poem
बेटी को मत समझो भार
बेटी को मत समझो भार,बेटियां हैं जिंदगी का आधार।बेटियां हैं हर घर की शान,दिल से करो उनका सम्मान।भ्रूण हत्या को मिटाना है,बेटियों को जीने का हक दिलाना है।बेटा होना किसी का भाग्य है ,बेटी होना […]
Bose Sir is the best
East or West,Bose sir is the best,North or South,Manoj sir is so couth. Up or down,He is BEOS’crown,Left or Right,He is so bright. Sky or the earth,His action spreadth,To the lazy or advance,He gives another […]
मुस्कुराहट की वजह बनो
मुस्कुराहट की वजह बनोक्यों दर्द की वजह बनते हो ?मोहब्बत की वजह बनोक्यों नफरत की वजह बनते हो ?जीने की वजह बनोक्यों मृत्यु की वजह बनते हो ?निभाने की वजह बनोक्यों बिखरने की वजह बनते […]
शब्द, प्रारब्ध और न्याय
शब्द पास मेरेकोई शोर नहींप्रारब्ध मेरा येरौशनी दीये कीपहाड़ की चोटी परअंधेरा छंट न सकासच्चाई है येदिखाई जरूर दूंगाप्रारब्ध मेरा ये lखून के स्याह धब्बेदिखा न सकामैं हर किसी कामेरा कोई न हुआजाहिल गँवार मैंदुनियाँ […]
मोहब्बत मरी नहीं, बेवफाई का शिकार हो गयी
मोहब्बत मरी नहींबेवफाई का शिकार हो गईशिद्दत से निभाने वाले आज भी हैं।यह दुनिया खाली नहींमुफ्त में खिलाने वालों सेसिंह आज भी जिंदा है।थोड़ी सेवा कर गरीबों कीफोटो खिंचवामदद करना एक रिवायत हो गईप्रभु दूर […]
ईहे कहाला भोजपुरी; सुनी सभे
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अँखिया के कजरा हेराइ गइले सजनी,हाथवा के मेहँदी खियाइ गइले सजनी।अजोरिया मे लौके हर ओरिया अन्हरिया,एहि घरवा दियवा बुताइ गइले सजनी।जोहत रहि गइनी चनरमा के चननिया,एही तरी अँखिया सुखाइ गइले […]
हे ! वाग्वादिनी माँ
हे ! वाग्वादिनी माँहे ! वाग्वादिनी माँतू हमें ज्ञान देंतू हमें ध्यान दें।भटक रहें हमजीवन पथ परआकर हमें तू अब थाम लें।तू ब्राम्ह की मायातू ही महामायाहम फंसे मोहजालआकर हमें तू अब निकाल लें।तू ज्ञान […]
नेता जी की जय
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–नेता आतंकी बने, बाँट रहे हैं देश।बोल विषैले बोलते, नक़्ली दिखता वेश।।दो–नेता इनको मत कहो, करते हैं व्यापार।मानवता को खा रहे, दिखें धरा पर भार।।तीन–घृणित कृत्य से युक्त हैं, दुर्गुण […]
कोरोना के काल में खुद को बचाना है
कोरोना की महामारी है आई,हर जगह हलचल है मचाई।स्कूल कॉलेज बंद करवाएं,बच्चे ऑनलाइन क्लास लगवाएं ।कई लोगों ने अपनी जान गवाई,कोरोना से बचने की रखो तैयारी।तीसरी लहर है आई ,छोटे बच्चों पर पड़ी है भारी।सबको […]
एक स्वछन्द अभिव्यक्ति
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–बनता-मिटता चित्र यहाँ, जीवन बन अभिशाप।मीठे फल सब चख रहे, बनकर के निष्पाप।।दो–भाँति-भाँति-जन हैं यहाँ, चतुर-चोर-चालाक।वाणी कोयल कूकती, दिखते मन से काक।।तीन–मन से दिखते दीन हैं, तन से सुन्दर अंग।चीर […]
ग़ुलामो की बस्ती
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यहाँ ग़ुलामो की बस्ती हैमारो ठोकरधराशायी कर दो नीवँ को।चाटुकार चमचों की गरदनलम्बी होती जा रही;उठाओ कील और टाँग दो खूँटी पे।ये इन्सानियत की भाषासमझकर भी नहीं समझतेइनकी ज़बाँ खोलोऔर […]
पराजित देह की ‘अनश्वर’ पटकथा
एक अभिव्यक्ति ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २९ जनवरी, २०२२ ईसवी।)
कविता : इश्क़
मैंने उससे इश्क किया,उसने किया किसी और से ।मैंने उसे दिल दिया ,उसने दिया किसी और को ।मैंने उससे प्यार किया ,उसने किया किसी और से।मैंने उससे नजर मिलायी ,उसने मिलायी किसी और से।मैंने उसका […]
बन्द हैं जो राज़, उनको अब तो खोलिए
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय होठों को दे ज़बाँ, अजी! कुछ तो बोलिए,बन्द हैं जो राज़, उनको अब तो खोलिए।बेहोश थे जब आप, बहुत बोल बोले थे,बाहोश अब आप, उन शब्दों को तोलिए।आम खाये नहीं, […]
मेरे कान्हाजी
मुझे अपना मीत बनाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी सखियों के संग रिझाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी रासिको का रास सिखाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी प्रेम की अनुभूति करवाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी माखन चुराना सिखाओमेरे कान्हा जी,मुझे भी निर्गुण […]
जी हाँ, मैं प्यार बेचता हूँ
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आइए जनाब!मैं प्यार बेचता हूँ।किसिम-किसिम का प्यार;तरह-तरह का प्यार;भाँति-भाँति का प्यार;नाना प्रकार का प्यार।विविध प्रकार का प्यार;विभिन्न प्रकार का प्यार।कोटि-कोटि का प्यार :–विभाजित प्यार; कटा प्यार-छँटा प्यार;अलगाऊ प्यार-लगाऊ प्यार;पूर्ण प्यार; […]
मौक़ा मिलते ही, बेलगाम हो लिये
अर्ज़ किया है ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आँखों-आँखों में, वे सलाम ले लिये,बन्द होठों से मेरे, वे पयाम ले लिये।लब थरथरा गये, मंज़र को देखकर,झुकीं ज्यों नज़रें, वे सलाम ले लिये।होठ खुले, अधखुले, बन्द […]
ऐ ज़िन्दगी! किस मोड़ पे, तूने छोड़ा था उसे
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय होठ बुदबुदाये, पर कुछ कह न सका, भाव उमड़ाया, पर कुछ बह न सका। विचार फैले इतने, बनके चादर हो गये, सिकोड़े थे बहुत, पर कुछ तह न सका। ज़ख़्म […]
लोहड़ी है हमारा पवित्र त्योहार
लोहड़ी है हमारा पवित्र त्योहार,घर-घर मे है खुशियाँ हजार।लोहड़ी है हमको भायी,सबके चेहरे पर खुशियाँ लायी।खुशी-खुशी लोहड़ी मनाते हैं,एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं।नए नए पकवान बनाते हैं,इस त्यौहार को मजेदार बनाते हैं।मूंगफली गजक रेवड़ी […]
बहकावे से दूर रह, तर्पण कर दो नाम
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–लँगोटी हैं चाट रहे, ले-ले गांधी-नाम।पाँच साल के मोह मे, बन जाये कुछ काम।।दो–शासन आते हाथ मे, फिर गांधी-अपमान।अन्तिम निर्णय कर बढ़ो, रहे न कोई नाम।।तीन–बहकावे से दूर रह, तर्पण […]
शायद मुझसे नहीं!
वो खुश है पर ,शायद मुझसे नहीं।वह नाराज हैं पर,शायद मुझसे नहीं ।उसे प्यार तो है पर,शायद मुझसे नहीं।वह बातें तो करते हैं पर ,किसी ओर से मुझसे नहीं।वो गुस्सा है पर ,शायद मुझसे नहीं।कौन […]
ऐ मेरे ज़मीर! उठ!
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय; ८ जनवरी, २०२२ ईसवी।)
कविता : शरणागत
मैं दीनहीन दुखियारा हूँमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।मैं जन्म-जन्म का मारा हूंमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।मैं हर जगह से हारा हूँमुझे अपनी शरण में प्रभु रख लो न।रोग शोक […]
गीत – याद तुम्हारी आयी है माँ!
नमन उस संघर्ष को © शिवांकित तिवारी ‘शिवा’
बच्चों ने मनमोहक कविताओं तथा सुंदर चित्रकारी के माध्यम से नववर्ष का किया स्वागत
ठाकुरद्वारा स्कूल के बच्चों ने रचनात्मकता के साथ नूतन वर्ष का स्वागत किया :- राजीव डोगरा कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश— जैसा कि हम जानते हैं कि अंग्रेजी नववर्ष सारे विश्व में बड़ी धूमधाम से आज मनाया […]
Poem : Welcome New Year
Two thousand twenty two,Twenty two year .Twenty first century’sWelcome new year. Marigold – flowers,Golden shining,Roses are wildly ,Blooming and laughing . Mine kitchen garden ,A beauteous spot,Bathing in the sun,Never feeling hot. Fruits are delicious […]
अतीत की ओर लौटते मेरे सहयात्री!
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपने बलिष्ठ कन्धों परतीन सौ पैंसठ दिनों के भारपल-पल लादकरअनवरत-अनथक यात्रा करते-करते,अतीतोन्मुख होते सहयात्री!तुम क्लान्त हो चुके हो;श्रान्त हो चुके हो;विश्रान्ति प्रतीक्षारत है,तुम्हें आगोश मे भरने के लिए;थपकी की ताल परसुमधुर […]
नया साल आया है, ढेरों खुशियाँ लाया है
नया साल आया है,ढेरों खुशियाँ लाया है।बच्चे बूढे खुश बहुत हैं,उत्साह का मौसम छाया हैं।।भेदभाव मिताएंगे,सबको गले लगाएंगे।ये सन्देश सब तक पहुंचाना हैं,सबको मिलकर रहना सिखाना हैं।।अब तो नये साल का सवेरा होगा,नये साल में […]
अब तो नया सवेरा होगा
हजारों खुशियां लाया हैनया साल जो आया है।भुला दो सब बीती बातों कोक्योंकि नया वर्ष जो आया है।अब तो नया सवेरा होगाइसमें खुशियों का डेरा होगा।नया साल आया हैबच्चों में धमाल लाया है ।बस आगे […]
नए साल में खुद भी हँसो और रोते हुए को भी हँसाओ
नए साल की बहुत-बहुत शुभकामना।पुराना साल चला गयानया साल आ गया।नए साल में खुद भी हँसोऔर रोते हुए को भी हँसाओ।नए साल में नए पकवान बनाओखुद भी खाओ औरगरीबों को भी खिलाओ। शबनम छठवीं कक्षा […]
नव वर्ष में कुछ नया कर जायें
देखो देखो नया साल है आयासुख दुख का पैगाम है लाया।दुख की बातों को भूल जाओखुशी से अब नया साल मनाओ।आगे-आगे कदम बढ़ाते जाओनए साल के साथकुछ नया सीखते जाओ।पुरानी बातों को भूल जाओमंजिल की […]
एक नयी मुस्कान नये वर्ष में पानी है
आप सब कोनववर्ष की शुभकामनाएं।बीत गया है पुराना वर्षनया वर्ष खुशियां लेकर आए है।ये कठिन जीवन कोसरल बनाने आये है।अब हमपुराने वर्ष को भूल जाएंगे।नए वर्ष मेंनया-नया काम कर जाएंगे।एक नयी मुस्काननए वर्ष में पानी […]
नया साल नये रंग लेकर आया है
नया सालनए रंग लेकर आया है,टूटे बिखरे ख्वाबों कोफिर से जोड़ कर,एक नया एहसास लेकर आया है।बीते हैं जो पल विषाद में,उनमें एक नयाआह्लाद लेकर आया है।छोड़ चुके हैं जो अपनेहमें समझ कर बोझ,उनको रिश्तो […]
ठंड का मौसम है आया
ठंड का मौसम है आयासर्दी-जुकाम साथ है लाया।ऊनी वस्त्र हमें पहनायेआग के पास हमें बिठाये।नहाने से सब छूटकारा पायेमुँह धोके सब काम चलाये।ठंडा पानी देख दिल घबरायेनहाये या ना नहाये?ये प्रश्न मन मे बार बार […]
नया साल आया है
नया साल आया है ,खुशियों की बहार लाया है ।बीते हुए कल को बुलाना है ,नए साल को खुशहाल बनाना है।इस साल के दुखों को मिटाना है,नए साल को सुकून से बिताना है।नए साल का […]
कुत्तों की ‘जातीय’ पहचान
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय देखो!थोड़ा नज़दीक आओ।देखो! उस कुत्ते कोअपनी जाति पहचानता है।उसके सामने भीड़ हैगँवार कुत्ते से लेकरअर्द्धशिक्षित-शिक्षित कुत्तों की मण्डलीमन्त्रणा करती आ रही है,‘रिफ़ाइण्ड हड्डी’ का दरकार है;क्योंकि उनकी भी अपनी सरकार […]
हमारा गाँव
ठाकुरद्वारा में शिव जी मंदिर कागांव में भोले भाले लोगों कास्कूल में हेडमास्टर सर काअंदाज ही निराला है।खेतो मे मक्के काभीड़ मे धक्के काहिंदी भाषा परलगने वाली बिंदी काअंदाज ही निराला है।ठाकुरद्वारा स्कूल के गुरुओ […]
कविता : तन्हा दिल
तन्हा दिल है न जाने कब से ,तुम मिलकर भी न मिल पाए।तन्हा है दिल न जाने कब से ,तुम छोड़ कर भी ना छोड़ पाए।तन्हा है दिल न जाने कब से,तुम देख कर भी […]
तुम में हम
मैं लिख रहा हूं तुमकोतुम पढ़ लेना खुद कोअगर न समझ आये कुछतो पूछ लेना फिर हमको।वैसे तुमबहुत समझदार होफिर भीकुछ समझ ना आएअपने बारे मेंकुछ तुमकोतो नासमझ समझ कर हीपूछ लेना हमको।मैं सोच रहा […]
कविता– आजीवन
जीवन के पथ परयहां से वहां जा रहा हूं,समझ नहीं आताक्या कर रहा हूंऔर क्या नहीं कर रहा हूं।जीवन की डगमग करतीनाव में बैठकरज़िंदगी का सफरतय कर रहा हूं।कभी तूफानों कामंजर देख रहा हूंतो कभी […]
सुप्रसिद्ध लेखिका अलका के काव्यपाठ को गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में किया सम्मिलित
मुम्बई:– अंतर्राष्ट्रीय शब्द सर्जन के द्वारा 21 नवंबर 2021 को ऑनलाइन भारतरत्न महोत्सव का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 16 देशों के 300 कवि उपस्थित थे, जिन्होंने काव्य पाठ किया। इसी कड़ी […]
अभिव्यंजना
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (एक)तेरा चुप भी इक सवाल है,यहाँ अब न कोई मलाल है।यहाँ हर ख़याल है सो रहा,अब यहाँ बोल है न चाल है।(दो)चमकता चाँद-सा बदन,न चुरा अनकहा कथन।पतंगी रूप हम पा […]
तेरा सान्निध्य
मैं तेरे पास रहूंतेरे साथ रहूंयही काफी है।मंत्रों का बोझतंत्रो का ओजभारी सा लगता है।तेरी गोद मेंममता भरी छाया मेंसोया रहूंयही काफी है।जन्म जन्मांतर की सिद्धियांयुगों-युगों की रिद्धियांअब भारी सी लगती हैतेरा हाथ पकड़ करबस […]
आवर्तन और परावर्तन
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मृग-मरीचिका-सा लगे, मार्ग दिखे विश्रान्त।पथ का राही सोच मे, चंचल मन अब क्लान्त।।दो–अलख जगाता फिर रहा, मिला नहीं भगवान्।अन्तस्-स्वर से दूर हो, पाता है अपमान।।तीन–युग का लक्षण दिख रहा, दिखे […]
उस रोज दीवाली होती है
प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा दीये जब नफरत के बुझ जाते होजब प्रेम से मीत बुलाते होजब कहीं किसी से बैर ना होसब अपने हो, कोई गैर न होउस रोज दीवाली होती है। गरीबों की थाली में […]
बचपन की कहानी
आओ तुम्हें सुनाता हूंबचपन की कहानी,वहां भी होती थी दिल्लगीऔर साथ ही होती थीहर दिन एक नई कहानी।रूठना मनानाआए दिन ही चलता था ।पर नहीं थी मन मेंकोई छल कपट की कहानी।हर रोज़ हम सबलड़ते […]
दीवाली जगमग हुई, दीये-झालर संग
दीवाली जगमग हुई, दीये-झालर संग।दिलवालों के माल पर, दिलवाले सबरंग ।। कच्चे,पक्के घर सभी, सजे-धजे बहु-भेष ।उत्साही गलियाँ हुई, मचा-कोलाहल देख ।। दूकानें शोभामती, चमक-दमक पर ध्यान ।वित्तमती हर नायिका, चटक-मटक का मान ।। खील […]
विषाक्त उत्सवधर्मिता!
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय दीपवर्तिका की ज्वलनशीलतालोकमानस की सहनशीलतापृथक्-पृथक् पथ पर परिलक्षित होती हैं।दो समानान्तर दूरी पर चलते हुए भीसंवाद करने के लिएकहीं-कोई ठौर नहीं बचता।किस-हेतु लोक दीप जलाता हैख़ुश हो लेता है?दीप-प्रज्वलन के […]
एक दीप मन में भी जलायें
एक दीप मन में भी जलाएंभरा जो अंधकार चलो उसे भी मिटाएंमंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे एक साथ बनाएहिंदू, मुस्लिम ,सिख -ईसाई का भेदभाव मिटाएंदिल से हटा दें फरेब की फुलझड़ियांबैर-भाव को भुला बनाएं चलो अपनत्व की […]
दीपावली है हमारा पवित्र त्यौहार
दिवाली आयी दिवाली आयी,खुशियों की बहार है लायी।हर घर जगमग दीप जलायें,श्रीराम जी की याद दिलायें।दीपावली है हमारा पवित्र त्यौहार,हर घर में है खुशियों का समाहार।राम ने रावण पर विजय है पायी,हर घर से बुराई […]
सरदार देश के हे युगसृष्टा!
——-राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवट जिनका लाखों जन कोसम्बल देता था।जिनका हुङ्कार रौद्र होकरतूफ़ां बन जाता था। ऐसे वीर शिरोमणि को सिरशत-शत बार नवाता हूँ।सरदार देश के हे युगसृष्टा!मैं तुमको पुनः बुलाता हूँ। कृषक देश […]
एक नयी दीपावली
छायी हैं नफ़रतें हर जगहआओ मिलकरमोहब्बत काएक नया गीत गाये।छाया है अविश्वास काघना अंधकारयहाँ हर जगह,आओ मिलकरविश्वास का एक नन्हा सादीया जलायें।छाया है मृत्यु कातांडव यहां हर जगह,आओ मिलकरनव जीवन का संचार करें।छाया है महामारी […]
यह जिंदगी भी किसी खेल से कहाँ कम है
कभी हँसाती है तोकभी रुलाती है।यह जिंदगीसमझ नहीं आती है?कभी खुशियां है तोकभी गम है ।यह जिंदगी भीकिसी.खेल सेकहां कम है।कभी दोस्त हैं तोकभी दुश्मन है ।तो जिंदगी मेंकही ग़म है तोकही हम है।कभी दिल […]
कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी
कितना खामोश होता है ठहरा हुआ पानी , बिल्कुल ज़िंदगी की तरह शांत। लहरे पानी में भी उठती हैं, जिंदगी में भी । कुछ किनारे इनके थपेड़ो से टूट जाते हैं , फ़ना हो जाते […]
जिंदगी पर कविता
जिंदगी है एक अनमोल रत्नइसमे खुश रहने का करो प्रयत्न।दुःख की घड़ी भी आएगीपर सुख से दूर नहीं रह न पाएगी।जिंदगी मे क्या छूट गयाक्यों करते हो उसकी चिंता?बस आगे बढ़ते चलोजिंदगी की हकीकत सेकिसी […]
आवर्त्तन और दरार
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–रूप-रंग की हाट में, तरह-तरह तस्वीर।राँझा बिकते हैं कहीं, कहीं बिक रहीं हीर।।दो–धर्म पंथ औ’ जाति की, बिगड़ गयी है रीति।ऐसे में कैसे भला, सब तक पहुँचे प्रीति।।तीन–रुपया-रुतबा-रूपसी, बहुत भयंकर […]
कोरोना आया कोरोना आया, हर घर को पाठशाला बनाया
कोरोना आया कोरोना आया,ऑनलाइन शिक्षा की नीति लाया,स्कूल जाना बंद करवाया,हर बच्चों के हाथ में फोन पकड़ाया,हर घर को पाठशाला बनाया,हर घर पाठशाला से अब हम पढ़ते,गूगल मीट से भी अब हमअध्यापकों से शिक्षा ग्रहण […]
क्यों जलाते हो मुझे
प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा अरे कलयुगी दानवो, मेरे पुतले को जलाने वालोंमैं नहीं कहता कि मत जलाओ मुझे ,लेकिन क्यों जलाते हो मेरे पुतले को यह तो बताओ मुझे ।तुम तो मुझे धर्मात्मा और ज्ञानी पंडित […]
मेरी पहचान हैं, मेरे पापा
मेरी पहचान हैं,मेरे पापा।मेरी हर खुशी हैं ,मेरे पापा।मेरी जान हैंमेरे पापा।मेरा हौसला हैं ,मेरे पापा।मेरा जनून हैं,मेरे पापा।मेरी मुसकान हैं ,मेरे पापा।मेरा सुख हैं,मेरे पापा। संजना (11वीं कक्षा की छात्रा)कांगड़ा हिमाचल प्रदेश।
गांधी-दर्शन
गांधी के सपनों का भारत आओ मिलकर हम बनाएं।गांव -गांव और ढाणी -ढाणी शिक्षा का दीप जलाएं।। रामराज्य की कल्पना को आओ मिल साकार बनाएं।भारत माँ के वीर सिपाही हम इस गुलशन को महकाएँ।। सत्य […]
गांधी के सपनों का भारत
गाँवों की समृद्धि के लिए गांधी जी प्रयास किए।कुटीर उद्योग खुलवाकर स्वरोजगार से जोड़ दिए।। खादी के वस्त्रों का चलन,गांधी जी के चरखे से आया।स्वावलम्बन और मेहनत से सबने खादी घर घर बनाया।। अहिंसा को […]
मुश्किल है इस जहाँ में कहीं सादगी मिले
आओ करें तलाश कहीं ज़िन्दगी मिले।शायद किसी शहर में कोई आदमी मिले।। खंजर कहीं कटार कहीं हाथ में पत्थर।मुश्किल है इस जहाँ में कहीं सादगी मिले।। उजड़े हुए हैं गाँव तो जलते हुए शहर।उठती नज़र […]
गुरु-शिष्य
गुरु-शिष्य का रिश्ता हैप्रेम भाव से निभता है।गुरु ज्ञानरत्नों का भंडार हैदेकर शिष्य को,दिलवाता समाज मेंप्रतिष्ठा मान-सम्मान है।शिष्य गुरुचरणों मेंजब झुकता है ,तभी तो उसकोज्ञान अमृत फल मिलता है।आओ,गुरुओं का मान करेंमिलकर दिल सेउनका सम्मान […]
सोचता हूँ आज कुछ लिखूँ!
सोचता हूँ आज कुछ लिखूं,पर क्या लिखूं?दर्द, प्रेम, गरीबी ,बीमारी या भूख !या लिखूं दो वो सपना जिसे मेरे पिता देखते हैं ,मेरे इलाहाबाद में मौजूद होने पर ।या लिख दूँ भूखे कामगारों के शोषण […]
यादों की एक कापी
आखिरी भ्रम थाछटने लगा धुंध परछाईयों सेतुम मेरे साथ हो ! अजीब किनारे से चुप होकरप्रतिक्रिया देने के लिए हर बारएक सीधा सवाल कर जाते हो । आखिरी भ्रम थाये सीधी सरल जिंदगी अभीदो कदम […]
कविता : फिर से
फिर से, तुमको जीवन कीमर्यादा के लिएउठना होगा।तुमको मानवता कीउदारता के लिएफिर सेउस ईश्वर के आगेझुकना होगा।तुम्हें असत्य कोहराने के लिएफिर सेसत्य से जुड़ना होगा।तुमको मानवता कीरक्षा के लिएफिर सेहार कर भी जीतना होगा। राजीव […]
सलामे इश्क़ के नाम कहो! बग़ावत लिख दूँ
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ख़ता क़ुबूल हो तो कहो! नफ़ासत लिख दूँ,पयामे इश्क़ के नाम इक वरासत लिख दूँ।न झुकाओ निगाहें चिलमन उठाकर आज,सलामे इश्क़ के नाम कहो! बग़ावत लिख दूँ।बला हो, हूर हो […]
तनहाई की अँगड़ाई दे दो तो कोई बात बने
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे होठों का रंग चुरा लो तो कोई बात बने,तनहाई की अँगड़ाई दे दो तो कोई बात बने।कानेमलाहत१ हो तो बदन को शराफ़त सिखलाओ,ख़ुशअक्ख़लाक़२ पैरहन३ ले लो तो कोई बात […]
अंजु चन्द्रामल की अभिव्यक्ति
सुनो!तुम्हें देने के लिए प्यार नहीं बो रही मैं,कहीं सींच-सींच करपागलपन में सड़ा दिया तो?मुहब्बत में हिलोरे लेती बेल भी नहीं लगाऊँगी,कहीं सहारा देने, बाँध-बाँध के टाँकने कीबंदिशों में घुट के ग़र मर गयी ‘मुहब्बत’ […]
कविता : मेरे ख़ुदा
मैं फकीर हूँ,तेरे दर का खुदामेरी आजमाइश न कर।तू पीर है मेरा,मेरे खुदामेरी जग हंसाई न कर।मैं कमजोर लाचार हूँ,मेरे खुदामेरा तू हम राही बन।मैं अनजान हूँ,तेरी इस कायनात सेमेरे खुदातू मेरा हमराज बन।मैं मुरीद […]
Poem : Story of Life
Raghavendra Kr. Tripathi ‘Raghav’ what is life ?It is like a flowing river.Flowing on narrow and rocky paths. Enduring winter and summer.Life is al like a river.You know river does not stopIt is always flowing.Bear […]
मातृभूमि प्राणों से प्यारी
आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक मातृभूमि प्राणों से प्यारी,स्वतंत्रता अपनी अनमोल ।वीर, आबाल, वृद्ध और नारीदेशभक्त सदा शत्रु पर भारी।प्राणों की आहुति दे-दे कर ,अनगिनत चुकाया इसका मोल।खुशी भरा यह दिवस अनोखाआओ मिलकर ध्वज फहराएं।‘राष्ट्र की उन्नति’ […]
जय भारत-जय भारत
आरती जायसवालकथाकार, समीक्षक धरती और गगन कहे,सुख शांति चहुँ ओर रहेजय भारत-जय भारत।सद्भाव के बीज उगे ,उन्नति का आशा जगे,खुशियों की फ़सल लगे ,तन-मन झूमे और कहेजय भारत-जय भारत।लहराता हुआ ध्वज कहे,वीरभूमि की रज कहे,जय […]
वक़्त-बेवक़्त
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय स्याह परछाइयाँ :–वक़्त-बेवक़्त कीचुपके से दाख़िल होती हैं,मन के अँधेरे घर में।घर के भार सेलहूलुहान नीवँकब दम तोड़ देगीइसे वक़्त भी नहीं जानता;क्योंकि वह जी रहा होता है,अपना वर्तमान।वह सहला […]
जागो-जागो देश! अब, जमके करो प्रहार
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय गंगाजल ले घूमता, अपराधी के देश।साधु बनाता संग ला, बना-बना के वेश।।दानव-जैसा दिख रहा, देव बहुत हैं दूर।शैतानों-सा बोलता, दिखता मानो सूर।।अधिनायक बन घूमता, मन से दिखता हीन।आतंकी का रूप […]
सत्य, निष्ठा और न्याय मेरा गाँव मेरा देश
उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती (31 जुलाई, 1880 लमही, काशी) सत्य, निष्ठा और न्याय के पथ पर,मैं जीवन भर चलती जाऊँ।सादा जीवन हो उच्च विचार,मैं महापुरुषों से ऐसी सीख लाऊँ। आदर्श यथार्थ भरी […]
अभिजीत मिश्र की कविताएँ
1. वसुधा पर मानव कुछ सीखा है हमने जग में, वसुधा के इस आँचल सेपौरुष की गाथा को सुनता आजीवन मानव व्याकुल मन से। सुरसरि के अविरल प्रवाह को बाँध दिया तब शंभू नेस्थान जटा […]
कविता : कुछ इस तरह…
हम बिखरेंगेकुछ इस तरहकि तुम संभाल भी न पाओगे।हम टूटेंगेकुछ इस तरहतुम जोड़ भी न पाओगे।हम लिखेंगेकुछ इस तरहकि तुम समझ भी न पाओगे।हम सुनाएंगे दास्तांकुछ इस तरहकि तुम कुछ कह कर भीन कह पाओगे।हम […]
डॉ० सपना दलवी की कविता— माँ
माँ के आँचल में जो सुकून है वो सुकून कहीं और कहाँ? सुना था मैंने, उसने सुनी जब मेरी पहली किलकारी तो आँखें उसकी नम सी हुई थीं पाकर मुझे अपनी गोद में उसने तो […]
बँटवारे का दंश!
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय विश्वास की डोर थामेसरक रहा थालक्ष्य की ओर—तन-मन मेंआशंकाओं की झंझावात समेटेडोर की मध्य-बिन्दु के स्पर्श की अनुभूतिबाहर से भीतर तकसिहरन भरती जा रही थी।अचानक…. सहसा!विश्वास की कुटिल चालेंचलायमान हो उठीं।विस्फारित […]
तस्मै श्री गुरुवे नमः, अब अतीत की बात
कोई मूरख कह हँसे, कोई कहे घसियारा ।हाय मास्टरी ने किया, जीवन को दुखियारा ।। गन्दा प्रांगण जो मिले, अफसर होयें क्रुद्ध ।मरता क्या करता नहीं, जीविका हो अवरुद्ध ।। ‘तस्मै श्री गुरुवे नमः ‘ […]
वक़्त को छेड़ना नादानी है
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय शाम ढली दीये को जलने दो,नींद में सपनों को पलने दो।बढ़ती है प्यास तो बढ़ जायेबर्फ़ को पानी में गलने दो।दम तोड़ ले ख़्वाहिश कहीं,आदत है, नींद में चलने दो।सरे-बाज़ार […]
हे प्रकृति! अब करो उद्धार
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय समय आया, कर विचार।देश की जनता है लाचार।समय-बाण से बेधो इतना,राजनीति बदले आचार।खद्दर शर्म से पानी-पानी,नहीं कहीं सुख का आधार।महँगाई से त्रस्त है जनता,सरकारें धरती पर भार।नेताओं से त्रस्त है […]
विषय विसंगति से भरा, मन लेता है भेद
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मायावी संसार में, भाँति-भाँति के लोग।पाप-घड़ा है भर रहा, यहीं करोगे भोग।।दो–जीवन रस की गागरी, कर लो छककर पान।भाव-समादर है यहीं, मिलता भी अपमान।।तीन–यहाँ-वहाँ के भेद से, मन में होता […]
घायल होती मुसकान
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भूख से बिलबिलाती आँतेंचीथड़ों में लिपटी-चिपटी-सिमटीअपनी पथराई आँखें पालतीटुकुर-टुकुर ताकतीआँखों से झपटने की तैयारी करतीमेले-झमेले की गवाह बनती।आस-विश्वास की फटही झोली लियेतमन्नाओं-अर्मानों की लाश ढोतीफफोलों से सजी हथेलियों कीरेखागणित पढ़तेहोठों […]