यह है, सुधीर चौधरी, जो हिन्दी-टाँगें तोड़ रहा है
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस विमूढ व्यक्ति की बातें सुने और जो लिखे हुए दिख रहे हैं, उन्हें भी पढ़ें। यह स्कूल को ‘कॉलेज’ और कॉलेज को ‘महाविद्यालय’ बता रहा है। अब इससे प्रश्न […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस विमूढ व्यक्ति की बातें सुने और जो लिखे हुए दिख रहे हैं, उन्हें भी पढ़ें। यह स्कूल को ‘कॉलेज’ और कॉलेज को ‘महाविद्यालय’ बता रहा है। अब इससे प्रश्न […]
पौराणिक मान्यता है कि विजयदशमी की तिथि को भगवान श्रीराम ने अत्याचारी रावण का वध किया तो संसार को एक पापात्मा से मुक्ति मिली। लेकिन भगवान श्रीराम के ऊपर ब्रह्महत्या का पाप भी लग गया […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शिक्षिका मनोरमा जी!आपने यह वीडियो प्रस्तुत करके अपने खोखले ‘संस्कृत-ज्ञान’ का बहुविध परिचय प्रस्तुत कर दिया है। शुद्ध शब्द ‘संस्कृत’ है; उच्चारण ‘सम्सकृत’ है, न कि ‘सन्स्कृत’। आप सभी का […]
अपने कालखंड में महर्षि वाल्मीकि ने “रामायण” और गोस्वामी तुलसीदास ने “रामचरितमानस” से जिस प्रकार जनमानस को शिक्षित और जाग्रत किया था, रामानंद सागर ने भी अपने धारावाहिक ‘रामायण” के माध्यम से हमारी पीढ़ी के […]
श्रद्धेय रामानंद सागर कृत रामायण को असाधारण लोकप्रियता देखकर यह सोचता हूँ कि आखिर उनकी रामायण में ऐसा क्या है जो लोग को बरबस ही अपनी ओर खींच लेता है? 80 के दशक के उत्तरार्ध […]
प्राय: देखा गया है कि जीवन में ‘आकस्मिक’ और ‘अप्रत्याशित’ गमनागमन (‘आवागमन’ अशुद्ध है।) की विशेष भूमिका होती है; जैसा कि महात्मा गांधी जी के साथ हुआ था :– जाना कहीं था और चले गये […]
यह बात तो ठीक है कि राजे-रजवाड़ों, नवाबों, रियासतों में बंटे इस देश के लोगों में अंग्रेजों के विरुद्ध आजादी की अलख जगाने और उन्हें एकजुट करने में मोहनदास करमचंद गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका रही […]
संकलित- मोहनदास करमचंद गांधी (2 अक्तूबर 1869 – 30 जनवरी 1948) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह – व्यापक सविनय अवज्ञा के माध्यम से अत्याचार के […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इस पुस्तक को शुद्ध हिन्दी का बोध करानेवाली ‘सर्वोत्तम’ पुस्तक बताया जा रहा है। सम्भवत: आप सभी मे से कुछ ने इस पुस्तक के आवरणपृष्ठ पर दृष्टिपात किये होंगे; परन्तु […]
संसद भवन, भारतीय लोकतंत्र का सबसे पवित्र मंदिर है । संसद में होने वाला वाद -विवाद अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में संसदीय पुस्तकालय में सुरक्षित रखा जाता है ताकि माननीय सांसद, शोधार्थी और अन्य […]
मैं वायु सेना में सेवा के दौरान हैदराबाद के वायुसेना अकादमी के बाहर सिविल एरिया (अन्नाराम) में फैमिली के साथ किराए पर रह रहा था। मेरे घर के पीछे रहने वाले एक हैदराबादी सज्जन खाने-पीने […]
सुधीर अवस्थी परदेसी, बघौली : पत्रकारिता महज एक काम नहीं बल्कि मिशन रही है। इस क्षेत्र में आने वाला शख्स अपना सब कुछ दांव पर लगा कर पत्रकार कहलाता है। बिल्कुल इस बात को कहने […]
हमारे गांव बरी वाले घर में दो गोई (जोड़ी) यानी कुल चार बैल हुआ करते थे। बड़ी वाली गोई ‘बछौना’ (जब बछवा यानी बच्चा था, तभी खरीदा गया था इसलिए बछौना ) और ‘बड़ौना’ (थोड़ी […]
(एक काल्पनिक कहानी) बचपन की बात है। एक बार ऐसे ही झमाझम बारिश हो रही थी और मुझे जोर से ‘दो नंबर’ लग आई। तब घरों में शौचालय नहीं हुआ करते थे इसलिए मैं छाता […]
आजकल निजीकरण का दौर है। इसलिए सबको टारगेट अचीव करना पड़ता है। नहीं तो व्यक्ति को ‘फ्लावर’ देने की जगह ‘फायर’ कर दिया जाता है। बहुत पहले नहीं, बस आज से दो-तीन दशक पहले तक […]
मैं कल से ही सोच रहा हूं कि स्टैंड अप कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के जाने का इतना दुख क्यों है?😢😢क्या इसलिए कि वह हास्य कलाकार थे? लेकिन हास्य कलाकार तो सेकुलर कपिल शर्मा और जिहादी […]
In Ajay Devgan’s new film Thank God, the adorable Guru of Kayasthas, Shri Chitragupta Bhagwan ji has been humiliated in some dialogues and work has been done to hurt the Hindu religion, the Kayastha society […]
1984 की बात है। ‘बड़ा पेड़’ गिरने के बाद धरती हिलकर लगभग शांत हो चुकी थी। मैं पापा के साथ मुंबई घूमने गया था, अपने नाना के घर। चूंकि उन दिनों किसी घर का दामाद […]
लगभग तीन दशक पहले की बात है। मैं 12 वीं कक्षा में पढ़ता था। हमें लालगंज बैसवारा में रहते हुए 4-5 साल हो गए थे। इसलिए अब तक सब कुछ तय सा हो गया था। […]
विनय सिंह बैस : श्री हरिद्वार सिंह (पूर्व प्रधानाध्यापक, इंटर कॉलेज विष्णुखेड़ा) पापा के सहकर्मी और घनिष्ठ मित्र थे। मेरे लिए भी वह गुरु और पितातुल्य दोनो थे। पापा के साथ 15 अगस्त और 26 […]
हरितालिका व्रत का पालन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सधवा महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और कुंवारी लड़कियों द्वारा सुंदर, सुशील, धनवान वर की कामना हेतु किया जाता है। चूंकि इस व्रत […]
फ़ोटो में झारखंड के दुमका में एक हिंदू किशोरी की नृशंस हत्या करने वाले इस मजहबी नराधम के चेहरे पर पुलिस की कस्टडी में भी विजयी और कुटिल मुस्कान इसलिए है क्योंकि:- इसे पता है […]
पिछले कई दशकों से खेलों विशेषकर हॉकी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिसड्डी होने के जिम्मेदार हम खुद ही रहे हैं। क्या आपको पता है कि जिस खिलाड़ी के नाम पर “राष्ट्रीय खेल दिवस” मनाया जाता […]
बुलंदी साहित्यिक संस्था द्वारा आयोजित विश्व के सबसे बड़े वर्चुअल कवि सम्मेलन के तीसरे दिन देश – विदेश के कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया । विश्व के इस सबसे […]
अगस्त का महीना एनडीए सरकार और भाजपा के लिए कुछ ज्यादा ही उल्लेखनीय रहा है। जहाँ एक ओर अनुच्छेद 370 की समाप्ति, राम मंदिर का शिलान्यास जैसे युगान्तकारी कार्य अगस्त के महीने में हुए । […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय १९ अगस्त को “आ बैल! मार मुझे” की कहावत चरितार्थ होती दिखी; और वह भी ‘भगवान्’ के दरबार मे। इसके लिए पूरी तरह से राज्य-शासन और ज़िला-प्रशासन उत्तरदायी है। जब […]
—सुरेश राय चुन्नीइलाहाबाद विश्वविद्यालय
बचपन के स्वतंत्रता दिवस की कुछ धूमिल यादें अब भी मन-मस्तिष्क में हैं! हमारे विद्यालय प्राथमिक पाठशाला बरी में प्रधानाध्यापक श्री अवधेश बहादुर सिंह हुआ करते थे। श्री देव नारायण सिंह, श्री अयोध्या सिंह शिक्षक […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश के राष्ट्रध्वज का वस्त्र खादी का रहा है। इस सरकार ने उसे भी बदल दिया है। खद्दर हमारी राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है। विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और उनका […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ● आज भक्तों की अपार भीड़ और सबसे पहले भगवान्-दर्शन करने की होड़ मे भगदड़ मचने से खाटूश्याम मे भक्तगण एक-दूसरे को रौंदते हुए बढ़ते रहे; ३ महिलाओं को भक्तों ने […]
तांबरम (चेन्नई) ट्रेनिंग सेंटर में हमारे एक ‘मित्र’ थे।नाम था—– खैर छोड़िए, शेक्सपियर कह गए हैं कि नाम में क्या रखा है? इसलिए चलो काम की बात करते हैं। काम की बात यह कि हमारे […]
आज दिल्ली में बारिश हुई तो लिट्टी-चोखा खाने का मन किया और मैं गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास एक परिचित सनातनी दुकान पर रुककर लिट्टी चोखा खाने लगा। लिट्टी-चोखा वास्तव में स्वादिष्ट था। मैं तारीफ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••खा तो इतना लिया है कि अन्धों को भी दिखने लगा है। उसने दूसरों की थालियों को बलपूर्वक अपनी ओर खींच लिया है, फिर खाने कैसे देगा? उसने हमारी थाली […]
स्मरण रहे कि राम मंदिर का निर्माण किसी साम्प्रदायिक सद्भाव, गंगा जमुनी तहजीब के कारण नहीं हो रहा है। बल्कि पांच अगस्त का यह पावन दिन राम भक्तों की पच्चीस पीढ़ियों के पांच सौ साल […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नीचे दिख रहे चित्र मे जिन महापुरुष का चेहरा दिख रहा है, वे हैं, देश के महान् उद्योगपति गौतम अडाणी/ अडानी। इन्होंने भारतीय बैंकों से २९ खरब ९३ अरब ९८ […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय विलम्ब रात्रि मे १.१५ पर अलोपीबाग़, प्रयागराज से डी० जे० बजाते हुए अराजक तत्त्व निकले थे, जिसकी आवाज़ विलम्ब रात्रि मे २.२० तक सुनायी दे रही थी। उसकी कर्कश धुन […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नीचे दिखायी गयी कार नवाब यूसुफ़ मार्ग, सिविललाइन्स लाइन्स, प्रयागराज के उस सड़क-मार्ग पर बन्द करके काफ़ी देर तक खड़ी कर दी गयी थी, जिसे नगर का अति व्यस्त क्षेत्र […]
उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती(31 जुलाई, 1880 लमही, काशी) सत्य, निष्ठा और न्याय के पथ पर,मैं जीवन भर चलती जाऊं।सादा जीवन हो उच्च विचार,मैं महापुरुषों से ऐसी सीख लाऊं। आदर्श यथार्थ भरी कहानियां […]
घटना आज से लगभग 20 वर्ष पहले की है। उस समय लोग रेलगाड़ियों में यात्रा करते समय मिल्टन, गोदरेज आदि कंपनियों की अपारदर्शी बोतलों में पानी भरकर अपने साथ ले जाते थे क्योंकि तब तक […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाध पाण्डेय प्रियवर डॉ० घनश्याम भारती जी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गढ़ाकोटा, सागर (मध्यप्रदेश) मे हिन्दीविभागाध्यक्ष और राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय सारस्वत आयोजनों के सूत्रधार हैं। वे मेरे परम प्रिय शिष्य हैं और अध्ययन-अनुशीलन के प्रति […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कोई मनुष्य महान् नहीं होता, उसकी ‘मनुष्यता ‘महान् होती है। कोई साधक महान् नहीं होता, उसकी ‘सिद्धि’ महान् होती है। कोई विदुषी अथवा विद्वान् महान् नहीं होता, उसका ‘वैदुष्य’ और उसकी […]
स्मृति-वातायन ०——– ● आज (२७ जुलाई) भ्राताश्री, पूर्व-राष्ट्रपति अबुल कलाम जी की निधनतिथि है। — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय डॉ० अब्दुल कलाम प्रेय थे तो श्रेय भी। उन्होंने जब राष्ट्रपति-पद की शपथ ली थी तब […]
तेज़ी से बदलते परिदृश्य के साथ बाहरी मामलों से निपटने के लिये नीतियाँ भी बदलती रहती हैं। इसलिए भारत भी समय-समय पर अपनी विदेश नीति में ऐसे बदलाव करता रहता है ताकि समयानुसार स्थितियों का […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ मे वित्तमन्त्री के रूप मे जनता के सीने पर हल जोत रही निर्मल सीतारमण से कल (२५ जुलाई) लोकसभा मे जब प्रश्न किया गया था– स्विस […]
बुढ़ापे में अपने नाती-पोतों को कहानी सुनाया करूंगा कि कारगिल युद्ध मैंने भी लड़ा था और उस युद्ध के सबसे बड़े नायक परमवीर चक्र विजेता कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव के साथ सेल्फी भी ली थी। […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज (२५ जुलाई) प्रयागराज के प्रमुख सड़क-मार्ग जी०टी० रोड– झूसी, अलोपीबाग़, बैरहना, बाई का बाग, रामबाग़ आदिक क्षेत्रों मे कथित हिन्दू-भक्ति का प्रभाव गहराई के साथ अनुभव किया गया। मेरे […]
1984 की बात है!!! “बड़ा पेड़” गिरने के बाद धरती हिलकर लगभग शांत हो चुकी थी। मैं पापा के साथ मुंबई घूमने गया था, अपने नाना के घर। चूंकि उन दिनों किसी घर का दामाद […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ई० डी० के अधिकारियों ने बंगाल के मन्त्री पार्थ चटर्जी को ‘शिक्षक भरती घोटाले’ मे गिरिफ़्तार किया है। उसकी चहेती अर्पिता मुखर्जी के घर से लगभग २१ करोड़ रुपये की […]
सन 2005 की बात है। उस समय मैं कुछ-कुछ वामपंथी था। पूजा-पाठ को ढोंग और धर्म (सिर्फ हिंदू धर्म) को अफीम समझता था। एक बार मैं घर से छुट्टी बिताकर वापस आया हुआ था और […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ममता बनर्जी, शरद पवार, हेमन्त सोरेन, उद्धव ठाकरे, मायावती, राजा भइया, वाइ० एस० आर० काँग्रेस, शिवपाल यादव, ओमप्रकाश राजभर आदिक विपक्षी नेता विश्वासघाती निकले। ममता बनर्जी को तो चुल्लूभर पानी […]
सौदर्य प्रतियोगिताओं के फाइनल राउंड में दुबली-पतली, कुपोषण की शिकार विश्व सुंदरियों से निर्णायक बहुत गंभीरता से प्रश्न पूछते हैं – “आपके जीवन का उद्देश्य क्या है? भविष्य में आप मानवता के लिए क्या करना […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय काँवरियों (‘काँवड़ियों’ अनुपयुक्त शब्द है।) को इतनी सुविधाएँ न दी जायें कि जनसामान्य का गमनागमन (‘आवागमन’ अशुद्ध शब्द है।) अवरुद्ध हो जाये। सभी समुदाय के पूजा-पाठ को समान रूप से […]
त्रेतायुग में यह सीख मिली कि:- अहंकार , महाबली और काल को पैरों तले रखने वाले रावण का भी नहीं टिक पाता है। प्रकांड विद्वान और शिव स्त्रोत का रचयिता भी अपने दुष्कर्मों से राक्षस […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज के अधिकतर गुरु अर्थात् तथाकथित ‘Sir’ अपने गर्हित आचरण की स्थापना ‘स्वयं’ कर चुके हैं। वे स्वयं को बाज़ार मे ‘विक्रेता’ के रूप मे उतार चुके हैं और ‘ज्ञान’ को […]
बैसवारा सदियों से कलम और तलवार का धनी क्षेत्र रहा है। महावीर प्रसाद द्विवेदी, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जैसे कलमकार और राजा राव रामबख्श सिंह तथा राणा बेनी माधव जैसे वीर योद्धा बैसवारा क्षेत्र की आन-बान-शान […]
विवाद संख्या -1:- अशोक स्तंभ का उद्घाटन लोकसभा के स्पीकर को करना चाहिए था न कि प्रधानमंत्री को। क्योंकि संसद का सर्वेसर्वा स्पीकर होता है , प्रधानमंत्री नहीं। स्पष्टीकरण:- यह बिल्कुल सत्य है कि किसी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आशा और निराशा के दोनों ध्रुवों के बीच ज़िन्दगी तैर रही है। जागरण में सुख के स्वप्न सँजोये वह पुतली की तरह चलती-फिरती है। उसका चम्पई तन सम्पर्कों की सारी […]
आजकल की अधिकतर फिल्मों के फूहड़ और कानफोड़ू गीत मैं सुनता नहीं हूं और कभी गलती से सुन भी लेता हूं तो मुझे समझ नहीं आता है कि गायक चिल्ला क्या रहा है। लेकिन पुराने […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देश मे दो क़ानून :–एक तुम्हारा और दूजा हमारा। तुम चाहें जितनी और जितनी बार पेंशन लो और हमारी पेंशन बन्द; तुम चाहें जितनी भी सुविधाएँ लो, हमारी सुविधाओं पर […]
1991 में प्रणव मुखर्जी के समर्थन से प्रधानमंत्री बने लेकिन उनको वित्तमंत्री न बनाकर राजनीति के क्षेत्र में बिल्कुल नौसिखिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर मनमोहन सिंह पर भरोसा किया। 1966 में इंदिरा गांधी द्वारा रुपये […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २६ जून, २०२२ ईसवी।)
बरखारानी के नावे आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय के एगो चिट्ठी आ ए हामार सोना के पुतरिया बरखारानी!जीयत रह आ जागतो रह! आ हेने के हाल-चाल ठीके बा। आपन सुनाव। ए घरी केने बाड़ू? आ जान […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय इन दिनो जिन उथले और थोथले तर्कों के साथ बुलडोज़र-प्रयोग कराये जा रहे हैं और न्यायालय मे तर्क प्रस्तुत किये जा रहे हैं, वे सरकार की अबोध मानसिकता को रेखांकित […]
बेशक, मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग का चेअरमैन ‘मेहरा’ है। पिछले १९ जून को आयोजित मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग की ओर से आयोजित ‘मध्यप्रदेश पी० सी० एस० (प्रा०) परीक्षा– २०२१’ के प्रश्नपत्र मे एक ऐसा प्रश्न किया गया […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश– (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १९ जून, २०२२ ईसवी।)
विनय सिंह बैस (अनुवाद-अधिकारी, लोकसभा सचिवालय)– बहुत समय पहले की बात है। तब मैं 6-7 साल का रहा होऊंगा! उन दिनों ज्यादातर घरों में भोजन पकाने के बाद आग को राख से ढक दिया जाता […]
0 चिन्तन के आयाम 0 ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यह विडम्बना ही है कि अद्वैतवादी सिद्धान्त और अभेदमूलक विचार की जन्मभूमि मे ही आरम्भ से भेदमूलक समाज रहा है। यहाँ सिद्धान्त और व्यवहार के […]
देश का प्रमुख व्यक्ति मात्र सत्ता पाने के लिए देशहित मे कोई घोषणा कर दे और शीघ्र ही उसे ‘ज़ुम्ला’ का नाम देकर पीछे हट जाये तो ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व मे यदि किसी भी […]
आज विशेष- स्वतंत्रता दिवस (आइसलैंड) सूखा व मरूस्थलीकरण नियंत्रण दिवस ज्ञान और विज्ञान 1775- बंकर हिल के युद्ध में ब्रिटिस सेना नेना अमेरिका की महाद्वीपीय सेना को पराजित किया किंतु उसे भारी क्षति उठानी पड़ी। […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमारे देश के ‘समाचार-चैनल’ इस सीमा तक पराधीन हो जायेंगे कि उनकी ‘सत्यनिष्ठा’ ‘अधर्म’ की श्रेणी में रेखांकित होगी, इसकी आशा भी नहीं थी। अब वे ‘अधर्म’ के चतुर्थ स्तम्भ […]
विश्व की तमाम सेनाओं में भर्ती दो तरह से की जाती है- अनिवार्य सैन्य सेवा, 2. स्वैच्छिक सैन्य सेवा नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा: इसमें हर नागरिक को एक खास उम्र के दौरान सेना […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सर्जक (‘सृजन’ निरर्थक शब्द है। सृज् धातु+ल्युट् प्रत्यय = सर्जन– रचना करनेवाला) की एक स्थिति ऐसी आ जाती है, जहाँ उसे बड़ी-बड़ी धनराशिवाले सम्मान भी डिगा नहीं पाते; क्योंकि उसकी […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जो कथित हिन्दू अपने सेवाकाल मे रिश्वतख़ोर रहे हैं और हैं; अपराधी रहे हैं और हैं, उनमे से अधिकतर कथित ‘न्यू इण्डिया की सरकार’ की जनघाती नीतियों के पक्षधर बने […]
आप जिस भी क्षेत्र मे जायें, अपनी सत्यनिष्ठा और स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना को कभी विस्मृति न करें। आप अपनी जिजीविषा (जीने की इच्छा) और जिगीषा (जीतने की इच्छा) को कभी शिथिल न पड़ने दें; […]
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का विचारमन्थन ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश जब ‘हिन्दू’ नहीं थे तब उनके उपासक ‘हिन्दूवादी’ कहाँ से आ गये? ‘तथ्य’ और ‘तर्क’ सनातन-सन्दर्भ मे सारगर्भित हो तभी ‘उत्तर’ दिया जाये। ‘धर्मान्धता ओढ़ा […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आज (१० जून) प्रयागराज मे जुमे की नमाज़ पढ़़ने के बाद जिस तरह से ईंट और पत्थर के टुकड़ों से पुलिस और ज़िला-प्रशासन के अधिकारियों पर हमले किये गये हैं, […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय कानपुर-दंगे को लेकर वहाँ की डी० एम० का स्थानान्तरण कर दिया गया है; अनेक पुलिस-अधिकारियों को इधर-उधर कर दिया गया है; मगर जिस मुख्य आरोपित और कथित ‘मास्टर माइण्ड’ नूपुर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सरकारी ‘लॉक-डाउन’ के कारण अब तक लाखों लोग नौकरी से बाहर हो चुके हैं; बाहर किये जा रहे हैं; कम्पनियाँ, व्यावसायिक प्रतिष्ठान इत्यादिक बन्द किये जा रहे हैं। ऐसे मे, […]
५ जून ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर विशेष । ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमारा संदूषित पर्यावरण स्वस्थ दिखे और जनमानस उसका ‘प्रसाद’ (कृपा) ग्रहण करे, कामना है। वर्तमान सरकार पर्यावरण के प्रति बिलकुल चिन्तित नहीं […]
यह कहना मुश्किल कि पीपल के इस बड़े से पेड़ के पास मेरा फ्लैट है या मेरे फ्लैट के पास यह पीपल का पेड़ है। नजदीकी इतनी कि खिड़की खोलते ही इसकी कोमल टहनियां गाल […]
प्रतिवर्ष हम 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर देश विदेश में कई बड़े आयोजन होते हैं सेमिनार होती है जहाँ पर्यावरण की सुरक्षा व संरक्षण पर वार्ता की जाती है। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण पर […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के सरसंघचालक मोहन मधुकर भागवत ने आज (३ जून) एक बहुत अच्छी बात कही है, ” हर मस्जिद मे शिवलिंग की खोज क्यों? अब आर० एस० एस० […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ज्ञानवापी मस्जिद, वाराणसी मस्जिद मे उन्हें पूजा-पाठ आदिक करने का अधिकार मिले, इसे लेकर राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, रेखा पाठक, सीता साहू तथा मंजू व्यास नामक महिलाओं ने ‘विश्व वैदिक […]
समाज के उत्थान एवं उसके संवर्धन की पहली कसौटी ही “नैतिकता” है, अगर समाज नैतिक शून्य हो जाये तो समाज लोगों के समूह से तुरंत भेड़ की भीड़ से लेकर जंगली जानवर के झुण्ड समान […]
मनुष्य ठहरी हुईं और गतिमान् मान्यताओं के साथ न्याय नहीं कर पाता है; क्योंकि गतिशीलता के ‘कु’ और ‘सु’ पक्षों से वह प्रभावित तो होता है, जबकि ‘ठहराव’ के प्रति उदासीन बना रहता है। ध्यातव्य […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय वर्ष २०१४ मे देश को आज़ादी मिलते ही देश के समस्त समाचार-चैनलों के अधिकारियों को ‘रतौंधी और ‘दिनौधी’ ने जकड़ लिया है। उन्हें ‘ज्ञानवापी’ ‘मथुरा’ ‘ताजमहल’, ‘कुतुबमीनार’ आदिक के अलावा […]
प्रभात सिंह (मान्यता प्राप्त पत्रकार, लखनऊ ) मैं ये स्वीकार करता हूँ कि मैं पत्रकार नही हूँ। मैं अपना दो- पहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट पहनता हूँ, गाड़ी के कागज़ पूरे रखता हूँ, मैं किसी […]
अमित कुमार अवस्थी- विरोध और क्रांति की आवाज हिंदी पत्रकारिता को पूरे 191 साल हो गए हैं। कानपुर की क्रांतिकारी धरा पर जन्मे हिंदी पत्रकारिता के पितृपुरुष पं युगुल किशोर शुक्ल जी ने प्रथम हिन्दी […]
—-०दो टूक०—- ● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जो भी व्यक्ति इस विषय का पक्षधर है कि उसके लिए ‘भाषा-शुचिता’ से अधिक ‘मात्र सम्प्रेषणीयता’ का महत्त्व है, वह मेरी मैत्री-सूची से स्वयं को ‘सदैव’ के लिए […]
प्रश्न;क्या साधारण मनुष्य बिना अधिकारों के किसी भीनिजी या व्यवहारिक/सामाजिक कर्तव्य करने हेतु उत्तरदायी है? उत्तर;नही, कोई भी मनुष्य अपने निजी कर्तव्यों हेतु पूर्णतः स्वतंत्र है वो भी तबतक जबतक कि व्यवहारिक/सामाजिक बाध्यता का हनन […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जो कथित हिन्दू अपने सेवाकाल मे रिश्वतख़ोर रहे हैं और हैं; अपराधी रहे हैं और हैं, उनमे से अधिकतर कथित मोदी-सरकार की जनघाती नीतियों के पक्षधर बने हुए हैं। उन्हें […]
मणि सत्यनारायण तिवारी : मैं सम्मान सभी धर्मों का करता हूँ पर मैं हिन्दू हूँ, इसपर मुझे गर्व है । बुद्धिजीवी कितना भी धर्म निरपेक्षता की बातें कर लें, लेकिन भारत “राष्ट्र” तभी तक है […]
मणिप्रकाश तिवारी : दोस्तों! आपको एक बात बताता हूँ; अपने देश के IIT मुंबई, दिल्ली और गुवाहाटी में एक डिपार्टमेंट है “रूरल डेवलपमेंट”; जहाँ रूरल डेवलपमेंट में Ph-D और अन्य पाठ्यक्रम भी संचालित किये जाते […]
आत्मीय मित्रमण्डल!समय का समादर करना सीखें। समय सभी को समान रूप से देखता आया है। वह प्रत्येक मनुष्य का मूल्यांकन उसके कर्मों के आधार पर करता आया है। समय कभी निष्ठुर नहीं होता; प्रत्युत मनुष्य […]
सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी द्वारा 2019 विजयादशमी को दिया एक भाषण मुझे याद है, उन्होंने कहा था कि – सामाजिक परिवर्तन के लिए ‘स्व’ केंद्रित सामूहिक दृष्टि विकसित होने […]
● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आज (५ मई) प्रात: बाँसडीह, बलिया (उत्तरप्रदेश) मे प्रभंजन (आँधी-तूफ़ान) के साथ वर्षा के आरम्भिक किशोरावस्था का दर्शन-लाभ प्राप्त हुआ है। उसने किशोरवय मे रहते हुए भी ‘तरुणाई’ की ओर […]
प्रभात सिंह (युवा लेखक/मान्यता प्राप्त पत्रकार)- पन्ना लाल ख़लीफ़ा एक हाँथ में गमछा और दूसरे हाँथ में माइक पकड़े पहले लंबी तान लगाते हैं। फिर मंच के नीचे बैठे रमेश ख़लीफ़ा, मुन्नी लाल ख़लीफ़ा से […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ (यह रचना राघवेन्द्र की पुस्तक “विकृतियाँ समाज की” से ली गयी है)- सड़क के किनारे पड़ी थी एक लाश । उसके पास कुछ लोग बैठे थे बदहवाश । उनमे चार छोटे […]
अखबार बेंचो, खबर लिखो और विज्ञापन तलाशो ! इस तरह ग्रामीण पत्रकारों की जीवन शैली कब तक चलती रहेगी ? वैसे तो यह आम बात है लेकिन आखिर कब तक यह रूटीन वर्क चलता रहेगा […]
प्रश्न : एक मित्र ने पूछा कि नेक मंशा रखते हुए भी मनुष्य मौजूदा राजनीति में असफ़ल क्यों होता है? क्योंकि; मौजूदा राजनीति अपने सामने वाले के गलत कृत्यों का विरोध करने से शुरू होती […]