ख्वाबों वाली लड़की
जी, हाँ, आप, करती है पर नाम नहीं लेती वो पुराने ख्यालों वाली लड़की हैं। तहजीब, सादगी , देख कर तुम्हें भी यही लगेगा कि वो किताबो वाली लड़की है, उसकी आंखें, उसका चेहरा, कान […]
जी, हाँ, आप, करती है पर नाम नहीं लेती वो पुराने ख्यालों वाली लड़की हैं। तहजीब, सादगी , देख कर तुम्हें भी यही लगेगा कि वो किताबो वाली लड़की है, उसकी आंखें, उसका चेहरा, कान […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इन दिनो उत्तरप्रदेश मे गरमी के महाप्रकोप से जनता त्रस्त हो चुकी है; ऊपर रोज़-रोज़ की बिजली की कटौती से जनता हलकान हो चुकी है। इस समय उत्तरप्रदेश मे सर्वाधिक […]
पुण्य और प्रेम????परोपकार तो पुण्य करवाता है प्रेम नहीं।पर (पराया) का उपकार ही पुण्य है।पर का स्वीकार ही प्रेम है।जब तक कोई पराया जैसा अनुभव हो तब तक प्रेम कहाँ..?पराए जब अपने लगें तभी प्रेम […]
उस समय हमारे पूरे मोहल्ले में एक ही टेलीविजन हुआ करता था– ब्लैक एंड ह्वॉइट, लकड़ी का शटर वाला । तब चैनल के नाम पर टीवी पर सिर्फ दूरदर्शन आता था। रामानंदकृत रामचरितमानस का प्रसारण […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इन दिनो एक ऐसी फ़िल्म जन-जन के दिलो दिमाग़ को बेचैन किये हुए है। ‘द कश्मीर फ़ाइल्स’ के बाद ‘द केरल स्टोरी’ का असर अभी ख़त्म होने की शुरूआत होने […]
बहुत समय पहले की बात है। तब मैं शायद 6-7 साल का रहा होऊंगा। उन दिनों ज्यादातर घरों में भोजन पकाने के बाद आग को राख से ढक दिया जाता था। अगली बार भोजन पकाने […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरा-जैसा मनुष्य कभी इतना उदारवादी हो जाता है कि अब तक के जीवनकालखण्ड मे जितना कुछ सार्थक बोध कर पाया है, वह सब लुटाता जा रहा है; बिना विचार किये― […]
90 के दशक तक शादियों में मुख्य रूप से चार संस्कार हुआ करते थे:- 1.बरदेखी – लड़के को देखना (लड़की बहुत कम लोग ही देखते थे या नहीं देखते थे। जाति, कुल, गोत्र सही हो, […]
संस्थाओं का निजीकरण करने की मुहिम ने अब जोर पकड़ लिया है। लेकिन इसकी शुरुआत बहुत पहले हो चुकी थी। छोटे मोटे कार्यों को ठीका, आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराने की तब प्रायोगिक स्तर पर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यह लोक विचित्रता से युक्त है; कहीं दिन मे ‘रात’ है तो कहीं रात मे ही ‘दिन’ है। अब देखिए न, ऊपर जो चित्र दिख रहा है, वह किसी बच्ची […]
—- ० आत्ममन्थन ०—- ★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जयजयकारा कभी श्रद्धा-विश्वास के साथ होता था, अब तो वैसी आस्था किंवदन्ती बन चुकी है। यदि कोई बताता और सुनाता है तो ‘दन्तकथा’ से अधिक कोई आकार-प्रकार […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय श्रमिक-वर्ग की बेकारी उतना चिन्त्य नहीं है जितना कि शिक्षित-वर्ग की। श्रमिक-वर्ग कहीं-न-कहीं सामयिक काम पाकर अपना जीवन-यापन कर लेता है; परन्तु विद्यार्थी-वर्ग जीविका के अभाव मे आधि-व्याधि का शिकार […]
यह कहना मुश्किल कि पीपल के इस बड़े से पेड़ के पास मेरा फ्लैट है या मेरे फ्लैट के पास यह पीपल का पेड़ है। नजदीकी इतनी कि खिड़की खोलते ही इसकी कोमल टहनियां गाल […]
आज (५ जून) ‘विश्वपर्यावरण-दिवस’ है। ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वैश्विक पर्यावरण की स्थिति अति भयावह है। हमारा पञ्चतत्त्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश एवं वायु) विषाक्त हो चुका है। यही कारण है कि धरती की […]
तब मैं वायुसेना से रिटायर होकर दिल्ली आया ही था। एक रोज वायु सेना स्टेशन तुगलकाबाद के सामने स्थित खानपुर बस स्टॉप के पास खड़ा हुआ था। तभी एक बस आकर रुकी और कुछ सवारियां […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमारे देश मे प्रतिवर्ष कोई-न-कोई भीषण रेलदुर्घटना होती आ रही हैं; परन्तु दुर्घटनाओं से सम्बन्धित रेलविभाग के अधिकारी सीख ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं। ४२ वर्षों-बाद यह भीषण दुर्घटना […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भारतीय जनता पार्टी का झण्डा लिये, भगवाधारी नरेन्द्र मोदी के स्वागत मे पहुँचे थे, जबकि उस स्थल पर हज़ारों यात्री अपनी जान गवाँ चुके थे; बुरी तरह से घायल हो […]
(मानवजीवन विकास पर आधारित प्रश्नोत्तर अवश्य पढ़ें व मनन करें)1•प्रश्न;मित्र और मित्रता की परिभाषा क्या है?????उत्तर;वास्तव में प्रेम से ही मैत्री का उदय होता है।किसी का सहचर होना मैत्री का प्रथम चरण है।मित्र सहचर से […]
किसी ने पूछा है;क्रोध अधिक आता है, इस क्रोध से कैसे छुटकारा हो?????प्रेम ही क्रोध का नियामक है।जैसे-जैसे प्रेम की वृद्धि होती है क्रोध स्वत: नियन्त्रित होने लगता है।और जैसे-जैसे ज्ञान की वृद्धि होती है […]
‘कोरा’ से प्राप्त ज्ञान के आधार पर पेड़ों पर चढ़ने के दो तरीके हैं:- हालाँकि यह तकनीक सीखना कठिन है। हमारी शारीरिक रचना इसे करना कठिन बना देती है क्योंकि आपको अपने द्रव्यमान के केंद्र […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आगामी लोकसभा-चुनाव मे ‘भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस’ दक्षिण-भारत, पूर्वोत्तर-भारत, पूर्वी भारत, पश्चिम-भारत के कई राज्यों तथा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखण्ड, हिमाचलप्रदेश, महाराष्ट्र आदिक राज्यों मे स्वतन्त्र रूप से चुनाव लड़कर […]
प्रश्न- सत्य क्या है…? उत्तर- सामान्यतः किसी भली या बुरी बात या घटना को ज्यों का त्यों कहने को ही लोग सत्य बोलना कहते हैं।लेकिन ऐसा बोलने वाला मामला तथ्य होता है सत्य नहीं।सत्य तो […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जयपुर (राजस्थान) मे सचिवालय के पास ‘योजना भवन’-स्थित ‘सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग’ के बेसमेण्ट की आलमारी मे रखे एक बैग मे से एक किलोग्राम सोने की सिल्ली (मेड इन स्विट्ज़रलैण्ड), […]
Hardoi– यह उन दिनों की बात है जब गांव में प्रधान चुने जाने पर सिर्फ प्रतिष्ठा मिलती थी पैसे नहीं। तब गांव की किसी लड़की की शादी पूरे गांव की बिटिया की शादी हुआ करती […]
मनुष्य के तीन मुख्य विक्षेप होते हैं- भय, दैन्य, दुःख। यही तीन रोग हैं जो मनुष्य को आजीवन त्रस्त किये रहते हैं और तीन प्रकार की शंकाएं भी उत्पन्न करते रहते हैं। इन तीनों ग्रंथियों […]
हाईस्कूल (10वीं) की परीक्षा में मुझे हिंदी में 58 जबकि बायोलॉजी में 75 (डिस्टिंक्शन) अंक मिले। इंटरमीडिएट में मुझे अंग्रेजी में मात्र 46 जबकि रसायन विज्ञान में 63 अंक मिले। अगर परीक्षा में प्राप्त अंकों […]
अमित शाह!‘राष्ट्रगीत’ की रचना बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने की थी। गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर ने ‘राष्ट्रगान’ की रचना की थी और वह भी केवल अपने देश के लिए, ‘दो देशों’ के लिए नहीं। उन्होंने बांगलाभाषा मे अपनी […]
प्रश्न-जो मीरा और अर्जुन ने कृष्ण से प्रेम किया, शबरी और भरत ने राम से प्रेम किया, क्या वह प्रेम सत्य के प्रति प्रेम नहीं था…? उत्तर-धूर्त लोग जीवित सदगुरु की भक्ति से डरते हैं।मृत […]
ज्वलन्त ०——- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस देश मे ‘सेंसर बोर्ड’ के अधिकारी निकम्मे हो चुके हैं; क्योंकि उनकी नियुक्तियाँ सरकारी कृपा पर निर्भर करती आ रही हैं। ‘सेंसर बोर्ड’ के सारे नियम अब […]
“गिरा जहाँ पर खून वहाँ का पत्थर-पत्थर जिंदा है !जिस्म नहीं है मगर नाम का अक्षर-अक्षर जिंदा है !जीवन में ये अमर कहानी अक्षर अक्षर गढ़ लेना !शौर्य कभी सो जाये तो राणा प्रताप को […]
कछौना, हरदोई। दैनिक यात्री संघ ने कानपुर अमृतसर सुपरफास्ट ट्रेन को बालामऊ जंक्शन पर आरक्षण की सुविधा के संदर्भ में सांसद अशोक रावत को पत्र लिखकर मांग की। जिससे यात्रियों को राहत मिल सके। दैनिक […]
धर्म क्या है? जीवन में पारस्परिक सहजीविता के आधार पर “न्यायपूर्वक” जीना ही धर्म है। धर्म जीवन को कभी दो भागों में नहीं बाँटता था। राजनीति ने जीवन को दो भागों में बाँट दिया-एक शोषक […]
एयर फोर्स अकादमी में मेरे एक मित्र थे-संतोष कुमार गुप्ता, जौनपुर वाले। संतोष शांत स्वभाव के संतोषी व्यक्ति थे। वह बहुत अच्छे कुक थे और हलवाई भी। भोजन तो वह लाजवाब बनाते ही थे, लौंगलता […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमे अच्छी तरह से जान लेना चाहिए कि दिल्ली-पुलिस केन्द्रीय गृह-मन्त्रालय के अधीन (‘आधीन’ अशुद्ध है।) है, जिसके सर्वेसर्वा गृहमन्त्री अमित शाह हैं और जिसके दल का सांसद बृजभूषण शरण […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज (१ मई) कुछ देर पहले विवादास्पद साधु-संत संतोष भदौरिया उर्फ़ ‘करौली बाबा’ के कानपुर-स्थित आश्रम ‘करौली सरकार आश्रम’ के एक कक्ष मे ग्रेटर नोएडा के ‘प्रापर्टी डीलर’ ५६ वर्षीय […]
प्रश्न:-लोग कहते हैं मृत्यु एक सत्य है।तो जीवन को सत्य क्यों नही कहा जा सकता…?इस ब्रह्माण्ड में जीवन भी तो हैतो फ़िर जीवन क्यों नही सत्य है..?????उत्तर:-सत्य ही तो जीवन है।जीवन ही शाश्वत और सनातन […]
◆ नरेन्द्र मोदी ने ‘पदक’ पाने के बाद उन्हीं पहलवानो की पीठ ठोंकी थी और उनके प्रति सम्मानबोधक विचार भी व्यक्त किये थे, जिन्होंने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णपदक, रजतपदक तथा काँस्यपदक जीतकर ‘देश’ की प्रतिष्ठा […]
सहज और सरस आचरणसहित मनुष्य मे ही स्वभावत: ‘विनयशीलता’ रहती है। उसकी वही नमनशीलता कर्कश चरित्र को भी शीतल कर देती है। ऐसे ही लोग वस्तुत: ‘साधु’, ‘संत’, ‘महात्मा’, ‘पीर-फ़क़ीर’ इत्यादिक हैं; उनसे इतर साधु, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय निस्संदेह, बिहार के कुख्यात राजनेता आनन्द मोहन की अनुचित तरीक़े से रिहाई पूरी तरह से ग़लत है; परन्तु इस पर ऐसे राजनेता विरोध कर रहे हैं, जिन्होंने अपने ऊपर लगायी […]
देश के शासनसंचालकवृन्द!जय भारत।मैने देशवासियों की मानसिक स्थिति और उसकी आह-संवेदना का प्रतिनिधित्व करते हुए, यह पत्र आप सभी के नाम समवेत रूप मे निर्भीकतापूर्वक प्रेषित किया है। आप लोग समस्त शासन-संचालकों को देश के […]
कल (२४ अप्रैल) राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की निधनतिथि थी। प्रस्तुत है, एक प्रेरक प्रसंग :―(प्रथम प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की साहित्यिक प्रतिभा से प्रभावित होकर उनका मनोनयन राज्यसभा के […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इतिहास से सीख न लेने पर महान् शक्ति भी पराजित होती रही है। एक शक्तिसम्पन्न व्यक्ति जब ‘बलप्रयोग’ करते हुए, निरंकुशता की ओर बढ़ता है तब उसकी बुद्धि किस समय […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इन दिनो ‘भारतीय जनता पार्टी’ की सरकार एक समुदाय-विशेष के पीछे हाथ धोकर पड़ी हुई है। इतना ही नहीं, अटलबिहारी वाजपेयी-सरकार के बाद से देश मे जिस प्रकार का शासन-तन्त्र […]
किसी मानवीय राष्ट्र या समाज की व्यवस्था में जातिवाद एक भयंकर जहर के समान घातक है। गुणानुसार कर्मो का अधिकार ही मानवीय व्यवस्था हो सकती है। ध्यान रहे जातिवादी व्यवस्था जंगली होती है जिसमें जन्म […]
प्रश्न:-“जब किसी के साथ उम्र भर का रिश्ता निभाना हो तो अपने दिल में एक कब्रिस्तान बना लो जहां उसकी गलतियों को दफन कर सको!”क्या उपरोक्त कथन सही है…? उत्तर:-कब्रिस्तान किसी गलती को समाप्त नहीं […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भारतीय इतिहास का एकमात्र उदाहरण, जिसमे देश के जाने-माने दो दुर्दान्त अपराधियों की पुलिस-संरक्षण मे हत्या कर दी गयी। दोनो अपराधियों को छ: पुलिसकर्मियों के घेरे मे मेडिकल-जाँच के लिए […]
7 True Original Messeges from God…. हे अबलों, कमजोरों, छोटों, पिछड़ों, गरीबों…तुम उन सभी चालबाज शिकारियों से सावधान हो जाओ…!!! जो तुम्हें अधिकार नहीं आरक्षण देते हैं। जो तुम्हें शाश्वत (स्थायी) समाधान नहीं क्षणिक अनुदान […]
रामायण केवल भगवान राम, देवी सीता, लक्ष्मण, भरत जैसे सर्वविदित नायक, नायिकाओं और रावण, बाली जैसे विद्वान, बलवान लेकिन कामी, दम्भी खलनायकों की गाथा भर नहीं है। इस महाकाव्य के गौण पात्र, लघु घटनाक्रम भी […]
धूर्त व्यक्ति चाहता है अच्छा स्कूल बने, अच्छा अस्पताल बने, अच्छी सड़क बने, जिनको मिल रही है उनको और भी अधिक बेहतर शिक्षा मिले, बेहतर चिकित्सा मिले, बेहतर सुविधा मिले।लेकिन धूर्त कभी यह नहीं चाहता […]
प्रश्न-क्या प्रेम में मेल जरूरी है..? उत्तर- किसी के प्रति स्नेहभाव, मैत्रीभाव, आदरभाव, समर्पणभाव ही प्रेम है। भावनात्मक मेल ही मैत्री है, प्रेम है।इच्छाओं, भावनाओं, कामनाओं का मेल ही मैत्री है, प्रेम है।यह प्रेम वास्तव […]
स्वीकारभाव ही प्रेम है।इस दुनिया में जो जैसा है उसको वैसा ही स्वीकार करना प्रेम का लक्षण है। जो अपने से निम्न है, छोटा है, न्यून है उसे स्नेहभाव से स्वीकार किया जाता है। और […]
8.आसाम में बिल्कुल ताजी पत्तियों वाली बिल्कुल हल्के रंग वाली आसाम चाय पी। अगर भावनाओं को परे रख दिया जाए तो बिना किसी दबाव, लोभ और लालच के कह रहा हूँ कि कामत होटल की […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हम-आप अपनो ‘के’ संग (लगाव) और अपनो से ‘निस्संग’ (अलगाव) के भाव को शब्दों के माध्यम से प्रकट तो कर लेते हैं; परन्तु यह शिशु (टिकोरा) उपर्युक्त दोनो भावों को […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश के वे सभी मीडियाकर्मी, जिन्हें रामनवमी की शोभायात्रा निकालते समय उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात तथा महाराष्ट्र मे सुनियोजित ढंग से कराये गये दंगे नहीं दिखे; निहायत घटिया क़िस्म के […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बंगाल मे साम्प्रदायिक उन्माद के मूल मे सत्ता की राजनीति के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। निकट भविष्य मे ‘हनुमान्-जयन्ती’ के अवसर पर किसी को भी जुलूस निकालने की अनुमति […]
आशा विनय सिंह बैस– इसी महीने बल्कि आज के ही दिन जैनियों के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का अवतरण दिवस है।
प्रेम तुम्हारी धन्यता का अनुभव है।जिसे भी अपने हृदय में प्रेम की अनुभूति होती है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। प्रेम का अनुभव ही पहली बार मानव जीवन के महत्त्व को व्यक्त करता है। […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय “कहो उतना जितना ‘कर’ सको; रहो उतना जितना ‘रह’ सको; सहो उतना जितना ‘सह’ सको; बनो उतना जितना ‘बना’ सको; उड़ो उतना जितना पंख ‘सहन’ कर सके, अन्यथा तुम ‘उत्तर’ […]
गुप्ता जी ग्वालियर वाले!! हमारे मित्र गुप्ता जी बहुत ही समझदार और कोमल प्रकृति के व्यक्ति हैं। वह किसी भी कार्य मे महिला-पुरुष का भेदभाव नहीं करते हैं। इसलिए गुप्ताजी सर्दियों के मौसम में लहसुन, […]
प्रेम जब भी होता है एकतरफा ही होता है।दूसरों से अपने लिए प्रेम की आशा केवल मूर्ख को होती है बुद्धिमान को नहीं। प्रेम तो हृदय के विकास का परिणाम है। मांगने या देने की […]
‘राम’ और ‘रामचरितमानस’ पूरे भारतवर्ष विशेषकर अवध क्षेत्र के कण-कण में और अवधवासियों के रग- रग में बसे हुए हैं। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी बोली में लिखी हुई मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की यह […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अब भारतीय लोकतन्त्र एक ख़तरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। भारत की सरकार, जो कि एक व्यक्ति-विशेष की सरकार बनती दिखती आ रही है, जन-जन के भविष्य के लिए संकटमयी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इन दिनो तथाकथित मोदी-सरकार जिस तरह से अपने मनबढ़ चरित्र का परिचय देते हुए, विपक्षी दलों, विशेषत: काँग्रेस के पूर्व-अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ अवैधानिक तरीक़े से निबट रही है, […]
हे हिन्दुओं…!हे मुसलमानो..!!हे ईसाइयों, बहाईयों, जैनो, बौद्धों…!!!हे दुनिया के सारे धर्म के अनुयाइयों…!क्या तुम्हारे गुरुओं, आकाओं, मालिकों, नेताओं के पास तुम्हें शिक्षा देने की, तुम्हें रोजगार देने की, तुम्हें सुखसुविधा देने की, तुम्हें संरक्षण देने […]
क्या सचमुच यह “मेरे सपनों का भारत” है– महात्मा गांधी जी? मैं आपसे इसलिए पूँछ रहा हूँ क्योंकि मेरा भारत अब मुर्दों का शहर बन चुका है! मैं आपसे ही यह सवाल इसलिए कर रहा […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी के नेता मनोज सिनहा कहाँ तक पढ़े हैं? क्या उनके पास ‘विधिक’ शिक्षा अर्जित करने का प्रमाणपत्र है?उनका कहना है, “पढ़े-लिखे लोगों को […]
एक मित्र का प्रश्न.. प्रश्न- प्रेम का प्रदर्शन कितना सही, कितना ग़लत है..?कथित प्रेमी/प्रेमिकाओं केअसफ़ल होकर आत्महत्या करने जैसे निर्णय पर भी प्रकाश डालें..! उत्तर- प्रेम में असफल कभी कोई हो ही नहीं सकता।असफलता केवल […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय “यहां #Modi वहां #Modiवहाँ मोदी जहां देखो #Modi.. लेकिन ये क्या?? हर #Modi के आगे #Bhrshtachaar सरनेम लगा हुआ है.. तो बात को ना समझो.. #Modi का मतलब #Bhrshtachaar.. चलिए […]
ईश्वर ने जो हमें तमाम नेमते दी हैं, उनमें से पका हुआ आम सबसे खूबसूरत, स्वादिष्ट और लजीज नेमतों में से एक है । हम भारतीय इस मामले में और भी अधिक भाग्यशाली हैं क्योंकि […]
विचार करें!यदि “सत्य और अहिंसा” ही गांधीवाद का धर्म है तो जनता के साथ आजादी के बाद से अबतक इतना अन्याय क्यों…? सत्य कहता है कि इस दुनिया में सभी मनुष्य एकात्म हैं तो सार्वजनिक […]
प्रेमधर्म के बिना परिवार नहीं टिकता..!!!आजके माता पिता अपने बच्चों को IQ सिखा रहे हैं लेकिन EQ नहीं।इसलिए अब रोना पड़ रहा है उनको।EQ ही सुख का स्रोत है।EQ ही परिवार का व्यवहार है।EQ ही […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मोदी हटाओ-देश बचाओ’― यह नारा ‘अपशब्द’ कैसे हो गया और उस पर दिल्ली-पुलिस-प्रशासन की तत्परता ग़ज़ब ढा रही है। जयप्रकाश नारायण की ‘समग्र क्रान्ति’ के समय नारा लगाया जाता था […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कानपुर के ‘करौली बाबा’ उर्फ़ संतोष सिंह भदौरिया के गुण्डों-द्वारा एक चिकित्सक और उसके पिता के साथ गम्भीरतापूर्वक मारपीट किये जाने का जो वीडियो सार्वजनिक किया जा रहा है, उससे […]
जब कोई व्यक्ति अपने लिए जीना मरना छोड़कर किसी दूसरे के लिए जीता मरता है तो इसे प्रेम कहते है। जो जिसको प्रेम करता है उससे प्रेरित होकर कर्म करता है।प्रेरणाशक्ति को ही प्रेम कहते […]
“पूर्ण शिक्षित रहने वाला सनातन राष्ट्र पूर्ण अशिक्षित और बेरोजगार ‘हिन्दूराष्ट्र’ में परिवर्तित कैसे हुवा?” अब से लगभग 4000 वर्ष पूर्व तक धरती पर एकमात्र सनातन धर्म ही व्याप्त था।ज्ञान और गुण प्राप्ति हेतु समुचित […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मै कल (१५ मार्च) को ब्रह्म मुहूर्त्त मे ४.२३ बजे गुवाहाटी (असम) रेलस्टेशन (‘रेलवे स्टेशन’ अशुद्ध है।) के प्लेटफ़ॉर्म-क्रमांक चार पर बैठा था, तभी एक वयोवृद्धा पर दृष्टि स्थिर हो […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय लज्जा का विषय है कि मध्यप्रदेश बोर्ड की दसवीं और बारहवीं परीक्षाओं के शुरू होने के एक दिन पहले ही सभी प्रश्नपत्र ‘लीक’ करा लिये जा रहे हैं। गत १ […]
प्रश्न- राम गुप्ता जी भगवान होते है अथवा नहीं..?मंदिर में निर्जीव मूर्ति और पत्थरों की पूजा से भगवान का क्या तात्पर्य है..? उत्तर- भगवान होते हैं लेकिन जिन्दे में होते हैं, मुर्दे में नहीं।चैतन्यता में […]
मेरे बड़े बाबा स्वर्गीय अभिलाख बहादुर सिंह (बप्पा बाबा) बेहद जिंदादिल इंसान थे। और जहां तक मुझे पता है ‘बप्पा बाबा’ वामपंथी नहीं थे, मुसलमान तो बिल्कुल भी नहीं थे। फिर भी पता नहीं क्यों […]
देशवासियों! यह बात उतनी ही सत्य व प्रामाणिक है जितने हमारे सनातनी वेद। नरेन्द्र मोदी जी का मकसद राजनैतिक या आर्थिक भ्रष्टाचार खत्म करना मकसद नहीं है, अगर उनका वास्तव में जड़ से भ्रष्टाचार खत्म […]
सत्य सभी को प्रिय है।लेकिन जब असत्य व्यवहार को ही सत्य के रूप में अपनाया जाय तो प्रिय नहीं हो सकता।प्रियता का जन्म ही सत्य से हुआ है।किसी भी दूसरे को प्रिय मानना ही प्रेम […]
प्रश्न:-हमारे धर्मशास्त्रों में नर और नारायण का वर्णन है, नारायण तो स्वयं भगवान विष्णु हैं तो नर कौन है ..?साधारण बोलचाल की भाषा में नारी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।तो नारी का क्या अर्थ […]
प्रश्न:- स्त्री का प्रेम में पहल करना ओशो ने आक्रामक कहा है। क्या ये ठीक कह रहे हैं? उत्तर:- प्रेम आक्रामक नहीं होता।प्रेमनिवेदन आक्रमण नहीं आमंत्रण है।स्त्री का तो पूरा अस्तित्व ही आमंत्रण है।कहीं भी […]
मैंने किशोरावस्था में ही अपना होमटाउन लालगंज बैसवारा छोड़ दिया। इसका फायदा यह हुआ कि मुझे जल्दी नौकरी मिल गई और जिस उम्र में मेरे कुछ सहपाठी अभी भी TGT/PGT की तैयारी कर रहे थे, […]
व्यक्ति नश्वर है।सिद्धांत शाश्वत है।व्यक्ति नष्ट हो जाते हैं।सिद्धांत स्थिर रहता है।। सत्य प्रेम न्याय पुण्य शाश्वत एवं सनातन सिद्धांत हैं।दार्शनिक सिद्धांत पर आधारित धर्म ही सनातन, शाश्वत और स्थायी हो सकता है।दूसरा कुछ भी […]
प्रश्न-शिक्षा और दीक्षा मे अंतर समझाते हुए उनकी दार्शनिक अनिवार्यता पर प्रकाश डालकर जिज्ञासा शांत करने की कृपा करें। उत्तर-मनुष्यों में सत्ज्ञान और सत्गुण के विकास हेतु शिक्षा और प्रशिक्षण की जरूरत होती है।शिक्षा अधिकार […]
हाई स्कूल की परीक्षा में मेरा सेंटर (परीक्षा केंद्र) इंटर कॉलेज अंबारा पश्चिम था यानि लालगंज बैसवारा से लगभग 6 किलोमीटर दूर । अन्य बच्चों की तरह मैं भी साइकिल से परीक्षा देने जाता तो […]
#RenamingCommission हम आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। हमें धार्मिक और सांस्कृतिक आजादी चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर #नामकरण_आयोग बनाने और वहशी विदेशी लूटेरों और आक्रांताओं के नाम पर बने कस्बों और शहरों के नाम […]
गज़ब सोचते हैं ये बुद्धिजीवी लोग भी, “प्यास लगने के बाद ही कुआँ खोदना भी आजकल शायद समझदारी की श्रेणी में आ चुका है।” अपराधी को सख्त सज़ा दिए जाने के कानून से भला मेरिटोक्रेसी […]
सामान्यतः किसी भली या बुरी बात या घटना को ज्यों का त्यों कहने को ही लोग सत्य बोलना कहते हैं।लेकिन ऐसा बोलने वाला मामला तथ्य होता है सत्य नहीं।सत्य तो ज्ञान है, आत्मा है, ईश्वर […]
रायसीना पहाड़ी पर स्थित राष्ट्रपति भवन (वाइसरॉय हाउस) के पीछे बना हुआ अमृत उद्यान तत्कालीन वाइसरॉय लार्ड होर्डिंग की पत्नी लेडी होर्डिंग की इच्छा और सर एडविन लुटियंस की वास्तुकला का अद्धभुत संगम है। 113 […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज काँग्रेस के मुखर प्रवक्ता पवन खेड़ा के विरुद्ध अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए, भारतीय जनता पार्टी की सरकार की असोम-राज्य- पुलिस-द्वारा दिल्ली वायुयान-केन्द्र से उन्हें यह कहकर अकस्मात् विमान […]
सदाचरण व सद्व्यवहार ही सत्धर्म है।यह सत्धर्म ही परस्पर शत्रुता के स्थान पर मित्रता को प्रतिष्ठित करता है।दुर्जन नहीं सज्जन बनने के लिए इसी शाश्वत एवं सनातन धर्म को स्वीकार किया जाता है ऐसे सनातन […]
◆ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चलो, हम मान लेते हैं, तुम ‘हिन्दूराष्ट्र’ बना लो; पर हमारे कुछ प्रश्न हैं :―● तथाकथित हिन्दू सनातनी सरकार की प्रतिशोधात्मक राजनीति समाप्त हो जायेगी?● “फूट डालो और राजनीति करो” […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस जगत् मे ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जो आप कुछ सोचें और वह उस सोच को, आपसे बिना कोई प्रश्न किये, सीधे बता सके। आप जब कुछ सोचते हैं […]
मान्यता है कि नाम लेने से उनके “उनकी” उम्र कम हो जाती है । इसी बात पर हरीलाल वाला चुटकुला भी बना है। हां, वही हरी/लाल जिनका शुरू का नाम लेने से गाड़ी चल देती […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस बार त्रिपुरा राज्य मे ६० सीटों के लिए कराये गये चुनाव मे कुल २५९ उम्मीदवार मैदान मे थे। भारतीय जनता पार्टी (५५ सीट) का अपने सहयोगी दल ‘आई० पी० […]
“आरम्भो न्याययुक्तो यः स हि धर्म इति स्मृतः।” यानि न्याय से युक्त होने पर ही धर्म का प्रारम्भ होता है यही बात याद रखने योग्य है। अब उपरोक्तानुसार आप विचार कीजिये क्या वर्तमान किसी भी […]