पढ़ीं-लिखीं चतुर मूर्ख महिलाएँ

March 30, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मैं गंगा-गोमती से लखनऊ जा रहा था। मेरे पार्श्व में दो महिलाएँ एक बच्चे के साथ बैठी हुई थीं। मैं अपनी पुस्तक ‘समग्र सामान्य हिन्दी’ और ‘समग्र सामान्य ज्ञान’ के […]

भोजपुरी बोली के रस पीहीं सभे बुझाइल कि ना हो?

March 25, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अझुराहि, गेंगाहि, नखराहि, बुदबुदाहि, फेकराहि, झोकराहि, बकलोल आ तिरछोल मेहरारू केहू के भेंटाइ गइल त जिनगी के ताक् धिना धिन सुरू हो गइल। एहुसे घेलुओ में केहू ओइसन मेहराऊ थमावे, […]

समय की मुसकुराहट

March 17, 2021 0

★ बिम्ब-विधान और प्रतीक-योजना का अनुशीलन करें। आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय आजमहुआटपकना भूल-सा गया है।फुनगी पर बैठी गौरैयाचहकना भूल-सी गयी है।तितलीपंखों को सिमटायेसशंक नेत्रों सेकुछ ढूँढ़-सी रही है।कोटर से झाँकता उल्लूबूढ़े अजगर की पीठ परक़दमताल-सा […]

बाल साहित्य लेखन की महती आवश्यकता

March 16, 2021 0

बच्चे अपने परिवार पास पड़ोस अपने विद्यालय अपने परिवेश से बहुत कुछ सीखता है। वातावरण विचारों आदर्शों लक्ष्यों और शब्दों से सांस्कृतिक वातावरण बनता है। छोटे बच्चे बड़ों का अनुकरण करते हैं। घर पर माता […]

सिख इतिहास और चमकते सितारे

March 12, 2021 0

प्रभात रंजन त्रिपाठी (संवाददाता, दिल्ली) वैसे तो देश को आजाद कराने में सभी धर्मों का अमूल्य योगदान रहा है, परन्तु सिख समुदाय को भी भुलाया नहीं जा सकता। अपनी किताब “सिख इतिहास के चमकते सितारे” […]

अभिव्यक्ति के दंश

March 11, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–ऐ हुस्न की मलिक:! आँखें यों मला न करो,वही तस्वीर है, जो छोड़कर तुम आयी थी।दो–अब लौटकर न आयेगी फिर से बहार,मेरे आँसू में देख! चाँद-तारे डूब रहे।तीन–कैसे मान लिया […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का काव्य-वैभव

March 10, 2021 0

एक–‘राम’-भाव से शून्य हैं, ‘श्री’ से भी हैं हीन।भाड़े के ‘जय’ दिख रहे, मानो कोई दीन।।दो–देश तोड़ना रह गया, जिनके जिम्मा काम।हृदय हलाहल है भरा, बोलें जय श्री राम।।तीन–नारी! तू नारायणी, कवि कहता चहुँ ओर।अबला-सबला […]

सृष्टि पर जीवन का उद्देश्य व आधार है नारी

March 7, 2021 0

शिवांकित तिवारी ‘शिवा’ (युवा कवि एवं लेखक) “नारी” नम्र, नियम, न्याय, निष्ठा से परिपूर्ण एक अद्भुत निकेतन है।“नारी” संस्कृति, सभ्यता, संवेदना, संकल्प, स्वाभिमान, सम्मान, सद्गुण एवं स्नेह की सर्वश्रेष्ठ संरक्षिका है।“नारी” यानी सदैव क्रियाशील रहना, […]

कुछ यादें ऐसी भी

March 7, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा शायद उस वक्त हम ना समझ या नादान होते हैं ,जब हम स्कूल में चार दोस्तों के साथ होते हैं ।हमेशा यही बातें करते हैं कि यार कब हमाराइस जगह से पीछा […]

तुमसे प्यार नहीं कर पाऊंगा

March 6, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा, म०प्र० तुम डिजिटल युग की लड़कीमैं गांव के संस्कारों का बादशाह हूँतुम बुलेट से कॉलेज आने वालीमैं तो अपनी साइकिल का ही आदि हूँतुम जाम शकीला पीने वालीमैं तो अपने मट्ठा में […]

वक़्त-बेवक़्त

February 24, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमने जब सोचा,चैन से कट जायेगाज़िन्दगी का हर पल।समय ने दस्तक दी;एक गह्वर में डाल दी गयी,बटोरी हुई साँस;फ़ज़ा में उड़ा दी गयीं,मेरी बची-खुची रातें।मैं ठगा-सा देखता रह गयावक़्त की […]

मुट्ठीभर आकाश

February 19, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मुखड़ा मौखिक दिख रहा, दिखता करुणा-रूप।शोकाकुल परिवेश है, बनती मृत्यु अनूप।।दो–मौन निमन्त्रण मौन है, सूनी माँग न देख।सधवा विधवा बन गयी, कैसा विधि का लेख।।तीन :बचपन सिसकी ले रहा, क्रन्दन […]

उनका मिज़ाज

February 19, 2021 0

आकांक्षा मिश्रा, गोंडा गाँवों की गलियों सेनिकलकरशहरों में व्यवस्थित करने की होड़ लिएनिश्चित समय में पहलाउपक्रम रहामन अभी भी सरसों के खेतों में रमा रहामाँ आज उदास सी कमरे मेंअलाव तापती हुईयह कहती रही पिता […]

दिन्ना : जीवन चक्र की पर्णहीन व्यथा का साक्षी

February 16, 2021 0

यह दिन्ना है । जीवन चक्र की पर्णहीन व्यथा इसे ‘दीन’ दर्शाती है । यह धर्मिता विरहिणी की भाँति श्रंगार त्यागी वीत-द्वेष-वृती है । तिक्त शीतकाल में देह की दहन-दाह से रिक्त हो, मधुमास की […]

सरस्वती वन्दना

February 16, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ ओ वीणापाणि माँ ! ओ पुस्तक धारिणि माँ ! ओ ज्ञान दायिनी माँ ! ओ हंसवाहिनी माँ ! कर तम का संहार ज्ञान की ज्योति देती माँ । ओ वीणापाणि माँ […]

‘बाग़ी बलिया’ से प्रक्षेपित शब्दतीर : सियासत नंगी-जाहिल ज़ाहिर हो चुकी

February 16, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रिश्तों की अहम्मीयत अब जान जाइए,बुराई में अच्छाई अब पहचान जाइए।निगाहें ग़र तलाशी लेने पे उतर आयें,ज़बाँ को तसल्ली दे मुसकान लाइए।नज़रें इनायत हों तो एक बात मैं कहूँ,अपनी कथनी-करनी […]

बाग़ी बलिया से प्रक्षेपित शब्दतीर : जवाब देते हैं सवाल की तरह

February 16, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अब वे लगने लगे हैं, जंजाल की तरह,चेहरा दिखता, किसी कंगाल की तरह।बातों-ही-बातों में, कुछ राज़ छुपा गये,जवाब देते हैं, किसी सवाल की तरह।आँखों पर है हर्फ़१ की, पर्द:दारी अब,उनकी […]

“सबल पुरुष यदि भीरु बनें तो हमको दे वरदान सखी” : सुभद्रा कुमारी चौहान (पुण्यतिथि विशेष)

February 15, 2021 0

● आज (१५ फ़रवरी) सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि है । -डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक) सुभद्रा कुमारी चौहान : एक दृष्टि में जन्म— १६ अगस्त, १९०४ ई० को निहालपुर, इलाहाबाद मृत्यु-– १५ फ़रवरी, १९४८ ई० […]

शहीद का भाई को पत्र

February 14, 2021 0

मेरे भाई बहुत दूर चला गया हूँ मै मेरी माँ से तू मेरा एक काम करना , उठना सुबह और रोज मेरी माँ भारती और तिरंगे को सलाम करना, कितना खुश नसीब था मैं माँ […]

नहीं भूलता बचपना

February 13, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, रीवा नहीं भूल पाता मैं बचपनाछोटी-छोटी बातों पर रोनारोते रोते ही हसने लगनाअपनी बातों पर अडिग रहनाऔर फिर कुछ समय तक खाना नहीं खानानहीं भूल पाता मैं बचपना । हर किसी के साथ […]

तन्हाई

February 11, 2021 0

राहुल पाण्डेय ‘अविचल’ किसको फिक्र है इस जिन्दगी की ,हमने तो तूफानों से टकराना सीखा है ।किसको फिक्र है टपकते आंसुओं की,हमने तो दरिया से मुस्कुराना सीखा है ।रूठ जाए जिसको मुझसे रूठना हो ,हमने […]

युद्ध ही युद्ध है

February 10, 2021 0

आज कौन बुद्ध है,आत्मा से शुद्ध है।हर कोई प्रबुद्ध है,युद्ध ही युद्ध है। हर तरफ प्रवंचना,भंग साधु-साधना।भ्रांतियों के चित्र हैं,कुदृष्टि की भावना।विचित्र मित्र बन्धुता,स्वाभिमान क्रुद्ध है। युद्ध ही युद्ध है…. साधुता निरीह है,दासता सहीह है।शहर […]

ख़ामोशी

February 10, 2021 0

राहुल पाण्डेय ‘अविचल’ : खामोशी भी एक उलझन सी होती है ,जो चुप रहती है मगर सोने नही देती है ।लोग कहते हैं खामोशी गम दूर करती है ,मुझे तो नही लगता कि यह कुछ […]

क्या मैं पागल हूँ?

February 9, 2021 0

राहुल पाण्डेय ‘अविचल’ क्या मैं पागल हूँ?सोचता हूँ जब कभी इस विषय पर लिखने को तो आँखों में आँशू होते हैं,सीने में जलन,चेहरे पर खामोशियाँ और सिकन,माथे पर चिन्ता की लकीरें,फिर भी सोचता हूँ लिख […]

एक अभिव्यक्ति

February 8, 2021 0

★आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय निरभ्र आकाश मेंमखमली वितान के नीचेगोटेदार चादर परविराजमान सितारेवसुन्धरा काश्रृंगार (शृंगार) कर रहे हैं।कुछ ऐसे अबूझ रास्ते हैं,जो पहाड़ों के दामन मेंवर्षों से सुस्ता रहे हैं।मीलों दूर विस्तृतरेत के सागर के […]

वो सपना था

February 6, 2021 0

शितांशु त्रिपाठी पहली पहली बार था उससे पहले घर में मैं मेरे यार था , फिर आया ऐसी दुनिया में जहाँ मेरे लिए अंधकार था, मंजिल कहीं और थी रास्ता कोई और था इसलिए मैं […]

टूटे दिल को जोड़ कर आया हूँ

February 6, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, सतना खिलौनों की तरह दिल को तोड़ने वालोंदेखो मैं फिर से टूटे दिल को जोड़ कर आया हूँ ।पता नहीं क्यों अब हमारी दिल लगाने कीकिसी से हिम्मत नहीं होतीशायद मैं सारी हदों […]

सरकार बहादुर की चड्ढी सरकती हुई

February 6, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भाइयों-बहनों-मितरों! फोर ट्वेंटी वेब ४२० पर यह खोखलीवाणी का ८४० झूमरी तलय्या का ढपोरशंखी-केन्द्र है। मैं लफ़्फ़ाज पण्डित लफ़्फ़ाजी का पिटारा लेकर ख़ुदा को हाज़िर-नाज़िर जानकर दरवाज़ातोड़ हाज़िर हूँ। जैसा […]

व्यंग्य : नेताओं का बोलबाला

February 5, 2021 0

प्रांशुल त्रिपाठी, सतना, हिनौती, मध्य प्रदेश संसद भवन में आजनेताओं का बोलबाला चल रहा है ।अब हमारे देश में सिंधिया जैसेनेताओं का जन्म हो रहा है । कोई खुद को बेच रहा हैतो कोई किसी […]

सेंसेक्स की उठापटक में, रिश्तों का अस्तित्व है नाटा

February 4, 2021 0

जगन्नाथ शुक्ल ‘जगन’, प्रयागराज : ऊँची-ऊँची मीनारों में, पसरा है भीषण सन्नाटा।सेंसेक्स की उठापटक में, रिश्तों का अस्तित्व है नाटा।। गाँव अभी तक करता आशा,बदली संकल्पों की भाषा।शंकाओं के मेघ घनेरे,घटा रहे जीवन-प्रत्याशा। होरी अब […]

चाँद ने हमको पुकारा

January 30, 2021 0

जगन्नाथ शुक्ल ‘जगन’ नेपथ्य से जब चेतना ने, वेदना का विष पिलाया।संदली ज़ज्बात ले कर , चाँद ने हमको पुकारा।। अमूर्त थी जो पीर अब तक,मूर्त हो खिंचती लकीरें।वार देने पर तुली वो,निज भ्रमों के […]

एक स्वछन्द अभिव्यक्ति

January 28, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–बनता-मिटता चित्र यहाँ, जीवन बन अभिशाप।मीठे फल सब चख रहे, बनकर के निष्पाप।।दो–भाँति-भाँति-जन हैं यहाँ, चतुर-चोर-चालाक।वाणी कोयल कूकती, मन से दिखते काक।।तीन–मन से दिखते दीन हैं, तन से स्वस्थ-मलंग।देश को […]

माटी क्रन्दन कर रही, करता घोष किसान

January 26, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–लुटिया देखो डूब रही, जन-जन है हलकान।लाल क़िले-प्राचीर से, करता घोष किसान।।दो–महँगाई अब खा रही, दु:खी खेत-खलियान।निद्रा छोड़ो, जागो सब, करता घोष किसान।।तीन–मूँद आँख हैं सो रहे, नहीं ज़रा भी […]

बोलो जय श्री राम

January 25, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–देश कितना पिछड़ गया, दिखते नमकहराम।गिद्ध दिख रहे हर तरफ़, बोलो जय श्री राम।।दो–नारी हर दिन लुट रही, दिखते सब बेकाम।रावण घर-घर दिख रहे, बोलो जय श्री राम।।तीन–महँगाई की मार […]

बेटी की माँ से की गयी प्रार्थना

January 24, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार ”राघव”- मत मारो मुझे मेरी माँ मैं टुकड़ा तुम्हारा ही माँ मत मारो मुझे मेरी माँ | खता क्या हमारी हमें भी बताओ जीवन हमारा माँ यूँ न मिटाओ , मैं साया  हूँ  […]

इहे ह भोजपूरी बाबू!

January 23, 2021 0

“अब देख ना हे भछनो के” — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (सर्वाधिकार सुरक्षित — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ जनवरी, २०२१ ईसवी।)

क्रिमिनल बाबा की जय हो!

January 20, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय : परिदृश्य–‘क्रिमिनल बाबा’ का अय्याशीभरा दरबार सज गया है। क्रिमिनल बाबा ओल्हरे हुए हैं। उनके चारों ओर भगतिन क्रिमिनल बाबा के हाथ-पैर मीज रही हैं। धर्म-कर्म का ठीकेदार ‘क्रिमिनल बाबा’ ६५ […]

देशप्रेम दिवस (23 जनवरी)

January 19, 2021 0

दिल्ली चलो, के नारे से भारत मे अलख जगाई थी।तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा महिमा गाई थी।। पूर्ण स्वराज्य के लक्ष्य को जिसने आगे रखा था।ओजस्वी भाषण से अपने भारत को जोड़े […]

कलियुग का भगवान

January 19, 2021 0

मैं कलियुग का भगवानकोरोना बोल रहा हूंमैं जल्द ही आ रहा हूंकलियुग में अपनी माया रचनेअपनी मनमोहक सी लिएइस छलिया रूपी संसार को छलनेमैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं…….मैं कलियुग का भगवानकोरोना बोल […]

मूलमंत्र आजादी

January 18, 2021 0

आत्मबल अंतर में रख जिसने स्वतंत्रता दिलाई थी।गौरों को सबक सिखाकर जिसने वीरता दिखाई थी।। आज़ादी जिसका मूलमंत्र कसम देश की खाई थी।नेताजी संग नोजवानों ने ली तब अंगड़ाई थी।। दूर फिरंगियों को करने की […]

आज की सरकार पर लिखूं, कि हो रहे बलात्कार पर लिखूं

January 17, 2021 0

प्रान्शुल त्रिपाठी : लिखूं तो क्या लिखूंमातृभूमि के मान पर लिखूंकि स्वदेश के सम्मान पर लिखूंभारत के संविधान पर लिखूंकी विधि के विधान पर लिखूंलिखूं तो क्या लिखूं …… शहीदों की कुर्बानी पर लिखूंकि बापू […]

सार्वजनिक होतीं ‘आरोपित एकांत’ और ‘जान है तो जहान है’ कृतियाँ

January 16, 2021 0

दो पुस्तकें ‘आरोपित एकांत’ और ‘जान है तो जहान है’ क्रमश: गद्य और पद्य-विधाओं के माध्यम से कोरोना के ‘कृष्ण’ और ‘शुक्ल’-पक्षों का जीवन्त चित्रण करती हैं। ये दोनों ही कृतियाँ समय-सत्य हैं, जिनका सामग्री-संकलन […]

Salty samosas, white-sweet-balls

January 14, 2021 0

Hello, Hay, dear friends,Welcome you-smile blends,Innocent life, is full of delight,Shining, calming, smoothly wends. Richness is, a sickness now,Prosperity must be somehow,Why panting in heat of hope,Have satisfaction of a hallow. Look at what is, […]

तब मैं रो पड़ता हूँ……

January 3, 2021 0

आधा पेट खिलाकर जब मां खुद भूखे पेट सोती है, बीच चौराहे पर जब कोई बहन बेइज्जत होती है lदहेज के दानों के हाथों जब बेटी फांसी पर होती है, जब निर्भया को न्याय नहीं […]

ज़ेह्न में उसके फ़क़त ज़ह्र भरा रहता है

January 3, 2021 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–किसे रोकूँ और किसे कहूँ, चले जाओ तुम सब,निगाहों की तलाशी में पाक-साफ़ कोई दिखता नहीं।दो–आज हवा में बला की शोख़ी नाच रही,कल तक खिंचे रहे, आज चले आ रहे।तीन–ज़ेह्न […]

Hi dear friends, Happy New Year

January 1, 2021 0

Hi dear friends, Happy New Year,Celebrate it, is so dear ,Sunday-fun day, work day-done day,Round of clock, goes through year. The rising sun of new-year’s-day,Let us welcome, happy and gay,All the things look energizing,Let us […]

क्या तुम फिर से नववर्ष मनाओगे?

December 31, 2020 0

क्या तुम फिर से नववर्ष मनाओगेवो जो झूठे वादे किए थे क्या उनको फिर से दोहराओगेजिन्हें तुम आज तक माल कहते थेक्या उनको फिर से बहन बताओगेजिन्हें छोड़ आए थे वृद्धा आश्रम मेंउन्हें आज फिर […]

अतीत-अतीत होते मेरे सहयात्री

December 31, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अपने बलिष्ठ कन्धों परतीन सौ पैंसठ दिनों के भारपल-पल लाद करमुखमण्डल पर निष्कामता का भाव लियेअनवरत-अनथक यात्रा करते-करतेअतीतोन्मुख हो रहे मेरे सहयात्री!तुम क्लान्त हो चुके हो;शिथिल गात हो चुके हो।तुम्हारा […]

दृष्टिबोध का वाचन

December 31, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय पसीने से हो तर-ब-तर,हवा चलती रही बेक़द्र।सूरज मद्धिम होता रहा,दीये-बाती-सा जलकर।गुस्ताख़ चेहरा बूढ़ा हो रहा,साल का ख़त्म होता सफ़र।आगाज़ अंजाम से यों बोला,”तूने बरपाये हैं बहुत क़ह्र।सीने पे मूँग तूने […]

निगाहें नज़र से कह रहीं, डर है बहुत यहाँ

December 30, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मन्दिर-मस्जिद के शंख-अज़ान बजते रहे,इज़्ज़त नीलाम होती रही, इक शख़्स न उठा।दो–इस धर्म के इतिहास में, धर्मराज भी यहाँ,द्रौपदी की चीख़ भी, सुनकर न सुन सके।तीन–कैसी विडम्बना है, इस धर्म-देश […]

एक अभिव्यक्ति

December 28, 2020 0

—- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ज़िन्दगी में अर्थ की परिव्याप्तिसुरसुरी-सी लगने लगी है।देह की खुरचनसायास-अनायासकेंचुल की भाँतिउतरती आ रही है।कालखण्डस्थितप्रज्ञ की भूमिका मेंअनासक्त योगी-सदृश“एकोहम् सर्वेषाम्” को अभिमन्त्रित करलोकजीवन को जाग्रत कर रहा है।प्रार्थना–स्वीकृति-अस्वीकृति की धुरी […]

जनवरी आ रही है

December 27, 2020 0

फिर एक बार दिसंबर जा रहा है माहेजनवरी आ रही है, बहुत खुश दिख रहे हो क्या सुकून की घड़ी आ रही है, ये तो बताओ दिन तारीख साल के सिवा कुछ और भी बदलेगा, […]

मैं अपनों से हुआ पराजित, अपनी ही हल्दीघाटी में” : अशोक सनेही

December 27, 2020 0

कविसम्मेलन और मुशायरा सम्पन्न ‘साहित्यांजलि प्रज्योदि’ की ओर से सारस्वत भवन, लूकरगंज, प्रयागराज में ‘प्रकृति से पराप्रकृति की ओर’ नामक समारोह के अन्तर्गत नगर के प्रमुख कवि और शाइरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया […]

द्विदिवसीय आन्तर्जालिक अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न : डॉ. निशंक एक ऊर्जावान साहित्यकार

December 25, 2020 0

‘सिदो कान्हु मुर्मु विश्वविद्यालय’, दुमका (झारखंड) की ओर से ‘वातायन’ अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान 2020 के संदर्भ में डॉ. निशंक का रचना-संसार’ विषय पर द्विदिवसीय आन्तर्जालिक (ऑन-लाइन) अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (23-24 दिसम्बर) प्रयागराज के शंकराचार्य आश्रम में […]

तुम बताओ तुम्हारे पास झूठे वादे और तानाशाही रवैए से ज्यादा क्या है ?

December 24, 2020 0

इं० शितांशु त्रिपाठी ●क्यों नहीं लिखता मैं?● क्यों नहीं लिखता मैं अब, अरे मेरे लिखने का फायदा क्या है ? पढ़ कर तुम भूल जाओगे मेरे लफ्ज़, इनकी इज्ज़त इससे ज्यादा क्या है ? बलात्कार, […]

व्याकरणाचार्य कामता प्रसाद गुरु पाणिनि-परम्परा के धारक थे

December 24, 2020 0

● आज (२४ दिसम्बर) व्याकरणाचार्य पं० कामता प्रसाद गुरु की १४६ वीं जन्मतिथि है। व्याकरणाचार्य पं० कामता प्रसाद गुरु की एक सौ छियालीसवीं जन्मतिथि के अवसर पर ‘सर्जनपीठ’ प्रयागराज की ओर से २४ दिसम्बर को […]

डॉ. निशंक की कृतियों में जीवन बोलता है

December 23, 2020 0

‘सिदो कान्हु मुर्मु विश्वविद्यालय’, दुमका (झारखंड) की ओर से ‘वातायन’ अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान 2020 के संदर्भ में डॉ. निशंक का रचना-संसार’ विषय पर द्विदिवसीय ऑन-लाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 23 दिसम्बर को अपराह्न 4- बजे से आयोजित […]

‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज का आन्तर्जालिक राष्ट्रीय बौद्धिक परिसंवाद

December 21, 2020 0

आचार्य पं० महावीर प्रसाद द्विवेदी हिन्दी-आलोचना के प्रथम प्रणेता थे । बौद्धिक, शैक्षिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक मंच ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज के तत्त्वावधान में द्विवेदी-युग के प्रवर्तक आचार्य पं० महावीर प्रसाद द्विवेदी की निधनतिथि २१ दिसम्बर के अवसर […]

आवर्तन और दरार

December 20, 2020 0

–आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–राजनीति में दिख रही, नहीं किसी की ख़ैर।तीर बात-बेबात के, करा रहे हैं बैर।।दो–तन-से-तन को दूर रख, मन-से-मन को जोड़।मानवता पहचान ले, मत कर तू अब होड़।।तीन–कपट रूप परहेज कर, माया […]

केसर के बाद अब दुबई के बाजारों में बिकेगा कश्मीरी सेब और शहद

December 14, 2020 0

शांतनु त्रिपाठी (स्वतंत्र पत्रकार) ● जम्मू-कश्मीर सरकार और लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के बीच एमओयू हुआ साइन ● श्रीनगर में स्थापित होगा फूड प्रोसेसिंग एंड लॉजिस्टिक्स सेंटर 14 दिसंबर, नई दिल्ली। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के […]

बुझी जलायी है तो यों ही नहीं

December 13, 2020 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय लेखनी उठायी है तो यों ही नहीं,आस जगायी है तो यों ही नहीं।दुश्मनी हद से गुज़र जाने दो अब,दोस्ती निभायी है तो यों ही नहीं।राज़फाश करना ज़रूरी है अब,चादर उठायी […]

यह दुनिया फ़ानी है, क्यों डूबे अफ़्साने में

December 12, 2020 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय रहो एहतिराम से, क्या रखा है, फ़साने में,यह दुनिया फ़ानी है, क्यों डूबे अफ़्साने में।इस जहाँ में सब तो पाक़ीज़ा नहीं दिखते,कुछ पापी भी हैं मेरे-जैसे, इस ज़माने में।उदास निगाहों […]

मंगलेश डबराल मानवीय संवेदना के पारखी थे

December 10, 2020 0

‘सर्जनपीठ’ का श्रद्धांजलि-समारोह शैक्षिक, बौद्धिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक संस्था ‘सर्जनपीठ’ के तत्त्वावधान में १० दिसम्बर को ‘स्मृति-शेष मंगलेश डबराल’-विषयक एक श्रद्धांजलि-समारोह का आयोजन प्रयागराज में किया गया। मंगलेश डबराल एक कवि ही नहीं थे, […]

लोकगीत से नवगीत तक अवधी अन्तर्राष्ट्रीय चिंतन संगोष्ठी सम्पन्न

December 6, 2020 0

● अन्तर्राष्ट्रीय भाषा संस्थान सूरत, भाषा शिक्षण संस्थान कोलकाता व भाखा पत्रिका के सामूहिक प्रयासों से हुआ कार्यक्रम । सीतापुर । अवधी लोकगीत में वह ताकत है जिससे विदेश में रहने वाला भी भारतीय साहित्य […]

सुन बापू .. तेरे देश में

December 3, 2020 0

सुन बापू .. तेरे देश में, आम आदमी आम नहीं हैं, ईश्वर, अल्लाह, राम नहीं हैं, सत्य, अहिंसा कहीं नहीं है, नियत हमारी सही नहीं है, बेटी  हमारी  सेफ  नहीं  है, नेता   कहते  रेप  नहीं  […]

ऐसा मूरख देखिये, बेंचै सूखी घास

November 30, 2020 0

ऐसा मूरख देखिये, बेंचै सूखी घास ।कौन खरीदेगा भला, जिसमें तत्व न आस ।।घूमता गली- गली ।पूछता गली- गली ।। दोनो पलड़ों में धरे, मूरख बेंचै घास ।दून-दून दे डालता,होता नहीं उदास ।।बाँट से क्या […]

बिनब्याही अपूर्णता

November 30, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय तुम्हारी पूर्णताभाती नहीं मुझे;क्योंकि तुम मुझसेद्रुत गति में चलायमान हो।हाँ, मैं अपूर्ण हूँ।तुम मुग्ध हो, अपनी पूर्णता परऔर मुझे गर्व है, अपनी अपूर्णता पर;क्योंकि आज मुझेएहसास हो रहा है :—कुछ […]

तलाश : एक नयी धरती की

November 26, 2020 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मेरे मन के पाँवविश्वास की धरती काएक टुकड़ा खोजने के लिए निकल पड़े :–रिश्तों का; धर्म काअहम् का; त्वम् काअपने का; पराये का;किन्तु हर बार :–एक ऐसा भूचाल आया;धरती का […]

जायसी का ‘पद्मावत’ : एक अनुशीलन

November 20, 2020 0

साहित्य-परिशीलन — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ‘पद्मावत’ महाकाव्य भारतीय परिभाषा के अन्तर्गत नहीं आता। उसे एक बृहद् खण्ड काव्य कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए कि उसमें कथा की धारा सर्गों में विभाजित न होकर, […]

अब रऊआँ सभे सुनीं; नीमन लागी नू, तबे रँऊवा सभे थपरी बजाइब

November 7, 2020 0

एगो भोजपुरी ह ० आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय जे-जे रहे दोस्त, सभ दुसमन होइ गइले,हमारा रहतिया में, सभ काँटा बोइ गइले।खूबे हँसी आवेला, ‘बाबू’ के चल्हकिया पर;जे सुरुज के गोलवा, चनरमा समुझि गइले।डूबत खूब देख […]

साहित्य किसी की भी ‘सम्पदा’ नहीं

November 6, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय साहित्य सभी के लिए है। साहित्य के साथ दलित-पतित, अगड़ा-पिछड़ा लगाकर साहित्य को कतिपय लोग एक खाँचे तक सीमित रखना चाहते हैं। अरे! साहित्य को ‘साहित्य’ ही रहने दो, उसका […]

हे कृषक-पुत्र! हे लौह-पुरुष! हे भारत के तारणहारे!

October 31, 2020 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ जीवट जिनका लाखों जन कोसम्बल देता था ।जिनका हुंकार रौद्र होकरतूफ़ां बन जाता था । ऐसे वीर शिरोमणि को सिरशत-शत बार नवाता हूँ ।सरदार देश के हे युगसृष्टामैं तुमको पुनः बुलाता […]

श्रीकृष्ण की आत्मकथा लिखते-लिखते वे स्वयं कृष्ण को जीने लगे

October 29, 2020 0

शाश्वत तिवारी : मनु शर्मा ने अपनी कलम से सनातन परम्परा को आगे बढाने का काम किया। उन्होंने आत्मकथाओं के माध्यम से हिन्दी साहित्य को नया आयाम दिया। उनकी लेखनी, शैली, रचनाएं आजीवन हिन्दी साहित्य […]

लिखित भावों की ‘पेटी’

October 21, 2020 0

— डॉ० अरुण कुमार पाण्डेय (वरिष्ठ सम्पादक) घर बाहर खड़े होकर दरवाजा खुलवाने के लिए डोरवेल बजाने के बजाय फोनवेल बजाने वाले लोग हों या हर छोटी बड़ी घटना व ‘नवजात भाव’ को साथी/प्रेमी/प्रेमिका के […]

जीय भोजपुरी-जीय आ फटहन के सीय!

October 21, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय नीमन भा बाउरखइका के गोड़़ लाग।बिजुरी के ठेकान ना;पानी के मारामारी।हगे के मैदान ना।सरकार अपना बंसरी में फँसइले बियासोचालय (शौचालय) के चारा देके गरई मछरिया।आ लड़पोछना के पतोहियाबँसवारी में जाइ […]

इहे ह भोजपुरी बाबू!

October 21, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ई मोछियामुड़ाइ लेहल!केकरा कहला पर?नीमन गँहकी बाड़।तनी कनखियाई के देखल सीखना तएक दिनमुड़ाइ जइब तुहूँ। (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २१ अक्तूबर, २०२० ईसवी)

सपरी त देखब, ना त राम-राम

October 21, 2020 0

इहे काहाला असलिका भोजपुरी — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ओइजा से केइजा?हेइजा कि होइजा?जगहि-जगहि के फरकअघाइ गइल जिनिगियादऊरत, भागत, हाँफत, खेदात।ना मनल–एगो टिटिम्हाओढ़ लेहल;सपरी त देखबना त राम-राम। (सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; […]

माता करो जग का उद्धार

October 19, 2020 0

जब-जब गलत हुआ धरती परआयी माता तुम बारम्बार । फिर से कष्ट एक आन पड़ा है आ जाओ फिर से इक बार ।माता करो जग का उद्धार । देखो मानव फिर त्रस्त हुआ है,बहुत हो रहा अत्याचार ।देखो […]

जान है तो जहान है’ और ‘आरोपित एकान्त’ लोकार्पित

October 18, 2020 0

कोरोनाकाल के कृष्णपक्ष को उजागर करते मुखपृष्ठ– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ ज्ञातव्य है कि उक्त दोनों सारस्वत कृतियाँ वैश्विक महामारी कोविड- १९ के प्रभावस्वरूप ‘लाॅकडाउन’ से उपजे सामाजिक आपातकाल में साहित्य-सर्जन के सन्दर्भ में समय-सत्य प्रयोग […]

हम दरो दीवार में अपना नाम ढूँढ़ रहे हैं

October 15, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मैकश मैकदा में परीशाँ, जाम ढूँढ़ रहे हैं,हम ज़ख़्म की ख़ातिर, आराम ढूँढ़ रहे हैं।चेहरा-पे-चेहरे लगा, रंग बदलते हैं जनाब,हम अधर्मियों के घर, अब ‘राम’ ढूँढ़ रहे हैं।किस हद तक […]

इस रचना की काव्यांग, व्याकरण आदिक के आलोक में खुलकर आलोचना करें

October 13, 2020 0

★ इस रचना की काव्यांग, व्याकरण आदिक के आलोक में खुलकर आलोचना करें, स्वागत है। शक्ति व्यंजना-लक्षणा, अभिधा करे कमाल — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–भाषा ले रसगागरी, चली पिया के देश।लिपि अगवानी में रही, […]

तानाशाही चरम पर, नहीं कोई दरकार

October 12, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गयी हाथ से नौकरी, लोग हुए बेकाम।नमो-नमो का जप करो, बोलो जयश्रीराम।।दो–शर्म-हया सब पी गये, छान पकौड़ा तेल।जनता जाये भाँड़ में, अजब-ग़ज़ब का खेल।।तीन–थपरी मारो प्रेम से, उत्तम बना प्रदेश।गुण्डे […]

सीना ताने सत्य पर, खड़े रहो तुम एक

October 12, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–हाथ जोड़कर हैं खड़े, कोई काम-न-धाम।नेता उनका नाम है, सबै बिगाड़ैं काम।।दो–चुनिए ऐसे लोग ही, जो जनता के पास।बाक़ी ठोकर मारिए, नहीं दिखे जो ख़ास।।तीन–कलियुगसमय-प्रभाव है, पाप पुण्य का रूप।छल-प्रपंच […]

शुक्रिया करो भगत सिंह!

October 11, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भगत सिंह!नोटों पर तुम्हारी फ़ोटोचस्पा नहीं हुई।मत भूलो!यह तुम पर मेहरबानी की गयी हैवरना मुन्नीबाई के कोठे परजिस्म के बदलेतुम्हारा भी सौदा किया जाता;मैख़ाने मेंमैकश के हाथों उछाले जातेऔर देश […]

चलो चलें ‘पृथ्वी’! इस बस्ती से अब दूर

October 8, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ग़म-ख़ुशी का फ़र्क़ महसूस होता है,अपना यहाँ न कोई महसूस होता है।सौग़ात में पाता रहा नायाब इक दर्द,रिश्तों में दरार अब महसूस होता है।जवानी ने भी छीन लीं किलकारियाँ,बुढ़ापे का […]

योगी! तेरे राज्य में जनता है मज़बूर

October 6, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय अन्धकार है छा गया, शासक है बेहोश।पनही लगाओ मुँह पर, आये शायद होश।।जनता भी कुछ कम नहीं, चाटे शहद लगाय।‘हिन्दू’ ‘मन्दिर’ जाप कर, स्वर्ग सहज ही पाय।।पानी-बिजली दूर अब, सब […]

योगी! तेरे शासन में

October 6, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय न बिजली है न पानी,योगी का नहीं सानी।जनघाती नीति कहती–शासन है दुरभिमानी।आँखें खोलो, जागो भी,नहीं यहाँ है दाना-पानी।शासन नहीं, दुश्शासन है,आँख हो गयी है कानी।तन लोभी, मन भी लोभी,याद कराये […]

याद पुरानी घातें आयीं

October 4, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चिन्दी-चिन्दी रातें पायीं,फाँकों में मुलाक़ातें पायीं।मुरझायीं पंखुरियाँ देखीं,कही-अनकही बातें पायीं।बेमुराद आँसू छलके जब,याद पुरानी घातें आयीं।दुलराते बूढ़े ज़ख़्मों को,यादों की रातें गहरायीं।शातिर की चालों में हमने,ठगा-ठगा रह मातें खायीं। (सर्वाधिकार […]

न्याय-देवता कह रहे, लाओ! घर में सौत

October 2, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–कैसा यह भगवान् है, चोर-चमारी भक्ति।मन्दिर में मूरत दिखे, उड़न-छू हुई शक्ति।।दो–पट्टी बाँधे आँख में, देश जगाता चोर।भक्त माल सब ले गये, कहीं नहीं अब शोर।।तीन–अजब-ग़ज़ब के लोग हैं, शर्म-हया […]

रोज़गार की चाह में, उजले होते बाल

September 28, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–जपो नमो-नमो माला, लिये कटोरा हाथ।कंगाली में देश है, दिखे न कोई साथ।।दो–देश की शिक्षा चोर है, चहुँ दिशि दिखें दलाल।रोज़गार की चाह में, उजले होते बाल।।तीन–देश विपक्षी ‘कोमा’ में, […]

मन हार गया तब तुम हारे, मन जीत गया तो जीते तुम

September 26, 2020 0

अनिल चौधरी ( बैंक अधिकारी ) इस क्रूर काल के हर रण में,हर अवरोहण आरोहण में ।तुम खुद ही खुद का संबल हो,जीवन संघर्षों के क्षण में ।। शूलों से छलनी पावों को ,पीड़ा से […]

व्यंग्य : E-पोथी अर्थात Google बाबा

September 24, 2020 0

चिन्तन : पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, ई-पोथी पढ़ि जिये। बालपोथी (कक्षा एक की पुस्तक) से आरंभ शिक्षा ई -पोथी ने क्या ले लिया,चमत्कार हो गया। बस्ते बच्चों या लेखपालों को लादने से मुक्ति मिली। […]

आओ! हौसले की एक बस्ती बना लें हम

September 24, 2020 0

—- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–चाँदनी ने चोरी की और रौशनी ने लूटा,बेचारे चाँद और सूरज की गिरिफ़्तारी क्यों?दो–बेरहम-बेमुरव्वत की दुनिया बहुत निराली है,अपनी ख़ुद्दारी की गठरी को सलामत रख।तीन–बेकसी-बेबसी-बेक़द्री की ज़िन्दगी क्यों?आओ! हौसले की […]

सबके-सब धुत्त दिख रहे इस मैख़ाने में!

September 24, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–सियासत लिपटी बदनामी की चादर में,सबके-सब धुत्त दिख रहे इस मैख़ाने में!दो–अजीब-सा सन्नाटा पसरा इधर और उधर,आग बो डालो अब, कहीं बीत न जाये पहर।तीन–बात आते-आते नज़र में ठहर आती […]

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : जीवन की तेजस्विता से परिपूर्ण

September 23, 2020 0

आज (२३ सितम्बर) ओजस्वी कवि ‘दिनकर’ जी की जन्मतिथि है। “सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है” — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय राष्ट्रकवि दिनकर ने हिन्दी-कविता को छायावाद की कुहेलिका से बाहर निकालकर, उसमें जीवन […]

ख़ूब पिलाया देश को चरणामृत उपदेश

September 19, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ऐ फ़क़ीर! अब लौट आ, संकट में है देश।छल-प्रपंच करता रहा, बदला तूने वेश।ठगा सभी को प्रेम से, कोयल-वाणी बोल।पर तू कौआ है दिखा, खुलती तेरी पोल।।भक्त बहुत हैं भीड़ […]

गुड नाईट…टू यू

September 15, 2020 0

उसकी नाईट क्या गुड होगी,जिसको नींद नहीं आती ।विश्लेषण करते- करते,व्यग्र यामिनी कर जाती ।। प्रात- उषा आलस भर देती,पथ पर भी चलना होता ।‘मूरख हिरदय’ तभी जागता,जब सब दुनिया सो जाती ।। नील गगन […]

महीयसी महादेवी वर्मा की कारयित्री और भावयित्री प्रतिभा को हमारा नमन

September 11, 2020 0

● आज (११ सितम्बर) ही की तिथि में महादेवी जी का शरीरान्त हुआ था।— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय प्रयाग-आगमन के बाद और क्रॉस्थवेट स्कूल इलाहाबाद में प्रवेश लेने के बाद महादेवी जी की साहित्य-साधना अबाध्य […]

पत्थर से जूझता अमलतास लिखता हूँ

August 31, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय सदियों से भटकती, इक तलाश लिखता हूँ,हवा, पानी, आँधी और बतास लिखता हूँ।सूख रही ताल-तलय्या, अब दूभर है पानी,इस काइनात१ की, अब ख़लास२ लिखता हूँहमक़दम दग़ा दे गया, कुछ दूर […]

ज़ाहिर अब हर सम्त है, ज़ालिम है सरकार

August 29, 2020 0

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–मन में बैठा चोर है, नहीं कहीं है ठौर।जनता-गठरी काटते, चोरों का है दौर।।दो–नाग विषैला दिख रहा, जड़ी बनी निरुपाय।लौट सँपेरे अब रहे, दिखता नहीं उपाय।।तीन–पानी-पानी हो रहे, यहाँ-वहाँ हैं […]

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