संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

October 23, 2021 0

◆ शब्द– अल्ला और अल्लाह।★ अल्ला– यह ‘संस्कृत-भाषा’ का शब्द है, जो लिंग-निर्धारण के अन्तर्गत स्त्रीलिंग का शब्द है। अधिकतर कोशकार ‘अल्ला’ शब्द को ‘अरबी-भाषा’ बताते हैं, जो कि ‘भयंकर’ दोष है। शब्दभेद की दृष्टि […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का ‘मौखिक और लिखित भाषा-प्रयोग में अशुद्धियाँ’ पर आगरा में व्याख्यान

October 5, 2021 0

भाषाविज्ञानी और समीक्षक आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय को ‘नागरी प्रचारिणी सभा’, आगरा की ओर से आयोजित एक सारस्वत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित किया गया है। वे ६ अक्तूबर को नागरी प्रचारिणी […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की प्रायोगिक पाठशाला

September 27, 2021 0

● समाचार-चैनल : ‘न्यूज़ 24’ यहाँ सबसे ऊपर एक चित्र है। इस चित्र के अन्तर्गत दिखाये गये समाचारों का शब्दानुशासन के निकष पर हम भाषिक परीक्षण करेंगे। आइए! चलते हैं, अपनी ‘प्रायोगिक भाषिक कर्मशाला में।अब […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

September 26, 2021 0

निम्नांकित शब्दों को सविस्तार समझने के लिए अपने स्वस्थ तर्क-चिन्तन को बोध का आधार बनायें। शुद्ध और उपयुक्त शब्द :– समाधि, उठावनी, पंचतत्त्व में विलीन, पार्थिव शरीर तथा पन्ना-पृष्ठ/पेज। ★ समाधि– इस शब्द को लेकर […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

September 19, 2021 0

सामर्थ्य के अवयव (तर्क अथवा वाक्य के पञ्च अंग :– उदाहरण, उपनयन, निगमन, प्रतिज्ञा तथा हेतु) सभी के भीतर हैं; आवश्यकता है, टटोलने की। सामर्थ्य पहले भ्रूणावस्था में रहती है, फिर भीतर-ही-भीतर उसका विकास होता […]

‘आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की प्रायोगिक पाठशाला’

September 18, 2021 0

◆ ऊपर दिये गये ‘चित्र’ को गम्भीरतापूर्वक देखें।● न हिन्दी का ज्ञान और न ही अँगरेज़ी का बोध!‘बस-विभाग’ की विमूढ़ता या फिर ‘वाराणसी विकास प्राधिकरण’ का प्रमाद कहा जाये– न हिन्दी का संज्ञान और न […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

September 17, 2021 0

प्रश्न– आपको अधोलिखित शब्दों में से जो शब्द/ शब्दप्रयोग अशुद्ध लगते हों, उन्हें शुद्ध करते हुए लिखें—१- समन्दर२- जीवन में सुख और दुख दोनों है।३- पाठ्येत्तर और शिक्षणेतर४- ऋषि पातंजली एवंम् पाणिनि५- उसके साँसों/श्वास में […]

हिन्दी की पाठशाला आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

September 12, 2021 0

● निम्नांकित वाक्यों/वाक्यांशों में से जो शुद्ध हों, उन्हें लिखें। निर्देश– आपका प्रथम उत्तर ही मान्य होगा। किसी के उत्तर पर कोई प्रतिक्रिया न करें। पाठशाला की ओर से आयोजित इस परीक्षा में समस्त सदस्यवृन्द […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

September 11, 2021 0

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••◆ प्रश्न– निम्नांकित वाक्यांशों में से कौन-से शुद्ध हैं, उन्हें यहाँ लिखें/टंकित करें?१- संवेदनाओं को तीव्रतर से तीव्रतर अनुभव।२- प्रेमचन्द्र के सर्वश्रेष्ठ कहानियां।३- संकल्पों को लेनी हैं।४- चक्रवाती तूफानों का भारी आतंक।५- साहित्य की निर्माण, […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

September 6, 2021 0

◆ निम्नांकित वाक्यों/वाक्यांशों को शुद्ध करें :–१- फुलों का विकसित होने से।२- गाड़ी से तीन सवारी गिरा।३- शपथनी का कथन।४- पौधरोपण की।५- उसने श्राप दी।६- महिला कार्यकर्ता आते। शुद्ध उत्तर हैं :–(१) कलियों के विकसित […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की रविवासरीय/रविवारीय पाठशाला में ‘कल’

September 4, 2021 0

लगभग चार वर्षों से देश के शीर्षस्थ हिन्दी-दैनिक समाचारपत्र ‘दैनिक जागरण’ में हमारी ‘भाषा की पाठशाला’ अनवरत प्रकाशित होती आ रही है। पहले यह ‘प्रति शनिवार’ को सप्तरंग पृष्ठ पर अपना भाषिक आकार ग्रहण करते […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

September 4, 2021 0

जो भी जन यह मानते हैं कि तपस्या करने के लिए किसी ‘उपत्यका’ (पहाड़ के समीप का भूभाग/भू-भाग/भू का भाग– षष्ठी तत्पुरुष समास; सम्बन्ध कारक) अथवा ‘अधित्यका’ (पहाड़ के ऊपर का समतल भूभाग) की आवश्यकता […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश-

September 1, 2021 0

मनुष्य यदि आत्मानुशासित नहीं है तो उसे ‘आत्मचिन्तन’ का आश्रय लेना होता है, अन्यथा वह एक ‘रिक्त पात्र’ की तरह से ‘सार्वकालिक वस्तु’ बनकर रह जाता है। अनुशासन का चरित्र वैषम्य (विषमता) से परे का […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

August 31, 2021 0

मनुष्य का एक वर्ग ऐसा है, जो योग और योगदान विषय पर प्रवचन तो करता है; परन्तु आचरणस्तर पर जब योगदान करने (यहाँ ‘देने’ अशुद्ध है।) का विषय आता है तब कुतर्क की क्षणिक स्थापना […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

August 29, 2021 0

इच्छाशक्ति सुदृढ़ हो तो मनुष्य प्रभंजन (प्रचण्ड वायु) की गति को भी विपरीत दिशा की ओर मोड़ने में समर्थ हो जाता है। पौरुष का अधिकारी वही होता है, जो अपने कथन और कर्म के धरातल […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

August 28, 2021 0

नदी अपनी स्वाभाविक गति में (‘गति से’ अशुद्ध है।) बहती रहती है। एक ढेला फेंकने के बाद कुछ क्षण तक जलान्दोलन बना रहता है, तदनन्तर वह अपनी पूर्व-गति पुन: प्राप्त कर लेती है। वह ढेले […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

August 26, 2021 0

कोई भी मनुष्य जन्मना ‘विशेष’ नहीं बनता; महान् नहीं बनता। विशेष और महान् बनाती है, उसकी आचरण की सभ्यता और संस्कृति। इसके लिए मनुष्य को आत्मचिन्तन करना पड़ता है। समाज की ‘विकृत’ व्यवस्था के साथ […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

August 24, 2021 0

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••अपने क़लम (‘अपनी क़लम’/’अपने कलम’ अशुद्ध प्रयोग है।) को ईमानदारी के साथ अपनी ताक़त (अरबी-भाषा) बनानेवाला अपनी कलानी (फ़ारसी-भाषा; गौरव) को प्राप्त कर अपने हर लफ़्ज़ से दुन्याया (अरबी-भाषा; संसार; दुनिया/दुनियाँ/दुनियां अशुद्ध है।) को शिकस्त […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की रविवासरीय/रविवारीय पाठशाला में ‘कल’

August 21, 2021 0

लगभग चार वर्षों से देश के शीर्षस्थ हिन्दी-दैनिक समाचारपत्र ‘दैनिक जागरण’ समाचारपत्र में हमारी ‘भाषा की पाठशाला’ अनवरत प्रकाशित होती आ रही है। पहले यह पाठशाला ‘प्रति शनिवार’ को सप्तरंग पृष्ठ पर अपना भाषिक आकार […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

August 21, 2021 0

मनुष्य का जीवन जीवधारी के कठोर साधना और सत्कर्म के परिणामस्वरूप प्राप्त होता है, जिसे ‘सर्वोत्तम योनि’ की संज्ञा प्राप्त है। ऐसे में, यदि मनुष्य साधनारहित होकर प्रतिकूल आचरण करता रहता है तो उसका संचित […]

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