एक अभिव्यक्ति

June 22, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय निभृत-निलय में वितान तानता मन,निश्शब्द-मूक याचना–सम्पृक्त उर्वशी-मेनका का तन।अनाघ्रात पुष्प-सा–सर्वांग सौन्दर्यस्वामिनी-द्वय की कान्ति,समग्र संसार-संसूचित–कमनीय कामिनी के क्लान्त कपोलों की भ्रान्ति।रूप, रस, गन्ध, स्पर्श का आकर्षण,जीवन्त अदृश्य पथ–अप्राप्य संस्पर्श का विस्मित […]

अन्तर्यात्रा

June 21, 2020 0

—-आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–शुष्क पड़ी संवेदना, आहत निज सम्बन्ध।अजब खेल है मोह का, कैसा यह अनुबन्ध?दो–मेरा-तेरा किस लिए, माया से अब डोल।गठरी दाबे काँख में, द्वार हृदय का खोल।।तीन–छक कर अब है जी लिया, […]

चाचा झगड़ू-भतीजा रगड़ू– एक

June 21, 2020 0

—आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चाचा झगड़ू– अरे बेटवा रगड़ू! भतीजा रगड़ू– चाचा! कई दफा बोला है, बेटा मत कहा करो। अरे! कछु लाज-सरम किहा करो। हम तुम्हार भतीजा हैं, भतीजा। भतीजा अउर बेटा मा बहुतै […]

आवर्तन और दरार

June 20, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कल तक था जो जगद्गुरु, भ्रष्ट बन गया देश।दिखते सब बहुरुपिये, तरह-तरह के वेश।।दो–कुम्भकर्णी सब नींद में, नहीं किसी को होश।बाँट रहे सब देश को, लोकतन्त्र बेहोश।।तीन–क़लम बिकाऊ दिख रहे, […]

क्या ज़ंग लग गयी, तुम्हारी जवानी में?

June 20, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जी चाहता, आग लगा दूँ अब पानी में,जी चाहता, ज़ह्र भर दूँ अब बानी में।‘इन्क़िलाब’ बोलने से कतराते क्यों?क्या ज़ंग लग गयी, तुम्हारी जवानी में ?हवा को पकड़ रुख़ बदल […]

आवाज़ दो, हम एक हैं

June 17, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–तेरी चोंचलेबाज़ी-ज़ुम्लेबाज़ी सबने देख ली है,उलटी गिनती शुरू हो गयी, जनता अब जागने को है।दो–मुझसे कुछ पूछने से तुम्हें ‘तुम्हारा हासिल’ क्या?पगडंडियों को छोड़ता नहीं, ‘चौराहों’ पे जवाब देता नहीं।तीन–इन्क़िलाब […]

बाक़लम मैंने सच की निगहबानी की है

June 17, 2020 0

चन्द अश्आर — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–बाक़लम मैंने ‘सच’ की निगाहबानी की है,क़लमबेचकर तमाशा दिखानेवाले कहीं और हैं।दो–हवा मंज़ूर करती है, मेरी दीवानगी,उसे मालूम है, मेरी कैफ़ीयत का जुनूँ।तीन–ख़त और ख़ुतूत की बातें अब […]

इशारों-इशारों में किसी रिश्ते का नाम न दो

June 17, 2020 0

चन्द अश्आर — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–यक़ीं हो गया, वह क़ाबिले-तारीफ़ नहीं,खड़ा ज़मीं पे और उड़ता आसमाँ में है।दो–मैं जिधर जाना चाहूँ, जाने दो, रोको न मुझे,इशारों-इशारों में किसी रिश्ते का नाम न दो।तीन […]

एलान कर दो, रौशनी मैं उगाता हूँ

June 17, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–नुमाइश किसकी लगी है, यह तो पता न चला,आँखें खुलीं तो जुम्हूरियत१ का हाथ बँधा पाया।दो–ज़ुल्मत२ हर सू, चिराग़ अब बन्धक है,एलान कर दो, रौशनी मैं उगाता हूँ।तीन :ज़ोरआज़्मा ज़ोरेबाज़ू […]

पेश करता हूँ, चन्द मौजूँ (उचित) शेर

June 16, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–बेचारा चाँद कसमसाहट में है,यहाँ ज़लील और जलील भी रहा करते।दो–चाँद की निगाहें किस-किस पे इनायत हों,“एक अनार सौ बीमार”-सा मंज़र दिखा करता यहाँ।तीन–चाँद का टुकड़ा-सा तेरा शफ़्फ़ाफ़१ बदन,कुछ दाग़ […]

चन्द मौजूँ अश्आर

June 16, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कैसे मान लूँ, सूरत कामिल१ चाँद-जैसा,उधार ही सही, सीरत२ होता चाँद-जैसा।दो–मेरे अशाइर३ चाँद को चाहते हैं बहुत,दाग़ के डर से चाँद को अलग करते हैं।तीन–चाँद देखने की आर्ज़ू पूरी न […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अपूर्ण आत्मकथा की अपूर्ण भूमिका

June 15, 2020 0

एक ‘विद्रोही’ की डायरी ”डंके की चोट पर” अन्त:करण से निकले शब्द महासागर के तटप्रान्त के निभृत निलय (एकान्त स्थान) पर जब स्वयं को खड़ा पाता हूँ तब जीवन का सच्चा पक्ष मेरे समक्ष आ […]

अपने अदब में आबे कशिश और लाइए

June 14, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–आओ! हम ग़ौर करें, सदियाँ गुज़र रहीं,ग़ुलाम तहज़ीब को, क्यों ढो रहे हैं हम?दो–तुमने कहा, मैंने सुना, हो जायें चुप अब हम,दीवारों के कान, इधर तक सरक आये हैं।तीन–माना आप […]

पथिक! बोलो

June 12, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय पथिक !परिचित पड़ाओं की प्रतीक्षाकब तक सहते रहोगे?अपरिचित राहें होतींतो पाँवों के छालेयों शिकायत नहीं करते।मरहम की तलाश में भटकनाकब भूल पाओगे?भिखारिन पगडण्डियों परकिसी पहचानी क़दमों की आहटजब-जब तुम्हारे कानों […]

उठा है जो तूफ़ान क़ह्र बरपायेगा बेशक

June 12, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आँखों-ही-आँखों में बात हो जाने दो,बातों-ही-बातों में रात हो जाने दो।बनने-सँवरने लगे ख़यालात के झरोखे,रातों-ही-रातों में मुलाक़ात हो जाने दो।ज़मानाए दराज़१ जुस्तजू अधूरी रही,चाहत दीदार का, शह-मात हो जाने दो।आँखों […]

टूटती है रसोई

June 8, 2020 0

ज़ैतून ज़िया – जब होती है कोई तलाकतो दो लोग नहीं टूटतेटूटती है रसोई भीनमक,चीनी, मिर्च, हल्दीभर लिया जाता है पन्नी मेंडब्बे खाली हो जाते हैइलायची, लौंग और जीरे केधीमी आंच पर जो प्रेम पका […]

कोरोना के नाम आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की एक अन्तरंग चिट्ठी

June 8, 2020 0

प्रिय भाई कोरोना! जुग-जुग जियो। इटली, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका आदिक देशों में तुम्हारा भाव बढ़ रहा था तब मुझे श्रीराम की तरह से कहना पड़ा था– अपि स्वर्णमय कोरोना पाश्चात्य देश: न […]

रह गये हैं तो प्रश्नों के छिलके

June 6, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मन-मस्तिष्क प्रश्नों कापिटारा बनता जा रहा है।अन्तहीन गह्वर मेंरह गये हैं तो प्रश्नों के छिलके।मूल को मुझसे दूर करसमझौतावादी दुनिया की प्रयोगशाला मेंपंचवर्षीय बिस्तर पर लेटाकरअनगढ़ पत्थरों की भाँतिअपरिपक्व हाथों […]

वो सपना था

June 2, 2020 0

पहली पहली बार था उससे पहले घर में मैं मेरे यार था , फिर आया ऐसी दुनिया में जहाँ मेरे लिए अंधकार था ।मंजिल कहीं और थी रास्ता कोई और था इसलिए मैं शांत था ,उजाले की दुनिया में भी दिख रहा मुझे चारों तरफ […]

ज़माने की यही है रीति

June 1, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भला यह कोई बात हुई, बातों-बातों में रात हुई। हमक़दम बन चलते रहे, मंज़िल के क़रीब घात हुई। मैं खड़ा रह गया दोराहे पे, वे आये और मुलाक़ात हुई। शातिर […]

मैं समाज का दर्पण हूँ

May 30, 2020 0

शरदेन्दु मिश्र ‘राहुल’ बघौली मैं समाज का दर्पण हूं,अभिव्यक्तियो का वर्णन हू ।सुख दुख का मैं मिश्रण हू,हा मैं मौलिकता का चंदन हू।। हमने देखे है कुछ विकासपर अधिकता में विनाश।कलम चली तो ये बोलेकुछ […]

हूँ तो मैं भी पत्रकार पर, ऐसा जिस पर क़लम लजाती

May 30, 2020 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ – डरता नहीं, न ही झुकता हूँ ।जो मन आए करता हूँ ।कहने को तो क़लमकार हूँपर सच कहने से डरता हूँ ।हमने गिरवी क़लम डाल दीसरकारी, दरबारी कोठों पर ।गाँधी […]

मज़दूराइन

May 29, 2020 0

ज़ैतून ज़िया तो अगली बारजब चुनना तुम उसे,तो देखना येकी चल पायेगी क्या?वो मीलों दूर पैदलवापस घर लौटने को,उठा पायेगी क्या?बोझ गृहस्थी कासिर पर,काट पायेगी क्या?भूख कई दिन तक पेट की !! जांच लेना तलवों […]

और तुम

May 29, 2020 0

ज़ैतून ज़िया मेरे पास ऐसी कई कहानियाँ हैँजिन्हें लिखूंतो कई बुर्राख कुर्तेदागदार हो जाएंशराफत की,दो पल्लीकई टोपियाँऔर ऊंची पगड़ियांनीचे गिर जायेंसदियों से गढ़ी गईइज़्ज़त कि मीनारेंज़मीनदोज़ हों और तुमजो, मुझसे नज़र मिलाते होतो ना मिलाओउन […]

पण्डित प्रभात शास्त्री धारा-प्रवाह संस्कृत-सम्भाषण करने में दक्ष थे– विभूति मिश्र

May 27, 2020 0

देववाणी संस्कृत-भाषा में पच्चीस ग्रन्थों– ‘अध्यात्म रामायण’, ‘रामगीतागोविन्दम्’, ‘गीताशंकर’, ‘संगीतमाधवम्’, ‘राहुलरचनामृतं’, ‘गीतगिरीशम्’ आदिक के सम्पादक ‘शास्त्रचूणामणि’ से अलंकृत; ‘संगमनी’ नामक पत्रिका के विश्रुत सम्पादक तथा हिन्दी साहित्य-सम्मेलन प्रयाग’ के विद्वान् निवर्तमान प्रधानमन्त्री पण्डित प्रभात शास्त्री […]

उजाड़

May 25, 2020 0

ज़ैतून ज़िया : तुम्हारे पास किस्से हैंवसंत केप्रेम केकहानियाँ हैँगुलदस्तों कीतितलियों की !! मेरे पास नहीं हैमै उजाड़ हूँयहाँ कोई नहीं आताकभी कभी आते है जंगली जानवरभूख कोशिकार कोसाधते है निशानामेरे मासूम चूहों, नेवलों और […]

हाँ प्रेममय हो जाऊं मैं

May 24, 2020 0

ज़ैतून ज़िया : मेरा नाम शीर्षक मेंलेकिन तुम्हारे नाम के बिना गुमनामइस शीर्षक को जानते है सबतुम्हारे नाम सेजब तक तुम्हें ना लिखा जायेहाँ वहीं नीचे कोने मेंशीर्षक पढ़ के भीपढता नहीं कोई तुम्हें रुकना […]

सबका अपना प्रेम

May 23, 2020 0

ज़ैतून ज़िया– सबका अपना प्रेम हैसबके अपने दर्द हैसबके शरीर पर छाले हैँकहीं हाथ, कहीं पाँव तो कहीं ह्रदय मेंकुछ सूखे तो कुछ बजबजे हैँसब चाहते हैं इस घाव को भरनालेकिन सबके भर नहीं पाते […]

चेहरा पे चेहरा अब तो न लगाइए हुज़ूर!

May 23, 2020 0

–— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हिचकी का सबब क्या है, बताइए हुज़ूर!परेशाँ हाले दिल को, अब सुनाइए हुज़ूर!कब तक भरमाइएगा, बाज़ीगरी दिखा के,चेहरा-पे चेहरा अब तो न, लगाइए हुज़ूर!लोग आपके हक़ीक़त से, वाक़िफ़ हैं यहाँ,रुख़ […]

मज़दूरों की वर्तमान स्थिति पर लिखी गयी अब तक की सबसे बेहतरीन कविता

May 23, 2020 0

कवि दिव्येन्दु दीपक ‘आधुनिक दिनकर’, रीवा (मध्यप्रदेश)- करता रहा जो साधना सब त्याग परहित, भूलकर संताप निज ले अधर स्मित, धूप, पानी, शीत के जो शीश चढ़ता, रह झोपड़ी में अन्य हित जो महल गढ़ता, बाधक […]

लेकिन…

May 22, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय लेकिन…जाने क्यों कल की बौरायी बदरीबेहद सीधी-सी लग रही है।अतीव विनम्र, चुप, मौन, शान्त-सहमी,मानो सारी उम्र कोईअपने को समझे जाने की प्रतीक्षा मेंखड़ा रह जाये। (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ […]

चलते-चलते-छलते-छलते

May 21, 2020 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक–कारवाँ रुके वा बढ़े, फ़िक़्र किस बात की,मंज़िल है पाँव तले, फ़िक़्र किस बात की?दो–रिश्ते अब सभी, ज़ख़्मी-से दिखते हैं,अपनों से बेहतर, ग़ैर यहाँ दिखते हैं।तीन–संगतराशी करते-करते, संगे दिल बन गया […]

नंगी आँखों की अस्लीयत

May 21, 2020 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– लगता है,कफ़न के कोर आतुर हैं,मेरी अँगुलियों के पोरों कोढकने के लिए।विवशताओं और बेचारगी कीबैशाखियों पर टँगा मैं,काली निशा की व्याप्ति को चीरने कीनाकाम कोशिशें कर रहा हूँ।बूढ़े बरगद की कोटर […]

मज़दूर की व्यथा

May 20, 2020 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक)– पैदल चलकर नाप रहे ख़ुद सड़कों की लंबाई, भूखें प्यासे  बच्चों  के  संग  मज़बूरी  में भाई,  नंगे  सूजे  पैर  जल  रहे, बिना रुके दिन रात चल रहे, भूख की […]

“हृदय के प्रणय-कुंज में लीन”– कविवर पन्त

May 20, 2020 0

आज (२० मई) कविवर पण्डित सुमित्रानन्दन पन्त की जन्मतिथि है। आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय : कल्पना के साथ सुमधुर कोमलता भी पन्त के काव्य में आरम्भ से ही संलक्षित होती है। वे प्रकृति का मातृरूप […]

माता-पिता से अनुरोध : इन बच्चों की गतिविधियों पर नज़रें दौड़ाते रहें

May 19, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इधर, हमारे देश में ‘रिजल्ट’ आने से पहले ही ‘सुसाइड’ करने का प्रचलन बढ़ गया है। ऐसे में ‘सिचुएशन’ अब बहुत ‘क्रिटिकल’ हो गया है। इसके लिए अब ‘सुसाइड कण्ट्रोलर’ […]

आँखें खोलो और मरन देखो!

May 19, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कराहता-सिसकता वतन देखो!घर-घर का उजड़ा चमन देखो!सिर चढ़कर बोलती बेशर्मी है,पर्द:नशीं का यह चलन देखो!शेर मानिन्द देश अब गुर्राता नहीं,ज़िन्दा लाश ओढ़े कफ़न देखो!मुल्क तबाह कर कुछ इठला रहे,हैरत है, […]

“एकांकी काल-सुन्दरी के सुन्दर गालों पर एक मधुर चुम्बन है”

May 19, 2020 0

● आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की आज (१९ मई) मृत्युतिथि है। एक रोचक संस्मरण ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक-) अध्यापक, आलोचक, सम्पादक तथा साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने यद्यपि ‘दुबे छपरा’, बलिया में […]

प्रेम की आस

May 18, 2020 0

गुड़िया कुमारी, पूर्णिया बिहार ✍️✍️ अभी तो बस नैन से नैन की बात हुई हैदिल से दिल की मुलाकात बाकी है ।इश्क़ की शुरुआत बाकी हैहर वो अधूरी बात बाकी है । अभी तो अंधेरी […]

माँ की ममता

May 17, 2020 0

अमर आकाश, श्रीनगर, पूर्णिया बिहार माँ की ममता की छाया,जिसने सदा हमें दुलराया ।माँ के आँचल का वह लालन,जिसमें हुआ मेरा पालन ।पाकर जिसकी उँगली का सहारा,घूमा मैं और देखा है नज़ारा । माँ की […]

मैं लिखने लगी हूँ

May 16, 2020 0

✍️गुड़िया कुमारी, पूर्णिया बिहार अनसुलझी सी जिंदगी को सुलझाने लगी हूँ, जिंदगी के सारें गमों को पीने लगी हूँ। लिखना मुझे इस क़दर भा गया, जिंदगी के दर्द को स्याही से पन्नो पर छापने लगी […]

ये जो वक्त बुरा है, बीत जाएगा

May 13, 2020 0

प्रिया कुमारी- ये जो वक्त बुरा हैये बीत जाएगा लेकिन, बीते वक्त के साथकुछ अपनों का साथ छूट जाएगा अभी भी वक्त हैंसंभाल जा मनुष्य, सब्र कर घरों से निकालने कादौर फिर आएगा, आफ़िस की […]

माँ : निःशब्द हूँ आज उस देवी के लिए

May 13, 2020 0

प्रिया कुमारी- निःशब्द हूँ आज उस देवी के लिए,जिस ने मुझे ये जीवन दान दिया।करने को पूरी मेरी हर ख़्वाहिशअपने अरमानों तक का त्याग किया।खोकर अपना सब कुछ उसनेमुझको पूर्णतः का एहसास दियाकैसे चुका पाऊँगी […]

नेता जी मुरदाबाद!

May 9, 2020 0

— पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–नेता जी के बग़ल में, सुघर सलोनी सोय।पुण्य कमाते हर घड़ी, पाप कहाँ से होय।।दो–‘नेता’ धाकड़ शब्द है, जपो-जपो हर रोज़।पाप करो हर दिन सदा, करो अनोखा खोज।।तीन–है रूप-रुपया-रुतबा, नेता की पहचान।आग […]

धर्मनिष्ठ महाराणा प्रताप

May 9, 2020 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ : काश ! महाराणा प्रताप धर्मनिरपेक्ष होतेउन्हें भी आधा भारत मिल गया होता ।देश, धर्म और स्वाभिमान हितहल्दीघाटी का भीषण युद्ध न होता ।समय सापेक्ष राजनीति करतेमुगलों से मिलते मौज़ करते […]

आज (९ मई) पण्डित महावीर प्रसाद द्विवेदी की जन्मतिथि

May 9, 2020 0

जन्मतिथि– ९ मई, १८६४ ईसवी; मृत्युतिथि– २१ दिसम्बर, १९३८ ईसवी हिन्दी को अनुशासन की छड़ी से शुद्ध बनानेवाले आचार्य द्विवेदी जी संयोजक और समन्वयक– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद् और समीक्षक) दशकों से संस्कृत, हिन्दी, बांग्ला, […]

कविता : प्रकृति

May 8, 2020 0

सौरभ कुमार ठाकुर– जहाँ जाने के बाद वापस आने का मन ना करे जितना भी घूम लो वहाँ पर कभी मन ना भरे हरियाली, व स्वच्छ हवा भरमार रहती है जहाँ सच में वही तो असली […]

शेष-अवशेष

May 6, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मन में मनका है नहीं, मन से मन का दोष।जीव ब्रह्म से पूछता, मन का कैसा रोष?दो–कान्ति अलक्षित हो रही, प्रमा अमा का रूप।यत्र-तत्र-सर्वत्र है, जीवन-रूप अनूप।।तीन–यश-अपयश चहुँ ओर है, जीवन भेद-विभेद।मन-मानस में […]

मदिरालय की मदहोशी ही, राजनीति पर तारी है

May 5, 2020 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ : देवालय के देव रो रहे, रीति सनातन हारी है ।मदिरालय की मदहोशी ही, राजनीति पर तारी है ।नहीं दिखी दुर्गापूजा, रामजन्म ताले के भीतर ।हनुमान जयन्ती के अवसर पर, लड़ते […]

गतिमान प्रगति-पथ देशों को, ‘वूहान’ बना डाला

May 1, 2020 0

हे ! ‘ चीनी जी’ शिनपिंग ,तुमने यह क्या कर डाला ?गतिमान प्रगति-पथ देशों को,‘वूहान’ बना डाला । सब शहर बन्द, घर- गाँव बन्द ,बाजार, माल, दूकान बन्द ।जीवन्त मार्गों, गलियों ,तक को वीरान बना […]

भोजपुरिया माटी-भाषा-थाती में गहरे तक पैठे वीर कुँवर सिंह का पुण्यस्मरण

April 26, 2020 0

डॉ● निर्मल पाण्डेय (इतिहासकार/व्याख्याता) : ——————— हड्डी ठोस, पेसानी दमकत, पुष्ट वृषभ-कंधा बा अस्सी के बा उमर भईल, का कहे बूढ़? अंधा बा सिंह चलन, रवि जलत नयन, जुग सुगठित चंड भुजा बा अईसन डोलेला […]

लघुकथा : आश्चर्य

April 26, 2020 0

सौरभ कुमार ठाकुर – आज सुबह जितेश का फ़ोन आया; हिमांशु ने फ़ोन रिसीव किया बोला: हेल्लो, क्या हालचाल जितेश, कैसे हो ? जितेश बोला; क्या भाई तबियत खराब है ?”भाई जितेश तुम अब बार-बार बिमार […]

अपने घर में रहिये प्यारे, लॉक-डाउन को सहिये प्यारे

April 17, 2020 0

अपने घर में रहिये प्यारे । लॉक-डाउन को सहिये प्यारे । कोरोना ‘चीनी’ विषाणु है, इससे बचकर रहिये प्यारे ।। आप सुरक्षित, तो देश सुरक्षित । कोरोना- योद्धा भी रक्षित । कोविड-19 सूक्ष्म – संचरी, […]

कुछ खोज नया निर्माण करो, घर में लेकिन हर हाल रहो

April 11, 2020 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक)– कुछ ऐसी चीजें रोज़ करें चलों खुद की हम ख़ुद खोज करें, बचना है इनसे सबको अब, अफ़वाहों से, उन राहों से जो करती है गुमराह हमें । अब […]

रुक मत सजनी, अब चल सजनी

April 8, 2020 0

अवधेश कुमार शुक्ला ‘मूरख हृदय’, कछौना चल री सजनी, छँटती बदली, अब क्या सोचे मन की पगली । कूटस्थ पंचतन्त्री बगरी , अब क्या ढूंढे, क्यों री सजली ।। निश्चेष्ट नियति, परिभाव शून्य, अवधान शून्य, […]

कविता : वक्त

March 30, 2020 0

राजन कुमार साह ‘साहित्य’मिथिला नगरी, जिला: मधुबनी, बिहार एक वक्त था, मेरा वक्त था, मेरे पास वक्त नहीं था । एक वक्त है, मेरे पास वक्त है, मेरा वक्त नहीं है । कहते हैं, वक्त, […]

कोरोना पर कुछ दोहे

March 22, 2020 0

डॉ. राजेश पुरोहित 1.कोरोना की मार से, बचा कहाँ संसार। दशों दिशाओं में मचा , देखो हाहाकार ।। 2 चेले निज घर बैठकर, मना रहे हैं मौज। गुरुवर शिक्षा दे गये, उठा ग्रंथ कन्नौज।। 3 […]

शेष-अवशेष

March 13, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : मैंने सूरज का जवाल१ भी देखा है, तूने कर लिया ख़ुद के साये पे भरोसा? दो : मेरे लाख कहने पे भी नहीं मानते हैं लोग, यों खुलकर मत मिलो बुरा […]

आवर्त्तन और दरार

March 13, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : जब भी चाहा, उठाकर फेंक दिया, दोस्ती का नाम देते शर्म आयी नहीं। दो : तुम भी आ जाओ, मेरे साये में, दीवार होने की सज़ा मालूम है। तीन : बहके-बहके […]

एक अभिव्यक्ति

March 12, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय– बेशक, चाहो पर बताओ नहीं, बेशक, पाओ पर सताओ नहीं। मुद्दत बाद ज़िन्दगी सयानी हुई, उसे सब्ज़बाग़ दिखाओ नहीं। मस्त-मौला है और फक्कड़ भी, भूले-बिसरे भी आज़्माओ नहीं। हक़ीक़त की ज़मीं ही बेहतर […]

अभिव्यक्ति के दंश

March 12, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : ऐ हुस्न की मलिक:! आँखें यों मला न करो, वही तस्वीर है, जो छोड़कर तुम आयी थी। दो : अब लौटकर न आयेंगी फिर से बहारें, मेरे आँसू में अब डूबते […]

चन्द अश्आर

March 12, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : बेतरतीब बनती जा रहीं रिश्ते की ज़ंजीरें, किसी बच्चे की चाहत-मानिन्द उलझी हुईं। दो : आँखों ने आँखों से गुफ़्तुगू क्या कर ली महफ़िल में, फ़क़त बात इतनी थी मगर अफ़साना […]

पृथ्वीनाथ पाण्डेय के कुछ शे’र

March 11, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय– एक : जब भी चाहा, उठाकर फेंक दिया, ऐसी दोस्ती से तेरी दुश्मनी ही भली। दो : तुम भी आ जाओ, मेरे साये में, मुझे दीवार होने की सज़ा मालूम है। तीन : […]

एक अभिव्यक्ति

March 11, 2020 0

पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक– तिल का ताड़ दिखने लगे हक़ीक़त में, सोचना, दिमाग़ का ज़ंग अभी बाक़ी है। दो– कुछ अलग हटकर सोचा करो साहिब! यहाँ जितने हैं ‘रेडीमाल’ बेचा करते हैं। तीन– तिनके-तिनके जोड़कर आशियाँ […]

कविता : स्त्री

March 11, 2020 0

आकांक्षा मिश्रा : एक स्त्री आधी से ज्यादा दूरी अकेले तय करती हैं , तुम्हारे सारे अधिकारों को कर्तव्य मानकर सफर जारी करती हुई तुम्हें मुक्त कर देती हैं मुड़कर मत देखो ,अधूरी रहेगी सारी […]

तुम सही कैसे हो सकते हो!

February 27, 2020 0

✍️ प्रिया कुमारी, नई दिल्ली अच्छा तो तुम सही, मैं गलत हूँ लेकिन ये बताओ मुझ पे हाथ उठा के, मेरे आत्म सम्मान को गिरा के तुम सही कैसे हो सकते हो …. मेरे हर […]

जियो और जीने दो

February 23, 2020 0

महावीर स्वामी ने कहा था जिओ और जीने दो। ये भावना शनैः-शनैः समाप्त होती जा रही है। मतलबपरस्ती में लोग एक दूसरे का हक छीन रहे हैं। परोपकार दया सदभाव भाईचारे की भावना ण कहाँ […]

एक भोजपुरी शोक-गीत

February 19, 2020 0

—– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इसके पहले कि आप इस शोक-प्रधान भोजपुरी गीत को पढ़ें , समझें तथा अनुभव करें, आपकी सुविधा के लिए इसकी पृष्ठभूमि का एक शब्द-चित्र प्रस्तुत है :——– तहरा जिनिगिया के भोर […]

मुट्ठीभर आकाश

February 19, 2020 0

— डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक– मुखड़ा मौलिक दिख रहा, दिखता करुणा-रूप। शोकाकुल परिवेश है, बनती मृत्यु अनूप।। दो– मौन निमन्त्रण मौन है, सूनी माँग न देख। सधवा विधवा बन गयी, कैसा विधि का लेख।। तीन […]

प्रिये तुम्हारे प्रेम पत्र का, हर अक्षर आधार बन गया

February 17, 2020 0

जगन्नाथ शुक्ल….✍ (प्रयागराज) प्रिये तुम्हारे प्रेम पत्र का , हर अक्षर आधार बन गया। भावों की जो बनी तूलिका, उस में ही संसार बस गया।। चढ़ते सूरज की किरणों सङ्ग, राग हमारा गहराया है। आते […]

पुस्तक समीक्षा : कविता सङ्कलन ख़्यालों का बागीचा

February 15, 2020 0

लेखिका:-चाँदनी सेठी कोचर प्रकाशक:- अंतरा शब्द शक्ति प्रकाशन वारासिवनी मध्यप्रदेश संस्करण:- प्रथम 2019 मूल्य:- 40 रुपये समीक्षक:- डॉ. राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” साहित्य भूषण सम्मान से सम्मानित दीप देहरी लघुकथा संग्रह ,की लेखिका देश की ख्यातिनाम […]

खुदा मुझे इलाहाबादी खुराफ़ातियों से बचाये : मिर्ज़ा ग़ालिब (पुण्यतिथि विशेष)

February 15, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) ● आज (१५ फ़रवरी) मिर्ज़ा ग़ालिब की पुण्यतिथि है । जाने क्यों, असद उल्लाह बेग़ ख़ाँ ‘मिर्ज़ा ‘ग़ालिब’ जैसे ज़हीनी अदीब और बेमिसाल शाइर के साथ ऐेसा कौन-सा वाक़िआ हुआ कि […]

अभियान गीत : हर हाथ क़लम

February 11, 2020 0

हर हाथ कलम अभियान चलाकर मानेंगे। हम सरकारी स्कूल की सूरत बदल कर मानेंगे।। श्रम से अपने बच्चों को आगे बढ़ाकर मानेंगे। गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का परचम हम ही लहरायेंगे।। पेन पेंसिल और रबर से […]

Poem : Be ahead on duty

February 10, 2020 0

Awadhesh Kumar Shukla ‘Murakh Hirdai’ (Head Master UPS Kamipur, Kachhauna)- Lo! life is busy So life is easy, If life is lazy, Then life is crazy. Behold at beauty, Be yield to the duty, If […]

अरे बिल्लो रानी! देखती जाओ

February 5, 2020 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- काहें के दँतवा चियार कर घिंघोर रही हो जी? तुम्हारे भी आच्छा दिनवा आ गया है। चौकीदरवा ‘दूधा का भात’ खा गया। उसको हम तुम्हारे लिए सरिहार कर रखे थे। अब का […]

कविता : बसंत पंचमी

January 29, 2020 0

शालू मिश्रा (युवा साहित्यकार/अध्यापिका, रा.बा.उ.प्रा.वि.सराणा, जालोर) मधु ऋतु का हुआ है आगमन, वसुधा ने किया पीतांबर धारण । प्रकृति में चहुँ ओर सुगंध छायी हैं, मनमोहक सी ये बेला आई है। समीर में हुआ केसर […]

लता खरे की कृति काव्यमेध का विमोचन सम्पन्न

January 20, 2020 0

भवानीमंडी:- छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में रविवार को चित्रांश कल्याण समिति के तत्वाधान में श्री मदन श्रीवास्तव के संयोजन मे कायस्थ सम्मेलन संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री एम एम श्रीवास्तव न्यायाधीश उच्च न्यायालय […]

राजनैतिक व्यंग्य : दिल्ली में चेहरे की तलाश

January 17, 2020 0

महेन्द्र नाथ महर्षि, से•नि• वरिष्ठ अधिकारी दूरदर्शन (गुरुग्राम)- आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पिछली टीम के बहुत से चेहरे नयों से बदल दिए गए […]

अंधकार संग मैं निरा अकेला, मुझको याद प्रिये की आयी

January 8, 2020 0

असित दुबे, हरदोई- इस शीतल सी निशा घड़ी में, चपल चंद्रिका चाँद को लाई, अंधकार संग मैं, निरा अकेला, मुझको याद प्रिये की आई। यह चुभती सी विछोह वेदना, है घुली हुई मेरे प्रतिपल में, […]

इस समाज की नीवँ धर्म है

January 8, 2020 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ हिंसक पशु कब समझा है, कोमल मन के भाव मधुर । बिना दण्ड कब सुधरे हैं, वामी, कामी और दुष्ट असुर । इस समाज की नीवँ धर्म है, यह हर प्राणी […]

क्षेत्रीय बोलियों के ऑनलाइन कवि सम्मेलन में बही काव्य की सरिता

January 7, 2020 0

राजेश पुरोहित, भवानीमंडी : साहित्य संगम संस्थान दिल्ली के बोली विकास मंच की ओर से क्षेत्रीय बोलियों के अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन में विभिन्न प्रान्तों के कवि कवयत्रियों ने अपनी कविताओं गीतों के माध्यम […]

अतीत-अतीत होते मेरे सहयात्री!

December 31, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपने बलिष्ठ कन्धों पर तीन सौ पैंसठ दिनों के भार पल-पल लाद कर मुखमण्डल पर निष्कामता का भाव लिये अनवरत-अनथक यात्रा करते-करते अतीतोन्मुख हो रहे मेरे सहयात्री! तुम क्लान्त हो चुके हो; […]

नव वर्ष का हदय से करें स्वागत

December 27, 2019 0

शालू मिश्रा (युवा कवयित्री/अध्यापिका) रा.बा.उ.प्रा.वि.सराणा, जालोर, नोहर (हनुमानगढ़) राजस्थान पल पल बीत गया इस वर्ष को सहेज कर यादों में । नव वर्ष का हदय से करे स्वागत महकती सी कल की नई भोर में […]

जय हिन्द का उद्घोष, मन्त्रोच्चार है मेरी दृष्टि में

December 25, 2019 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’– जिस भारत माता के बेटे राम और कृष्ण आकर बने हों। जिस सनातन भूमि में देवगण ऋषि बनकर रमे हों । जिस धरा को त्याग से राणा ने उर्वर कर दिया […]

मैथिली अधिकार दिवस पर ननौर में साहित्यिक गोष्ठी का हुआ आयोजन

December 23, 2019 0

भवानीमंडी:- सोमवार को मधुबनी जिले के ननौर गाँव मे कपिलेश्वर नाथ शिव मन्दिर परिसर मे एक साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मैथिली अधिकार दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम दो सत्रों मे सफलता पूर्वक सम्पन्न […]

“जोकर’ हूँँ मैं और मेरी जिंदगी सर्कस

December 23, 2019 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक संपर्क सूत्र :- 9340411563 ‘जोकर’ हूं मैं और मेरी जिंदगी सर्कस है । जिसमें मुझे लोगों को हंसाने, लोगों को खुश करने का काम मिला है । मगर […]

कविता : आत्मरक्षा करेगी नारी

December 22, 2019 0

शालू मिश्रा (युवा साहित्यकार/अध्यापिका) रा.उ.प्रा.वि.सराणा (जालोर) देखो बहुत सह लिए उसने जुल्मों-सितम, अब आत्मरक्षा की ख़ातिर नारी वीरांगना कहलाएगी। अपने आत्म सम्मान की रक्षा में नारी,अस्त्र शस्त्र उठाकर अपनी आबरू वो बचाएगी। इस कलयुग में […]

परीक्षा का भय

December 14, 2019 0

शालू मिश्रा, युवा साहित्यकार/अध्यापिका (रा.बा. उ.प्रा.वि.सराणा, आहोर), नोहर (हनुमानगढ़) कौन था वो महान जिसने बनाई थी ये रस्म, परीक्षा आने का नाम सुनकर वो ही बात याद आ जाती है । प्रश्न पत्र को देख […]

ले वो वादे गरीबी मिटा देंगे

December 10, 2019 0

ले वो वादे गरीबी मिटा देंगे, ले वो वादे बेरोजगारी मिटा देंगे, लो वो वादे भ्रष्टाचार मिटा देंगे, हम नया हिन्दुस्तान बना देंगे । ले वो वादे कुपोषण मिटा देंगे, ले वो भारत को साक्षर […]

पुस्तक समीक्षा, कृति : मूर्खमेव जयते युगे युगे

December 9, 2019 0

लेखक:- विनोद कुमार विक्की प्रकाशक:- दिल्ली पुस्तक सदन शाहदरा, नई दिल्ली पृष्ठ:-119 संस्करण:- प्रथम, 2020 समीक्षक:-राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित‘ तेरी भौं भौं मेरी म्याऊं में नेताओ के झूंठे वादे के बारे में बताया की नेता […]

‘एक शाम कान्हा के नाम’ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न

December 9, 2019 0

राजेश पुरोहित, भवानीमंडी – साहित्य संगम संस्थान दिल्ली के योगशाला मंच पर रविवार को एक शाम कान्हा के नाम पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । जिसकी अध्यक्षता संस्थान के राष्ट्रीय अध्य्क्ष राजवीर […]

राष्ट्र भाषा गौरव सम्मान से नवाजे गये संस्थान के नवरत्न

December 6, 2019 0

भवानीमंडी:- साहित्य संगम संस्थान की सम्मानशाला में चलने वाले साहित्य सम्मान की अनवरत सम्मान योजना में संस्थान के नौ साहित्य धर्मियों को राष्ट्र भाषा गौरव सम्मान प्रदान किया गया । सम्मानित साहित्यकारों ने सम्मानकर्ता लता […]

जस्टिस फॉर प्रियंका रेड्डी

December 6, 2019 0

सीतांशु त्रिपाठी, जिला- सतना (मध्यप्रदेश) फिर लुट गई है गुड़िया किसी मां की चलो रे हम सब मिल के फिर उसको इंसाफ दिलाये । उसकी तस्वीर पर जस्टिस फॉर प्रियंका रेड्डी लिख कर दो-चार दिनों […]

कविता : हिम्मत

December 3, 2019 0

सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक) मुजफ्फरपुर, बिहार, मो0- 8800416537 तुम कुछ कर सकते हो  तुम आगे बढ़ सकते हो । तुममे है बहुत हिम्मत  तुम जग को बदल सकते हो । तुम खुद से […]

व्यंग्य : नेताओं से यारों होता गदहा महान है

December 1, 2019 0

राजन कुमार साह ‘साहित्य’ (दरभंंगा, बिहार) चंद नेताओं से यारों होता गदहा महान है । चंद पैसो के लिए बेचता नहीं अपना ईमान है । कौन कहता है हमारे देश में महंगाई बहुत है । […]

कविता : दहेज दानव

November 30, 2019 0

कब तक अपनी बहू बेटियाँ चढ़ती रहेंगी बलिवेदी पर । इस दहेज दानव के मुख का कब तक रहें निवाला बनकर ? कब तक इनके पैरों में जकड़ी रहेंगी बेड़ियाँ ? कब तक हम सब […]

बेशक, मैं एक सम्पादक हूँ

November 29, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– जी हुज़ूर! मैं सम्पादक हूँ; तरह-तरह का सम्पादक हूँ; किसिम-किसिम का सम्पादक हूँ। पूर्वग्रह से ग्रस्त सम्पादक हूँ। सवाल है– रूप-रुपये-रुतबे का तलाश है, ऐसे दाताओं की फिर तो आपको फ़ीचर-पेज का […]

सिरोही राजस्थान के साहित्यकार छगनलाल गर्ग की कृति काव्यमेध का जिला कलेक्टर के कर कमलों से हुआ विमोचन

November 27, 2019 0

साहित्यिक समाचार भवानीमंडी:- अखिल भारतीय साहित्य परिषद और पेंशनर विभाग के तत्वावधान में रविवार को पेंशनर समाज भवन, सिरोही में श्री मान जिला कलेक्टर महोदय श्री सुरेन्द्र कुमार सौलंकी की अध्यक्षता में काव्यगोष्ठी का भव्य […]

आख़िर कब तक?

November 24, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय : जुम्हूरियत को नंगी दिखाओगे कब तक? बेहयाई की सीरत दिखाओगे कब तक? जाहिल-मवाली अब दिखे हैं हर जानिब, लुच्चों को सिर पे बिठाओगे कब तक? तवाइफ़ से बढ़कर सियासत है दिखती, […]

पुस्तक समीक्षा, कृति :- काव्यमेध

November 24, 2019 0

लेखिका:- अर्चना पाण्डेय प्रकाशक:- साहित्य संगम प्रकाशन, इंदौर पृष्ठ:- 23 संस्करण:- 2019 (प्रथम) समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” अध्यक्षीय में राजवीर सिंह मन्त्र लिखते हैं कि हर रचनाकार के मन मे ये होता है कि […]

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