ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

नीति देश की मनचली, छिनरे हैं सब ओर

May 11, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गंगा में शव बह रहे, केवल दिखता रोष।शासक मद में चूर है, नहीं किसी को होश।।दो–क्रूर बहुत परिवेश है, साधन-सुविधा हीन।जनता ऐसी दिख रही, मानो कोई दीन।।तीन–हम अपने ही देश […]

“माँ” मेरी दुनिया

May 9, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी : मां से बढ़कर इस दुनिया में मेरा कोई नहीं ,जब भी मैं रोया तो चुप कराई वहीं ।अपने दिल में छुपा कर हमें रखती थी वो ,लोगों की नजरों से बचाने के […]

भगवान कैसा होता है …….

May 9, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी : चलो ठीक हैतुम कहते हो तो मान लेता हूंकि मां में भगवान होता है,लेकिन मुझे यह तो बताओकि भगवान कैसा होता है ,मां ने तो कभी आंसू तक नहीं आने दियाफिर यह […]

आवर्त्तन और दरार

May 3, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–आग आग से कह रही, दु:ख में भी है सुख।सुख तो औरों के लिए, बाँध लो गठरी दु:ख।।दो–तिनका-तिनका जोड़कर, महल बनाया एक।आधी घड़ी न सुख मिला, रहने लगे अनेक।।तीन–कष्ट मिटाओ […]

उन्हें औक़ात पर अब लाइए साहिब!

May 1, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उनकी बातों में मत आइए साहिब!उनकी घातों में मत आइए साहिब !हर गोट के मिज़ाज से वाक़िफ़ हैं वे,भूलकर धोखा मत खाइए साहिब!ख़ैरात भी माँगे तो मत दीजिए उन्हें,उन्हें औक़ात […]

यह है ‘जैविक युद्ध’, हाय! लड़ रहा मनुष्य अभागा

May 1, 2021 0

अभी समय है, अभी नहीं कुछ भी बिगड़ा है ।क्रूर-काल कोविड-19, चुप-छुप पास खड़ा है ।सम्भलो स्वयं, सम्भालो अपनों को भी प्यारे,‘जीता वही सिकन्दर’ जिसने विजयी युद्ध लड़ा है।। उसे पूछता कौन, हार कर पीठ […]

आज़ाद क़लम

April 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–चपटी धरती है कहीं, कहीं दिखे है गोल।आँख उठाकर देखिए, सब हैं पोलमपोल।दो–तुलसी औ’ कबीर सूर, सदा हमारे संग।क़लम आज हैं बिक रहे, दिखते नंग-धड़ंग।तीन–शिथिल पड़ी संवेदना, कपट हुई मन-बात।पहचानो! […]

अव्यक्त सत्ता जोड़ लो समष्टि से

April 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हो रहा है जो, जहाँ सो हो रहा।व्यर्थ ढपली, बज रही कर्त्तव्य की,भार भारी लग रहा, सब दिख रहे।गात शिथिल स्पष्ट सब लक्षित हुए,कौन जाने कौन-सा पल क्या रहे!बयार हलकी […]

खेलने की उम्र में फैले हैं हाथ देखो

April 24, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ खेलने की उम्र में फैले हैं हाथ देखो ।कुदरत भी क्या अजब हैइसके कमाल देखो ? तुतलाती भाषा में बच्चे,कितने प्यारे लगते हैं ।शैतानी कर-कर इठलाते,सबसे न्यारे लगते हैं ।जब ये […]

धू-धू जलती है चिता, लावारिस है रूप

April 15, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मातम पसरा हर दिशा, मुखिया दिखता मौन।कितना निर्दय दिख रहा, इसे बताये कौन?दो–लाशों का अम्बार है, चीख़-दहाड़ें रोज़।बेशर्मी है नाच रही, कौन करेगा खोज?तीन–बाप मरा-बेटा मरा, घर-घर छाया शोक।माँ का […]

Awakening and sleep

April 12, 2021 0

★ Acharya Pt Prithvi Nath Pandey On the dense road of AllahabadOld-fashioned sleeping adult,Co-ordinates livelihoods;Amazingly collected and segregatedDemonstrate a civilization of conduct;Interviewing the subconscious,As if far from worldlyA dreamed beauty in a closed ventricleShreya-Preya, with […]

मौसम वाणी बोलता, होंगे अबकी पस्त

April 10, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–आस्तीन के साँप सब, मत जाओ अब पास।कदाचार है दिख रहा, कर दो अबकी साफ़।।दो–कितने चतुर-सुजान हैं, हवाबाज़ी में दक्ष।सच की गरदन दाबकर, पाप का रखते पक्ष।।तीन–पाप घड़ा का भर […]

जो बैठे हैं तेरे साथ, वे बेईमान लिये फिरते हैं

April 9, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बेजान हुस्न की, अदा लिये वे फिरते हैं,चश्मे पुरनम की, अदा लिये वे फिरते हैं।कज़ा लौट घर उनके, दस्तक दे आती है,साथ ज़िन्दगी का, सामान लिये वे फिरते हैं।तल्ख़ अन्दाज़ में, […]

समय की मुसकुराहट

March 17, 2021 0

★ बिम्ब-विधान और प्रतीक-योजना का अनुशीलन करें। आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आजमहुआटपकना भूल-सा गया है।फुनगी पर बैठी गौरैयाचहकना भूल-सी गयी है।तितलीपंखों को सिमटायेसशंक नेत्रों सेकुछ ढूँढ़-सी रही है।कोटर से झाँकता उल्लूबूढ़े अजगर की पीठ परक़दमताल-सा […]

अभिव्यक्ति के दंश

March 11, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–ऐ हुस्न की मलिक:! आँखें यों मला न करो,वही तस्वीर है, जो छोड़कर तुम आयी थी।दो–अब लौटकर न आयेगी फिर से बहार,मेरे आँसू में देख! चाँद-तारे डूब रहे।तीन–कैसे मान लिया […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का काव्य-वैभव

March 10, 2021 0

एक–‘राम’-भाव से शून्य हैं, ‘श्री’ से भी हैं हीन।भाड़े के ‘जय’ दिख रहे, मानो कोई दीन।।दो–देश तोड़ना रह गया, जिनके जिम्मा काम।हृदय हलाहल है भरा, बोलें जय श्री राम।।तीन–नारी! तू नारायणी, कवि कहता चहुँ ओर।अबला-सबला […]

सृष्टि पर जीवन का उद्देश्य व आधार है नारी

March 7, 2021 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक) “नारी” नम्र, नियम, न्याय, निष्ठा से परिपूर्ण एक अद्भुत निकेतन है।“नारी” संस्कृति, सभ्यता, संवेदना, संकल्प, स्वाभिमान, सम्मान, सद्गुण एवं स्नेह की सर्वश्रेष्ठ संरक्षिका है।“नारी” यानी सदैव क्रियाशील रहना, […]

कुछ यादें ऐसी भी

March 7, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा शायद उस वक्त हम ना समझ या नादान होते हैं ,जब हम स्कूल में चार दोस्तों के साथ होते हैं ।हमेशा यही बातें करते हैं कि यार कब हमाराइस जगह से पीछा […]

तुमसे प्यार नहीं कर पाऊंगा

March 6, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा, म०प्र० तुम डिजिटल युग की लड़कीमैं गांव के संस्कारों का बादशाह हूँतुम बुलेट से कॉलेज आने वालीमैं तो अपनी साइकिल का ही आदि हूँतुम जाम शकीला पीने वालीमैं तो अपने मट्ठा में […]

वक़्त-बेवक़्त

February 24, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमने जब सोचा,चैन से कट जायेगाज़िन्दगी का हर पल।समय ने दस्तक दी;एक गह्वर में डाल दी गयी,बटोरी हुई साँस;फ़ज़ा में उड़ा दी गयीं,मेरी बची-खुची रातें।मैं ठगा-सा देखता रह गयावक़्त की […]

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