्या आती नही अभिव्यक्ति ?या फिर जाती नहीअब भी अहम भक्ति ? छोड़ दो न छंदों अलंकारों कोकम से कम करो नआत्म अभिव्यक्ति।या फिर जाती नहींअब भी शकी अभिव्यक्ति ? हिंदू हिंदुस्तान […]

बेचारा आवारा

September 8, 2023 0

थक कर बैठ गया हूँथोड़े विराम के लिएमगर सोच मत लेनाकि मैं जीवन से हार गया हूँ। बदलते रहते हैंजीवन के पड़ावमगर सोच मत लेनामैं दूसरों के सहारे हो गया हूँ। बदलते हुए जमाने के […]

रूप और कला का संघर्षण

September 5, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• रूप ने कला से कहा :–तेरा दृष्टि-अनुलेपन है अनुपम,तू रूप को सुरूप करती है।विरूप को कुरूप रचती हैतू सुरूप को विद्रूप बनाती है।तू रंग-रोगन करती हैऔर उकेरी गयी व्यथा-कथा को,एक […]

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली

September 4, 2023 0

लक्ष्य को प्राप्त करने मैं चली सूरज को पकड़ने चलीहर मुश्किलों को पार करके ,आज उन्मुक्त गगन में उड़ने मैं चली | सबकी मुझसे अनंत इच्छाएंँ हैं ,एकाग्र चित्त होकर ,सबके सपनों को साकार करने […]

अंतिम राह

September 3, 2023 0

जीवन की अंतिम राह मेंन कोई अपना चलेगा न पराया। जीवन की अंतिम राह मेंन सिद्धियां काम आएगी न ऋद्धियां। जीवन की अंतिम राह मेंन कोई तंत्र चलेगा न मंत्र फिरेगा। जीवन की अंतिम राह […]

लफ्ज़ खामोश हो गए

September 3, 2023 0

हाशिया बनाकर खुद खैर बनकर पूछनाखुश्क सा होकर खस्ता करनादेह स्वतंत्र सी लगेऔर मन को कहीं कफस ने जकड़ा।लफ्ज़ खामोश हो गएमानो गहरी निद्रा में सो गएगुमनाम सा कुछ हो रहा थाबवंडरों में अब खो […]

अथाह अनुभूति

September 2, 2023 0

हजारों तंत्र हो मुझ मेंहजारों मंत्र हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।न ज्ञान का अहंकार हो मुझ मेंन आज्ञान का भंडार हो मुझ मेंमैं फिर भी लीन रहू तुझ में।योग का भंडार […]

मैं अकेला हूंँ

September 2, 2023 0

दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ |चलते चले जाना है , किसी का अब इंतजार नहीं ,दिल को समझाऊंँ कैसे ?दिल मानने को तैयार नहीं , मैं अकेला हूंँ | जीना तो […]

मनमयूर

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक–ऐ मेरे गीत!तुझे जन्म तो दे देता हूँ;पर गा नहीं पाता।मेरा पौरुष,रोने के आवेदनपत्र पर–हस्ताक्षर नहीं करता। दो–कभी इधर देखूँ,कभी उधर।पसीने से हो जाता हूँ–तर-ब-तर। तीन–अनुभूति की गहराई मेडूब जाता […]

एक अभिव्यक्ति

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कई अनकहे पल, फुसफुसाते हैं कानो मे;बिनब्याही बातों का, हिसाब हम नहीं करते।दो–तू उसे भूलने की बात, हर बार क्यों करता है;वह तो कभी याद आने की बात करता ही […]

वीतराग मन कह रहा, जीवन है निस्सार

August 25, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गगरी अधजल दिख रही, छलक रहा है बोध।चिन्तन चला वितान ले, मानसपथ अवरोध।।दो–मरा-मरा ही तत्त्व है, तत्त्व राम से हीन।तत्त्वज्ञान राहित्य है, पापपंक मे लीन।।तीन–वीतराग मन कह रहा, जीवन है […]

सत्य समझ लो सार को, मिथ्या है संसार

August 23, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••एक–पाप पुण्य से कह रहा, मेरा देख प्रताप।लोक मुझे ही पालता, पर तू पाता ताप।।दो–जीवन-जंगल जल रहा, जलता नहीं प्रमाद।सत्य वचन है जान लो, यहाँ-वहाँ उन्माद।।तीन–एक घड़ी-आधी घड़ी, चिन्तन हो […]

युगबोध से शून्य है, मत कर तू! अभिमान

August 22, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••एक–मद मे अन्धा दिख रहा, बोली बोल कुबोल।काल विहँसता कह रहा, विष को मत तू घोल।।दो–युगबोध से शून्य है, मत कर तू! अभिमान।आयेगी कब गति-कुगति, नहीं किसी को भान।।तीन–दम्भ पालता […]

यह दीपक है, इसे जलाना चाहिए

August 22, 2023 0

देख बुराई अपने अंदरइसे मरना ही चाहिए,जीवन में फैला अंधेरामिटना ही चाहिए।यह दीपक है,इसे जलना ही चाहिए।लगी विचारों मे वर्षो की दीमकइसे हटना ही चाहिए,विरासत में पाया रूढ़िवादिता और अंधविश्वास।इसे जलना ही चाहिए।यह दीपक है,इसे […]

हिन्दी कविता : खुदगर्जी

August 18, 2023 0

गिर रही है नये जो आसमा से तड़पती बूंदेकभी तुम इनसेमज़ा लेते होतो कभी ये डूबकरतुम्हारे अस्तित्व का मज़ा लेती है। बह रही हैं न ये नदियाँकभी खुद बहती हैअपनी ही मस्ती मेंतो कभी तूफ़ान […]

मन का अन्धा सुन!

August 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ कलियुगी धृतराष्ट्र!तुमने अपनी प्रजा को छला;मात्र सत्तासुख की ख़ातिरतुमने लक्ष्मणरेखा पार की।तुझे अपनो से मोह ने,‘अपनो’ से दूर कर दिया।जिन पर तुझे गुमान है,वे भी एक-एक करचीलर लगी बण्डी […]

मत भूल!

August 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ नादिरशाह!तेरी ताक़त तू नहीं।तेरे चारों ओर मँडरातेवे गिद्ध हैं,जो तुझे अपने पंखों की आड़ दे,तुझे दसों दिशाओं सेतुझ पर रक्षाकवच छाये हुए हैं,तभी तू सीना तानकर,अपने सिद्ध वाचाल होने […]

झूठ के पाँव

August 16, 2023 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय तुमने जो बीज बोया है,उसका पौध तो नहीं देख पायेगा;पर लोग उस फल को चखते हीधिक्कारेंगे तुझे।तुमने दिये क्या :―झूठ, अविश्वास, वैमनस्य?तुमने हमारे राष्ट्र को छला है;एक बार नहीं, सौ […]

मेरी माटी, मेरा देश

August 16, 2023 0

मेरी माटी, मेरा देश ।सारे जग से न्यारा देश ।सब देशों में, डंका बजता ।प्रजातन्त्र है, प्यारा देश ।। पर्वतराज हिमालय प्रहरी ।गंगा, यमुना, सरयू गहरी ।झेलम, कृष्णा अरु कावेरी ।अमृत जल से सींचे खेत […]

मातृभूमि ‘भारत महान’

August 14, 2023 0

आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक मातृभूमि ‘भारत महान’सदैव हमको अभिमान रहे!वीरों की,देवों की धरती ,होंठों पे सदा गुणगान रहे!सर्वधर्म समभाव रहें,एक दूजे का सम्मान रहे!स्वतंत्रता पर गर्व करें,वीरों का अमर बलिदान रहे!हर घर में तिरंगा लहराएं,‘हर दिल […]

कविता: मोल

August 13, 2023 0

किस्मत का नाम देना क्या सही है?मर्जियां सब अपनीऔर नाम किस्मत कावक्त तो देखते ही नहींकि ज़माना कहां हैकिताबें वो लेख कुछ अधूरे से हैंजहां समानता की बात है।खुद के फैंसलेखुद के सवालखुद ही गवाहऔर […]

वह प्यार था हमारा, जो हमें छोड़ गया

August 12, 2023 0

वादे किए थे हजारों,एक पल में तोड़ गया।वह प्यार था हमाराजो हमें छोड़ गया।भूले नहीं जाते वह लम्हेजो उसके साथ बिताए थे।याद आती है उसकी वह बातें कसमें खाकर जो उसने मुझे कही थी।जिसने पसंद […]

आम सी लड़की

August 12, 2023 0

सुन कर मोहब्बत केअधूरे किस्से सहम जाती हैआम सी लड़की। अजनबी लोगों को देखघबराकर छुप जाती हैआम सी लड़की। माँ के आंचल को,पापा के कंदे कोअपनी ढाल समझती हैंआम सी लड़की। इश्क़ तो दूरउसके नाम […]

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