Easy poetic definitions of parts of speech

August 7, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav Noun– Noun is naming word,Emotion, tree or bird.Person, place or thing,A name to everything. Pronoun– It replaces noun,And take it’s place.He, she, it, theyPronoun’s face. Verb : Play eat and runVerb […]

Grammar in rhymes

August 5, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Essay ——:—– In Essay Many paragraphs,Joined with care.They share same topic,Clear and fair. Paragraph —–:-‐– A group of sentences,About one thought.Together they explain,The lesson taught. Idiom —-:— Idiom is special phrase,Not […]

English Grammar: Poetic Definitions

August 4, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Figure of Speech :– Words arranged,In a special way.They make writeup,Brighter in many way. Simile :– Two things compared,Using “as” or “like.”Simile says harsh words,Seems me as spike. Metaphor :– A […]

God : The Formless One

July 30, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav Beyond the dawn of thought He stands, Beyond where time or silence lands; No birth proclaims, no end defines, The Source from which all being shines. His grace dissolves illusion’s veil, […]

Poem : Unity in Diversity

July 28, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Many languages, many song,One country where all belong.Different cultures, different ways,Together we sparks India’s days.Respect and love make us strong,Helping every heart belong.Hand in hand we’ll always grow,Sharing kindness everywhere we […]

The Gift of Relations

July 24, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Can you imagine life without a friend?Without a heart on which your soul can depend? Life is no game of endless delight;It weaves through shadows before finding light.Its roads are winding, […]

Poem : Together we stand, hand in hand

July 23, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Freedom came through sacrifice and pain.Courage of all Indians shall forever remain.The tricolour flies so proud high and high.A symbol of dignity that colours all the sky.With honesty for nation let […]

Poem : My Motherland

July 22, 2026 0

I dream of skies forever blue,Where every dream can come true.Schools that teach mind and soul,Helping every child reach at goal.Clean rivers, land and green,The loveliest country ever seen.Science, courage, hope with grace,Lead our nation […]

A Little Room With Quiet Wall

July 16, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav Whenever I feel so sad inside.All my smiles just run and hide.I build a little room with quiet wall.Where no one hears my voice at all. It grows so big, it […]

सीता का धर्म, प्रकृतिज्ञान, लोककल्याण और नारीशक्ति

July 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– दण्डकारण्य में प्रवेश करते-करते अनेक सप्ताह बीत चुके थे। अब वन ने इन तीनों यात्रियों को स्वीकार कर लिया था। जहाँ पहले पक्षी उड़ जाते थे, अब वे समीप बैठ जाते। […]

प्रार्थना : हे त्रिभुवनपति! हे विश्वनाथ!

July 12, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हे त्रिभुवनपति! हे विश्वनाथ!हे विश्वेश्वर! हे जगन्नाथ!करुणा कर दो शम्भो मुझ पर,हो शिवचरणो मे मेरा निवास।शिव-शिव जपते बीते जीवन,शिवमय हो मेरी प्रत्येक श्वास।।हे डमरूधर! हे नंदीनाथ।हे त्रिभुवनपति! हे विश्वनाथ!हे विश्वेश्वर! हे […]

भूमि का भार उतारने को भूमिजा का प्रण

July 11, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट पीछे छूट चुका था। अब वन का स्वरूप बदल रहा था। यहाँ वृक्ष अधिक विशाल थे। उनकी जटाएँ मानो धरती को आलिंगन करती थीं। लताएँ शताब्दियों पुराने वृक्षों से इस […]

अनसूया और सीता : धर्म की अधिष्ठात्री का ज्ञानाभिषेक

July 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट की वंदनीय भूमि से आगे बढ़ते हुए जब श्रीराम, लक्ष्मण और सीता महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे, तब संध्या अपने सुनहरे चरण धीरे-धीरे वनभूमि पर रख रही थी। पश्चिम दिशा […]

पुत्रि! पवित्र किए कुल दोऊ

July 9, 2026 0

चित्रकूट का वन उस दिन असाधारण रूप से शांत था। वायु जैसे अपने वेग को रोककर किसी महान संवाद की प्रतीक्षा कर रही थी। मंदाकिनी का जल सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक निर्मल प्रतीत होता […]

चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ का शब्दवैभव देखते ही बनता है

July 7, 2026 0

चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ के जन्मदिनांक ७ जुलाई के अवसर पर विशेष ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• हिन्दी-साहित्य की बहुसंख्य छात्र-छात्राएँ और अध्यापक-अध्यापिकाओँ को चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ के विषय मे इतना ही बोध है कि उन्होँने […]

ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः

July 6, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सूर्य की प्रथम किरण हिमालय की पर्वत-श्रृंखलाओं को स्वर्णिम आभा से आलोकित कर रही थी। पहाड़ों के बीच स्थित एक छोटा-सा गाँव शिवपुर अपनी सहज सरलता और प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए […]

कहानी : भरोसे की डोर

July 5, 2026 0

आदित्य त्रिपाठी (सहा० अध्यापक, प्रा० वि० प्रतापपुर, कोथावाँ)– अनिल और राज नगवा गाँव की मिट्टी में एक साथ ही घिसलकर बड़े हुए थे। दोनो मे गहरी दोस्ती थी। बचपन से एक ही थाली में खाते […]

सीता : ऋषियों के मध्य धर्म की अधिष्ठात्री

July 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट में समय धीरे-धीरे बीत रहा था। अब वन के ऋषियों ने यह अनुभव करना प्रारम्भ कर दिया था कि श्रीराम के साथ केवल एक राजकुमार और एक राजकुलवधू नहीं आई […]

धर्म की रक्षा के लिए दण्ड भी आवश्यक : सीता

July 2, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन का विस्तार जितना सुंदर था, उतना ही भयावह भी। एक दिन प्रातःकाल सीता आश्रम से कुछ दूर वनौषधियाँ एकत्र करने निकलीं। उनके साथ कुछ ऋषि-पत्नियाँ भी थीं। मार्ग में उन्हें […]

भूमिसुता का मौन और प्रकृति का शोर

July 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन की वह संध्या अत्यन्त विलक्षण थी। आकाश पर धूसर मेघों की पतली परतें तैर रही थीं। सूर्य अस्ताचल की ओर झुक रहा था, पर उसकी लालिमा मानो धरती के हृदय […]

अयोध्या की पुत्रवधू “धर्म की जननी”

June 29, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– संध्या उतर रही थी। सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम के पर्वतों के पीछे विलीन हो रहा था। आकाश में लालिमा थी, पर वह लालिमा भी जैसे विरह का रंग धारण कर चुकी थी। […]

इंसाँ तो मरा हुआ, आँखेँ खुली हुई हैँ

June 28, 2026 0

शिखा यादव– पानी तो बिक रहा है, पवन बिक न जाए;धरती भी बिक रही है, गगन बिक न जाए।अन्तरिक्ष मे भी निगाहेँ हैँ सबकी लगीँ;डर है, सूरज की तपन बिक न जाए।स्वार्थनीति चलते, कोई जगह […]

भरी-पूरी दुनिया में हम हैं अकेले

June 25, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– न हमें कोई समझा, न समझा भावनाएँ,भरी-पूरी दुनिया में हम हैं अकेले।कहने को रिश्ते अनेकों यहाँ हैं,जिधर देखता हूँ उधर दिखते मेले।हर तरफ ताकते-झाँकते लोग दिखते,जहाँ देखो दिखते यहाँ पर झमेले।न […]

और मेरा सत्य राम हैं

June 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र मौन थे। वन की निस्तब्धता और भी गहन होती जा रही थी। वृक्षों की छाया मानो स्वयं इस संवाद को सुनने के लिए ठहर गई थी। मंद पवन बह रही […]

वन की प्रथम रात्रि : सीता के अन्तर्मन का द्वंद्व

June 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि अपने पूर्ण विस्तार पर थी। आकाश तारों से भरा हुआ था। ऐसा प्रतीत होता था मानो अनन्त ब्रह्माण्ड अपनी असंख्य आँखों से पृथ्वी की ओर देख रहा हो। राम निद्रा […]

सीता : प्रेम, धर्म और वियोग की अग्नि में तपता हुआ स्वर्ण

June 17, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सुमन्त्र का रथ दृष्टि से ओझल हो चुका था। वन की निस्तब्धता में अब केवल पत्तों की हल्की सरसराहट थी। किन्तु उस निस्तब्धता के भीतर भी सीता के हृदय में असंख्य […]

रामायण : स्थान सुख नहीं देता अपितु साथ सुख देता है

June 15, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आर्य सुमन्त्र मौन थे। उनके पास शब्द थे, पर वे शब्द जैसे अपने अर्थ खो चुके थे। वे सीता के मुखमण्डल को देख रहे थे—वह मुख, जो राजमहलों की सुख-संपन्नता में […]

जहाँ राम हैं, वहीं अयोध्या है

June 12, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वन की ओर बढ़ते रथ के पहिए केवल धूल नहीं उड़ा रहे थे, वे इतिहास की दिशा बदल रहे थे। अयोध्या पीछे छूट रही थी और सामने था अनिश्चितताओं से भरा […]

प्रेम मे अधिकार नहीँ तो वियोग मे कष्ट क्योँ

June 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि उतर आई थी। आकाश में असंख्य तारिकाएँ जगमगा रही थीं। मंदाकिनी का जल अब चाँदी-सा चमक रहा था। दूर कहीं किसी पक्षी की करुण पुकार सुनाई दी और फिर समूचा […]

क्या मेरी भी कोई बारी आएगी

June 4, 2026 0

वो अपना, अपना ही रहा, सब हार गई …..थी पराई वो, किससे कहती कितना कहती,अब अपनों से कैसे लड़ाई हो। अरमान संजोकर स्वप्नलोक के,हर रीत थी वहां निभाई तो,टुकड़ो को जोड़ती रही सदा,पर दी न […]

उन्हेँ औक़ात पे अब लाइए साहिब!

May 25, 2026 0

– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय उनकी बातोँ मे मत आइए साहिब!उनके घातोँ मे मत आइए साहिब !हर गोट के मिज़ाज से वाक़िफ़ हैँ वे,भूलकर भी धोखा मत खाइए साहिब!ख़ैरात भी माँगेँ तो मत दीजिए कभी,उन्हेँ […]

मझधार

May 19, 2026 0

मिले जो कोई भी मझधार,कहो फिर कैसे बिन पतवार,चलूँ किस डगर, बता किस नगर,न कोई ओर न कोई छोर। नचावे प्रतिदिन यह चितचोर,छोड़ कर इस दुनिया की होड़,मची है जहाँ वो अंधी दौड़,कि बस मैं […]

कविता : प्रतीक्षा

May 18, 2026 0

प्रतीक्षा कहूँ…या कहूँ प्रतीक्षाएँ,अनवरत जीवनपर्यंत। प्रतीक्षा एक मुकाम की,प्रतीक्षा सम्मान की,निज आन के अभिमान की,निर्णयों की स्वतंत्रता की,प्रिय के मान की। उन्मुक्त गगन में उड़ान की,हाँ, है कुछ,मुझमें इप्सित,प्रतीक्षित,बहु प्रतीक्षित……… प्रतीक्षा है उस सुबह की,जब […]

जिन्दगी का सामना

May 17, 2026 0

है कठिन पथरीली डगर तो क्या?है सामने उलझा भँवर तो क्या?इन कंटकों का सामना डटकर करेंगे।जिंदगी का सामना हँसकर करेंगे। हैं ख्वाब कुछ छूटे अधूरे से,भय के हैं बादल भी घनेरे से,इन बादलों को भेदकर […]

God’s descent and the restoration of virtue

May 16, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– In a time long forgotten, there existed a land where the seeds of righteousness were sown deep within the hearts of its people. Religion flourished and its guiding principles of compassion, […]

कहानी-शीर्षक– अन्त

May 15, 2026 0

हमेशा चहकती और खिलखिलाती रहने वाली श्रुति न जाने क्यों कुछ दिनों से खामोश थी। परिधि के लिए उसका ये रूप नितांत अपरिचित सा था। उसने कई बार पूछने की कोशिश भी की, लेकिन कोई […]

लघुकथा : घुट्टी सब्र की

May 13, 2026 0

सोलह श्रृंगार से परिपूर्ण लाल जोड़े में सजी अक्षिता आज विवाह के उपरांत दूसरी बार इस चौखट के आगे थी। भीड़ आज भी कम नहीं थी,पर वातावरण की ये निस्तब्धता कोलाहल से भरे रहने वाले […]

रातों की सूनी चौखट पर, तेरा नाम पुकारा मैंने

April 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वादा करके मैं मुकरा,अब जीना भारी लगता है।कैसे आँख मिलाऊँ मैं,जीना गद्दारी लगता है।तुम मानो या ना मानो ये,तुम बिन जीना मुश्किल है।साँसें भी कोस रही हमको,लगता पहाड़ सा पल-पल है।मन […]

शिवत्व की यात्रा : न मे मृत्युशंका न मे जातिभेदः

April 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में संध्या उतर चुकी थी। वटवृक्ष के नीचे बैठे सुधांशु की आँखें बंद थीं। आचार्य के शब्द उसके भीतर मर्मस्थान को वेध रहे थे। वास्तव मे ये विचार अब परिपक्व […]

शिवत्व की यात्रा : गुरु की माया

April 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल मे सूर्य की बाल किरणें जब धरती को स्पर्श कर रही थीं, उसी समय सुधांशु आश्रम के प्रांगण में खड़ा था। वह स्थान जहाँ से उसकी यात्रा आरम्भ हुई थी— […]

शिवत्व की यात्रा : दिव्य यात्रा के साक्षी अनिरुद्ध की वापसी

April 18, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि का दूसरा प्रहर था। आकाश में चंद्रमा शांत था, और उसकी चाँदनी धरती पर एक कोमल श्वेत आभा बिखेर रही थी। हवेली के पीछे वही उपवन—जहाँ कुछ समय पूर्व प्रेम […]

शिवत्व की यात्रा : प्रेम की अग्निपरीक्षा

April 17, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। आकाश में सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा था, और उसकी किरणें आकाश को लालिमा से भर रही थीं—मानो प्रकृति स्वयं किसी गहन भाव से रंग गई हो। […]

ज़िन्दगी की जद्दोजहद

April 16, 2026 0

तुम्हारे पास कमी है वक्त की और मै खुद मे ही बहुत व्यस्त हूँ।हमारे रास्ते कभी एक नहीं तुम अपने मे और मैं अपने मे मस्त हूँ।जानिबे मंज़िल जाते कभी टकरा गये तो बात होगी […]

शिवत्व की यात्रा : यदि सब कुछ शिव हैं… तो प्रेम का स्थान कहाँ

April 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर की शीतलता अभी पूर्णतः विलीन नहीं हुई थी। मंदिर से लौटते समय सुधांशु के भीतर एक अद्भुत शांति थी, पर उसी के साथ एक नया प्रश्न भी जन्म ले चुका […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्यमयी संन्यासी और परदे के पीछे का सत्य

April 12, 2026 0

अब कथा उस रहस्य के द्वार पर पहुँचती है जहाँ पाठक और साधक—दोनों के भीतर एक ही प्रश्न उठता है— “यह रहस्यमयी संन्यासी वास्तव में कौन है?” इसी रहस्य को धीरे-धीरे उद्घाटित करते हुए, गहन […]

शिवत्व की यात्रा : चेतना का जागरण

April 11, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात्रि का अंतिम प्रहर… आकाश गहन अंधकार में डूबा था, पर उस अंधकार के भीतर एक अदृश्य प्रकाश छिपा हुआ था—जैसे सृष्टि स्वयं किसी महान परिवर्तन की प्रतीक्षा कर रही हो। […]

ग़ज़ल : रिवाजेइश्क का मारा हुआ हूँ मै

April 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– राहेइश्क़ मे पाने से ज़्यादा लोग खोते हैं।इस रिवाजेइश्क का मारा हुआ हूँ मै।राह-ए-इश्क़ चलकर ख़ुद को जला दिया।चौसर-ए-इश्क़ की बाजी हारा हुआ हूँ मै।इश्क़ के सितम की इन्तहा देखने निकला […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्य के परे जाती साधना

April 8, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— रात का तीसरा प्रहर था। चारों ओर गहरा सन्नाटा छाया हुआ था। हवेली के भीतर सब सो चुके थे, किन्तु सुधांशु की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। उसके भीतर […]

We learn through play

April 6, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav We learn through play.Never engage in a fray. To school we all go, day after day.Teachers impart wisdom in own way. Homework given, we do with care.Daily tasks, we complete with […]

शिवत्व की यात्रा मे पढ़ें भीतर का शत्रु

April 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात गहरी हो चुकी थी। हवेली के चारों ओर फैली शांति में केवल कभी-कभी पत्तों की सरसराहट सुनाई देती थी। दूर खेतों में जलती हुई मशालों की लौ हवा के साथ […]

प्रेरक कहानियाँ : शिवत्व की यात्रा मे पढ़ें मानसिक शत्रुओं का विरेचन और शान्ति की अनुभूति

April 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम के क्षितिज में विलीन हो रहा था और आकाश में हल्की सुनहरी आभा फैल रही थी। हवेली के प्रांगण में एक विचित्र शान्ति थी, […]

शिवत्व की यात्रा : त्याग का अग्निपथ

April 2, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– जमींदार के कक्ष में कुछ क्षण के लिए ऐसा मौन छा गया मानो समय स्वयं रुक गया हो। सुधांशु के शब्द हवा में स्थिर हो गए थे— “यदि आवश्यक हुआ तो […]

शिवत्व की यात्रा : शक्ति और धर्म का संवाद

March 31, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का पहला प्रकाश अभी क्षितिज पर उभर ही रहा था। हल्की धुंध खेतों के ऊपर तैर रही थी और दूर कहीं बैलों की घंटियों की धीमी आवाज सुनाई दे रही […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्यमयी संन्यासी और पहली कसौटी

March 30, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात का सन्नाटा गहरा था। आकाश में बादल छाये हुए थे और चन्द्रमा कभी-कभी उनके बीच से झाँक जाता था। सुधांशु के घर के आँगन में दीपक की लौ हल्की-हल्की काँप […]

शिवत्व की यात्रा : धर्म और प्रेम का द्वंद्व

March 29, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रात धीरे-धीरे गहरी हो चुकी थी। आकाश में चन्द्रमा बादलों के पीछे छिपता-उभरता जा रहा था। सुधांशु के घर के आँगन में एक दीपक जल रहा था जिसकी लौ हवा के […]

शिवत्व की यात्रा : तप की अग्नि है गृहस्थाश्रम

March 28, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– संध्या का समय था। सूर्य पश्चिम दिशा में ढल रहा था और आकाश में लालिमा फैलती जा रही थी। सुधांशु आश्रम की पगडंडी से आगे बढ़ रहा था। उसके कदम धीमे […]

शिवत्व की यात्रा : परीक्षा का आरम्भ

March 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– भोर का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की हल्की आभा प्रकट होने लगी थी। आश्रम के चारों ओर फैली निस्तब्धता धीरे-धीरे पक्षियों के कलरव से टूट रही थी। वृक्षों की […]

शिवत्व की यात्रा : रहस्य का पुनः उदय और गुरु की दृष्टि

March 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वसंत का प्रारम्भ हो चुका था। आम के वृक्षों पर कोमल बौर आ गया था और हवा में एक मदमस्त सुगन्ध फैलने लगी थी। जीवन में जैसे एक हल्का-सा उल्लास लौट […]

पुरुष परिधि पर घूम रही नारी बेचारी

March 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शूद्र गँवार ढोल पशु नारीये ताड़न की अधिकारी है।जाति-पाँति से हीन रहीयुग-युग से वह बेचारी है।बुद्धिमान होकर भी नारीजाहिल समझी जाती है।गैरों का पाप लिए सिर परवह दर-दर ठोकर खाती है।जीवन […]

शिवत्व की यात्रा : सम्बन्धों की कसौटी मे धर्म की पहली परीक्षा

March 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शीत ऋतु का प्रारम्भ था। प्रातःकाल की धूप अभी कोमल थी और हवा में हल्की ठंडक थी। निरंजन अपने घर के बाहर बैठा था। सामने आँगन में तुलसी के चौरे पर […]

शिवत्व की यात्रा : धर्म और सम्बन्ध मे प्रेम की मर्यादा

March 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा का समय समाप्त हो चुका था। आकाश स्वच्छ था और हवा में हल्की शीतलता घुलने लगी थी। संध्या का समय था। निरंजन घर के आँगन में बैठा था। सामने तुलसी […]

Poem : The Wall of Silence

March 18, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– When the limits of my sorrow, Are finally crossed, I’ll find no strength to borrow, In silence, I’ll be lost. Like a stone, I will harden, While you try to appease, […]

शिवत्व की यात्रा : साधना की गुप्त परम्परा

March 16, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– उस रहस्यमयी अतिथि के जाने के बाद कई दिनों तक निरंजन के भीतर एक अजीब जिज्ञासा बनी रही। वह व्यक्ति कौन था? उसका उद्देश्य क्या था? और उसे कैसे पता था […]

पछुआ मन घायल करे, पुरुआ करे उदास

March 16, 2026 0

– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–पछुआ मन घायल करे, पुरुआ करे उदास।झरते पत्ते शाख से, कोई आस-न-पास।।दो–देश लगे पतझर यहाँ, कोई हाल-न-चाल।मौसम निर्मम इस तरह, खीँच रहे सब खाल।।तीन–पंख घृणा फैला दिखे, करे कष्ट संवाद।मानव-मानव […]

शिवत्व की यात्रा : साधना का दर्पण

March 14, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की एक गहरी रात्रि थी। आकाश में बादल छाए हुए थे और हवा में एक विचित्र नमी थी। घर के बाहर पीपल के पत्तों की हल्की सरसराहट सुनाई दे रही […]

शिवत्व की यात्रा : भक्ति की वास्तविक परीक्षा

March 13, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समय अपने शांत प्रवाह में आगे बढ़ता रहा। निरंजन का जीवन अब एक संतुलित लय में चल रहा था। सुबह का ध्यान, दिन भर का श्रम, परिवार की जिम्मेदारियाँ और रात्रि […]

शिवत्व की यात्रा : गृहस्थाश्रम का यज्ञ

March 10, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव— समय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। निरंजन का जीवन अब आश्रम की एकांत साधना से निकलकर गृहस्थ जीवन की जटिलताओं में प्रवाहित हो चुका था। उसका घर छोटा था, जीवन साधारण […]

शिवत्व की यात्रा : भीतर के अंधकार से युद्ध है गृहस्थ का तप

March 9, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। पूर्व दिशा में सूर्य की पहली किरणें आकाश को हल्की स्वर्णिम आभा से भर रही थीं। आश्रम के प्रांगण में शांति थी, पर उस शांति के भीतर […]

शिवत्व की यात्रा का विस्तार : व्यक्ति से युगचेतना तक

March 6, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद पूर्णिमा की रात्रि थी। चन्द्रमा का प्रकाश आश्रम की शिला-दीवारों पर शान्त चाँदी-सा बिछा हुआ था। हवा में न शीत का तीखापन था, न वर्षा की नमी—केवल एक निर्मल संतुलन। […]

शिवत्व की यात्रा का दार्शनिक स्वरूप : समाधि से समाज तक

March 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम में सामान्य दिनचर्या प्रारम्भ हो चुकी थी—गौशाला में सेवा, रसोई में धूप की सुगन्ध, प्रार्थना का मधुर गान। परन्तु निरंजन के भीतर कुछ असामान्य था। समाधि […]

शिवत्व की यात्रा : समाधि की देहरी

March 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– शरद की स्वच्छ रात्रि थी। आकाश निर्मल, तारकाओं से भरा हुआ, मानो अनन्त का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हो रहा हो। आश्रम के उत्तर दिशा में स्थित उस प्राचीन पीपल वृक्ष के नीचे […]

शिवत्व की यात्रा : नाद, नृत्य और ओंकार का मिलन

March 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वर्षा ऋतु का अन्तिम चरण था। आकाश स्वच्छ था, परन्तु वायु में अभी भी जल की शीतलता थी। आश्रम के उत्तर दिशा में एक प्राचीन कक्ष था, जिसे नाद-मण्डप कहा जाता […]

शिवत्व की यात्रा मे मर्यादा, प्रेम और त्याग का अग्निसंस्कार

February 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक गंभीरता थी। प्रभात की वायु में भी जैसे कोई गूढ़ संकेत था। निरंजन शिवालय के सामने बैठा था, पर आज उसका ध्यान स्थिर नहीं था। उसके […]

शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : मौन-तप और वाणी की शुद्धि

February 25, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– श्रावण का अन्तिम सप्ताह बीत चुका था। आश्रम का वातावरण अब अधिक शांत था। वर्षा की रिमझिम ध्वनि, वृक्षों से टपकती जल-बूँदें और दूर बहती नदी का मधुर स्वर—सब मिलकर एक […]

शिवत्व की यात्रा का अगला चरण : भक्ति, ध्यान और ज्ञान की त्रिवेणी

February 24, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– आश्रम में उस दिन एक विशेष वातावरण था। श्रावण मास का अंतिम सोमवार था। प्रातःकाल से ही शिव-मंदिर में अभिषेक चल रहा था। जल, दुग्ध, बिल्वपत्र और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर […]

शिवत्व की यात्रा का एक और चरण : आसक्ति से मुक्ति

February 23, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रभात का समय था। आश्रम के पीछे बहने वाली छोटी नदी के तट पर निरंजन अकेला बैठा था। जल का प्रवाह शांत था, परन्तु उसके भीतर निरन्तर गति थी। वह उसी […]

शिवत्व की यात्रा : मौन का प्रकाश

February 22, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रातःकाल का समय था। आकाश में हल्की लालिमा फैल रही थी। पूर्व दिशा में सूर्य अभी उगा नहीं था, परन्तु उसका संकेत धरती को जागृत कर चुका था। आश्रम के प्रांगण […]

शिव की महिमा : जन-मन मे शिवत्व का प्रस्फुटन

February 21, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– महाशिवरात्रि की उस साधना-रात्रि के पश्चात् गाँव का वातावरण जैसे दीर्घकाल तक उसी भाव में डूबा रहा। यह परिवर्तन क्षणिक उत्साह का परिणाम नहीं था; यह धीरे-धीरे लोकजीवन में उतरने लगा। […]

मनुजत्व से शिवत्व तक की अगली कड़ी : मन्त्र, मूर्ति और महातत्त्व

February 20, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव — दार्शनिक चर्चा ने गाँव की चेतना को गहरा किया था, पर अब एक नया प्रश्न उठने लगा— क्या यह समस्त साधना केवल आन्तरिक है, या इसके लिए परम्परागत उपासना की […]

शिवत्व का दार्शनिक आलोक

February 19, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वटवृक्ष के नीचे होने वाली मौन-साधना ने गाँव के जीवन को केवल सामाजिक नहीं, दार्शनिक आयाम भी प्रदान कर दिया था। अब प्रश्न केवल व्यवहार के नहीं रहे; वे अस्तित्व के […]

शिवत्व की अन्तर्यात्रा का ताण्डव

February 18, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव-– गाँव में बाहरी व्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित हो जाने के बाद जीवन पुनः अपनी सहज गति में लौट आया, किन्तु भीतर कुछ ऐसा था जो अब पहले जैसा नहीं रहा। […]

सत्ता और चेतना का संघर्ष

February 16, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चेतना का प्रसार जितना शांत दिखाई देता है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होता है। गाँवों में उभर रही नई पद्धति—जहाँ निर्णय सामूहिक होते थे, जहाँ न्याय करुणा के साथ संतुलित […]

परम्परा और परिवर्तन का संगम

February 15, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गाँव के मध्य स्थित वह विशाल वटवृक्ष अब केवल छाया का स्थान नहीं रहा था; वह सामूहिक चेतना का केन्द्र बन चुका था। उसकी जटाओं की भाँति गाँव के लोगों के […]

राष्ट्रीय पर्वों को मुँह चिढ़ाता वैलेंटाइन डे

February 14, 2026 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– फरवरी महीने का दूसरा सप्ताह प्रेमियों के लिए होली, दीपावली और ईद से भी कहीं बढ़कर होता है। तरह-तरह के पक्षियों का दाने की तलाश में उड़ान भरते नजर आना मामूली […]

दुःख हमे ढूँढ़ते हैं

February 13, 2026 0

मै ख़ुशियाँ ढूँढ़ता हूँ हर ओर, मगर दुःख हमे ढूँढ़ते हैं। मै भलाई करता हूँ राघव, लोग कमियाँ ढूँढ़ते हैं। हमे नारियल समझकर लोग, तोड़ते और फोड़ते हैं। बड़ी उलझन मे हूँ आजकल, रिश्ते बनने […]

मेघनाद वध : रावण की निश्चित हार का प्रमाण

February 7, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– लंका अब केवल नगर नहीं थी—वह एक भय-शाला बन चुकी थी। रावण ने सभा में कहा—“अब मेरा पुत्र जाएगा।” इंद्रजीत। जिसने कभी पराजय नहीं देखी थी।जिसके अस्त्र देवताओं को भी चकित […]

सेतुसमुद्रम : धर्म पहले संवाद करता है और युद्ध बाद में

February 5, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– समुद्र सामने था—अथाह, गंभीर और चुनौतीपूर्ण। यह वही समुद्र थाजो रावण के अहंकार की सीमा बन चुका था। वानर सेना ठिठकी नहीं,पर प्रश्न था—“कैसे?” राम मौन थे। विभीषण ने सागर से […]

लंका की गर्दन पर अंगद का पैर

February 4, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमान लौट आए थे। समुद्र के उस पार से नहीं,बल्कि एक नए युग की घोषणा लेकर। उन्होंने जो देखा था,जो किया था—वह केवल कथा नहीं थी,वह प्रमाण था। वानर सेना पहले […]

प्रेम सभी भावों मे सबसे पावन और महान है

February 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रेम सभी भावों में सबसे पावन और महान है।प्रेम बिना जग सूना है और जीवन वीरान है।मन, विचार और हृदय मे गहरे तक है प्रेम बसा।प्रेम नित्य और ईश्वर है इसकी […]

रावण के आतंक का अन्त

February 3, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– हनुमानजी ने लंका को पहली बार देखा तो ठिठक गए। यह वैसी नहीं थी जैसी कथाओं में कही गई थी।यह केवल भय की नगरी नहीं थी—यह वैभव की नगरी थी। स्वर्ण-प्रासाद, […]

रामायण : रावण-निर्मित भय का उन्मूलन

February 1, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रावण को किसी ने देखा नहीं था—फिर भी सबने उसे देखा हुआ मान लिया था। किष्किंधा से दक्षिण की ओर बढ़ते वानर-दल के पाँव दृढ़ थे,पर मन अनिश्चित। वन बदलते जा […]

नजरों मे गिर जाना

January 30, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– गिरना भी भाँति-भाँति का होता है।चलते-चलते गिर जानाकिसी से टकराकर गिर जाना।नैतिकता के आँचल से गिर जाना।और तो और अपनो की नजरों से गिर जाना।लेकिन सबसे निकृष्ट हैअपनी नजरों मे गिर […]

The Nature of Love

January 18, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav— The human body is composed of the five great elements—earth, water, air, fire, and ether. In the Indian philosophical tradition, these five are not merely components of the body; they are […]

राघव के दोहे

January 15, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– प्रकृति हँसे सबसे कहे, छठा तत्त्व पहचान।नाम प्रेम है उसका, जो दे सबको प्राण॥ठोस तरल ये कुछ नहीं, न दृष्टि न स्पर्श।फिर भी सबमें व्याप्त है, बन जीवन का हर्ष॥प्रेम बिना […]

अंजाम मोहब्बत का

January 10, 2026 0

जो रहना चाहता है दूररहने दे।वो जो करना चाहता हैकरने दे।जो तेरा नहींतेरे पास क्या करेगा?उसे उसके हाल पररहने दे।जिन्दा रखतू अपनी खुद्दारी।जो हो रहा हैउसे होने दे।किरदारों का क्या बंदेआज कुछ और कुछ कल?हँसकर […]

कुहरा शीत घना दिखे, कम्पन करते मेख

January 9, 2026 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••एक–ठिठुरन ठिठकी ठण्ढ मे, टूट देह की जोड़।माघ-पूस की शीत मे, धरती पड़े न गोड़१।।दो–हवा हवाई हाल है, ख़तरे मे मुसकान।जीव-जगत् जड़ जोड़ता, जाड़े से हलकान।।तीन–जड़-चेतन हैँ काँपते, माँग रहे हैँ […]

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