ग़ज़ल : मैने देखा खून आज राह मे गिरा हुआ

May 3, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’–  मैने देखा ख़ून आज राह में गिरा हुआ, पूछा ख़ून किसका है कोई तो बताइए? क्या हुआ जो आप सब क्रोध में उबल रहे? व्यर्थ ही सामर्थ्य आप ऐसे ना जलाइये। […]

रतजगों की थकन

May 3, 2022 0

सत्याधार (युवा गीतकार)- बात बेबात पर दरकिनारी हुई । बेवजह बात उनसे हमारी हुई ॥ चन्द नगमें गढ़े, चन्द गजलें कही । इस तरह से खतम उम्र सारी हुई ॥ यूँ तो दफ्तर पहुँचता हूँ […]

गीत – आँसू और उदासी ने जब जीवन पथ पर साथ निभाया

May 2, 2022 0

सत्याधार- आँसू और उदासी ने जब जीवन पथ पर साथ निभाया, तो फिर इन्हें छोड़ खुशियों संग मैं विवाह कैसे कर लेता? आँसू बन जाते हैं स्याही , और रौशनाई होता दिल ! लेकर कलम […]

पहली पोस्टिंग

May 1, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा गोंडा- तुम्हारी हर आकांक्षा पूरी अब हो सकेगी निःसन्देह , ये सच हैं , स्वीकार करना अभी मौन की स्थिति बड़ी दयनीय हैं जहाँ कोई उत्कंठा हैरत करती कितनी मन्नत पूरी करनी हैं […]

News Headlines : 30th April 2022

April 30, 2022 0

Remembering Khudiram Bose and Prafulla Chaki. On 30th of April, 1908 Khudiram Bose and Prafulla Chaki attacked carriage which they thought was carrying the infamous magistrate Kingsford. Prime Minister Narendra Modi says during Azadi Ka […]

मेरे पापा मेरी जान

April 30, 2022 0

मेरे पापा मेरी जान है,मेरे पापा मेरी शान है ,उन पर मेरा सब कुछ कुर्बान है।मेरे पापा मेरी दुनिया है,मेरे पापा मेरी धड़कन है,उनसे ही मेरी पहचान है।मेरे पापा मेरी हर खुशी है,मेरे पापा मेरे […]

संवाद के बहाने से

April 30, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा – अल्का कोई दस्तक नहीं दी हैरानी की बात यह राज क्यों रखी ? खुली पलकों में अल्का देखों इस मनुष्य को कभी विफल नहीं हुए निराश क्यों ? कल्पना के अधीन होकर […]

कविता : आजकल का प्यार

April 30, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार ‘राघव’- माँ के लिए नहीं कभी दो सौ रूपये की साड़ी, लेकिन वैलेंटाइनडे पर पाँच सौ रूपये का गुलाब । भौतिक तृष्णाओं का ये सजीला गुलदस्ता है, आजकल के प्रेम का है अपना ही […]

बहुत भड़का चराग़-ए-इश्क़ बुझाए जाने से पहले

April 29, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ लखनऊ – बहुत भड़का चराग़-ए-इश्क़ बुझाए जाने से पहले | ग़ज़ब के हर्फ़ लिख डाले मिटाए जाने से पहले || सम्हाले दिल को रखना तुम कहीं ये टूट न जाए | […]

वो दिन भी थे ज़माना जब हमारी बात करता था

April 29, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’, लखनऊ- सुहाने पल न जाने क्यूँ ख़्यालों में नहीं आते | अन्धेरों में हैं खोए सब उजालों में नहीं आते || नहीं बुझती प्यास मेरी बहुत ज़्यादा मैं प्यासा हूँ | […]

मेरे शहर मे

April 29, 2022 0

आओ! कभी मेरे शहर मेंतुम को गैरों को अपना बनाकरदिल लगाना सिखाए। आओ!कभी मेरे शहर मेंतुमको हर एक शख्स़ सेमोहब्बत करना सिखाए। आओ!कभी मेरे शहर मेंतुम को नफरतों के बीच मेंपलता इश्क दिखाएं। आओ!कभी मेरे […]

खिल उठा देख कुमुद का यौवन

April 29, 2022 0

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी- चाँदनी रात, महकता चंदन । खिल उठा देख कुमुद का यौवन। * हवा मे रात की रानी महकी दूर महका कोई सघन उपवन । * गर तेरे रूप की फुहार पड़े […]

तेरा नाम ले के डूबे, दीवानगी पे रोये

April 28, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’, लखनऊ- पल-पल जो बढ़ रही है उस तिश्नगी पे रोए | ग़म-ए-ज़िन्दगी से ज़्यादा ग़म-ए-आशिक़ी पे रोए || मेरा राब्ता नहीं अब कुछ तुझसे रह गया है | रग-रग में फिर […]

इन गुलाबों से ख़ुद को सजा लीजिए

April 28, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’, लखनऊ- जान मेरी छोड़ मुझको अगर जाएगी | ज़िन्दगी टूट कर के बिखर जाएगी || इन गुलाबों से ख़ुद को सजा लीजिए | कुछ तो इनकी भी लाली निखर जाएगी || […]

दिल ने तुमको बुलाया है चले आओ मुझे लेने

April 28, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’, लखनऊ – बहुत तुमने सताया है चले आओ मुझे लेने | बहुत तुमने रुलाया है चले आओ मुझे लेने ||    नहीं जी पाएंगे तुम बिन बहुत तुम याद आते हो […]

तुम्हें अब जान कह कहकर बुलाने कौन आएगा

April 28, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’, लखनऊ- ज़रा सोचो अधूरे ख़्वाब सजाने कौन आएगा | अगर रूठी तो अब तुमको मनाने कौन आएगा || सोचा मिलता चलूँ तुमसे कहीं मैं जा रहा था और | बहाने कर […]

मेरी ग़ज़लों में तेरा ज़िक्र बस यूँ ही नहीं होता

April 27, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ (लखनऊ) बहारें चल कर आएंगी तेरा दामन सजाने को | मैं फिर से लौट आऊँगा तेरी दुनिया बसाने को || तुझे मिलने की ख़ातिर ग़र क़यामत का सफ़र ही है | […]

ख़ुद ही ख़ुद का क़ैदी हूँ मै, ख़ुद ही ख़ुद का ज़िन्दान हूँ मै

April 27, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ (लखनऊ) मुझको नहीं मालूम है कैसे तेरे अन्दर ज़िन्दा हूँ मैं तेरे दिल की क़ैद में रोता टूटा एक परिन्दा हूँ मैं। सारे जहाँ की ख़ुशियों को मैं ठोकर मार के […]

तुम्हारे साथ बीते पल मुझे बस याद रह जाएं

April 27, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ (लखनऊ) –        तुम्हारे दिल में मेरे कुछ छिपे जज़्बात रह जाएं | मुझे तुम छोड़ न पाओ ऐसे हालात रह जाएं || मैं सब कुछ भूल भी जाऊँ मुझे […]

कविता : हृदय की वेदना

April 26, 2022 0

आदित्य त्रिपाठी, सहायक अध्यापक बे०शि०प०  भला कब कौन समझा है! भला कब कौन समझेगा! हृदय की वेदना तेरे सिवा अब कौन समझेगा? मैं तुझको आजमा लेता मगर क्या आजमाऊँगा, तुम्हारे प्यार से दीपित दिये दिल […]

कुत्ते को गाय बनाना, बात कठिन

April 26, 2022 0

डा. दिवाकर दत्त त्रिपाठी (चिकित्सक/युवा साहित्यकार)- बंदर को आइना दिखाना , बात कठिन । मूरख को सच भी समझाना, बात कठिन। . साबुन से नहला दो ,ये कर सकते हो ! पर कुत्ते को गाय […]

ग़ज़ल– मोहब्बत में असर होता तो ये हालात न होते

April 26, 2022 0

मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ (लखनऊ)  सज़ाएं काट लूँगा मैं तुम्हारा नाम न लूँगा | कभी भी अब ज़माने में प्यार से काम न लूँगा || मुहब्बत में असर होता तो ये हालात न होते | […]

गीत : विष आलिंगन में खुश रहना, यह मैंने चंदन से सीखा

April 25, 2022 0

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी- सोने जैसा खरा नही हूँ । पर इतना भी बुरा नही हूँ । मुद्दों को मत मीत बनाओ , मत राई को मेरु बनाओ। मेरे घाव बहुत दुखते हैं, मत खंजर […]

रंगे सियारों से सारी उम्मीदें बेमानी हैं

April 25, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार “राघव” राजनीति के रंगे सियारों सेसारी उम्मीदें बेमानी हैं। सत्ता लोलुपता के कारणमर गया आँख का पानी है। भीतर विद्रोही मार रहेबाहर आतंकी काट रहे। लेकिन हम हैं बेशर्म बड़ेराजनीति ही हाँक रहे। […]

आर्त्तनाद विधवाओं का

April 24, 2022 0

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी ऐ मेरी देश की बहरी सरकार ! भला कब तक तू निंदा का राग यूँ अलापेगी? क्लीव हो चुके हैं देश के चालक सभी, दिल्ली की सोई हुई सत्ता कब जागेगी? […]

वह तुम थे या नियति का परिहास

April 24, 2022 0

कृष्ण प्रिया- क्या लौट आई थी प्रतिध्वनि मेरी! स्वर न हो सका शंखनाद! उस दिन ख्वाबों के घाट तुम ही तो चले आए थे न श्याम मेरी आंखों में अविश्वास घनेरे थे कैसे करती विश्वास […]

मन नहीं बुढ़ाता

April 24, 2022 0

सुधेश- चलते चलते हाथ पाँव थकते चलने की चाह नहीँ मरती देखते देखते आँखेँ धुँधलातीँ देखने की चाह नहीँ मरती दुनिया की चखचख सुनते कान बधिर सुनने की चाह नहीँ मरती घर बाहर का सब […]

एक अतुकांत कविता- मेस वाला लड़का

April 24, 2022 0

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी-  वो मेस वाला लड़का , जो खाना लेकर आता है। मेरे मन में वो ढेरो सवाल छोड़ जाता है । अभी उमर उसकी क्या होगी? दस ,बारह या तेरह , यही […]

चुप्पी अब तो व्यर्थ है, लेती है आकार

April 23, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मन का प्यासा दूर है, तन का प्यासा पास।मृगमरीचिका ही दिखे, थोथी होती आस।।दो–रूप रूपसी रुत नहीं, रंग नूर अवसान।पलक झपकती आँख है, मची है घमासान।।तीन–गणित बदलता धूप का, जलती […]

क़िताबें

April 23, 2022 0

किताबें ऐसी सम्पत्ति हैं जिसमें सहजता और सरलता भी है। किसी की हो जाती हैं तन्मयता के साथ सबकी किताबें एक जैसी अलमारियों पर करीने से सजाई हुई बस्ते में कवर चढ़ाई हुई सर्जन पथ […]

क्रोध के स्वर : सिंहों पर हमने कुछ गीदड़ रौब जमाते देखे हैं

April 23, 2022 0

योगेश समदर्शी (हास्य एवं ओज कवि)- जुगनू कुछ सूरज को हमने अब धमकाते देखे हैं सिंहों पर हमने कुछ गीदङ रौब जमाते देखे हैं बहकावे में आकर जिसने हाथ में पत्थर थाम लिए और शत्रु […]

अनुभव

April 23, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा प्रेम का अनुभव रसरूपक विचित्र भावो का द्योतक है तुम प्रेम में कहा तक सफल हुए यह विस्तारण भावो का तुम कठिन हुए हर मोड़ पर जीवन के कब सरल रहे , कहा […]

ऊँची उड़ान

April 23, 2022 0

पिण्टू कुमार पाल- आसमां भी आपका, जमी भी आपकी, हौसला भी आपका, उड़ान भी आपकी, उड़ो तो आसमान की ऊँचाई नाप दो, गिरो तो समंदर की गहराई नाप दो. भरो तुम बहुत ऊँची उड़ान, पर […]

न रख इतना नाज़ुक दिल

April 22, 2022 0

—डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ इश्क़ किया तो फिर न रख इतना नाज़ुक दिल माशूक़ से मिलना नहीं आसां ये राहे मुस्तक़िल । तैयार मुसीबत को न कर सकूंगा दिल मुंतकिल क़ुर्बान इस ग़म को तिरि ख़्वाहिश मिरि मंज़िल ।   मुक़द्दर यूँ सही महबूब तिरि उल्फ़त में बिस्मिल तसव्वुर में तिरा छूना हक़ीक़त में हुआ दाख़िल । कोई हद नहीं बेसब्र दिल जो कभी था मुतहम्मिल गले जो लगे अब हिजाब कैसा हो रहा मैं ग़ाफ़िल ।   तिरे आने से हैं अरमान जवाँ हसरतें हुई कामिल हो रहा बेहाल सँभालो मुझे मिरे हमदम फ़ाज़िल । नाशाद न देखूं तुझे कभी तिरे होने से है महफ़िल कैसे जा सकोगे दूर रखता हूँ यादों को मुत्तसिल ॥

कविता : मैं तुमसे पूछता हूँ

April 22, 2022 0

पंकज चतुर्वेदी – जैसे-जैसे पकड़ तुम्हारी सख़्त होती है कश्मीर छूटता जाता है जिनकी हथियार में आस्था है वे समझ नहीं पाते कि प्यार का विकल्प नहीं है तुम उनसे अलग नहीं हो तुम नहीं […]

मेरे पास शब्द हैं

April 22, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा (युवा साहित्यकार)- उसने कहा मेरे पास शब्द हैं तुम्हें जानने के लिए इतने शब्द हालात सम्भालने के काम आ सके क्या कहूँ ? अभी-अभी हृदय की पीड़ा बढ़ रही तुम अभी मौन हो […]

जाने क्यूँ मुझको मेरी माँ, मेरी बेटी लगती है

April 22, 2022 0

उषा लाल – जाने क्यूँ मुझको मेरी माँ मेरी बेटी लगती है ! घड़ी घड़ी जिज्ञासित हो कर बहुत प्रश्न वह करती है भर कौतूहल आँखों में हर नई वस्तु को तकती है ! बात […]

खामोशी मेरी इक आग बनती जा रही है

April 22, 2022 0

योगेश समदर्शी (कवि/प्रकाशक)- मैं जिसे लिख ही न पाया, पीर मुझको खा रही है और खामोशी मेरी इक आग बनती जा रही है। १. मुझमे कोई हँस रहा है, हाथ में विषधर लपेटे और मैं […]

मत वर्तमान से खेल करो

April 22, 2022 0

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी- ऐ! रुको! रुको! मेरे अतीत,मत वर्तमान से खेल करो ! गाया तुमको मैने अतीत!जैसे कि कोई शोक गीत।तुम वर्तमान से दूर रहो,मत करो मेरे उर को सभीत।तुम मिट्टी थे, ये सोना […]

कौन सुनेगा अपनी बोलो, अब किससे करिये फरियाद

April 22, 2022 0

सत्याधर (कुरसठ, हरदोई)- कब तक दिल का रोना रोयें,अब मत करिये उसको य़ाद ।जितनी गुजरी रो-रो गुजरी,शेष जो है ना कर बरबाद । खाकी, खादी, मुंसिफ, मुजरिमसब मिल बैठे हैं फिर तोकौन सुनेगा अपनी बोलोअब […]

गाँव बस खेत वालों का कभी भी नहीं रहा

April 22, 2022 0

योगेश समदर्शी (हास्य एवं ओज कवि)- गाँव बस खेत वालों का कभी भी नहीं रहा गाँव के लिए धोबी, कहार भी जरूरी थे । नाई और धीमर व बढ़ई जुलाहा सभी गावँ की व्यवस्था में […]

ज़िन्दगी को मैने नज़दीक से निहारा है

April 21, 2022 0

डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी- जिंदगी को मैंने नजदीक से निहारा है । जेठ की दुपहरी में देखा बदन जलता हुआ। पसीने की बूंदो से तर बतर , वो काला नर, बैलों के साथ मे ही […]

कूड़ी के गुलाब

April 20, 2022 0

अमित धर्मसिंह- गमले के गुलाब की तरह नहीं,हम कुकुरमुत्ते की तरह उगे । माली के फव्वारे नेनहीं सींचीं हमारी जड़ें,हमारी जड़ों नेपत्थर का सीना चीरकरखोजा पानीकुटज की तरह । कुम्हार के हाथों ने नहीं गढ़ा […]

फागुन की बयार

April 20, 2022 0

  उषा लाल– फागुन की बयार मनभावनपूनम का है चाँद ,जले होलिका अबकी ऐसीहर ले सबकी क्लांत !हो गुलाल रस प्रेम रंग कापिचकारी में प्रीत!गले मिलें सब इक दूजे केगिरा द्वेष की भीत!दहन करें अपने […]

कविता : कहाँ हैं आप ?

April 20, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा- बात कुछअटपटी सा लगी होगीलेकिन बात शुरू हुई,कहा हैं आप ?शायद मन झल्ला गया होगानिःसन्देह दोनो ही !आखिर ढाई शब्द के प्रश्न का उत्तर मिलाक्यों ?मौन एक क्षण होकरमायूसी ने दस्तक दे दीबस […]

जिंदगी आग है संघर्ष की तपते रहिये

April 20, 2022 0

डॉ.अन्नपूर्णा सिसोदिया ‘अमन’- जिंदगी आग है, संघर्ष की तपते रहिये हर लपट से कुंदन बन निखरते रहिये । अरुणिमा की रेख बन करती उजली राहें जिंदगी भोर है, हर घडी चलते रहिये । सुगंध सी […]

कड़वा घूंट

April 19, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा- किसी पुरुष के सानिध्य में रहकर, स्त्री वाद की बात करे तो पूरी तरह से छिछलापन हैं कुरूपता लिए बेगढ़न्त बातें उतरती नहीं कड़वे घूंट की तरह पूजती हैं पत्थरों में अमरसुहाग के […]

सारे सपने गिर जाते हैं , पत्तों जैसे पीले होकर

April 19, 2022 0

डॉ० दिवाकर दत्त त्रिपाठ (चिकित्सक/युवा गीतकार)- कभी कभी इस उर की पीड़ा, पतझड़ जैसी हो जाती है ।रंग बिरंगी दुनिया , यह जब सेमल फूल सरीखी लगती ।कोयल की वह कूक कर्णप्रिय, कानो को तब […]

हँसी कभी धूमिल नहीं होती

April 18, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा (बस्ती)- सब गलियाँ सुनसान हैंखनकती आवाजें भी ख़ामोश हैं बचपन कमरों में कैद हुआ स्वयं के जीवन का बोध करता हुआअपनी माँ के प्रेम से दूर हैं गलियों में अंधेरा घना जीवन को भेदता […]

प्रेम में डूबी दर्द से भरी एक दास्ताँ

April 18, 2022 0

डॉ. आकांक्षा मिश्रा, बस्ती (उ. प्र.) प्रेम में डूबकर जख्म खाई लड़कियाँ आखिर हार जाती हैं ..। जीवन का हर दाँव , संवरने से पहले ही बिखर जाती हैं ..। जीवन से भी ; मंजिल […]

निराश क्यों ?

April 18, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा, बस्ती उत्तर -प्रदेश-  हे मनुष्य ! तुम कभी विफल नहीं हुए फिर अकारण निराश क्यों ? कल्पना के अधीन होकर स्थिरता का कैसा विस्तार कर रहा है मनुष्य । प्रकृति का स्पर्श ही […]

लगे आग चारों दिशा, चादर ले तू तान

April 18, 2022 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–धर्म कहे दुनिया जिसे, भटका-भटका ज्ञान।कर्ममार्ग अज्ञात है, अटका-अटका ध्यान।।दो–महँगाई मुरदा हुई, मस्जिद हुई जवान।मन्दिर धन्धा बन गया, काट रहे सब कान।।तीन–बाबा बुल्डोजर बने, चला रहे हैं बाण।कहाँ न्याय-अन्याय है, […]

आँखें जिधर घुमाइए, दिखते हैं सब सूर

April 17, 2022 0

◆ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–सत् संवाद-शून्य है, लुप्त धरा का धाम।कलियुग को हम क्या कहें, जहाँ फँसे हैं राम।।दो–राम-नाम की लूट मे, भक्त फँसे हनुमान्।नेत्र घृणा की बन्द कर, सन्मति दे भगवान्।।तीन–भाँज रहे तलवार […]

तेरी इन झील सी आंखों में, जो ये नूर दिखता है

April 16, 2022 0

Pawan Kashyap- तेरी इन झील सी आंखों में, जो ये नूर दिखता है । तेरे चेहरे की मदहोशी में, ये मन चूर दिखता है । कहीं जुल्फों का गिर जाना, कहीं अधरों का खुल जाना […]

मनुष्य देवता 

April 16, 2022 0

सुधेश – ३१४ सरल अपार्टमैन्ट्स , द्वारका , सैक्टर १०,  दिल्ली ११००७५  भारत की जनसंख्या थी जब तैतीस करोड़ तब उतने ही थे देवता आज सवा सौ करोड़ में कितने देवता है ? शायद कुछ […]

आँधी मेँ औँधा पेड़

April 16, 2022 0

सुधेश- पास के बगीचे मेँ एक बूढा पेड आँधी मेँ औँधे मुँह पडा था न माली पास आया न लकडी चोर धूप मेँ सूखा पानी मेँ गला यतीम सा पडा रहा कमबख्त मरने को। महीनोँ […]

पत्थर हो जाऊँ 

April 16, 2022 0

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय)- यदि पत्थर हो जाऊँ और कोई उस पर फूल चढ़ा दे तो पत्थर भी पुजने लगता है वहाँ खड़ा होता है मन्दिर भक्तों की लगती भीड़ […]

अभी रुको

April 16, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा (अध्येता/लेखिका)- उसने कहा बार -बार मृत्यु नहीं होगी जीवन को जोड़ने के लिए पीड़ा देती है मैं चाहता हूँ हर वक्त साथ रहूँ प्रकृति रहने नही देती रूपक में अभी रुको तुम्हे निकट […]

मंज़िल 

April 16, 2022 0

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय )

कविता : चींटी 

April 16, 2022 0

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) ३१४ सरल अपार्टमैन्ट्स , द्वारका , सैक्टर १० – सरकती सरकती चढ़ गई हिमालय कुछ दिनों बाद कोरी चमड़ी में खाज उठी सोचा एवरेस्ट की सैर करूँ […]

गदहे भाई

April 16, 2022 0

Babulal Dahiya- गदहे भाई बड़े खधाई दिन भर जागर प्यारा। मुँह अंधियारे निकर गया ता बहुरा लउटत ब्यारा।। लदी रहय पीठे मा गोनिया ढोबा पथरा ईटा। जहां न ठेलन कय पइठारी अतरिउ खोतरी हीठा।। मालिक […]

अव्यक्त

April 16, 2022 0

अमित द्विवेदी- एक पाषाण सा है मेरा अंतस जब कलम की नोक से तराशता हूँ तो साकार हो जाते है कई अनसुलझे रिश्ते कुछ अनकहे।

बाहर लाखों का मौसम 

April 16, 2022 0

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय)- भीतर ज्वर में तन तपता बाहर कोकिल कूक रही मीठी वाणी भीनी भीनी बयार सरकती कत्थक नर्तकी सी । भाई ज्वर जल्दी उतरो बाहर लाखों का […]

जागर्ति और सुषुप्ति

April 16, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रयागराज के सघन पदातिक पथ परविश्रान्त-क्लान्त शयन करती प्रौढ़ा,आजीविका-साधन से समन्वय-सामंजस्य स्थापित करती;अद्भुत एकान्वित और पार्थक्य केआचरण की सभ्यता प्रदर्शित करती;अवचेतन से साक्षात् करती,मानो सांसारिकता से सुदूरकिसी निभृत निलय में […]

आशीर्वाद की अभिलाषा

April 15, 2022 0

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ (लेखक/कवि, पत्रकार {हिन्दुस्तान} एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ )- गुरु पितु मातु प्रणाम तुम्हें, तुम बिन कौन हमारा है | बतियाने वाले बहुत दोस्त, संकट में कौन सहारा है || हे स्वर्ग के वासी […]

एक गीत होरी का गोदान

April 15, 2022 0

 दिवाकर दत्त त्रिपाठी- होरी का गोदान कभी क्या हो पायेगा ? पाँच पाँच करके हैं बीते साल कई ।चोर उचक्के हुयें हैं मालामाल कई ।खादी पहन के कइयों देश को लूट रहेखादी बुनने वालें हैं […]

सोच रहा हूँ एक गीत लिखूं

April 15, 2022 0

पिण्टू कुमार पाल- सोच रहा हूंँ एक गीत लिखूं, मेरे मन का मीत लिखूं, या तेरे मन की प्रीति लिखूं, प्रकृति का सौन्दर्य लिखूं, या विधवा के मन की व्यथा लिखूं, कहाँ हैं आप ? […]

चिठ्ठियाँ तुम्हारे नाम की

April 15, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा- तुम्हें….!!कभी-कभी चिठ्ठियाँ लिखाकरुँगी । चिठ्ठियाँ तुम्हारे नाम की पता मेरे घर का ही होगापढ़कर खुश तुम होना कुशल मेरे परिजन का ही होगा ।सिहर जायेगा हृदय…….ये जानकर , तुम्हारे द्वार परदिया आज भी जलता […]

कहाँ हैं आप ?

April 15, 2022 0

आकांक्षा मिश्रा- बात कुछ अटपटा सा लगा होगालेकिन बात शुरू हुई,कहा हैं आप ? शायद मन झल्ला गया होगानिःसन्देह दोनों ही !आखिर ढाई शब्द के प्रश्न का उत्तर मिलाक्यों ? आशीर्वाद की अभिलाषा मौन एक […]

इश्क़ की बातें अक्सर महँगी पड़ती हैं

April 15, 2022 0

इश्क़ की रातेंऔर इश्क़ की बातेंअक्सर महँगी पड़ती है। ज्यादा समझदारी औरलगी हुई इश्क़ बीमारीअक्सर महँगी पड़ती है। गैरों के साथ यारी औरअपनों के साथ गद्दारीअक्सर महंगी पड़ती है। जरूरत से ज्यादा समझदारीऔर गैरों से […]

कविता : मृगमरीचिका

April 14, 2022 0

राश दादा राश (दार्शनिक/साहित्यकार)- जमीं से उठता वो ;जो आसमाँ नजर आता है ये सही नहीं वो आशियाँ बनाता है बलुआई रेत के संशय सुखद लुभाए ,, ,, मृगमरीचिका जो टूटे धैर्य का बन्धन करूँ […]

कविता – स्त्री

April 14, 2022 0

डॉ. आकांक्षा मिश्रा-   एक स्त्री आधी से ज्यादा दूरी अकेले तय करती हैं , तुम्हारे सारे अधिकारों को कर्तव्य मानकर सफर जारी करती हुई तुम्हें मुक्त कर देती हैं मुड़कर मत देखो , अधूरी रहेगी […]

राम! उत्तर दो

April 13, 2022 0

★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय राम!तुम पैदा क्यों हुए?तुम तो क्रय-विक्रय के लिएमात्र एक वस्तु-सदृश हो चुके हो।तुम एक ऐसा विज्ञापन हो,जिसे सीने पर साटकर उन्मादी भीड़हिंसा का जुलूस निकाल रही है।तुम्हारे नाम के रहस्य से […]

देश के युवा साथियों के नाम एक कविता

April 13, 2022 0

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ –लखनऊ-हरदोई राजमार्ग, टावर प्लाट, सुन्नी, हरदोई (उ॰प्र॰) युवा साथियों जोश मे आओ, अपने देश की शान को | विश्व गुरु भारत भूमि के, मिलके बढ़ाओ मान को || केवल अपने तक सीमित रहना, […]

मन बहुत साफ-सुथरा है, इसमे अच्छी बातों को बसाओ

April 12, 2022 0

जीवन बहुत छोटा है,इसे खुशी से बिताओ।क्रोध बहुत खराब है,उसे हमेशा दबाकर रखो।आंखें बहुत नशीली है,इन से आंसू मत बहाओ।होंठ बहुत खूबसूरत हैं,इनकी मुस्कुराते हुए शान बढ़ाओ।दिल में बहुत कुछ छुपाया है,इसे छुपाओ नहीं जताओ।मन […]

हकीक़त

April 11, 2022 0

दास्तां चलती रहीएक तरफ ,थोड़ी सी नादानियां भरीएक तरफ सब्र का तालीमएक तरफ हुक्म की पेशकसीथोड़ी रहमतें भी होदिलों में रंजिशें न बचेथोड़ी अदायगी रहे । आकांक्षा मिश्रा, गोण्डा

पथिक

April 8, 2022 0

पथिक हो?फिर विराम क्यों ?चलना तेरा काम हैफिर आराम क्यों? पथिक हो?फिर पथ पर पड़ेकंकरओं सेतुमको भय क्यों? पथिक हो?फिर पथ परचलने से तुम कोथकावट क्यों? पथिक हो?फिर हार जाने केडर से तुम कोघबराहट क्यों? […]

धूप-दर्शन

April 5, 2022 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–पुरवइया हलकान है, पछुआ करे न बात।घूँघट दिखती साँझ है, सूरज मारे लात।।दो–लू चलती ज्यों आग है, आँख उठे यों पीर।ऋतु कोलाहल यों पड़े, दहक रहा ज्यों तीर।तीन–मन तो बहुत […]

मैं एक गधा आवारा हूँ

April 1, 2022 0

सब यही सुना कर कहते हैं,मैं एक गधा आवारा हूँ।मानवता जिनमें होती है,बस उसी प्यार का मारा हूँ।। सबकी अपनी दुनिया होती,मैं भी अपने में जीता हूँ।ढोता हूँ जग का भार,और कटुताओं को चुप पीता […]

श्री सिद्धिविनायक स्तुति

April 1, 2022 0

हे ऋद्धि सिद्धि के ममदातातुमही हो मेरे भाग्य विधातापूर्ण करो प्रभुजी सब काजाॐ गं गं गं गणपति-गणेशाभक्त तेरा, पड़ा घने-क्लेशातुम्हीं आन दूर करो द्वेषाॐ कं कं कं कालिके-नंदनकरूं गौरी – सुत स्नेह वंदनभरो ह्रदय मेरे […]

मत भूलो!

March 28, 2022 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरी आँखों के सामने एके-४७ हैउसे देख-देखकरकेवल ख़याली पुलाव पका-पकाकर रह जाता हूँ।सामने मेरा घर और परिवार वर्ज्य दीवार की भाँतिसीना तानकर खड़ा दिखता है।बेशक, बँधी मुट्ठियाँ हैं।दायित्व का बन्धनमुट्ठियों से […]

इन वादियों में

March 27, 2022 0

जग की पीड़ा ,पीड़ा में तुमको पायाइस दुनिया की लय मेंसब कुछ खोकरयादों की छुई मुई सी धूप बनबिखर रही जग में प्रांतर के कोने मेंछाया की सुखद रूप मेंकल तुमको पाया ,आजतुम्हारी यादों कोइस […]

माँ जगदंबे काली

March 25, 2022 0

रक्षा करो माँ जगदंबे कालीरक्षा करो माँ जगदंबे काली…… तुम हो दुर्गा तुम ही कालीकरती हो तुम अपने बल सेसारे जगत की रखवालीमेरी भी रक्षा करो माँ जगदंबे काली।रक्षा करो माँ जगदंबे काली…… तुम हो […]

समय की मुसकराहट

March 20, 2022 0

★ बिम्ब-विधान और प्रतीक-योजना का अनुशीलन करें। ★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आजमहुआटपकना भूल-सा गया है।फुनगी पर बैठी गौरैयाचहकना भूल-सी गयी है।तितलीपंखों को सिमटायेसशंक नेत्रों सेकुछ ढूँढ़-सी रही है।कोटर से झाँकता उल्लूबूढ़े अजगर की पीठ […]

धन्यवाद प्रकृति इतना देने के लिए

March 20, 2022 0

डॉ.अन्नपूर्णा सिसोदिया ‘अमन’- विद्यालय जाते समय आजकल सड़क के दोनों ओर सजे खेतों में गेहूं की बालियों की स्वर्ण लहरियों का मनमोहक दृश्य देख उपजे भाव..धन्यवाद प्रकृति इतना देने के लिए  – फागुनी बयार के […]

कोई फ़र्क नहीं

March 19, 2022 0

मैं कब हारामैं कब जीतामुझे इससे कोई फर्क नहीं। कौन अपनाकौन परायामुझे इससे कोई फर्क नहीं। मैं क्यों रोयामैं क्यों हंसामुझे इससे कोई फर्क नहीं। कौन मेराकौन तेरामुझे इससे कोई फर्क नहीं। क्या खोयाक्या पायामुझे […]

बातें-जज़्बे

March 18, 2022 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ताल कितना मिला रहा, छटक रहा हर राग।मिलता उत्तर भी नहीं, खेलूँ कैसे फाग।।देवर-भाभी में कहाँ, भला दिखे अनुराग।बाहर-बाहर प्रेम है, भीतर-भीतर आग।।रस्सी लेकर सब जुटे, बढ़ा-बढ़ाकर बैर।आँखें मन की बन्द […]

होली का त्योहार है आया

March 18, 2022 0

होली का त्योहार है आया,खुशियों की बौछार है लाया।फागुन मास आता है ,रंगों का त्योहार लाता है।रंग बिरंगे गुलाल उड़ाए,हर चेहरे पर रंग लगाए।प्यार के रंग से भरी पिचकारी ,एक दूसरे पर बच्चों ने मारी।होलिका […]

फिर बिखर गई वह शून्य में

March 16, 2022 0

बदसूरत थी,खूबसूरत न थी।सड़ गए थे पंचतंत्र जैसे,बदबू आ रही थी शरीर से।न जाने उन दरिंदों को,खुशबू लगी किस तंत्र की।लोग जिनसे डरते हैं, पूजते हैं,ब्रह्मबाबा, डीह बाबा, शहीद बाबा के पास।घने जंगलों में, पटरियों […]

बदलते रंग

March 11, 2022 0

बदलते हुए रंगों के साथबदलते हुएअपने लोग देखे हैं।चेहरे पर नकाब ओढ़ेसीने पर वार करतेअपने ही लोग देखे हैं।हरे रंगों जैसीअब लोगों के दिलों मेंहरियाली कहाँ ?अपने ही लोगखंजर फेरह्रदय तल कोबंजर करते देखे हैं।रंगों […]

Don’t consider daughter as a burden

March 7, 2022 0

Don’t consider daughter as a burdenDaughters are the basis of life.Daughters are the pride of every home,Respect them from the heart.To eradicate infanticide,Girls have to be given the right to live.It’s one’s destiny to have […]

तेरी महफ़िल में शोर कहाँ ?

March 4, 2022 0

तेरी महफ़िल में शोर कहाँ ?मेरे सिवातेरा कोई यहाँ और कहाँ?लोग कहते हैंतुम हर लफ़्ज़ कोपकड़ लेते हो।फिर तुम्हारी जिंदगी मेंमोहब्बत के पन्नों परइश्क की दास्तां कहाँ?लोग कहते हैंहर आशिक तेरा यहाँ।फिर तेरे चाहने वालों […]

शिवरात्रि

February 28, 2022 0

शिवजी की रात है सुहानी, पर्वतों से जुड़ी है उनकी कहानी। नीलकंठ है उनका नाम, उनके भक्तों में है मेरा नाम। तन मन से निकली आवाज, शिवजी को पाना है मेरा ख्वाब। भक्त इस दिन […]

अविरल धारा

February 28, 2022 0

जीवन के सिन्धु सेतु पर दिखा कई देशों का पहरा। जहाँ, बह गई निजता, मनुष्यता सदा एक सानिध्य की चेष्टा। असंख्य आकांक्षाओं से निकली जीवन की एक सुंदर रेखा। हमने जिसको देखा भावशून्य न ही […]

एहसास करो!

February 24, 2022 0

एहसास करो जरा मेरी कमी ,थोड़ी सी तो महसूस करोगे।एहसास करो जरा मेरी बातें,थोड़ी सी तो याद करोगे।एहसास करो जरा मेरा प्यार,थोड़ा सा तो पछताओगे । एहसास करो जरा मेरी मोहब्बत ,थोड़ी सी तो समझ […]

कविता : युवक

February 22, 2022 0

शिवाजी पटेल, कुरसठ जन्म लेकर जैसे ही इस दुनिया में आता है। माँ-बाप का वह राजा बेटा कहलाता है। दिन पर दिन वह प्यार से बड़ा होता जाता है। बाप के कंधे पर हर जगह […]

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